नई दिल्ली/जमशेदपुर: भारत के करोड़ों परिवारों के लिए एक ऐसी राहत भरी खबर आई है, जिसका इंतजार पिछले दो हफ्तों से पूरा देश कर रहा था। मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की नाकेबंदी के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक ताकत के दम पर रसोई गैस (LPG) के संकट को टाल दिया है। भारत के दो विशालकाय गैस टैंकर, ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’, मौत के साये को मात देकर सुरक्षित भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं।

कैसे हुआ यह ‘चमत्कार’? मोदी-ईरान की गुप्त कूटनीति
जब ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी दुनिया के लिए लगभग बंद कर दिया था और दुनिया के विकसित देशों के जहाज वहां फंसे हुए थे, तब भारत के जहाजों का सुरक्षित निकलना वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
- सेफ पैसेज (Safe Passage): सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली और तेहरान के बीच एक उच्च-स्तरीय गोपनीय समझौता हुआ है। संवेदनशील मामला होने के कारण अधिकारी मौन हैं, लेकिन हकीकत यह है कि भारतीय जहाजों को विशेष रूप से ‘सुरक्षित रास्ता’ दिया गया है।
- तिरंगे की धमक: दोनों जहाजों ने अपने AIS सिस्टम (लोकेशन ट्रैकर) पर स्पष्ट संदेश दिया है कि ये ‘भारत सरकार के जहाज’ हैं। युद्ध क्षेत्र में भारतीय तिरंगे की यह पहचान सुरक्षा कवच बन गई।
गैस संकट पर लगेगा विराम: शिवालिक और नंदा देवी की घर वापसी
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% एलपीजी मिडिल ईस्ट से आयात करता है। जंग के कारण सप्लाई चेन टूटने से देश में सिलेंडर की किल्लत शुरू हो गई थी।
- शिवालिक: शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुका है।
- नंदा देवी: यह जहाज भी कतर के रास लफान से एलपीजी लोड कर तेजी से भारत की ओर आ रहा है।
- अगले हफ्ते राहत: अगले सप्ताह इन जहाजों के भारत पहुंचने के साथ ही रसोई गैस की सप्लाई फिर से सुचारू हो जाएगी।
एनर्जी सिक्योरिटी: दुश्मन भी रह गए दंग
मिसाइलों और इलेक्ट्रॉनिक दखलंदाजी के खतरे के बीच भारत ने न सिर्फ अपने जहाजों को निकाला, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि एलपीजी से लदे अन्य जहाजों की कतार भी सुरक्षित बाहर आए। यह मिशन भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) और वैश्विक मंच पर बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है।
क्या सस्ता होगा गैस सिलेंडर?
सप्लाई पटरी पर लौटने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि बाजार में गैस की किल्लत खत्म होगी और कीमतों पर भी लगाम लगेगी। सरकार लगातार ईरान और अन्य खाड़ी देशों के संपर्क में है ताकि भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।
तीसरी धारा न्यूज डेस्क की विशेष रिपोर्ट।











