एक नई सोच, एक नई धारा

IMG 20260422 WA0006
जमशेदपुर: इंसानियत की मिसाल, पत्रकार ने भटके हुए मासूम को सुरक्षित पुलिस तक पहुंचाया

जमशेदपुर: शहर के बारीडीह वर्कर्स फ्लैट इलाके से एक राहत भरी खबर सामने आई है। यहाँ एक 4 साल का मासूम बच्चा अपने घर का रास्ता भटक गया था, जिसे एक स्थानीय पत्रकार की तत्परता और संवेदनशीलता के कारण सुरक्षित सिदगोड़ा थाना पहुँचाया गया।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, बारीडीह वर्कर्स फ्लैट के पास एक 4 वर्षीय बालक को अकेला और परेशान हालत में घूमते देखा गया। बच्चा काफी डरा हुआ था और अपने घर के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था। उसी दौरान वहां से गुजर रहे एक पत्रकार की नजर उस बच्चे पर पड़ी।

मासूम की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, पत्रकार ने तुरंत उसे अपने संरक्षण में लिया और बिना समय गंवाए सिदगोड़ा थाना ले गए।

पुलिस की कार्रवाई

थाने में तैनात पुलिस अधिकारियों ने बच्चे को सुरक्षित रखते हुए उसके परिजनों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा आसपास के इलाकों में सूचना प्रसारित कर दी गई है ताकि बच्चे को जल्द से जल्द उसके माता-पिता से मिलाया जा सके।

स्थानीय लोगों ने पत्रकार के इस नेक कार्य की सराहना की है, जिसने एक अनजान बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित कर समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया है।

तीसरी धारा न्यूज

1002405363
झारखंड भाजपा में बड़ी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: नगर निकाय चुनाव में बागियों पर गिरी गाज; पूर्व विधायक संजीव सिंह समेत 18 दिग्गजों को कारण बताओ नोटिस

रांची/जमशेदपुर | 15 फरवरी, 2026

​झारखंड नगर निकाय चुनाव के शोर के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अनुशासन का डंडा चला दिया है। पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के खिलाफ मोर्चा खोलने और खुद चुनावी मैदान में ताल ठोकने वाले 18 प्रदेश स्तरीय नेताओं को भाजपा ने ‘शोकॉज’ (Show-cause) नोटिस जारी किया है। पार्टी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि सात दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो निष्कासन की कार्रवाई तय है।

1002405363

इन दिग्गजों की कुर्सी पर मंडराया खतरा

​प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री सह राज्यसभा सदस्य प्रदीप वर्मा ने यह नोटिस जारी किए हैं। जिन प्रमुख नामों को नोटिस थमाया गया है, उनमें शामिल हैं:

  • धनबाद: पूर्व विधायक संजीव सिंह, भृगुनाथ भगत, और पूर्व महानगर अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह।
  • जमशेदपुर: पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव।
  • गढ़वा/पलामू: पूर्व जिलाध्यक्ष अलखनाथ पांडेय और परशुराम ओझा।
  • चास: मेयर प्रत्याशी परिंदा सिंह।
  • देवघर/जामताड़ा: बाबा बलियासे और तरुण गुप्ता।

​इसके अलावा गिरिडीह से कामेश्वर पासवान और सिमडेगा से फुलसुंदरी देवी समेत कई अन्य नेताओं से भी जवाब तलब किया गया है।

केंद्रीय आलाकमान की कोशिशें रहीं नाकाम

​सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने बागियों को मनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, उपाध्यक्ष रेखा वर्मा और राष्ट्रीय मंत्री रितुराज सिन्हा जैसे भारी-भरकम नेताओं को बागियों को समझाने की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, रांची में तो तीन बागी मान गए, लेकिन धनबाद और जमशेदपुर जैसे इलाकों में ‘ऑपरेशन डैमेज कंट्रोल’ पूरी तरह फेल साबित हुआ।

धनबाद में ‘अपनों’ के बीच जंग: संजीव बनाम संजीव

​सबसे दिलचस्प मुकाबला धनबाद नगर निगम में दिख रहा है। यहाँ भाजपा ने प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संजीव कुमार को अपना आधिकारिक समर्थन दिया है। लेकिन पूर्व विधायक संजीव सिंह (जिनकी पत्नी रागिनी सिंह झरिया से भाजपा विधायक हैं) ने पार्टी के फैसले को दरकिनार कर मैदान में डटे रहने का फैसला किया है। 12 फरवरी को जारी नोटिस का जवाब उन्हें 23 फरवरी (मतदान की तारीख) से पहले देना होगा।

​”पार्टी के संज्ञान में आया है कि आप पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं। यह अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। एक सप्ताह में जवाब न मिलने पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

भाजपा प्रदेश कार्यालय द्वारा जारी पत्र का अंश

1002405223
तीसरी धारा ग्राउंड रिपोर्ट: रांची में ‘हिट एंड रन’ के बाद भी नहीं सुधरे हालात; कचहरी चौक पर सख्ती तो स्टेशन रोड बनी ‘अड्डेबाजी’ की नई पनाहगाह

रांची | 15 फरवरी, 2026

1002405223

​झारखंड की राजधानी रांची का कचहरी चौक हाल ही में एक ऐसी सनसनीखेज वारदात का गवाह बना, जिसने पूरे शहर को सिहरा दिया। किन्नरों के साथ शराब पीने के विवाद के बाद हिट एंड रन, अपहरण और पुलिसकर्मी को कुचलने के प्रयास ने सुरक्षा दावों की पोल खोल दी थी। लेकिन ‘तीसरी धारा’ और ‘प्रभात खबर’ की टीम की पड़ताल बताती है कि प्रशासन की सख्ती महज एक ‘अस्थायी मरहम’ साबित हुई है।

कचहरी में सन्नाटा, स्टेशन रोड पर ‘सौदा’ जारी

​पुलिसिया कार्रवाई के डर से कचहरी चौक के आसपास तो फिलहाल अड्डेबाजी बंद है, लेकिन चुटिया थाना क्षेत्र के स्टेशन रोड पर अपराधी और संदिग्ध तत्व अब भी बेखौफ हैं। यहाँ दो चाय की दुकानों के बीच स्थित एक गुमनाम ‘झोपड़ी’ अब संदिग्ध गतिविधियों का नया केंद्र बन गई है।

तीन रातों की निगरानी: अंधेरे में होता ‘डील’ का खेल

​लगातार तीन रातों (रात 9:30 से 1:30 बजे तक) की गई निगरानी में चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं:

  • पैटर्न: मुँह ढके हुए महिलाएं सड़क किनारे खड़ी होकर राहगीरों और कार सवारों को इशारे करती हैं।
  • डील: पैदल गुजरने वाले युवकों और लग्जरी कारों में सवार ग्राहकों से खुलेआम बातचीत और मोलभाव होता है।
  • अड्डेबाजी: चाय की दुकानों को ‘कवर’ की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जहाँ से संदिग्धों को झोपड़ी की ओर जाते देखा गया है।

आम नागरिक और राहगीर परेशान

​स्टेशन रोड से गुजरने वाले रेल यात्री, नाइट ड्यूटी से लौटने वाले कर्मचारी और स्थानीय निवासी इस माहौल से बेहद असहज हैं।

  • अशोभनीय हरकतें: स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात चढ़ते ही सड़क पर अश्लीलता और बदतमीजी आम हो जाती है।
  • युवाओं पर खतरा: अभिभावकों को डर है कि इस इलाके से गुजरने वाले छात्र और युवा इस दलदल में फंस रहे हैं।

पुलिस की गश्ती पर उठते सवाल

​कचहरी चौक की घटना के बाद उम्मीद थी कि पुलिस पूरे शहर में ‘क्लीन स्वीप’ अभियान चलाएगी, लेकिन चुटिया इलाके की यह तस्वीर पुलिसिया गश्ती की पोल खोल रही है।

​”पुलिस तभी जागती है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है। कुछ दिन सख्ती होती है और फिर वही ढर्रा शुरू हो जाता है। नियमित गश्ती न होना ही इन अड्डों को पाल रहा है।”

एक स्थानीय निवासी

1002386674 scaled
जमशेदपुर: चक्का जाम से पहले खूनी संघर्ष, ट्रेलर ओनर यूनियन अध्यक्ष पर जानलेवा हमला

जमशेदपुर, 11 फरवरी 2026: शहर में ड्राइवरों के मानदेय को लेकर चल रहा आंदोलन हिंसक हो उठा है। 11 फरवरी को प्रस्तावित ‘चक्का जाम’ हड़ताल से ठीक एक रात पहले, जमशेदपुर लोकल ट्रेलर ओनर यूनियन के अध्यक्ष जयकिशोर सिंह पर जानलेवा हमला किया गया है। 20 से अधिक हमलावरों द्वारा किए गए इस हमले में अध्यक्ष गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

1002386674

​यह घटना शहर के औद्योगिक क्षेत्र में तनाव पैदा कर रही है, क्योंकि यह हमला सीधे तौर पर आंदोलन को कुचलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

​घटना का विवरण: कार्यालय के बाहर घेराबंदी

​जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार रात की है जब जयकिशोर सिंह बर्मामाइंस स्थित यूनियन कार्यालय के पास मुख्य सड़क पर मौजूद थे। तभी अचानक करीब 20 लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी। हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे। लहूलुहान हालत में उन्हें सहयोगियों द्वारा तत्काल एमजीएम (MGM) अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका उपचार चल रहा है।

​सीधे आरोप: “आंदोलन को दबाने की साजिश”

​अस्पताल में भर्ती जयकिशोर सिंह ने इस हमले के पीछे गहरी साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने सीधे तौर पर कुछ बड़े नाम लिए हैं:

  • अजित वर्मा पर आरोप: सिंह का दावा है कि कंपनी पदाधिकारी अजित वर्मा से जुड़े लोगों और टाटा कंपनी के कुछ वेंडरों ने मिलकर इस हमले की साजिश रची है।
  • मकसद: उन्होंने कहा कि ड्राइवरों के मानदेय (Salary/Stipend) बढ़ाने की मांग को लेकर जो आंदोलन 11 फरवरी (आज) होने वाला है, उसे कमजोर करने और डराने के लिए यह खून-खराबा किया गया है।

​स्थिति तनावपूर्ण, हड़ताल पर असर?

​यूनियन अध्यक्ष पर हमले के बाद ड्राइवरों और ट्रेलर मालिकों में भारी रोष व्याप्त है। यूनियन सदस्यों का कहना है कि वे इस कायरतापूर्ण हमले से डरने वाले नहीं हैं।

  • पुलिस जांच: बर्मामाइंस पुलिस मामले की छानबीन कर रही है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
  • सुरक्षा व्यवस्था: औद्योगिक क्षेत्रों में तनाव को देखते हुए पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है।
1002384700
जमशेदपुर: नई श्रम संहिताओं के विरोध में 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल, ट्रेड यूनियनों ने भरी हुंकार

जमशेदपुर, 10 फरवरी 2026: कोल्हान क्षेत्र के ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को साकची में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यूनियनों ने घोषणा की कि 12 फरवरी को चार नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) और ‘श्रम शक्ति नीति-2025’ के विरोध में संपूर्ण भारत में राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी।

​यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल श्रमिकों की नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बचाने की है।

1002384700

​मुख्य आपत्तियां और चिंताएं

​प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एटक (AITUC), सीटू (CITU) और बीमा व बैंक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने सरकार पर तीखे हमले किए:

  • श्रम कानूनों का ‘कॉर्पोरेटीकरण’: आरोप लगाया गया कि कोविड महामारी के दौरान बिना किसी चर्चा के पारित किए गए ये कोड 70% कारखानों को श्रम कानूनों के दायरे से बाहर कर देंगे। इससे न्यूनतम वेतन, कार्य के घंटे और सामाजिक सुरक्षा जैसे अधिकार समाप्त हो जाएंगे।
  • श्रम शक्ति नीति-2025: यूनियनों का मानना है कि इस नीति के तहत सरकार ने अपनी भूमिका ‘नियामक’ से घटाकर केवल एक ‘सुविधा प्रदाता’ की कर दी है, जिससे श्रमिकों के कानूनी संघर्ष की शक्ति कमजोर होगी।
  • बजट 2026-27 और निजीकरण: सार्वजनिक उपक्रमों (जैसे HEC) के निजीकरण, बीमा क्षेत्र में 100% FDI और मनरेगा के स्वरूप को बदलने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है।
  • व्यापार समझौते का विरोध: अमेरिका के साथ हालिया व्यापार समझौते को ‘जन-विरोधी’ बताया गया, जिसमें भारतीय सामानों पर 18% टैरिफ के मुकाबले अमेरिकी सामानों पर शून्य टैरिफ का प्रावधान है।

​मांग पत्र की मुख्य बातें

​ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने निम्नलिखित मांगों को लेकर हड़ताल का आह्वान किया है:

  1. ​चारों नए श्रम संहिताओं को तत्काल रद्द किया जाए।
  2. समान काम के लिए समान वेतन और स्थायी रोजगार सुनिश्चित हो।
  3. ​ठेकाकरण और आउटसोर्सिंग प्रथा को समाप्त किया जाए।
  4. ​कृषि क्षेत्र के लिए वैधानिक MSP और ऋण माफी की गारंटी दी जाए।
  5. ​परमाणु ऊर्जा विकास (SHANTI) अधिनियम जैसे कानूनों को वापस लिया जाए।

​आंदोलन की रूपरेखा: मशाल जुलूस से विशाल प्रदर्शन तक

​हड़ताल को सफल बनाने के लिए कोल्हान में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया गया है। आगामी कार्यक्रम इस प्रकार हैं:

तिथिसमयकार्यक्रमस्थान
11 फरवरीशाम 5:30 बजेविशाल मशाल जुलूसआमबगान मैदान से साकची चौक
12 फरवरीसुबह सेकार्यस्थल पर धरनासभी औद्योगिक एवं निजी क्षेत्र
12 फरवरीदोपहर 12:00 बजेमहा-प्रदर्शनजुबली

​”सरकार काम को ‘अधिकार’ के बजाय ‘धर्म’ की संज्ञा देकर श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों को छीनना चाहती है। यह हड़ताल कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ एक निर्णायक संघर्ष है।”

बिश्वजीत देब, सीटू प्रतिनिधि

​आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंबुज ठाकुर, बिश्वजीत देब, सुभाष करण, हीरा अरकाने, वीरेंद्र कुमार, पीयूष गुप्ता और ओम प्रकाश सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। मंच ने समाज के सभी वर्गों से इस हड़ताल को सफल बनाने की अपील की है।

1002382949
तीसरी धारा न्यूज: चुनावी हुंकार

वार्ड संख्या 09: विजय सोय ने पेश किया ‘आदर्श वार्ड’ का ब्लूप्रिंट; नशा, अपराध और प्रदूषण के खिलाफ छेड़ेंगे जंग

जमशेदपुर | स्थानीय डेस्क

नगर निकाय चुनाव की सरगर्मी के बीच वार्ड क्रमांक 09 के उम्मीदवार श्री विजय सोय ने क्षेत्र के विकास के लिए अपना विजन साझा करते हुए जनता से आशीर्वाद मांगा है। अपने समर्थकों और शुभचिंतकों के साथ जनसंपर्क करते हुए विजय सोय ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता केवल राजनीति नहीं, बल्कि समाज सेवा और मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान है।

1002382949

विजय सोय का ‘चतुष्कोणीय’ विकास मॉडल

​विजय सोय ने वार्ड की जनता से वादा किया है कि यदि उन्हें सेवा का अवसर मिलता है, तो वे निम्नलिखित चार स्तंभों पर कार्य करेंगे:

  1. सुरक्षित और स्वच्छ वार्ड: क्षेत्र को नशा मुक्त, अपराध मुक्त और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कड़े कदम उठाएंगे।
  2. बुनियादी ढांचे का कायाकल्प: सड़क, नाली, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर सक्रियता से कार्य करना।
  3. सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच: यह सुनिश्चित करना कि सरकार की हर कल्याणकारी योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के पहुंचे।
  4. सशक्तीकरण और पर्यावरण: महिला सुरक्षा के लिए विशेष अभियान और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण के माध्यम से वार्ड 09 को ‘ग्रीन और सेफ वार्ड’ बनाना।

“आपका विश्वास, क्षेत्र का विकास”: विजय सोय

​जनता से भावुक अपील करते हुए विजय सोय ने कहा:

“आपका साथ और आशीर्वाद ही मेरी ताकत है। मेरी सेवाभावना और आपका विश्वास मिलकर वार्ड संख्या 09 को एक आदर्श वार्ड बनाएगा। हम मिलकर क्षेत्र की हर गली और हर घर तक खुशहाली लाएंगे।”

1002382501
तीसरी धारा न्यूज: भ्रष्टाचार पर प्रहार

कमीशनखोरी के ‘साम्राज्य’ पर ईडी का बुलडोजर: आलमगीर आलम और वीरेंद्र राम की 86.61 करोड़ की संपत्ति स्थायी रूप से जब्त; दिल्ली में नकद खरीदे गए थे बंगले

रांची | विशेष संवाददाता

झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में फैले कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई पूरी कर ली है। ईडी की एडजुकेटिंग ऑथोरिटी ने पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके पीएस संजीव लाल और तत्कालीन मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम की लगभग 86.61 करोड़ रुपये की संपत्ति को स्थायी रूप से जब्त करने का आदेश जारी कर दिया है।

1002382501

वीरेंद्र राम: 48.94 करोड़ की बेनामी संपत्ति का खुलासा

​जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि कुल जब्त संपत्ति का आधे से अधिक हिस्सा (48.94 करोड़) अकेले वीरेंद्र राम और उनके परिजनों के नाम पर था। भ्रष्टाचार की इस काली कमाई को सफेद करने के लिए दिल्ली के पॉश इलाकों में करोड़ों का निवेश किया गया।

काले धन का निवेश पैटर्न:

  • दिल्ली (साकेत): पिता गेंदा राम के नाम पर 22 करोड़ की जमीन खरीदी गई, जिसमें से 18.50 करोड़ रुपये नकद दिए गए।
  • लग्जरी फ्लैट्स: पत्नी राजकुमारी के नाम पर 11.30 करोड़ का फ्लैट और साकेत में एक अन्य 5 करोड़ का फ्लैट खरीदा गया, जिनमें आधे से अधिक भुगतान नकद (Cash) किया गया।
  • लग्जरी गाड़ियों का शौक: जांच में ऑडी, फॉर्च्यूनर और सास को गिफ्ट की गई 27 लाख की स्कोडा जैसी महंगी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं।

कमीशन की ‘चेन’ पर शिकंजा: दर्जनभर इंजीनियर रडार पर

​ईडी की कार्रवाई केवल जब्ती तक सीमित नहीं है। अब विभाग के भीतर कमीशन की पूरी चेन को ध्वस्त करने की तैयारी है।

  1. समन जारी: ईडी ने 11 फरवरी के बाद दर्जनभर इंजीनियरों को पूछताछ के लिए बुलाया है।
  2. इन पर गाज: समन पाने वालों में कार्यपालक अभियंता (EE), सहायक अभियंता (AE) और कनीय अभियंता (JE) शामिल हैं।
  3. जांच का उद्देश्य: टेंडर आवंटन में ऊपर से नीचे तक पैसे के बंदरबांट के नेटवर्क का खुलासा करना।

अस्थायी से स्थायी जब्ती: अब वापसी नामुमकिन

​ईडी की एडजुकेटिंग ऑथोरिटी ने माना है कि यह पूरी संपत्ति अपराध की कमाई (Proceeds of Crime) से अर्जित की गई है। इस आदेश के बाद अब आरोपी इन संपत्तियों का उपयोग या बिक्री नहीं कर पाएंगे और यह पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण में रहेगी।

1002382410
तीसरी धारा न्यूज: सिस्टम पर सर्जिकल स्ट्राइक

झारखंड स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खुलासा: नए साल के पहले महीने गायब रहे 4468 डॉक्टर-कर्मी; अब ‘जितनी हाजिरी, उतना वेतन’ का फॉर्मूला होगा लागू

रांची | विशेष संवाददाता

झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की एक डरावनी तस्वीर सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग के उपस्थिति पोर्टल (ACVMS) के विश्लेषण में यह चौंकाने वाला तथ्य मिला है कि जनवरी 2026 के पूरे 31 दिनों में राज्य के 4468 डॉक्टर और कर्मचारी एक भी दिन ड्यूटी पर नहीं आए। इनकी उपस्थिति ‘शून्य’ दर्ज की गई है। इस लापरवाही को देखते हुए सरकार अब सख्त कदम उठाने जा रही है।

1002382410

आंकड़ों की जुबानी: ड्यूटी से ‘हॉलिडे’ का खेल

​उपस्थिति पोर्टल पर कुल 28,781 कर्मी रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा पूरे महीने नदारद रहा:

  • डॉक्टरों की स्थिति: मेडिकल कॉलेजों को छोड़कर राज्य के 18% डॉक्टर (405) पूरे जनवरी गायब रहे।
  • कर्मचारियों का हाल: लगभग 15% कर्मचारी (3656) एक भी दिन अस्पताल नहीं पहुंचे।
  • मेडिकल कॉलेज: राज्य के छह प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में भी 405 डॉक्टर और कर्मचारी पूरे महीने अनुपस्थित पाए गए।
  • हजारीबाग की स्थिति सबसे बदतर: विश्लेषण में पाया गया कि हजारीबाग के SBMCCH मेडिकल कॉलेज की स्थिति पूरे राज्य में सबसे खराब रही।

पकड़े जाने के डर से नहीं करा रहे ‘निबंधन’

​विभाग को यह भी जानकारी मिली है कि कई डॉक्टर और कर्मी जानबूझकर उपस्थिति पोर्टल पर अपना निबंधन (Registration) नहीं करा रहे हैं। उनका मानना है कि बिना रजिस्ट्रेशन के उनकी मॉनीटरिंग नहीं हो पाएगी। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने साफ कर दिया है कि:

  1. वेतन से लिंक होगा पोर्टल: अब अटेंडेंस पोर्टल को सीधे ट्रेजरी से जोड़ा जाएगा। ‘नो वर्क, नो पे’ के आधार पर केवल उतने ही दिनों का वेतन मिलेगा जितने दिन की हाजिरी पोर्टल पर दर्ज होगी।
  2. अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: सभी कर्मियों को पोर्टल पर आना होगा, ताकि एक क्लिक पर उनकी लोकेशन और टाइमिंग का पता चल सके।

आयुष्मान योजना: 30 दिन में दोबारा भर्ती पर जसास (JSAS) सख्त

​इधर, मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को लेकर भी सख्ती बढ़ गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के मुख्य वित्तीय पदाधिकारी गयासुद्दीन अहमद ने समीक्षा बैठक में पाया कि कई अस्पतालों में मरीज 30 दिनों के भीतर ही दोबारा भर्ती (Re-admission) हो रहे हैं।

  • जांच के घेरे में अस्पताल: ऐसे अस्पतालों की पहचान की जा रही है जहाँ री-एडमिशन के मामले असामान्य रूप से अधिक हैं।
  • इलाज की गुणवत्ता: अस्पतालों को मानक उपचार प्रोटोकॉल (Standard Treatment Protocol) का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। लापरवाही मिलने पर अस्पतालों को योजना से बाहर (De-panel) किया जा सकता है।
1002382399
तीसरी धारा न्यूज: बजट 2026-27 का विशेष रोडमैप

झारखंड की ‘विभूतियों’ को अब आर्थिक सुरक्षा: पद्म पुरस्कार विजेताओं को मिलेगी सम्मान राशि; खिलाड़ियों के लिए पेंशन और इको-टूरिज्म पर हेमंत सरकार का बड़ा दांव

रांची | विशेष संवाददाता

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार राज्य के मान-सम्मान को बढ़ाने वाले विशिष्ट नागरिकों और खिलाड़ियों को बड़ी सौगात देने की तैयारी में है। आगामी बजट में पद्म पुरस्कार विजेताओं के लिए सम्मान राशि का प्रावधान किया जा रहा है, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन करने वाली हस्तियों को आर्थिक चुनौतियों का सामना न करना पड़े।

1002382399

सम्मान राशि: कला, खेल और समाज सेवा का कद्रदान

​पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सुदिव्य कुमार ने विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मानव संसाधन को सशक्त बनाने के लिए बजटीय उपबंध किए जाएं। इस पहल का सीधा लाभ झारखंड के उन रत्नों को मिलेगा जिन्होंने सीमित संसाधनों में शिखर तक का सफर तय किया है।

राज्य की प्रमुख हस्तियां जो इस दायरे में आएंगी:

  • दिशोम गुरु शिबू सोरेन (पद्म भूषण)
  • महेंद्र सिंह धोनी और दीपिका कुमारी (खेल जगत)
  • प्रेमलता अग्रवाल (पर्वतारोहण)
  • छुटनी महतो, जमुना टुडू और साइमन उरांव (समाज सेवा एवं पर्यावरण)
  • शशधर आचार्य और डॉ. रामदयाल मुंडा (कला एवं संस्कृति)

खिलाड़ियों के लिए ‘पेंशन कवच’ का विस्तार

​सरकार ने केवल पद्म विजेताओं ही नहीं, बल्कि ओलंपियन और राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेताओं के लिए भी पेंशन योजना के विस्तार का फैसला लिया है। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों में भविष्य के प्रति सुरक्षा का भाव पैदा करना है ताकि वे बिना किसी आर्थिक चिंता के केवल अपने प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

इको-टूरिज्म: प्रकृति की गोद में बसेंगे ‘बैम्बू हाउस’

​बजट 2026-27 में पर्यटन को उद्योग की तरह विकसित करने पर फोकस रहेगा। झारखंड की प्राकृतिक संपदा को विश्व पटल पर लाने के लिए इको-टूरिज्म की तर्ज पर विकास होगा:

  • प्रमुख स्थल: दलमा, पलामू टाइगर रिजर्व और नेतरहाट में सुविधाओं का विस्तार।
  • बैम्बू हाउस: पर्यटकों को प्रकृति के करीब लाने के लिए दलमा की तर्ज पर अन्य स्थलों पर भी बांस के घरों (Bamboo Houses) का निर्माण होगा।
  • वाटरफॉल टूरिज्म: राज्य के प्रपातों (Falls) के पास बुनियादी ढांचा सुधारा जाएगा।
1002382393
तीसरी धारा न्यूज: स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

RIMS की बदहाली: अल्ट्रासाउंड की फिल्म खत्म, जूनियर डॉक्टर हाथ से लिख रहे रिपोर्ट; मरीजों की जान और जेब दोनों पर संकट

रांची | विशेष संवाददाता

झारखंड के सबसे बड़े मेडिकल संस्थान रिम्स (RIMS) में इन दिनों मरीजों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की मशीनें तो चल रही हैं, लेकिन जांच फिल्म (प्रिंट शीट) खत्म होने के कारण मरीजों को रिपोर्ट का प्रिंट नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि जूनियर डॉक्टर सादे कागज पर हाथ से लिखकर रिपोर्ट दे रहे हैं, जिसकी विश्वसनीयता और स्पष्टता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

1002382393

हाथ से लिखी रिपोर्ट: न डॉक्टर समझ पा रहे, न मरीज

​अस्पताल सूत्रों के अनुसार, फिल्म की अनुपलब्धता के कारण रिम्स और सदर अस्पताल में प्रतिदिन होने वाली 200 से अधिक जांचों का कोई विजुअल रिकॉर्ड मरीजों को नहीं मिल रहा है।

  • सेकेंड ओपिनियन में बाधा: जब मरीज किसी विशेषज्ञ डॉक्टर के पास हाथ से लिखी रिपोर्ट लेकर जाते हैं, तो तस्वीर (फिल्म) न होने के कारण डॉक्टर बीमारी की गंभीरता को सही से समझ नहीं पाते।
  • गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को कष्ट: पेट, किडनी और आंत की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं को भी इस अव्यवस्था के कारण बार-बार दौड़ना पड़ रहा है।

गरीबों की जेब पर भारी पड़ रही सरकारी ‘मुफ्त’ जांच

​रिम्स में मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले गरीब मरीजों को अब मजबूरी में निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।

  • निजी केंद्रों की चांदी: निजी केंद्रों में अल्ट्रासाउंड के लिए 800 से 1500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
  • आर्थिक बोझ: जो मरीज रिम्स इसलिए आए थे कि पैसे बचेंगे, उन्हें अब अपनी जमा-पूंजी बाहर खर्च करनी पड़ रही है।

अव्यवस्था पर फूटा मरीजों का गुस्सा

​मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यह समस्या काफी दिनों से बनी हुई है। जांच सेंटर पर रोज बहस और हंगामा होता है, लेकिन प्रबंधन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। सामाजिक संगठनों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द फिल्म की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि गरीबों का इलाज सुलभ हो सके।

तीसरी धारा कड़ा सवाल: क्या यही है हाई-टेक रिम्स?

​एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और हाई-टेक बनाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में एक अदद ‘प्रिंट शीट’ न होना प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करता है। क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं?

error: Content is protected !!