एक नई सोच, एक नई धारा

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बोकारो में हाथियों का खूनी तांडव: गोमिया में 48 घंटे के भीतर 5 की मौत, ग्रामीणों में दहशत

गोमिया (बोकारो): झारखंड के बोकारो जिले का गोमिया प्रखंड इन दिनों हाथियों के भीषण आतंक से थर्रा उठा है। पिछले 48 घंटों के भीतर हाथियों ने अलग-अलग गांवों में हमला कर 5 निर्दोष ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया है। गुरुवार रात गांगपुर गांव में दादा-पोते की मौत के साथ ही इस क्षेत्र में मातम और आक्रोश का माहौल है।

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गांगपुर में आधी रात का कहर: दादा और पोते की जान गई

​महुआटांड़ पंचायत के गांगपुर गांव में गुरुवार रात करीब 8:30 बजे तीन हाथियों का झुंड अचानक घुस आया। गांव में बिजली नहीं होने के कारण अंधेरे का फायदा उठाकर हाथियों ने घरों पर हमला करना शुरू कर दिया।

  • मृतक: 60 वर्षीय सोमर साव और उनका 8 वर्षीय पोता अमन कुमार (आयुष)।
  • घायल: हाथियों ने घर की दीवारें तोड़कर अंदर मौजूद लोगों को निशाना बनाया, जिसमें 10 वर्षीय राहुल कुमार, शांति देवी और राशि कुमारी गंभीर रूप से घायल हो गए।
  • लापता: ग्रामीणों के अनुसार एक व्यक्ति अभी भी लापता है, जिसकी तलाश वन विभाग और स्थानीय लोग कर रहे हैं।

बड़की पन्नू गांव: एक ही परिवार के तीन लोगों को कुचला

​इससे पूर्व बुधवार देर रात करीब 3 बजे बड़की पन्नू गांव में हाथियों के पांच सदस्यीय झुंड ने भीषण तबाही मचाई थी। यहाँ हाथियों ने एक ही परिवार के तीन सदस्यों को बेरहमी से मार डाला:

  1. गंगवा करमाली: घर से बाहर भागते समय हाथियों ने सूंड में लपेटकर पटक दिया।
  2. कमली देवी: पति की चीख सुनकर बाहर निकलीं पत्नी को भी हाथियों ने कुचल दिया।
  3. भगिया देवी: जान बचाने की कोशिश कर रही गंगवा करमाली की भाभी को भी हाथियों ने अपना शिकार बनाया।

प्रशासनिक विफलता और अंधेरे का फायदा

​ग्रामीणों में प्रशासन और वन विभाग के प्रति भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि:

  • ​गांवों में बिजली की अनुपलब्धता के कारण हाथियों की आवाजाही का पता नहीं चल पाता।
  • ​हाथी घरों के दरवाजे और दीवारें तोड़कर सीधे रिहायशी इलाकों में हमला कर रहे हैं।
  • ​वन विभाग की गश्त और हाथियों को भगाने के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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जमशेदपुर में गूंजेगा ‘जय भवानी, जय शिवाजी’: 19 फरवरी को निकलेगी भव्य भगवा शोभायात्रा

जमशेदपुर: हिंदवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती के अवसर पर इस वर्ष भी जमशेदपुर की सड़कें भगवामय होने वाली हैं। ‘छत्रपति शिवाजी सेना’ द्वारा आयोजित होने वाली यह भव्य शोभायात्रा लगातार तीसरे वर्ष 19 फरवरी 2026 को निकाली जाएगी।

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बारीडीह से एग्रीको तक उमड़ेगा जनसैलाब

​एक प्रेस वार्ता के दौरान आयोजन की रूपरेखा साझा करते हुए छत्रपति शिवाजी सेना के संस्थापक मनीष कुमार प्रसाद (मनीष सिंदे) ने बताया कि शोभायात्रा बारीडीह दुर्गा पूजा मैदान से शुरू होगी और एग्रीको पुराने दुर्गा पूजा मैदान तक जाएगी। इस यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और युवाओं के शामिल होने की उम्मीद है।

शौर्य और संस्कृति का अनूठा संगम

​शोभायात्रा को भव्य बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं:

  • पारंपरिक छटा: शोभायात्रा में लहराते भगवा ध्वज, ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु आकर्षण का केंद्र होंगे।
  • राष्ट्रभक्ति का संदेश: देशभक्ति के नारों और शिवाजी महाराज के जीवन दर्शन की झांकियों के माध्यम से युवा पीढ़ी को उनके गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया जाएगा।
  • अनुशासन सर्वोपरि: मनीष कुमार प्रसाद ने जोर दिया कि आयोजन पूरी तरह से अनुशासित और सामाजिक सौहार्द के साथ संपन्न होगा।

तीसरे वर्ष भी ऐतिहासिक होगा आयोजन

​संस्थापक ने शहरवासियों से अपील करते हुए कहा:

​”छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि सुशासन और राष्ट्र निर्माण के प्रतीक हैं। हर साल लोगों का उत्साह बढ़ रहा है और यह तीसरा वर्ष जमशेदपुर के इतिहास में ऐतिहासिक होगा। हम सभी को मिलकर इस राष्ट्रभक्ति के उत्सव को सफल बनाना है।”

युवाओं को जोड़ने का संकल्प

​आयोजकों का मुख्य उद्देश्य आधुनिक युवाओं को शिवाजी महाराज के आदर्शों, स्वाभिमान और राष्ट्र सेवा की भावना से जोड़ना है। प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्यकर्ताओं की टोलियां भी तैनात रहेंगी।

कार्यक्रम का विवरण:

  • दिनांक: 19 फरवरी 2026
  • प्रारंभ: बारीडीह दुर्गा पूजा मैदान
  • समापन: एग्रीको पुराना दुर्गा पूजा मैदान
  • आयोजक: छत्रपति शिवाजी सेना
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प्रतिभा का महाकुंभ: नेताजी सुभाष पब्लिक स्कूल राखामाइंस में वार्षिकोत्सव की धूम, बच्चों ने बिखेरे संस्कृति के रंग

राखामाइंस: नेताजी सुभाष पब्लिक स्कूल, राखामाइंस के सभागार में आयोजित वार्षिक समारोह (Annual Day) में छात्र-छात्राओं की रचनात्मकता और भारतीय संस्कृति की अनुपम झलक देखने को मिली। दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम ने पूरे वातावरण को भक्ति और उत्साह से सराबोर कर दिया।

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दिग्गजों की मौजूदगी में निखरी बच्चों की कला

​समारोह के मुख्य अतिथि नेताजी सुभाष ग्रुप ऑफ स्कूल के संस्थापक श्री मदन मोहन सिंह रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने की। इस दौरान शिक्षा जगत की कई जानी-मानी हस्तियां मंचासीन रहीं, जिनमें डॉ. आर. एन. शर्मा, तनवीर आलम और विभिन्न स्कूलों के प्रिंसिपल्स शामिल थे।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

​विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने नृत्य, संगीत और नाटकों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छोटे-छोटे बच्चों का आत्मविश्वास और उनकी टीमवर्क देख अभिभावकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। विद्यालय की प्रिंसिपल वाई. मांगा लक्ष्मी ने स्पष्ट किया कि स्कूल का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें ‘संस्कारवान नागरिक’ बनाना है।

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अतिथियों के विचार: शिक्षा और सर्वांगीण विकास

​कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने शिक्षा के बदलते स्वरूप और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया:

  • मदन मोहन सिंह (संस्थापक): “वार्षिकोत्सव बच्चों के भीतर छिपी प्रतिभा को निखारने का सशक्त माध्यम है।”
  • मृत्युंजय कुमार झा (अध्यक्ष): “नैतिक मूल्यों के बिना शिक्षा अधूरी है, और हमारे बच्चे सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”
  • तनवीर आलम (मार्केटिंग हेड): “ऐसे आयोजनों से बच्चों में अनुशासन और नेतृत्व क्षमता (Leadership) का विकास होता है।”

सराहनीय रहा शिक्षकों का मार्गदर्शन

​नेताजी सुभाष हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज के प्रतिनिधि डॉ. आर. एन. शर्मा और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने शिक्षकों के मार्गदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रस्तुतियों का स्तर विद्यालय में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को दर्शाता है।

समापन और आभार: कार्यक्रम का समापन शिक्षक समन्वयक सतीश झा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों, शिक्षकों और विशेष रूप से कड़ी मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। बड़ी संख्या में उपस्थित अभिभावकों ने भी विद्यालय के इस प्रयास की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

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जमशेदपुर: अपहरण कर कोरे कागज पर कराए हस्ताक्षर, कार भी छीनी; 20 दिन बाद भी ‘करणदीप’ पुलिस की पकड़ से बाहर

जमशेदपुर: लौहनगरी में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दिनदहाड़े अपहरण और लूट जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। सोनारी निवासी नरेश कुमार के साथ हुई खौफनाक वारदात को 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन बिष्टुपुर पुलिस और वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को लिखित शिकायत देने के बावजूद अब तक न तो आरोपी करणदीप सिंह की गिरफ्तारी हुई है और न ही पीड़ित की कार बरामद की जा सकी है।

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बातों में फंसाया, फिर साथियों संग किया अपहरण

​पीड़ित नरेश कुमार (निवासी: सीपी क्लब, सोनारी) ने बताया कि घटना 11 जनवरी की शाम की है। वे बिष्टुपुर स्थित जुडिओ मॉल जाने के लिए अपनी कार (JH-05DD-9486) पार्क कर रहे थे। तभी करणदीप सिंह नामक युवक उनके पास आया और बातों में उलझा लिया। देखते ही देखते एक दूसरी कार में करणदीप के 5-6 साथी वहां आ धमके।

गाढ़ाबासा में बंधक बनाकर मारपीट और जबरन हस्ताक्षर

​अपराधियों ने नरेश को जबरन अपनी कार में बैठा लिया और साकची के गाढ़ाबासा स्थित एक कमरे में ले गए। पीड़ित के अनुसार:

  • मारपीट: कार के अंदर और कमरे में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे उनके चेहरे, आंख और छाती पर गंभीर चोटें आईं।
  • जबरन वसूली का तरीका: डरा-धमकाकर अपराधियों ने एक कोरे कागज पर यह लिखवा लिया कि नरेश ने पैसे के एवज में अपनी कार बेच दी है। साथ ही कई सादे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर भी करवा लिए गए।
  • धमकी: अपराधियों ने नरेश और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी, जिसके डर से पीड़ित ने वही किया जो हमलावरों ने कहा।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल

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​नरेश कुमार ने न्याय के लिए कानून का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन मिला है:

  1. 11 जनवरी: बिष्टुपुर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
  2. 14 जनवरी: वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को मामले की गंभीरता से अवगत कराया।

​20 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई न होना पुलिस की गश्ती और अनुसंधान पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। पीड़ित अब भी डरा हुआ है और अपनी संपत्ति (कार) वापस पाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है।

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मुख्य बिंदु:

  • आरोपी: करणदीप सिंह और उसके 5-6 अज्ञात साथी।
  • कार नंबर: JH-05DD-9486 (अभी तक बरामद नहीं)।
  • चोटें: पीड़ित के चेहरे और छाती पर हमले के निशान।
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“काम ही मेरी पहचान”: वार्ड-14 से युवा प्रत्याशी राकेश कुमार सिंह ने भरी हुंकार, विकास के ‘मॉडल’ का दिया ब्लूप्रिंट

जमशेदपुर (मानगो): मानगो नगर निगम के वार्ड संख्या-14 की चुनावी फिजां अब पूरी तरह बदल चुकी है। शिक्षित, कर्मठ और युवाओं के बीच लोकप्रिय प्रत्याशी राकेश कुमार सिंह ने “काम ही मेरी पहचान” के संकल्प के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल कर चुनावी बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीति का आधार केवल वादे नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाला विकास होगा।

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भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी शासन का वादा

​नामांकन के बाद समर्थकों के हुजूम को संबोधित करते हुए राकेश कुमार सिंह ने कहा कि वार्ड-14 की जनता अब बदलाव चाहती है। उन्होंने अपने विजन में मुख्य रूप से इन बिंदुओं को शामिल किया:

  • सरल सरकारी प्रक्रिया: विधवा, वृद्धा और दिव्यांग पेंशन के साथ-साथ राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को इतना पारदर्शी बनाया जाएगा कि किसी भी जरूरतमंद को कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।
  • भ्रष्टाचार पर वार: वार्ड स्तर पर होने वाले कार्यों में पारदर्शिता लाना और बिचौलिया संस्कृति को खत्म करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।

गरीबों की आजीविका और सामाजिक सरोकार

​राकेश कुमार सिंह ने छोटे दुकानदारों और फुटपाथ विक्रेताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए कहा:

​”सब्जी विक्रेताओं और अस्थायी दुकान लगाने वाले गरीब परिवारों की आजीविका की रक्षा करना मेरी नैतिक जिम्मेदारी होगी। इसके साथ ही, गरीब बच्चों की उच्च शिक्षा और उनकी शादियों जैसे सामाजिक दायित्वों में मैं और मेरी टीम सदैव ढाल बनकर खड़ी रहेगी।”

स्वच्छता और स्वास्थ्य: ‘हर घर जल’ का लक्ष्य

​वार्ड की बुनियादी समस्याओं पर प्रहार करते हुए राकेश ने “स्वस्थ और स्वच्छ वार्ड-14” का नारा दिया है। उनके मुख्य वादों में शामिल हैं:

  1. आधुनिक कचरा प्रबंधन: कचरे के सही निपटान के लिए एक आधुनिक प्रणाली विकसित करना।
  2. बीमारियों से बचाव: नियमित फॉगिंग और नालियों की गहरी सफाई सुनिश्चित करना।
  3. पेयजल आपूर्ति: पाइपलाइन के विस्तार के जरिए हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना।

शिक्षित प्रत्याशी पर युवाओं का भरोसा

​राकेश कुमार सिंह की शिक्षित और युवा छवि वार्ड के मतदाताओं, खासकर युवाओं को काफी आकर्षित कर रही है। समर्थकों का मानना है कि एक पढ़ा-लिखा जनप्रतिनिधि ही मानगो की जटिल समस्याओं का तकनीकी और प्रशासनिक समाधान निकाल सकता है।

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रेवंत रेड्डी की भाजपा को खुली चुनौती: ‘हिम्मत है तो तेलंगाना में सरकार बनाकर दिखाएं, 4% आरक्षण कोई नहीं छीन सकता’

हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए उन्हें राज्य में सत्ता हासिल करने की चुनौती दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेलंगाना में अल्पसंख्यकों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण बरकरार रहेगा और भाजपा का इसे खत्म करने का सपना कभी पूरा नहीं होगा।

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हेट स्पीच के खिलाफ ‘कर्नाटक मॉडल’ पर बनेगा कानून

​हैदराबाद में जमीयत उलमा तेलंगाना की बैठक में मुख्यमंत्री ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना सरकार जल्द ही हेट स्पीच (नफरती भाषण) के खिलाफ एक सख्त कानून लाने जा रही है।

  • मसौदा तैयार: इस कानून के ड्राफ्ट के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस सुदर्शन रेड्डी से मदद मांगी गई है।
  • लक्ष्य: नफरत फैलाने वाले बयानों पर रोक लगाना और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों को कड़ी सजा दिलाना।
  • बजट सत्र: सरकार इस विधेयक को आगामी विधानसभा बजट सत्र में पेश करने की तैयारी में है।

अमित शाह और मोदी से सीधे सवाल

​मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस पुराने बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने भाजपा के सत्ता में आने पर मुस्लिम आरक्षण खत्म करने की बात कही थी। रेवंत रेड्डी ने तीखे लहजे में कहा:

​”अगर आपमें हिम्मत है, तो तेलंगाना में सरकार बनाकर दिखाइए। दिल्ली से आकर महबूबनगर में बड़ी-बड़ी बातें करने से कुछ नहीं होगा। हमने जातिगत सर्वेक्षण के जरिए डेटा पुख्ता कर लिया है, जिससे 4% आरक्षण को स्थायी बनाने में मदद मिलेगी।”

भाजपा-बीआरएस पर ‘वोट ट्रांसफर’ का आरोप

​रेवंत रेड्डी ने भाजपा की चुनावी जीत पर तंज कसते हुए आरोप लगाया कि तेलंगाना में भाजपा को जो भी सफलता मिली है, वह बीआरएस (BRS) द्वारा किए गए ‘वोट ट्रांसफर’ का नतीजा है। उन्होंने कहा कि नफरत की राजनीति के बजाय देश को अमेरिका और चीन जैसी शक्तियों के सामने खड़ा करने के लिए सभी समुदायों को एकजुट होना होगा।

सियासी टकराव की पृष्ठभूमि

​हाल ही में भाजपा अध्यक्ष नितिन नाबिन ने रेवंत सरकार पर ‘तुष्टीकरण’ का आरोप लगाया था। भाजपा का तर्क है कि अल्पसंख्यक आरक्षण का लाभ काटकर अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़े वर्गों को दिया जाना चाहिए। वहीं, कांग्रेस सरकार इसे अल्पसंख्यकों का संवैधानिक अधिकार बता रही है।

मुख्य बिंदु:

  • जाति सर्वेक्षण: राज्य सरकार का दावा है कि उनके पास अब मुस्लिम आबादी का सही डेटा है।
  • कानूनी लड़ाई: मुस्लिम आरक्षण का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है, जहाँ राज्य सरकार मजबूती से अपना पक्ष रखने की तैयारी में है।
  • नगर निकाय चुनाव: आगामी 11 फरवरी को होने वाले निकाय चुनावों से पहले इस बयानबाजी को काफी अहम माना जा रहा है।
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कानूनी शिकंजे में राजपाल यादव: दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर जेल में सरेंडर, 9 करोड़ का है बकाया मामला

नई दिल्ली: अपनी शानदार कॉमेडी से करोड़ों दिलों को जीतने वाले अभिनेता राजपाल यादव के लिए ‘अता पता लापता’ फिल्म का कर्ज अब जी का जंजाल बन गया है। दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त आदेश के पालन में राजपाल यादव ने गुरुवार को जेल अधीक्षक के सामने सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने उनके द्वारा दी गई किस्तों और आश्वासनों को नाकाफी बताते हुए राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।

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कोर्ट रूम ड्रामा: 25 लाख का चेक भी नहीं आया काम

​सरेंडर करने के बाद राजपाल यादव व्यक्तिगत रूप से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे 25 लाख रुपये का चेक साथ लाए हैं और बाकी की रकम भी जल्द चुका देंगे। हालांकि, कोर्ट का रुख सख्त रहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि:

  • ​किसी भी राहत पर विचार करने से पहले सरेंडर अनिवार्य है।
  • ​बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद शिकायतकर्ता कंपनी को भुगतान नहीं किया गया।
  • ​मौजूदा समय में उन पर लगभग 9 करोड़ रुपये का बकाया है।

“अदालत के साथ लुका-छिपी नहीं”: कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

​जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि राजपाल यादव की सजा को जून 2024 में सिर्फ इसलिए रोका गया था ताकि वे मामला सुलझा सकें। कोर्ट ने अभिनेता की उन दलीलों को भी खारिज कर दिया जिसमें डिमांड ड्राफ्ट में ‘तकनीकी गलती’ का बहाना बनाया गया था। कोर्ट के अनुसार, बार-बार नियम तोड़ने और वरिष्ठ वकीलों के जरिए झूठे वादे करने के बाद अब रियायत की कोई जगह नहीं बची है।

क्या है 16 साल पुराना यह विवाद?

​इस पूरे मामले की जड़ें साल 2010 से जुड़ी हैं:

  1. कर्ज की शुरुआत: राजपाल यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
  2. चेक बाउंस: फिल्म के फ्लॉप होने के बाद जब कर्ज चुकाने के लिए चेक दिए गए, तो वे बैंक में बाउंस हो गए।
  3. सजा का ऐलान: साल 2018 में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी।
  4. ब्याज का बोझ: समय बीतने और भुगतान न होने के कारण 5 करोड़ की यह राशि अब करीब 9 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है।

अब आगे क्या?

​कोर्ट ने आदेश दिया है कि राजपाल यादव को ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा काटनी होगी। साथ ही, रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा की गई राशि शिकायतकर्ता कंपनी को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

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सीतारामडेरा थाने से सटे मंदिर में चोरी, सीसीटीवी में कैद हुई वारदात

जमशेदपुर: लौहनगरी में चोरों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब वे पुलिस थाने के पास भी वारदात करने से नहीं हिचक रहे हैं। ताजा मामला सीतारामडेरा थाना से सटे शिव हनुमान मंदिर का है, जहाँ बीती रात एक चोर ने मंदिर की दीवार फांदकर चोरी की घटना को अंजाम दिया।

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वारदात का तरीका: दान पेटियों को बनाया निशाना

​जानकारी के अनुसार, चोर ने पहले मंदिर की चहारदीवारी फांदी और परिसर के अंदर दाखिल हुआ। इसके बाद उसने बड़ी चालाकी से मंदिर की तीन दान पेटियों के ताले तोड़ दिए और उनमें रखे नकदी (चढ़ावा) लेकर रफूचक्कर हो गया।

सुबह खुला राज

​घटना का पता शुक्रवार की सुबह तब चला जब मंदिर के सेवक मुन्ना पात्रों मंदिर खोलने पहुंचे। उन्होंने देखा कि दान पेटियों के ताले टूटे हुए हैं और सारा कैश गायब है। मुन्ना पात्रों ने बताया:

​”सुबह जब मैं आया तो देखा कि मंदिर में तोड़फोड़ हुई है और तीनों दान पेटियों से पैसे चोरी हो गए हैं। हमने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी।”

सीसीटीवी में कैद हुआ चोर

​हालांकि चोर ने शातिर तरीके से चोरी की, लेकिन वह मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की नजर से नहीं बच सका। फुटेज में चोर की हरकतें और उसका हुलिया कैद हो गया है। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है और चोर की शिनाख्त की कोशिश की जा रही है।

स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी

​थाने से चंद कदमों की दूरी पर स्थित मंदिर में चोरी होना इलाके में चर्चा और गुस्से का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर थाने के बगल में भी मंदिर सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा। उन्होंने पुलिस गश्त और रात के समय सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।

पुलिस का बयान: सीतारामडेरा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और दावा किया है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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झारखंड में ‘ग्रीन स्टील’ क्रांति: ₹1.27 लाख करोड़ के निवेश से खुलेगा नए औद्योगिक युग का द्वार

रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड अब केवल खनिजों का स्रोत नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक और हरित ऊर्जा (Green Energy) का वैश्विक हब बनने की ओर अग्रसर है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और यूके दौरे से लौटे मुख्यमंत्री के प्रयासों का असर दिखने लगा है। राज्य सरकार को विभिन्न प्रमुख औद्योगिक समूहों से 1 लाख 27 हजार करोड़ रुपये के निवेश के आशय पत्र (LoI) प्राप्त हुए हैं।

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प्रमुख निवेश और औद्योगिक दिग्गज

​इस भारी-भरकम निवेश में देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने शामिल हैं, जो झारखंड की तस्वीर बदलने के लिए तैयार हैं:

  • नवीन जिंदल समूह: सबसे बड़ा निवेश प्रस्ताव, ₹70,000 करोड़
  • टाटा स्टील: ₹11,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित।
  • उड़ीसा एलॉय स्टील: लातेहार में पावर और स्टील सेक्टर के लिए ₹25,000 करोड़ का प्रस्ताव।
  • रुंगटा समूह: सरायकेला-खरसावां में ₹10,000 करोड़ से अधिक का निवेश।

क्षेत्रवार निवेश का विवरण

​राज्य के अलग-अलग जिलों में संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए परियोजनाओं को वितरित किया गया है:

सेक्टरप्रमुख कंपनीस्थाननिवेश (₹ करोड़)
पावर एवं स्टीलउड़ीसा स्टील अलॉयलातेहार25,000
इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंगरुंगटा माइन्ससरायकेला10,000
फिनिश्ड स्टील एवं पावरअमलगम स्टीलकांड्रा (ई. सिंहभूम)4,980
AI डेटा सेंटरसनशाइन ग्लोबल (सिंगापुर)3,000
उन्नत कोटिंग स्टीलबीएमडब्लू (BMW) इंडस्ट्रीजबोकारो1,070
ऑटोमोटिव सेक्टरजय सस्पेंशनआदित्यपुर

ग्रीन स्टील और अत्याधुनिक तकनीक: जीरो कार्बन का लक्ष्य

​झारखंड अब “क्लीन स्टील” उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसके लिए विश्व स्तर की तकनीकों का उपयोग किया जाएगा:

  • EASyMelt तकनीक: कार्बन उत्सर्जन में 50% तक की कमी लाएगी।
  • Hisarna तकनीक: निम्न-श्रेणी के लौह अयस्क का उपयोग कर उत्सर्जन को 80% तक कम करेगी।
  • सस्टेनेबल टिनप्लेट: 85% वाटर रीसाइक्लिंग और पर्यावरण अनुकूल एसिड का उपयोग होगा।

रोजगार के नए अवसर: 46,000+ परिवारों को लाभ

​इस निवेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का सृजन है। अनुमान के मुताबिक, इन परियोजनाओं से 46,555 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे:

  • ​अकेले उड़ीसा स्टील अलॉय से 20,000 लोगों को काम मिलेगा।
  • ​रुंगटा समूह से 6,200 और अमलगम स्टील से 3,000 युवाओं को प्रत्यक्ष लाभ होगा।
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हसरतों की ‘एक्सप्रेस’: दुमका के इस शख्स ने ईंट-पत्थर के घर को बना दिया रेलगाड़ी

दुमका, झारखंड: कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है, लेकिन झारखंड के दुमका जिले में एक कलाकार ने साबित कर दिया कि ‘अधूरी हसरतें’ भी कला को जन्म दे सकती हैं। जहाँ आज भी रेल की सीटी एक सपना है, वहां लताबनी गांव के सोमराज मरांडी ने अपने पूरे घर को ही एक ‘नीले कोच’ वाली एक्सप्रेस ट्रेन की शक्ल दे दी है।

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खेतों के बीच खड़ी ‘नीली कोच वाली ट्रेन’

​दूर से देखने पर ऐसा भ्रम होता है कि धान के खेतों के बीच कोई एक्सप्रेस ट्रेन सरपट दौड़ने को तैयार खड़ी है। खिड़कियों की बनावट, नीला रंग और बारीकियों से की गई पेंटिंग इसे हूबहू रेल का डिब्बा बनाती है। सोमराज मरांडी, जो पेशे से एक पेंटर हैं, उन्होंने अपनी इस कलाकारी से पूरे इलाके में हलचल मचा दी है।

भावुक कर देने वाली वजह

​सोमराज की इस रचनात्मकता के पीछे एक मार्मिक दर्द छिपा है। उन्होंने बताया:

“हमारे गांव के बुजुर्गों और बच्चों ने कभी असली रेलगाड़ी नहीं देखी। वे रेल देखने और मजदूरी के लिए बंगाल पलायन करते हैं। मैंने सोचा कि अगर रेल यहाँ नहीं आ सकती, तो क्यों न मैं घर को ही रेल बना दूँ ताकि मेरे अपनों को इसका अहसास हो सके।”

पर्यटन स्थल बना सोमराज का आशियाना

​आज सोमराज का घर सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि एक सेल्फी पॉइंट बन चुका है।

  • पड़ोसी राज्यों से आवक: झारखंड के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और बिहार से भी लोग इस अनोखे ‘रेल-घर’ को देखने और फोटो खिंचवाने आ रहे हैं।
  • परिवार की खुशी: सोमराज की पत्नी अनादि मुर्मू और उनके चाचा इस उपलब्धि पर गर्व महसूस करते हैं। उनका कहना है कि इस घर ने उनके गुमनाम गांव को एक नई पहचान दी है।

सियासत और विकास की विसंगति

​जहाँ लोग सोमराज की कला की तारीफ कर रहे हैं, वहीं इस घर ने इलाके में रेल कनेक्टिविटी की कमी को भी उजागर कर दिया है। स्थानीय विधायक आलोक सोरेन ने कलाकार की सराहना तो की, लेकिन साथ ही केंद्र सरकार पर रेल पटरियां न बिछा पाने का तंज भी कसा। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया है कि सांसद नलिन सोरेन के प्रयासों से जल्द ही यह क्षेत्र रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा।

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