एक नई सोच, एक नई धारा

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तीसरी धारा न्यूज: मौत के साये में मंडी

परसुडीह हाट: जर्जर छतों के नीचे सज रहीं 200 दुकानें, बिना भूकंप कांपती हैं दीवारें; क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?

जमशेदपुर | विशेष संवाददाता

लौहनगरी के परसुडीह स्थित कृषि उत्पादन बाजार समिति (मंडी) का ‘हाट’ इन दिनों एक खतरनाक जुए का केंद्र बना हुआ है। यहाँ व्यापार तो लाखों का हो रहा है, लेकिन इंसान की जान की कीमत शून्य नजर आ रही है। भवन निर्माण विभाग द्वारा ‘खतरनाक’ घोषित की जा चुकी पक्की दुकानों के नीचे रोज 200 से अधिक दुकानें खुल रही हैं, जहाँ दुकानदार और ग्राहक दोनों हर पल मौत के साये में खरीदारी कर रहे हैं।

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बिना भूकंप के कांपती हैं छतें, झड़ता है प्लास्टर

​हाट की स्थिति इतनी भयावह है कि बगल से कोई भारी वाहन गुजरता है, तो दुकानों की छतों में कंपन शुरू हो जाता है।

  • जर्जर ढांचा: आए दिन छतों का प्लास्टर, छज्जा और रेलिंग गिरते रहते हैं।
  • खतरे का संकेत: तकनीकी जांच में इंजीनियरों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह ढांचा अब मरम्मत के लायक भी नहीं बचा है और इसे तत्काल ध्वस्त करने की जरूरत है।
  • असामाजिक तत्वों का अड्डा: प्रथम तल की दुकानें पूरी तरह टूट चुकी हैं, जहाँ शाम ढलते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है।

अजीब फैसला: नीचे दुकान, ऊपर मौत!

​मामला जब जिला की ‘दिशा’ बैठक में पहुँचा, तो एक अजीबोगरीब बीच का रास्ता निकाला गया। प्रशासन ने प्रथम तल (First Floor) को तो पूरी तरह कंडम मानकर बंद कर दिया, लेकिन ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें चलाने की अनुमति दे दी।

सवाल यह है कि यदि ऊपर का ढांचा कमजोर है, तो क्या उसके गिरने पर नीचे बैठे दुकानदार और ग्राहक सुरक्षित रहेंगे?

किराये का खेल और सुरक्षा से पल्ला

​हैरानी की बात यह है कि जिस भवन को सरकारी तौर पर ‘असुरक्षित’ माना गया है, वहां के ग्राउंड फ्लोर से बाजार समिति आज भी किराया वसूल रही है। नियमतः कंडम घोषित इमारत में व्यावसायिक गतिविधि अवैध होती है। यदि समिति किराया ले रही है, तो क्या वह किसी हादसे की स्थिति में जिम्मेदारी लेने को तैयार है?

प्रशासन का पक्ष: “सुरक्षा सर्वोपरि है”

​कृषि उत्पादन बाजार समिति के सचिव अभिषेक आनंद के अनुसार:

  • ​दुकानों का री-डेवलपमेंट (Re-development) प्रस्तावित था, लेकिन दुकानदारों ने जगह खाली करने से मना कर दिया।
  • ​फिलहाल प्रथम तल से किराया नहीं लिया जा रहा है, केवल ग्राउंड फ्लोर से वसूली हो रही है।
  • ​दुकानदारों की सुरक्षा के लिए जल्द ही ठोस कदम उठाए जाएंगे।

तीसरी धारा का कड़ा सवाल: ‘राम भरोसे’ क्यों है जनता?

​बाजार समिति ने अब तक दुकानदारों के लिए किसी वैकल्पिक शेड या अस्थायी स्थान की व्यवस्था नहीं की है। बिना किसी ठोस प्लान के नोटिस जारी करना केवल कागजी खानापूर्ति नजर आता है। क्या प्रशासन तब जागेगा जब कोई बड़ी त्रासदी इन मासूम ग्राहकों और दुकानदारों को अपनी चपेट में ले लेगी?

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तीसरी धारा न्यूज: कोल्हान की बड़ी खबर

झारखंड क्षत्रिय संघ (गम्हरिया) के अध्यक्ष संतोष सिंह का निधन, TMH में भारी हंगामा; धरने पर बैठे पूर्व CM चंपई सोरेन

जमशेदपुर/गम्हरिया | मुख्य संवाददाता

लौहनगरी जमशेदपुर के प्रतिष्ठित अस्पताल टीएमएच (TMH) में रविवार देर रात उस वक्त भारी तनाव व्याप्त हो गया, जब झारखंड क्षत्रिय संघ, गम्हरिया इकाई के अध्यक्ष संतोष सिंह (55 वर्ष) के निधन के बाद परिजनों और समर्थकों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

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पिकनिक से लौटने के बाद आया हार्ट अटैक

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, संतोष सिंह रविवार को जगन्नाथपुर के देवनगरी में आयोजित झारखंड क्षत्रिय संघ के मिलन समारोह और पिकनिक में शामिल हुए थे। वहां से शाम करीब साढ़े पांच बजे घर लौटने के बाद उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द और सांस लेने में तकलीफ महसूस हुई।

  • ​परिजन उन्हें तुरंत टीएमएच लेकर पहुंचे।
  • ​अस्पताल पहुँचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

परिजनों का गंभीर आरोप: “पैसे के लिए इलाज में की गई देरी”

​संतोष सिंह की मौत के बाद उनके परिजनों और समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल इलाज शुरू करने के बजाय कागजी कार्रवाई और पैसे की मांग को लेकर समय बर्बाद किया। समर्थकों का कहना है कि यदि समय पर प्राथमिक चिकित्सा मिल जाती, तो संतोष सिंह की जान बचाई जा सकती थी।

पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन पहुंचे अस्पताल, धरने पर बैठे

​घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन भारी संख्या में समर्थकों के साथ टीएमएच पहुंचे। अस्पताल प्रबंधन के अड़ियल रवैये और इलाज में हुई कथित देरी के विरोध में वे अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गए।

  • माहौल तनावपूर्ण: रात भर अस्पताल परिसर में समर्थकों की भीड़ जुटी रही और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को तैनात करना पड़ा।
  • प्रबंधन का पक्ष: टाटा स्टील कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के प्रवक्ता ने फिलहाल इस मामले पर कुछ भी कहने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पूरी जानकारी हासिल करने के बाद ही कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा।
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तीसरी धारा न्यूज: असम का रण

असम में ‘झामुमो’ की दस्तक: हेमंत सोरेन का तिनसुकिया दौरा बना चर्चा का विषय, 40 सीटों पर सियासी समीकरण बदलने की तैयारी

गुवाहाटी/रांची | विशेष संवाददाता

झारखंड की राजनीति के धुरंधर और झामुमो अध्यक्ष हेमंत सोरेन अब पूर्वोत्तर के ‘लाल मैदान’ यानी असम में अपनी नई सियासी बिसात बिछा रहे हैं। 2026 में होने वाले असम विधानसभा चुनाव से पहले हेमंत सोरेन की तिनसुकिया यात्रा ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। आदिवासियों और चाय बागान मजदूरों के बीच उनकी बढ़ती सक्रियता को भाजपा के ‘मजबूत किले’ में सेंधमारी के रूप में देखा जा रहा है।

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तिनसुकिया में उमड़ा जनसैलाब: ‘एकजुट हों तो बदल देंगे दिशा’

​01 फरवरी 2026 को तिनसुकिया में आयोजित 21वीं आदिवासी महासभा में हेमंत सोरेन बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस दौरान लगभग 30 हजार आदिवासियों के जमावड़े को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया:

  • एकजुटता की अपील: हेमंत सोरेन ने कहा कि यदि असम का आदिवासी और चाय मजदूर संगठित होकर मतदान करे, तो वह राज्य की सत्ता की चाबी अपने पास रख सकता है।
  • मजदूरी का मुद्दा: उन्होंने चाय बागान मजदूरों की 250 रुपये की कम दिहाड़ी पर सवाल उठाते हुए इसे ‘शोषण’ करार दिया और झारखंड की तर्ज पर कल्याणकारी योजनाओं का भरोसा दिलाया।

35 से 40 सीटों पर झामुमो की नजर

​सूत्रों के अनुसार, झामुमो असम की उन 35 से 40 विधानसभा सीटों का गहराई से आकलन कर रहा है जहाँ आदिवासी और चाय जनजाति (Tea Tribes) निर्णायक भूमिका में हैं।

  • रणनीतिक दौरा: जनवरी के मध्य में जनजातीय कार्य मंत्री चमरा लिंडा, सांसद विजय हांसदा और विधायकों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने असम के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी हकीकत परखी थी।
  • पहचान की लड़ाई: बैठकों में यह बात निकलकर सामने आई कि यहाँ का आदिवासी समुदाय अब केवल ‘टी-ट्राइब’ बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि पूर्ण अनुसूचित जनजाति (ST) के दर्जे की मांग कर रहा है।

आंकड़ों की बाजीगरी और भाजपा की प्रतिक्रिया

​असम में करीब 70 लाख आदिवासी आबादी है, जो कुल जनसंख्या का लगभग 20% है। झामुमो इसी वोट बैंक के सहारे असम में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश में है। हालांकि, असम की सत्तारूढ़ भाजपा इस सक्रियता को चुनौती नहीं मान रही है। भाजपा का तर्क है कि झामुमो का वहां कोई सांगठिक ढांचा नहीं है।

तीसरी धारा विश्लेषण: क्या सफल होगा ‘झारखंड मॉडल’?

​हेमंत सोरेन का ‘जल, जंगल और जमीन’ का नारा असम के चाय बागानों में कितना असर दिखाएगा, यह तो वक्त बताएगा। लेकिन इतना साफ है कि झामुमो अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहना चाहती।

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तीसरी धारा न्यूज: यादें, उमंग और सामाजिक संकल्प

बोकारो में जुटी ‘GPA जमशेदपुर’ की टोली: आदित्यपुर डिप्लोमा कॉलेज के पूर्व छात्रों का मिलन समारोह, लिया समाज सेवा का संकल्प

बोकारो | ब्यूरो रिपोर्ट

समय बीत जाता है, पर यादें और दोस्ती हमेशा जवां रहती हैं। इसका जीवंत उदाहरण रविवार, 08 फरवरी 2026 को बोकारो के सिटी पार्क में देखने को मिला। आदित्यपुर स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक (GPA जमशेदपुर) के पूर्ववर्ती छात्रों ने एक भव्य मिलन समारोह का आयोजन किया, जहाँ सालों बाद पुराने सहपाठियों ने एक-दूसरे से गले मिलकर कॉलेज के सुनहरे दिनों को याद किया।

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देश के नवनिर्माण में ‘आदित्यपुरियंस’ का डंका

​इस मिलन समारोह की सबसे खास बात यह रही कि आज इस कॉलेज से निकले छात्र देश की नामी-गिरामी संस्थाओं में उच्च पदों पर आसीन हैं। कार्यक्रम में पहुंचे छात्रों ने अपनी कामयाबी साझा करते हुए बताया कि वे वर्तमान में निम्नलिखित संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं:

  • स्टील सेक्टर: टाटा स्टील लिमिटेड, सेल बोकारो, सेल बर्नपुर, राउरकेला।
  • इंजीनियरिंग और पावर: भेल (BHEL), पावर ग्रिड, झारखंड बिजली विभाग।
  • रेलवे और अन्य: भारतीय रेल, श्री सीमेंट, यूरेनियम कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया (UCIL) जादूगोड़ा, टाटा स्टील गम्हरिया।

सिर्फ जश्न नहीं, समाज सेवा का भी लिया संकल्प

​यह आयोजन केवल हंसी-मजाक और खान-पान तक सीमित नहीं रहा। वहां मौजूद छात्रों ने अपने पूर्ववर्ती छात्र ग्रुप के माध्यम से समाज को वापस लौटाने (Give Back to Society) का एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे भविष्य में:

  1. रक्तदान शिविर का नियमित आयोजन करेंगे।
  2. नदी सफाई जैसे पर्यावरण संरक्षण अभियानों से जुड़ेंगे।
  3. ​अन्य सामाजिक सरोकारों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

इनकी रही मुख्य उपस्थिति

​इस यादगार मिलन समारोह में लगभग 80 से अधिक पूर्व छात्र शामिल हुए। कार्यक्रम को सफल बनाने और नेतृत्व करने वालों में मुख्य रूप से अविनाश रंजन, अविनाश राज, दीपक, चंद्रिका, अजीत, ज्योतिष, दिनेश, चंद्रशेखर और रवि समेत कई अन्य साथी मौजूद थे।

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तीसरी धारा न्यूज: अपराध पर प्रहार

गुडासाई में अवैध शराब माफियाओं पर पुलिस का शिकंजा: भट्टी ध्वस्त, 2500 किलो जावा महुआ किया गया नष्ट

चक्रधरपुर | ब्यूरो रिपोर्ट

कोल्हान क्षेत्र में अवैध नशों के कारोबार के खिलाफ पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सोमवार को जिला पुलिस और आबकारी (उत्पाद) विभाग की संयुक्त टीम ने चक्रधरपुर थाना क्षेत्र के गुडासाई में छापेमारी कर अवैध शराब निर्माण के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया।

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SP और उत्पाद अधीक्षक के निर्देश पर बड़ी रेड

​पुलिस अधीक्षक और उत्पाद अधीक्षक को गुप्त सूचना मिली थी कि गुडासाई के जंगलों और रिहायशी इलाकों के समीप बड़े पैमाने पर अवैध देशी शराब बनाई जा रही है। इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए एक संयुक्त टीम का गठन किया गया।

भारी मात्रा में सामग्री बरामद और नष्ट

​छापेमारी के दौरान टीम ने मौके से भारी मात्रा में अवैध शराब बनाने की सामग्री जब्त की:

  • जावा महुआ: लगभग 2500 किलोग्राम जावा महुआ बरामद किया गया, जिसे शराब बनाने के लिए सड़ाया जा रहा था।
  • देशी शराब: मौके से 160 लीटर तैयार अवैध देशी शराब भी जब्त की गई।
  • मौके पर कार्रवाई: पुलिस ने विधिसम्मत तरीके से जब्त जावा महुआ और शराब को मौके पर ही नष्ट कर दिया और भट्टी को पूरी तरह जमींदोज कर दिया।

छापेमारी की भनक लगते ही कारोबारी फरार

​पुलिस की गाड़ी पहुँचने से पहले ही अवैध शराब के धंधेबाज मौके से भागने में सफल रहे। हालांकि, पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

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तीसरी धारा न्यूज: बदहाल शिक्षा व्यवस्था

पटमदा: 200 बच्चों पर सिर्फ एक गुरुजी! कमलपुर मध्य विद्यालय में फूटा अभिभावकों का गुस्सा, तालाबंदी की चेतावनी

पटमदा | संवाददाता

एक तरफ सरकार ‘शिक्षा के अधिकार’ की बात करती है, वहीं दूसरी ओर पटमदा प्रखंड के कमलपुर मध्य विद्यालय की हकीकत सिस्टम की पोल खोल रही है। 200 से अधिक छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ से नाराज अभिभावकों ने सोमवार को विद्यालय परिसर में जमकर प्रदर्शन किया।

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एक शिक्षक के भरोसे 8 कक्षाएं: कैसे होगा भविष्य निर्माण?

​विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष आदित्य गोराई के नेतृत्व में दर्जनों अभिभावक सोमवार सुबह 10 बजे विद्यालय पहुंचे। अभिभावकों का कहना है कि 200 से अधिक बच्चों के लिए मात्र एक शिक्षक उपलब्ध है। ऐसे में न तो पढ़ाई हो पा रही है और न ही विद्यालय का प्रशासनिक कार्य सही ढंग से चल रहा है।

मुखिया की पहल और प्रशासन का आश्वासन

​प्रदर्शन की सूचना मिलते ही स्थानीय मुखिया जामिनी बेसरा मौके पर पहुंचीं। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) को फोन लगाया।

  • डीएसई से संपर्क नहीं: हालांकि डीएसई से सीधा संपर्क नहीं हो सका, लेकिन उनके प्रधान सहायक से दूरभाष पर बात हुई।
  • एक सप्ताह की मोहलत: प्रधान सहायक ने मुखिया को आश्वासन दिया है कि एक सप्ताह के भीतर विद्यालय में नए शिक्षकों की पदस्थापना (Posting) कर दी जाएगी।

ग्रामीणों का अल्टीमेटम: “अगले मंगलवार से होगा उग्र आंदोलन”

​मुखिया के समझाने-बुझाने के बाद अभिभावक शांत तो हुए, लेकिन उन्होंने साफ चेतावनी दी है:

​”यदि अगले सोमवार तक शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होती है, तो मंगलवार से ग्रामीण और अभिभावक सड़कों पर उतरेंगे और उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।”

तीसरी धारा की ग्राउंड रिपोर्ट

​कमलपुर मध्य विद्यालय की यह स्थिति जिले के कई अन्य ग्रामीण स्कूलों की भी कहानी है। भारी छात्र संख्या के बावजूद शिक्षकों की कमी से मिड-डे मील से लेकर पठन-पाठन तक सब कुछ ठप पड़ा है। अब देखना यह है कि प्रशासन अपना वादा निभाता है या ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ेगा।

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तीसरी धारा न्यूज: व्यवस्था पर सवाल

जगन्नाथपुर CHC की बदहाली: 48 घंटे से न डॉक्टर, न स्टाफ; ‘फोर्थ ग्रेड’ कर्मियों के भरोसे मरीजों की जान!

जगन्नाथपुर | ब्यूरो रिपोर्ट

झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती एक डरावनी तस्वीर जगन्नाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से सामने आ रही है। पिछले 48 घंटों से यह अस्पताल ‘भगवान भरोसे’ चल रहा है। आलम यह है कि अस्पताल में न तो कोई डॉक्टर मौजूद है और न ही कोई नियमित स्वास्थ्यकर्मी। पूरी व्यवस्था चतुर्थ श्रेणी (फोर्थ ग्रेड) कर्मचारियों के कंधों पर टिकी है।

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मासूम की जान पर बनी, तड़पती रही सहिया

​सोमवार की सुबह अस्पताल की इस लापरवाही ने दो परिवारों की सांसें अटका दीं:

  1. घायल बच्चा: छत से गिरकर एक मासूम गंभीर रूप से घायल हो गया। खून से लथपथ हालत में परिजन उसे लेकर अस्पताल भागे, लेकिन वहां कोई डॉक्टर नहीं मिला। हद तो तब हो गई जब बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे हायर सेंटर रेफर करने के लिए साइन करने वाला भी कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
  2. घायल सहिया: कोचड़ा गांव की एक सहिया मोटरसाइकिल दुर्घटना का शिकार होकर अस्पताल पहुँची। डॉक्टर के अभाव में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने जैसे-तैसे पट्टी तो बांधी, लेकिन गंभीर चोट के कारण उसे रेफर करने वाला कोई नहीं था और वह घंटों अस्पताल परिसर में ही तड़पती रही।

क्या कागजों पर चल रहा है अस्पताल?

​स्थानीय ग्रामीणों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है; जगन्नाथपुर CHC में डॉक्टरों की अनुपस्थिति एक ‘नियमित बीमारी’ बन चुकी है।

  • सवाल: आखिर बिना डॉक्टर के अस्पताल के संचालन की अनुमति किसने दी?
  • खतरा: आपातकालीन स्थिति में अगर किसी मरीज की जान जाती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा—स्वास्थ्य विभाग या जिला प्रशासन?

क्षेत्र की जनता की मांग: अविलंब हो कार्रवाई

​क्षेत्र की जनता ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्री से मांग की है कि:

  • ​तत्काल अस्पताल में नियमित डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
  • ​पिछले 48 घंटों से ड्यूटी से गायब कर्मियों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई हो।
  • ​रेफरल सिस्टम को दुरुस्त किया जाए ताकि मरीजों को दर-दर न भटकना पड़े।
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तीसरी धारा न्यूज: जच्चा-बच्चा सुरक्षा सर्वोपरि

चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में उमड़ी गर्भवती महिलाएं: ‘9 तारीख’ के विशेष शिविर में हुई मुफ़्त स्वास्थ्य जांच

चक्रधरपुर | संवाददाता

क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार को चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में विशेष प्रसव पूर्व जांच (ANC) शिविर का आयोजन किया गया। सरकार की नियत तिथि के अनुसार, हर माह की 9 तारीख को आयोजित होने वाले इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाएं जांच के लिए पहुंचीं।

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विशेषज्ञ डॉक्टर की देखरेख में जांच

​अस्पताल की डॉ. लक्ष्मी कुमारी ने शिविर में मौजूद सभी गर्भवती महिलाओं की व्यक्तिगत रूप से जांच की। उन्होंने न केवल शारीरिक परीक्षण किया, बल्कि महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, उचित खान-पान और संस्थागत प्रसव के महत्व के बारे में आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

एक ही छत के नीचे सभी टेस्ट

​शिविर की सबसे खास बात यह रही कि महिलाओं को अलग-अलग लैब के चक्कर नहीं काटने पड़े। एक ही स्थान पर उनकी व्यापक स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें शामिल थे:

  • मुख्य रक्त जांच: हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, ब्लड ग्रुपिंग और ब्लड प्रेशर।
  • गंभीर बीमारियों की स्क्रीनिंग: हेपेटाइटिस बी एवं सी, सिफलिस और एचआईवी (HIV) जांच।
  • शारीरिक निगरानी: वजन की जांच और हीमोग्लोबिन के स्तर के आधार पर आवश्यक दवाएं।

इन स्वास्थ्य कर्मियों का रहा सहयोग

​शिविर को सफल बनाने में अनुमंडल अस्पताल की पूरी टीम मुस्तैद रही। इसमें मुख्य रूप से:

  • लैब टेक्नीशियन: जगन्नाथ प्रसाद महतो।
  • स्वास्थ्य कर्मी: सीएचओ गीता सामड, भुवनेश्वर प्रधान, जानकी मुंडा।
  • एमपीडब्ल्यू: चंचल प्रधान और दिनेश कुमार महतो। इसके अलावा बड़ी संख्या में सहिया साथी भी महिलाओं को गांव से अस्पताल तक लाने और उनकी सहायता करने के लिए मौजूद रहीं।
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तीसरी धारा न्यूज: शिक्षा की ओर बढ़ते कदम

टिस्को मजदूर यूनियन की अनूठी पहल: नवोदय प्रवेश परीक्षा के लिए मेधावी बच्चों के बीच बांटी गई पुस्तकें

छोटा गम्हरिया | ब्यूरो रिपोर्ट

औद्योगिक क्षेत्र के श्रमिकों के हक की आवाज उठाने वाली टिस्को मजदूर यूनियन अब ग्रामीण शिक्षा की तस्वीर बदलने के मिशन में भी जुट गई है। सोमवार को छोटा गम्हरिया स्थित प्राथमिक विद्यालय में एक सादे समारोह का आयोजन कर क्षेत्र के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकों का वितरण किया गया।

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नवोदय का सपना होगा साकार

​यूनियन का मुख्य फोकस उन बच्चों पर है जो संसाधनों की कमी के कारण बेहतर शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। इस कार्यक्रम के तहत क्षेत्र के 20 मेधावी प्रतिभागियों को विशेष रूप से नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी पुस्तकें प्रदान की गईं।

कंपनी के आसपास के गांवों पर विशेष ध्यान

​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए यूनियन के महामंत्री शिवलखन सिंह ने कहा:

​”नवोदय विद्यालय में प्रवेश एक छात्र के जीवन की दिशा बदल सकता है। यूनियन का उद्देश्य टीजीएस (TGS) कंपनी के इर्द-गिर्द बसे गांवों के प्रतिभावान बच्चों को सही संसाधन उपलब्ध कराना है। हमारा प्रयास केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हम आगे भी ऐसी मदद जारी रखेंगे।”

यूनियन की सक्रियता से ग्रामीणों में हर्ष

​इस नेक कार्य को सफल बनाने में यूनियन के ट्रेजरर (कोषाध्यक्ष) दिलीप महतो की अहम भूमिका रही। उन्होंने आयोजन की रूपरेखा तैयार की और यह सुनिश्चित किया कि सहायता सही और जरूरतमंद बच्चों तक पहुँचे।

​कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, विद्यालय के शिक्षक और यूनियन के सदस्य उपस्थित थे। ग्रामीणों ने यूनियन के इस सामाजिक सरोकार की सराहना करते हुए इसे शिक्षा के प्रति एक सराहनीय कदम बताया।

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तीसरी धारा न्यूज: जमशेदपुर की सुलगती समस्या

मानगो पुल पर ‘महाजाम’: घंटों रेंगती रही लौहनगरी की लाइफलाइन, फ्लाईओवर के काम और अतिक्रमण ने बिगाड़ी चाल

जमशेदपुर | सिटी रिपोर्टर

लौहनगरी की धड़कन कहे जाने वाले मानगो पुल और आसपास के इलाकों में आज एक बार फिर ‘ब्लैक मंडे’ जैसी स्थिति रही। सोमवार की सुबह जैसे ही पीक आवर शुरू हुआ, मानगो की सड़कें वाहनों के समंदर में तब्दील हो गईं। सुबह से शुरू हुआ यह गतिरोध दोपहर तक जारी रहा, जिसने हजारों शहरवासियों के पसीने छुड़ा दिए।

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पुराने और नए पुल पर वाहनों का ‘रेला’

​मानगो चौक से लेकर जयप्रकाश नारायण सेतु (पुराना पुल) और नए पुल तक जिधर नजर गई, सिर्फ वाहनों की लंबी कतारें ही दिखाई दीं।

  • फंसे रहे मासूम: जाम का सबसे बुरा असर स्कूली बच्चों पर पड़ा। तपती धूप और उमस के बीच स्कूल बसें घंटों फंसी रहीं, जिससे छोटे बच्चे बेहाल नजर आए।
  • ड्यूटी वाले परेशान: दफ्तर और फैक्ट्री जाने वाले कर्मचारी समय पर नहीं पहुंच सके, जिससे लोगों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी देखी गई।

जाम के तीन प्रमुख विलेन

​तीसरी धारा न्यूज की टीम ने जब मौके का मुआयना किया, तो जाम के पीछे तीन मुख्य कारण उभर कर आए:

  1. अतिक्रमण की मार: सड़क किनारे अवैध रूप से सजी दुकानों और ठेलों ने पहले से ही संकरी सड़क को और छोटा कर दिया है।
  2. फ्लाईओवर निर्माण: मानगो फ्लाईओवर का काम चल रहा है, लेकिन वैकल्पिक ट्रैफिक प्लान (Traffic Plan) का सही क्रियान्वयन जमीन पर नहीं दिख रहा।
  3. भारी वाहनों का दबाव: नो-एंट्री खुलने के बाद भारी वाहनों के अचानक दबाव ने स्थिति को नियंत्रण से बाहर कर दिया।

प्रशासन के दावे बनाम हकीकत

​पुलिस प्रशासन का दावा है कि मानगो चौक और डिमना रोड में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है। हालांकि, बढ़ती गाड़ियों की संख्या और बेतरतीब पार्किंग के आगे ये इंतजाम ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ साबित हो रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन केवल आश्वासन देता है, जबकि आम जनता हर दिन ‘नर्क’ जैसे हालात झेल रही है।

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