सरायकेला/गम्हरिया:
सरकारी तंत्र की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला गम्हरिया से सामने आया है। जहां एक तरफ पिछले 8 महीनों से गरीब परिवार राशन में दाल मिलने का इंतजार कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ जन वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों के बीच बंटने वाला कई क्विंटल चना दाल सरकारी गोदाम में रखे-रखे सड़ कर बर्बाद हो गया। इस घटना ने प्रखंड आपूर्ति विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘आपूर्ति शून्य’ का रोना रोते रहे अधिकारी, गोदाम में सड़ता रहा अनाज
हैरानी की बात यह है कि इस प्रखंड में पिछले 8 महीने से कार्डधारियों को राशन में दाल नहीं दी जा रही थी। अधिकारियों द्वारा लगातार यह दलील दी जा रही थी कि ऊपर से ही आपूर्ति शून्य है और बैक लॉग चल रहा है। इस बात की पुष्टि खुद जिला आपूर्ति पदाधिकारी पुष्कर सिंह मुंडा ने भी पत्रकारों के समक्ष की थी। लेकिन इस बयान के ठीक दूसरे ही दिन सच सामने आ गया, जिससे विभाग की पोल खुल गई। गोदाम में क्विंटल भर चना दाल सड़कर पूरी तरह बर्बाद हो चुका है, जिसे समय रहते गरीबों के बीच बांटा ही नहीं गया।
जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही उजागर, MO ने काटा फोन
उचित रखरखाव की कमी और वितरण में जानबूझकर की गई देरी के कारण गरीबों के हक का निवाला गोदाम में ही सड़ गया। इस महालापरवाही को लेकर जब गम्हरिया की प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (MO) से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो वह अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थीं। हद तो तब हो गई जब उन्होंने पत्रकारों का फोन तक रिसीव करना उचित नहीं समझा और पूरे मामले पर चुप्पी साध ली।
पहले भी बांटा गया था कीड़े लगा और एक्सपायरी राशन
गौरतलब है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले दिनों सरायकेला के ग्रामीण इलाकों में PDS के तहत कार्डधारियों के बीच कीड़े लगी और एक्सपायरी डेट वाली चना दाल बांटे जाने का गंभीर मामला सामने आया था, जिसे लेकर जनता में भारी आक्रोश था। अक्सर उचित निगरानी और वितरण व्यवस्था में खामियों के चलते गरीबों को खराब, घुन लगे या एक्सपायर हो चुके पैकेट थमा दिए जाते हैं।
अब सवाल यह उठता है कि जब जनता दाने-दाने को मोहताज है, तो गरीबों के निवाले को इस तरह गोदाम में सड़ा देने वाली इस घोर लापरवाही का जिम्मेदार आखिर कौन है? क्या ऐसे लापरवाह अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई होगी, या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
– रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज़











