जमशेदपुर – क्षत्रिय करणी सेना की झारखंड इकाई ने हाल ही में अधिसूचित UGC (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 के खिलाफ औपचारिक रूप से अपना विरोध दर्ज कराया है। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक ज्ञापन में संगठन ने इस नीति को तत्काल “वापस” (Rollback) लेने की मांग की है।






मुख्य आपत्तियां
प्रदेश सचिव श्री कमलेश सिंह के नाम से जारी इस पत्र में तर्क दिया गया है कि हालांकि UGC की इस अधिसूचना का उद्देश्य जाति-आधारित भेदभाव को रोकना है, लेकिन इसका कार्यान्वयन एक संवैधानिक असंतुलन पैदा करता है। करणी सेना की मुख्य चिंताएं निम्नलिखित हैं:






- सामान्य वर्ग की अनदेखी: संगठन का दावा है कि ये नियम विशेष रूप से SC, ST, OBC और दिव्यांग छात्रों के अधिकारों पर केंद्रित हैं, जबकि “सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों के संवैधानिक संरक्षण और अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी” की गई है।
- संवैधानिक उल्लंघन: ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि नए नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 की भावना के अनुरूप नहीं हैं, जो सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देते हैं।
- इक्विटी कमेटियाँ: करणी सेना ने सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में 90 दिनों के भीतर “इक्विटी कमेटियों” के गठन के प्रावधान पर विशेष चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि इन समितियों को दी गई जांच की शक्तियां एकपक्षीय दृष्टिकोण अपना सकती हैं।






कार्रवाई की मांग
करणी सेना ने इन नियमों को “एकपक्षीय” और संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) के प्रतिकूल बताया है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि:
- वर्तमान UGC रेगुलेशन, 2026 को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
- सभी संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।
- एक ऐसी संतुलित नीति बनाई जाए जो किसी एक वर्ग के पक्ष में असंतुलन पैदा किए बिना सभी वर्गों के छात्रों के लिए न्याय सुनिश्चित करे।











