चांडिल डैम से भगवान शिव की 200 किलो वजनी विशाल प्रतिमा मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है
तीसरी धारा के संवाददाता अंकित सिन्हा को मिली जानकारी के अनुसार स्थानीय मछुआरों एवं स्थानीय ग्रामीणों द्वारा यह मूर्ति सैकड़ों वर्ष पुरानी बताई जा रही है। कहा जाता है कि चांडिल डैम के निर्माण से पहले यहां एक प्राचीन शिव मंदिर था, जो डैम के जलाशय के अंदर जलमग्न हो गया था। वर्षों बाद, जलस्तर घटने के कारण यह मूर्ति पहली बार पूरी तरह बाहर दिखाई दी है। मूर्ति के दर्शन होते ही लोगों में गहरा उत्साह और आस्था का वातावरण बन गया।

शिवभक्तों का मानना है कि यह कोई सामान्य घटना नहीं बल्कि ईश्वरीय संकेत है। कई श्रद्धालु इसे “भोलेनाथ का आशीर्वाद” बताते हुए जलाभिषेक कर रहे हैं। आसपास के गांवों से महिलाएं और बुजुर्ग भी कलश और दूध लेकर पूजा करने पहुंच रहे हैं। कुछ भक्तों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा अद्भुत दृश्य पहले कभी नहीं देखा।
डैम प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती की है। वहीं स्थानीय पुजारी और समाजसेवियों ने इस स्थल को अस्थायी रूप से तीर्थस्थल घोषित कर पूजा की व्यवस्था शुरू कर दी है।
इतिहासकारों का मानना है कि इस क्षेत्र में कई प्राचीन मंदिर और मूर्तियाँ मौजूद थीं, जो डैम बनने के बाद पानी के नीचे चली गईं। अब जब शिवमूर्ति जलस्तर घटने से सामने आई है, तो यह पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण खोज मानी जा रही है।










