नई दिल्ली | 1 फरवरी, 2026
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में ‘विकसित भारत’ की डिजिटल नींव रखते हुए सेमीकंडक्टर मिशन के लिए ऐतिहासिक आवंटन की घोषणा की है। पिछले बजट के ₹22,500 करोड़ के मुकाबले, इस बार सीधे ₹40,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह 77% की भारी बढ़ोतरी दर्शाती है कि भारत अब तकनीक के मामले में दुनिया का पिछलग्गू नहीं, बल्कि नेतृत्व करने वाला देश बनना चाहता है।

💡 इस घोषणा के 4 बड़े प्रभाव:
- चीन-अमेरिका को सीधी टक्कर: भारी निवेश के साथ भारत अब ग्लोबल सप्लाई चेन में वियतनाम और ताइवान जैसे देशों के समकक्ष खड़ा होगा।
- सस्ते होंगे गैजेट्स: स्थानीय स्तर पर चिप उत्पादन से स्मार्टफोन, लैपटॉप और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की लागत में 10-15% की कमी आने की उम्मीद है।
- लाखों हाई-टेक नौकरियां: सेमीकंडक्टर फैब यूनिट्स और डिजाइनिंग सेंटर्स के आने से स्किल्ड इंजीनियरों के लिए रोजगार की बाढ़ आएगी।
- R&D पर फोकस: इस फंड का एक हिस्सा रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) के लिए आरक्षित है, जिससे भारत सिर्फ ‘असेंबली’ नहीं बल्कि ‘इनोवेशन’ का केंद्र बनेगा।
📊 बजट तुलना: सेमीकंडक्टर आवंटन
| वित्तीय वर्ष | बजट आवंटन (करोड़ में) | मुख्य लक्ष्य |
|---|---|---|
| 2025-26 | ₹22,500 | बुनियादी ढांचा और प्रारंभिक प्लांट |
| 2026-27 | ₹40,000 | मास मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल एक्सपोर्ट |
“भारत का अपना सिलिकॉन वैली”
विशेषज्ञों का मानना है कि टाटा और वेदांता जैसी कंपनियों के मौजूदा प्रोजेक्ट्स को इस फंड से नई गति मिलेगी। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निवेश केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को ‘चिप डिजाइन’ की वैश्विक राजधानी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
”अब दुनिया का हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ‘मेड इन इंडिया’ चिप से धड़केगा।” — बजट सत्र का मुख्य आकर्षण





















