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‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन की 82वीं जयंती: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिता की याद में साझा किया भावुक संदेश

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राँची: झारखंड आंदोलन के पुरोधा और ‘दिशोम गुरु’ के नाम से विख्यात दिवंगत नेता शिबू सोरेन की आज 11 जनवरी को 82वीं जयंती मनाई जा रही है। 4 अगस्त 2025 को उनके निधन के बाद यह उनकी पहली जन्मजयंती है, जिसे लेकर पूरे राज्य में भावुक माहौल है। इस विशेष अवसर पर उनके पुत्र और राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक अत्यंत मार्मिक पोस्ट साझा कर अपने पिता को नमन किया।

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पिता नहीं, जीवन की पाठशाला थे बाबा: हेमंत सोरेन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि यह दिन उनके लिए केवल एक महान नेता का जन्मदिन नहीं, बल्कि उस मार्गदर्शक की याद है जिन्होंने उन्हें गढ़ा है। उन्होंने अपने पोस्ट में पिता से मिली सीखों का जिक्र करते हुए कहा:

> “बाबा ने मुझे जीवन जीने की कला और संघर्ष करना सिखाया। सबसे महत्वपूर्ण बात जो मैंने उनसे सीखी, वह है—बिना झुके अपनी गरिमा, मूल्यों और सच्चाई पर अडिग रहना।”


संघर्ष और सिद्धांतों की विरासत


सीएम हेमंत ने अपने पोस्ट में शिबू सोरेन के जीवन के उन पहलुओं को साझा किया जो जनता के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने लिखा कि:

* अटूट इच्छाशक्ति: “मैंने उन्हें कई बार थका हुआ देखा, लेकिन टूटते कभी नहीं देखा।”
* आदिवासी अस्मिता: उन्होंने जंगल, जमीन और आदिवासी पहचान की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
* सादगी और सेवा: सत्ता को हमेशा जन-सेवा का माध्यम माना, कभी उसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।

दिशोम गुरु का महाप्रयाण और झारखंड की राजनीति

झारखंड अलग राज्य आंदोलन के नायक शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में हुआ था। उनके जाने से न केवल सोरेन परिवार बल्कि झारखंड की राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा हुआ है जिसे भरना नामुमकिन है। शिबू सोरेन ने महाजनी प्रथा के खिलाफ आंदोलन से लेकर अलग राज्य की लड़ाई तक, दशकों तक आदिवासियों और पिछड़ों की आवाज बुलंद की थी।

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संकल्प: “आपके दिखाए मार्ग पर चलता रहूँगा”

पोस्ट के अंत में मुख्यमंत्री ने अपने पिता और गुरु के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त करते हुए संकल्प लिया। उन्होंने लिखा, “बाबा, आपके दिखाए मार्ग और आदर्शों पर मैं जीवन भर चलता रहूँगा, चाहे कितनी भी चुनौतियां आएं। जय झारखंड! जय दिशोम गुरु!”

मुख्य बिंदु:

* तिथि: 11 जनवरी (82वीं जयंती)
* विशेष: शिबू सोरेन के निधन के बाद पहली जयंती।
* संदेश: सादगी, साहस और जन-सेवा का संकल्प।