जमशेदपुर: झारखंड आंदोलन के प्रणेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग जोर पकड़ रही है। पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के झारखंड आंदोलनकारियों ने इस संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एक मांग पत्र जिला उपायुक्त को सौंपा है।

सदन से लेकर सड़क तक उठ रही मांग
उल्लेखनीय है कि झारखंड विधानसभा ने पहले ही सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से शिबू सोरेन को मरणोपरांत भारत रत्न देने की सिफारिश की है। विधायक सरयू राय और अन्य नेताओं ने भी इस पहल का समर्थन किया है। आंदोलनकारियों का तर्क है कि गुरुजी ने अपना पूरा जीवन आदिवासियों, शोषितों और पीड़ितों के हक की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया।
आंदोलनकारियों का भावनात्मक संदेश
आंदोलनकारियों द्वारा सौंपे गए पत्र में उल्लेख है कि:
- अविस्मरणीय संघर्ष: झारखंड राज्य के निर्माण में गुरुजी का संघर्ष और बलिदान अतुलनीय है।
- अंतिम विदाई: उनके देहावसान के उपरांत देश के कोने-कोने से लाखों लोगों ने उनके पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) पहुंचकर उन्हें अश्रुपूरित विदाई दी थी, जो उनके प्रति जन-सम्मान का प्रतीक है।
- सच्ची श्रद्धांजलि: समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने वाले ऐसे महान नेता को भारत रत्न देना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में हुआ था। वे 3 बार राज्य के मुख्यमंत्री, 11 बार सांसद (लोकसभा और राज्यसभा) और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक के रूप में उन्होंने अलग राज्य के आंदोलन का दशकों तक नेतृत्व किया।
मांग पत्र सौंपने वाले प्रमुख आंदोलनकारियों में बिरसिंह सोरेन, उमानाथ झा, प्रकाश चंद्र मा, नंदा पाल, निता सरकार और अन्य शामिल रहे।











