वाराणसी | तीसरी धारा न्यूज धर्म और राजनीति की नगरी काशी में इन दिनों एक वीडियो और एक मुलाकात ने नई चर्चा छेड़ दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया दो दिवसीय वाराणसी दौरे के दौरान, दक्षिण विधानसभा के विधायक नीलकंठ तिवारी के प्रति पीएम का विशेष स्नेह अब शहर के हर चौराहे पर बहस का विषय बन गया है।
बाबा विश्वनाथ के धाम में क्या हुआ?
29 अप्रैल को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे, तो वहां मेयर, मंत्री और विधायक उनके स्वागत के लिए कतारबद्ध थे। जैसे ही पीएम मोदी विधायक नीलकंठ तिवारी के पास पहुंचे, तिवारी ने हाथ जोड़कर अभिवादन किया। इसके बाद जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया—प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए नीलकंठ तिवारी का हाथ पकड़कर उन्हें नीचे झुकाया और बड़े ही आत्मीय भाव से उनकी पीठ थपथपाई।
सोशल मीडिया पर यह वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है। जानकार इसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं।
कौन हैं नीलकंठ तिवारी, जिन पर पीएम हैं मेहरबान?
वाराणसी शहर दक्षिणी सीट से विधायक नीलकंठ तिवारी को पीएम मोदी के बेहद करीबी नेताओं में गिना जाता है।
- चुनौतीपूर्ण शुरुआत: 2017 में बीजेपी ने सात बार के दिग्गज विधायक श्यामदेव राय चौधरी का टिकट काटकर नीलकंठ तिवारी को मौका दिया था। उस वक्त पीएम मोदी ने खुद तीन दिनों तक काशी में कैंप कर तिवारी की जीत सुनिश्चित की थी।
- बड़ी जीत: नीलकंठ तिवारी ने कांग्रेस के राजेश मिश्र को 16,000 से अधिक वोटों से हराकर अपनी काबिलियत साबित की और योगी सरकार में राज्यमंत्री भी रहे।
छात्र राजनीति से सत्ता के गलियारे तक
मूल रूप से देवरिया के रहने वाले नीलकंठ तिवारी का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा है:
- शिक्षा: हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज से बीएससी और एलएलबी करने के बाद उन्होंने ‘सोशल इंजीनियरिंग’ विषय में पीएचडी की।
- करियर: पेशे से वकील तिवारी 1989 में छात्र संघ महामंत्री और 2014 में सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे। हालांकि, उन्होंने पार्षद का चुनाव भी लड़ा था, जिसमें उन्हें हार मिली थी, लेकिन उनकी मेहनत ने उन्हें आज देश के प्रधानमंत्री के भरोसेमंद नेताओं की सूची में शामिल कर दिया है।
2027 के लिए क्या हैं संकेत?
तीसरी धारा न्यूज के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक मंच पर इस तरह पीठ थपथपाना न केवल नीलकंठ तिवारी का कद बढ़ाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आगामी चुनावों में पार्टी के भीतर उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
काशी की जनता अब पूछ रही है—क्या नीलकंठ तिवारी को किसी बड़ी जिम्मेदारी की तैयारी के लिए यह ‘आशीर्वाद’ मिला है?
ब्यूरो रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज











