लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जनता दल यूनाइटेड ने कमर कस ली है। जेडीयू बिहार की 16 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इस सबके बीच नीतीश कुमार को बड़ा झटका भी लगा है। जदयू के दिग्गज नेता अली अशरफ फातमी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
उन्होंने अपने इस्तीफे को लेकर खुद जानकारी दी है।
अली अशरफ फातमी ने कहा, “मैंने आज इस्तीफा दे दिया है। मैंने राष्ट्रीय महासचिव के पद से भी इस्तीफा दे दिया है। कारण व्यक्तिगत नहीं है… महागठबंधन सरकार बिहार में ठीक से चल रही थी। नीतीश कुमार की छवि स्थापित हो रही थी और उनके उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के कार्यों की भी सराहना हो रही थी”।
इसलिए छोड़ी पार्टी
उन्होंने आगे कहा कि संविधान और भारत के भविष्य को बचाने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि इंडी गठबंधन चुनाव जीते। मैं इस बात से आहत था कि जदयू इंडी छोड़ एनडीए में चली गई और इसलिए मुझे पार्टी छोड़ने और अन्य विकल्प तलाशने के लिए मजबूर होना पड़ा।
लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान साथ ही राजनीतिक दलों के नेता अपने दौरा तेज कर दिए हैं. चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव आज यानी मंगलवार (19 मार्च) को मैनपुरी पहुंची हैं.
डिंपल ऐसे वक्त में मैनपुरी पहुंची हैं जब अपर्णा यादव बिष्ट के भी इस सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा है. डिंपल यादव मैनपुरी पहुंचकर लोगों से मुलाकात की.सीथ ही उन्होंने पार्टी के नेताओं और कर्यकर्ताओं से भी मुलाकात की है. उन्होंने लोगों के बीच पहुंचर जनसंवाद किया.
मैनपुरी पहुंचीं सपा सांसद डिंपल यादव ने अपर्णा यादव के मैनपुरी से चुनाव लड़ने की चर्चा पर दी प्रतिक्रिया दी है. डिंपल यादव ने कहा कि नेता जी (मुलायम सिंह यादव) की कर्मभूमि रही है मैनपुरी, मुलायम सिंह यादव का उन सब के साथ भावनात्मक रिश्ता रहा है. बहुत अच्छा चुनाव होगा चाहे कोई भी आ जाए. बता दें कि डिंपल यादव ने मुलाकात के बहाने चुनाव प्रचार अभियान की शुरूआत कर दी है.समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी बनाए जाने पर मैनपुरी में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया.
मैनपुरी से एक बार फिर चुनाव लड़ेंगी डिंपल यादव
सपा ने डिंपल यादव को मैनपुरी सीट से प्रत्याशी घोषित किया है. वर्तमान में डिंपल यादव मैनपुरी से सांसद हैं. मैनपुरी सीट पर लंबे समय से समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है. मैनपुरी लोकसभा सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ है. मैनपुरी लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाई गईं डिंपल यादव अपनी शालीनता के लिए जानी जाती हैं. डिंपल यादव भारतीय राजनीति के बड़े घराने सैफई परिवार की बहु हैं. समाजवादी पार्टी के संस्थापक और दिग्गज नेता मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधू हैं, इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की धर्मपत्नी है.
बीजेपी बनाएगी अपर्णा यादव को मैनपुरी से उम्मीदवार?
अपर्णा यादव यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं.उन्होंने कुछ दिन पहले ही सीएम योगी से मुलाकात की थी और बीजेपी का दामन थाम लिया है.अपर्णा यादव की सीएम योगी से मुलाकात के बाद मैनपुरी से बीजेपी उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा तेज है. ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि बीजेपी डिंपल यादव के सामने अपर्णा यादव को टिकट देगी।
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) में जारी कलह खुलकर सामने आ गया. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी और जामा विधानसभा सीट से जेएमएम की विधायक सीता सोरेन ने आज भाजपा ज्वाइन कर ली.
प्रमुख शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन ने बीजेपी की सदस्यता ले ली है. झारखंड में बीजेपी के प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विनोद तावड़े ने उनका स्वागत किया और पार्टी की सदस्यता दिलाई.
सीता सोरेन ने कुछ घंटे पहले ही JMM छोड़ने का ऐलान किया था. उसके बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था. सीता, दुर्गा सोरेन की पत्नी और पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की पत्नी हैं.
‘बीजेपी की ताकत बढ़ी है’
विनोद तावड़े ने कहा, झारखंड की एक नेता और बहन सीता सोरेन बीजेपी में शामिल हुई हैं. उनके बीजेपी में आने से पार्टी की ताकत बढ़ी है. लोकसभा चुनाव के बाद वहां इसका अलग असर दिखेगा. हम झारखंड में शक्तिशाली हो रहे हैं. हम उनका स्वागत करते हैं. वे आदिवासी के कार्यक्रम में अपनी पूरी शक्ति लगाएंगी.
‘संघर्ष की पर्याय हैं सीता सोरेन’
लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा, JMM में रहते हुए भी सीता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष किया. उन्होंने दिल्ली तक आवाज उठाई है. आदिवासी बहन संघर्ष की पर्याय हैं.
विकास से कोसों दूर है झारखंड’
सीता सोरेन ने कहा, आज हम विशाल परिवार में शामिल हो रहे हैं. जिस तरह से नरेंद्र मोदी का सोच पूरे भारत और विश्व को देखने को मिल रहा है. आए दिन विकास के कार्य हो रहे हैं. सभी मिलकर देश के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं. आज हर कोई इस परिवार में जुड़ रहा है. मैंने भी झारखंड में कई संघर्ष किए. 14 साल झारखंड मुक्ति मोर्चा में रही. मेरे ससुर शिबू सोरेन और पति दुर्गा सोरेन की अगुआई में अलग राज्य बना. उन्होंने राज्य के विकास कार्य की लड़ाई लड़ी. मेरे पति का सपना सिर्फ सपना ही रह गया. उनके सपने को पूरे करने के लिए मैं JMM की विधायक रही. लेकिन जिस मुकाम तक पहुंचना चाहिए था, वो हासिल नहीं हो पाया. झारखंड आज भी विकास से कोसों दूर है. हमें झारखंड बचाना है और न्याय दिलाना है, इसलिए मैं मोदी जी के परिवार में शामिल हुई हूं.
कोल्हान की गीता कोडा के बाद अब संथाल की सीता सोरेन के द्वारा कमल की सवारी करने की खबर सामने आ रही है. बताया जा रहा है कि आज दोपहर दो बजे सीता सोरेन औपचारिक रुप से भाजपा ज्वाईन करने की घोषणा कर सकती है. यहां बता दें कि लम्बे अर्से से सीता सोरेन का पार्टी से नाराजगी की खबर सामने आ रही थी. चंपाई मंत्रिमंडल विस्तार के वक्त भी सीता की नजर मंत्रिमंडल पर बनी हुई थी. लेकिन एन वक्त पर यह बाजी बसंत सोरेन के हाथ लगी और इसके बाद भी सीता सोरेन खामोशी की चादर ओढ़े हुई थी. और उनके द्वारा पार्टी के सभी पदों के साथ ही अपनी विधायकी से भी इस्तीफे देने की घोषणा की गयी है. अपने सुसर और झारखंड मुक्ति मोर्चा सुप्रीमो शिबू सोरेन को लिखे पत्र में अपने परिवार के खिलाफ साजिश का आरोप लगाया है. साथ ही बुझे मन से अपने इस्तीफे की घोषणा की है.
सियासी गलियारों में गर्म था कयासों का बाजार
ध्यान रहे कि जब पश्चिमी सिंहभूम से सांसद गीता कोड़ा ने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा की सवारी की थी, उस वक्त भी सियासी गलियारों में इस बात के दावे किये जा रहे थें कि गीता कोड़ा के साथ ही बाबूलाल का यह अभियान समाप्त नहीं होने जा रहा, हालांकि जिस तरीके इन खबरों के बीच भी गोड्डा सांसद निशिकांत सीता सोरेन पर आरोपों की बौछार कर रहे थें, इस बात का ताल ठोक रहे थें कि सीता सोरेन के साथ ही पूरा सोरेन परिवार भ्रष्टाचार में संलिप्त है. निशिकांत हाउस ट्रेडिंग का पुराना मामला भी उठा रहे थें और इस बात का दावा ठोक रहे थें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सीता के खिलाफ जांच का रास्ता साफ हो गया है, आज नहीं तो कल उनका जेल जाना तय है. अब देखना होगा कि पलटी के बाद भी क्या निशिकांत सीता के खिलाफ जांच की मांग कायम रहते हैं या फिर कमल की इस सवारी के साथ ही सारे मामले दफन हो जाते हैं.
इस पलटी के बाद क्या आसान होने जा रहा है संताल में भाजपा की राह
यहां ध्यान रहे कि संताल में विधान सभा की कुल 16 सीटें आती हैं, जिसमें से छह पर झामुमो, तीन पर कांग्रेस और पांच पर भाजपा का कब्जा है. जबकि झाविमो के द्वारा जीती गयी दो सीटें भी भाजपा के साथ ही है. इस प्रकार संताल के कुल 16 विधान सभा में आज भाजपा के पास सात, जबकि 9 पर महागठबंधन का कब्जा है. हालांकि झामुमो कोटा से एक विधायक लोबिन हेम्ब्रम भी लगातार सरकार को निशाने पर लेते रहे हैं, और अब सीता भी भाजपा के साथ होने वाली है. इस नजरिये से देखे तो सीता के इस बगावत के बाद संताल में भाजपा एक ताकत से साथ सामने आती दिखती है। लेकिन यदि हम सामाजिक समीकरणोँ की बात करें, तो स्थिति बदली नजर आती है, और खासकर तब संताल की सियासत में सीता का कद इतना बड़ा नजर नहीं आता कि वह अपने दम पर कोई कमाल कर सकें, संताल की सियासत पर नजर रखने वालों का मानना है कि सीता की इस पलटी से झामुमो का जो सामाजिक आधार है. उसमें कोई सेंधमारी नहीं होने वाली, क्योंकि संताल की सियासत में सीता का यह सियासी सफर झामुमो के जनाधार के बल पर ही बढ़ता रहा है. इस हालत में भले ही सीता पलटी मार चुकी हों, लेकिन भाजपा के लिए अभी भी संताल का किले भेदना एक मुश्किल चुनौती है.
सुप्रीम कोर्ट ने आयुर्वेदिक कंपनी पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण और योग गुरु रामदेव को सुनवाई की अगली तारीख पर पेश होने के लिए कहा है। दरअसल, बीमारियों के इलाज पर भ्रामक विज्ञापनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि और बालकृष्ण को अवमानना का नोटिस भेजकर जवाब मांगा था, जिसका इन लोगों ने जवाब नहीं दिया।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कंपनी और बालकृष्ण की अदालत द्वारा पहले जारी नोटिसों पर जवाब दाखिल करने में विफल रहने पर कड़ी आपत्ति जताई। पीठ ने रामदेव को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।
पहले लग चुकी है फटकार इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने योगगुरु रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद को उसके उत्पादों के बारे में न्यायालय में दिए गए पूर्व के आश्वासनों के उल्लंघन और दवाओं के असर से जुड़े गलत दावों के मामले में कड़ी फटकार लगाई थी। न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति ए अमानुल्लाह की पीठ ने पतंजलि आयुर्वेद और उसके प्रबंध निदेशक को नोटिस जारी कर पूछा था कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों नहीं शुरू की जाए।
कर्नाटक के बेंगलुरु में कथित तौर पर हनुमान चालीसा सुनने पर एक शख्स की पिटाई के मामले में बीजेपी नेता टी राजा सिंह का बयान आया है. उन्होंने कहा है कि रोड पर नमाज पढ़ सकते हैं, लेकिन दुकान के अंदर हनुमान चालीसा नहीं सुन सकते हैं.
उन्होंने सोमवार (18 मार्च) को अपने X हैंडल से इस बारे में टिप्पणी की. इसके अलावा टी राजा सिंह ने एक वीडियो जारी कर विस्तार से प्रतिक्रिया दी है.
रोड पर नमाज पढ सकते है लेकिन अपनी दुकान के अंदर हनुमान चालीसा नही सुन सकते!
वीडियो मैसेज में टी राजा सिंह ने कहा, ”बेंगलुरु के अंदर एक छोटी सी मोबाइल की दुकान के अंदर एक हिंदू जोकि एक हनुमान भक्त था, वो कल शाम 6:00 बजे हनुमानजी के भजन सुन रहा था तो वहां के स्थानीय लोकल कुछ मुस्लिम उसकी दुकान के पास जाते हैं, आवाज बंद करने के लिए धमकाते हैं, वो नहीं सुनने पर उस पर हमला करते हैं.”
उन्होंने कहा, ”आज कर्नाटक में कोई हिंदू सुरक्षित नहीं है. ये कांग्रेस का राज है कर्नाटक में और इतिहास गवाह है जहां-जहां पर कांग्रेस की सरकार रही है वहां-वहां पर हिंदुओं पर अत्याचार ही हुआ है. तो आने वाले समय में कांग्रेस के राज में हिंदू सुरक्षित है या नहीं है, ये आज के हिंदुओं को सोचने और समझने की आवश्यकता है.”
सेक्युलरिज्म को लेकर टी राजा सिंह ने साधा विरोधियों पर निशाना
टी राजा सिंह ने कहा, ”कुछ ही दिन पहले दिल्ली में रोड पर रोड कब्जा करके नमाज पढ़ने वालों को एक पुलिस का अधिकारी जब हटाने की कोशिश करता है, नहीं सुनने पर जिस भाषा में वो लोग समझते हैं उस भाषा में वो पुलिस का अधिकारी उनको समझाने का प्रयत्न करता है तो तुरंत उस पुलिस के अधिकारी को सस्पेंड किया जाता है. तो अब मैं पूछना चाहता हूं उन सेक्युलरिज्म के नेताओं को कि क्यों इस पर बात नहीं कर रहे? क्यों इस पर आवाज नहीं उठा रहे हैं? क्यों? क्योंकि हिंदू मार खा रहा है, हिंदू पर जुल्म हो रहा है, इसलिए आवाज नहीं उठा रहे हैं?”
टी राजा ने हिंदुओं से की अपील- ‘उस हिंदू भाई के साथ खड़े रहें’
उन्होंने कहा, ”मैं कर्नाटक के हिंदुओं से ये निवेदन करना चाहूंगा कि उस हिंदू भाई के साथ खड़े रहें और जो लोगों ने उस हिंदुओं पर अत्याचार किया है, हमला किया है, जब तक वो लोग अरेस्ट नहीं हो जाते, एक अभियान चलाएं. ये मैं कर्नाटक के हिंदुओं से निवेदन करना चाहूंगा, साथ ही साथ भारत की जनता से निवेदन करना चाहूंगा कि सोचो अगर भूल से भारत में एक बार आ गए इस कांग्रेस की सरकार तो हिंदुओं का क्या होगा? इसलिए अगर हिंदुओं को सुरक्षित रहना है तो तीसरी बार भी भगवा सरकार भारत में बननी ही चाहिए.”
‘राइजिंग भारत 2024’ के मंच से केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि वह भाजपा का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे. नितिन गडकरी ने अपनी जीत कि भविष्यवाणी करते हुए कहा कि एनडीए इस बार 400 का आंकड़ा पार करेगा और पीएम मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे.
मैं अपने क्षेत्र में जितने लोग हैं, सबको परिवार समझता हूं. 10 सालों में मैंने जो काम किया है, उससे लोगों ने मेरा नाम भी जाना है और काम भी. मुझे पोस्टर और बैनर से प्रचार करने की जररूत नहीं. मुझे लोगों को वोट के बदले कुछ सेवा देने की जरूरत नहीं. मैं लोगों से मिलूंगा, लोगों के घर जाऊंगा और उनसे आशीर्वाद लूंगा. मैं हाउस टू हाउस और डोर टू डोर कैंपेन करूंगा.
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बड़ी भाभी झारखंड मुक्ति मोर्चा की विधायक सीता सोरेन के द्वारा विधायक पद से और झामुमो की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने की खबर है।
इस खबर से राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मच गया है और चंपई सोरेन सरकार के खिलाफ खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।
इसका वजह बताया जा रहा है कि झारखंड सरकार के नए मंत्रिमंडल में चंपई सोरेन के नेतृत्व की सरकार में विधायक सीता सोरेन को मंत्री पद नहीं मिली है। जबकि सरकार गठन के पूर्व बागी विधायकों में वह भी शामिल थी जिन्हें किसी तरह मना लिया गया था लेकिन अब उन्होंने फिर से एक बार पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और विधायक पद से इस्तीफा दे दिया जिस राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
जमशेदपुर : मानवाधिकार सहायता संघ अंतरराष्ट्रीय के सरायकेला खरसावां जिला महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्रीमती सुमन कारूवा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि यूनियन होम मिनिस्ट्री का डेटा से प्राप्त जानकारी अनुसार वर्ष 2019 से 2021 तक के दौरान साढ़े तेरह लाख लड़की गायब हुई है। इस पर भारतीय आंतरिक मामले सुरक्षा खुफिया एजेंसी के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। इस रहस्यमई रूप से गायब हुई लड़कियों के ऊपर क्या बीत रही होगी।
सुमन कारूवा ने इस रहस्यमई रूप से गायब हुई लड़कियों के मामले पर अंतरराष्ट्रीय महिला आयोग एवं राष्ट्रीय महिला आयोग के द्वारा संज्ञान लेने की मांग की है, साथ ही इस मामले पर भारत सरकार को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए गंभीरता पूर्वक आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह भी किया है। उन्होंने कहा कि रहस्यमई रूप से गायब हुई लड़कियों को कहां-कहां, किस – किस माध्यम से, किसके इशारे पर अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय गैंग गिरोह के द्वारा अपहरण कर अन्यत्र ले जाकर गायब करने का काम कर रही है। यह भारत सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। अब इस गोरखधंधे का रहस्य कब तक उजागर होगी। हमारे देश में विश्व के खुफिया एजेंसी विश्वस्तरीय होते हुए भी कामयाबी हासिल नहीं हुई है, यह चिंता का विषय है।
सुप्रीम कोर्ट आज यानी मंगलवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिसमें केंद्र को नागरिकता संशोधन नियम, 2024 के कार्यान्वयन पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की गई है, जब तक कि शीर्ष अदालत नागरिकता (संशोधन) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला नहीं कर लेती।
साल 2019 में सीएए प्रावधान पारित होने के बाद से इस मामले पर शीर्ष अदालत में 230 से ज्यादा याचिकाएं दायर की गई हैं।
अधिसूचित नियमों पर रोक लगाने की मांग
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच मामले में सुनवाई करेगी। इंडियन यूनियन ऑफ मुस्लिम लीग (IUML) ने 12 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA), 2019 और 11 मार्च, 2024 को सरकार द्वारा अधिसूचित इसके नियमों पर रोक लगाने के लिए तत्काल सुनवाई की मांग की थी। लोकसभा सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी सीएए के प्रावधानों को लागू करने पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
गैर-मुस्लिम प्रवासियों को मिलेगी नागरिकता
गृह मंत्रालय ने 11 मार्च को नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के नियमों के कार्यान्वयन को अधिसूचित किया था। यह कानून अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी शरणार्थियों के लिए इन देशों के वैध पासपोर्ट या भारतीय वीजा के बिना भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करता है।
IUML ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की है याचिका
केंद्र की ओर से सीएए के तहत नियम जारी करने के एक दिन बाद केरल के राजनीतिक दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने नियमों के कार्यान्वयन पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। आईयूएमएल ने मांग की कि विवादित कानून और नियमों पर रोक लगाई जाए और मुस्लिम समुदाय के उन लोगों के खिलाफ कोई कठोर कदम नहीं उठाया जाए जो इस कानून के लाभ से वंचित हैं। आईयूएमएलएल के अलावा अन्य पार्टियों और व्यक्तियों जैसे डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI), असम विधानसभा में विपक्ष के नेता देबब्रत सैका, असम से कांग्रेस सांसद अब्दुल खालिक ने भी आवेदन दायर किया है।
कुछ क्षेत्रों पर लागू नहीं होंगे ये नियम
नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 दिसंबर 2019 में संसद में पारित किया गया था। लोकसभा ने 9 दिसंबर को विधेयक पारित किया, जबकि राज्यसभा ने 11 दिसंबर को इसे पारित किया। अवैध प्रवासियों के लिए नागरिकता पर संशोधन कुछ क्षेत्रों पर लागू नहीं होंगे। इनमें संविधान की छठी अनुसूची में शामिल असम, मेघालय, मिजोरम और त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्र शामिल हैं। बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन 1873 के तहत जिन राज्यों में ‘इनर लाइन परमिट’ व्यवस्था लागू है, वहां भी सीएए लागू नहीं होगा। अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नागालैंड में ‘इनर लाइन परमिट’ की व्यवस्था लागू है।