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झारखंड सरकार पर आर्थिक संकट के बादल — खजाने में सिर्फ़ 4000 करोड़ बचे! अब क्या होगा योजनाओं का भविष्य?

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रांची : झारखंड सरकार इस वक्त गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है। सूत्रों के मुताबिक़ राज्य के कोषागार (ट्रेजरी) में फिलहाल सिर्फ़ 4000 करोड़ रुपये शेष बचे हैं, जिससे सरकार की वेतन, पेंशन और विकास योजनाओं की फंडिंग पर संकट गहराता जा रहा है।

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वित्त विभाग के एक अधिकारी के अनुसार “राज्य की आय का बड़ा हिस्सा केंद्र पर निर्भर है। रेवेन्यू घटा है और खर्च बढ़ गया है। कई योजनाओं के भुगतान लंबित हैं।”
इस आर्थिक तंगी का सीधा असर राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर पड़ सकता है — सरणा विकास योजना, अभियान झारखंड जनसेवा, किसान सहायता निधि, आदिवासी छात्रवृत्ति योजना और ग्रामीण सड़क विकास मिशन जैसी योजनाएँ फंड के इंतज़ार में अटकी पड़ी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही राजस्व के नए स्रोत नहीं खोजे गए, तो सरकार को कर्ज या केंद्र से विशेष सहायता पैकेज लेना पड़ सकता है। वहीं विपक्ष ने इस स्थिति पर सरकार को घेरते हुए कहा है कि “खजाना खाली, वादे भारी — यही झारखंड की सच्चाई है।”
झारखंड की जनता अब पूछ रही है — विकास योजनाएँ कब पटरी पर आएंगी? सरकार के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है — “संकट से निकलने का रास्ता कहाँ से आएगा?”

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