एक नई सोच, एक नई धारा

असम में ‘तीर-धनुष’ का कमाल: सीमित संसाधनों में JMM ने दर्ज कराई धमक, हेमंत सोरेन ने जताया आभार

गुवाहाटी/रांची: असम विधानसभा चुनाव के परिणामों ने पूर्वोत्तर की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम के चुनावी रण में अपनी पहली ही एंट्री से सभी को चौंका दिया है। बिना किसी बड़े गठबंधन और सीमित संसाधनों के बावजूद पार्टी ने कई सीटों पर प्रभावशाली प्रदर्शन कर अपनी राजनैतिक जड़ें जमाने के संकेत दे दिए हैं।n71101835517779533763997914fa1b2dce6a07863053a48e2b26d36835d660fd6db1c365368ef2c77d4a12

चुनावी आंकड़े: पहली ही कोशिश में कड़ा मुकाबला

​झामुमो ने असम की 16 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। परिणामों के विश्लेषण से पता चलता है कि पार्टी ने केवल उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि जीत-हार के समीकरणों को भी प्रभावित किया:

  • दो सीटों पर नंबर 2: पार्टी दो विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर रही, जो एक नई पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि है।
  • 7 सीटों पर 15 हजार से ज्यादा वोट: सात प्रमुख सीटों पर पार्टी को 15,000 से अधिक मतदाताओं का साथ मिला।
  • प्रमुख प्रदर्शन वाले क्षेत्र: * मजबत: 29,172 वोट
    • भेरगांव: 21,997 वोट
    • गोसाईगांव: 20,831 वोट
    • रंगापारा: 20,301 वोट
    • अन्य: डिगबोई, मार्गेरिटा, खुमताई और सोनारी में भी पार्टी को सम्मानजनक मत प्राप्त हुए।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

हेमंत सोरेन का संदेश: ‘यह अधिकारों की लड़ाई है’

​इस प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम की जनता का आभार जताया। उन्होंने कहा:

​”इतने कम समय और सीमित संसाधनों के बीच असम की जनता ने जो विश्वास दिखाया है, वह हमारे लिए हौसला बढ़ाने वाला है। यह केवल एक चुनावी प्रयास नहीं, बल्कि आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अस्तित्व, पहचान और अधिकारों की लड़ाई है। यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।”

 

इन मुद्दों ने दिलाई पहचान

​असम में झामुमो की सफलता के पीछे स्थानीय और सामाजिक मुद्दों को प्रमुख माना जा रहा है। पार्टी ने मुख्य रूप से इन विषयों को उठाया:

  1. चाय बागान मजदूरों की कम मजदूरी का मुद्दा।
  2. ​राज्य के आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने की मांग।
  3. ​भूमि अधिकार और स्थानीय पहचान की रक्षा।

भविष्य की राह: पूर्वोत्तर में विस्तार की संभावना

​राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिना गठबंधन के चुनाव लड़कर झामुमो ने अपनी स्वतंत्र ताकत का अहसास कराया है। इस प्रदर्शन ने पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी पार्टी के विस्तार के लिए नए दरवाजे खोल दिए हैं। आने वाले समय में मजबूत संगठन और रणनीति के साथ झामुमो असम की राजनीति में एक ‘किंगमेकर’ की भूमिका में नजर आ सकती है।

रिपोर्ट: ब्यूरो, तीसरी धारा न्यूज

error: Content is protected !!