चांदीपुर (ओडिशा): भारत ने रक्षा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने शुक्रवार शाम ओडिशा के चांदीपुर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से परमाणु क्षमता से लैस अपनी पहली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का सफल परीक्षण किया।
शनिवार को डीआरडीओ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए बताया कि 8 मई 2026 को MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेड री-एंट्री व्हीकल) तकनीक से लैस एडवांस अग्नि मिसाइल का परीक्षण किया गया। इस तकनीक की खासियत यह है कि एक ही मिसाइल एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है।
चीन और पाकिस्तान को कड़ा संदेश
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस परीक्षण के जरिए भारत ने अपने पड़ोसियों, विशेषकर चीन को एक सख्त संदेश दिया है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे और पाकिस्तान-बांग्लादेश के साथ बनते समीकरणों के बीच भारत की यह सैन्य उपलब्धि शक्ति संतुलन (Balance of Power) की दिशा में निर्णायक मानी जा रही है।
दुनिया के ‘सुपर एलीट’ क्लब में भारत की दस्तक
इस सफल परीक्षण के साथ भारत अब उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा हो गया है जिनके पास 12,000 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता वाली ICBM तकनीक है। वर्तमान में यह तकनीक मुख्य रूप से अमेरिका, रूस, चीन और उत्तर कोरिया के पास है। हालांकि आधिकारिक तौर पर रेंज की पुष्टि होना बाकी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह अग्नि-6 का सफल परीक्षण है, तो अब दुनिया का कोई भी कोना भारत की मिसाइल जद से बाहर नहीं होगा।
परीक्षण की मुख्य बातें:
- नोटम (NOTAM) कॉरिडोर: परीक्षण के लिए बंगाल की खाड़ी में लगभग 3,560 किलोमीटर का हवाई क्षेत्र प्रतिबंधित किया गया था।
- रणनीतिक बढ़त: पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार तो हैं, लेकिन उसके पास ICBM तकनीक नहीं है। वह केवल मध्यम दूरी की मिसाइलों तक सीमित है।
- स्वदेशी ताकत: DRDO प्रमुख समीर वी. कामथ ने हाल ही में संकेत दिया था कि सरकार की अनुमति मिलते ही भारत इस दिशा में आगे बढ़ने को तैयार है।
भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से यह परीक्षण न केवल भारत की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की सैन्य साख को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज






