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झामुमो का ‘मिशन असम’: आदिवासियों की स्थिति जानने पहुंचेगी हेमंत सोरेन की हाई-लेवल टीम; 10 दिनों में मांगी रिपोर्ट

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रांची: झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम में रह रहे आदिवासियों की बदहाली और उनकी वास्तविक स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर गठित यह समिति असम में आदिवासियों की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों का गहरा अध्ययन करेगी।

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हाई-प्रोफाइल कमेटी में कौन-कौन?

​पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने मंगलवार को इस समिति के गठन की आधिकारिक पुष्टि की। इस महत्वपूर्ण दल में राज्य के कद्दावर नेताओं को शामिल किया गया है:

  • विजय हांसदा: सांसद (राजमहल)।
  • चमरा लिंडा: मंत्री, झारखंड सरकार।
  • भूषण तिर्की: विधायक (गुमला)।
  • मो. ताजुद्दीन राजा: विधायक (राजमहल)।

10 दिनों का ‘डेडलाइन’ और मिशन का उद्देश्य

​मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने टीम को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे 10 दिनों के भीतर असम का दौरा संपन्न करें। टीम वहां के चाय बागान श्रमिकों और वर्षों से रह रहे झारखंडी मूल के आदिवासियों से मुलाकात करेगी।

  • अध्ययन के बिंदु: आदिवासियों को मिल रहे संवैधानिक अधिकार, उनकी आर्थिक स्थिति और सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण।
  • प्रतिवेदन: दौरे के बाद टीम एक विस्तृत लिखित रिपोर्ट सीधे पार्टी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को सौंपेगी।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा: क्या है इसके पीछे का संकेत?

​राजनीतिक जानकारों का मानना है कि झामुमो का यह कदम झारखंड से बाहर अन्य राज्यों में भी अपनी पैठ बनाने और ‘आदिवासी अस्मिता’ के मुद्दे को धार देने की रणनीति का हिस्सा है। विशेष रूप से असम में रह रहे ‘चाय जनजाति’ के लोग लंबे समय से अनुसूचित जनजाति (ST) के दर्जे की मांग कर रहे हैं, जो झामुमो के लिए एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

​”असम में हमारे पूर्वज और आदिवासी भाई किस हाल में हैं, यह जानना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर यह टीम धरातल पर जाकर सच्चाई का पता लगाएगी।”

विनोद पांडेय, महासचिव, झामुमो