गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव की दहलीज पर राज्य की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के दिग्गज नेता और वर्तमान विधायक अमिनुल इस्लाम ने अपनी पार्टी का साथ छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। चुनाव से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम को राज्य की सत्ता में होने वाले संभावित बदलाव के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
बदलते समीकरण और ‘कांग्रेस लहर’ की आहट
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक मौजूदा विधायक का चुनाव से ऐन वक्त पहले पार्टी बदलना केवल व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत का आईना है। अमिनुल इस्लाम के इस कदम से यह स्पष्ट हो गया है कि असम में कांग्रेस के प्रति जनता और नेताओं का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है। जानकारों के अनुसार, यह दलबदल राज्य में चल रही ‘सत्ता विरोधी लहर’ (Anti-incumbency) का सीधा परिणाम है।
बीजेपी खेमे में बढ़ी बेचैनी
इस बड़े राजनीतिक फेरबदल ने सत्ताधारी खेमे की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राज्य में पिछले कुछ समय से महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार को जनता के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही बाढ़ प्रबंधन में विफलता और चर्चित जुबान हत्याकांड जैसे संवेदनशील मामलों ने जनता के असंतोष को हवा दी है। अब नेताओं का पाला बदलना यह दर्शाता है कि यह आक्रोश राजनीतिक रूप लेने लगा है।
जनता की पुकार: बदलाव की मांग
जमीनी स्तर पर भी असम की जनता के बीच एक नई और ईमानदार व्यवस्था की मांग तेज हो गई है। लंबे समय से काबिज सरकार के प्रति व्यवस्थागत समस्याओं से त्रस्त लोग अब बदलाव की ओर देख रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमिनुल इस्लाम की कांग्रेस में एंट्री तो बस एक शुरुआत है, आने वाले दिनों में कई और बड़े चेहरे पाला बदल सकते हैं।
”यह घटनाक्रम महज एक विधायक के पार्टी बदलने का मामला नहीं है, बल्कि यह असम की बदलती राजनीतिक दिशा का प्रतिबिंब है। हवा का रुख बता रहा है कि असम इस बार बदलाव के लिए तैयार है।”











