एक नई सोच, एक नई धारा

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झारखंड: खुद ‘बीमार’ हुई 108 एम्बुलेंस, बीच रास्ते में डीजल खत्म होने से अटकी डायरिया मरीज की जान

जमशेदपुर/पटमदा: झारखंड में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा ‘108 एम्बुलेंस’ की बदहाली थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला गुरुवार को पटमदा क्षेत्र में सामने आया, जहाँ एक गंभीर मरीज को अस्पताल ले जा रही एम्बुलेंस का बीच सड़क पर डीजल खत्म हो गया। इस लापरवाही के कारण डायरिया पीड़ित महिला करीब एक घंटे तक सड़क पर तड़पती रही।

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धूसरा गांव के पास थमे एम्बुलेंस के पहिए

​आगुईडांगरा गांव की 45 वर्षीय सावित्री सिंह को बुधवार से लगातार उल्टी और दस्त (डायरिया) की शिकायत थी। हालत गंभीर होने पर परिजनों ने 108 पर कॉल किया। बोड़ाम के लावजोड़ा पीएचसी से एम्बुलेंस (JH01CJ-8238) मरीज को लेकर एमजीएम अस्पताल के लिए निकली, लेकिन महज 8 किमी दूर धूसरा गांव के पास गाड़ी का इंजन अचानक बंद हो गया।

खराब रखरखाव और तकनीकी खामियां

​एम्बुलेंस चालक कामदेव महतो और टेक्नीशियन गणेश कौशल महतो ने जो खुलासे किए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:

  • डीजल की कमी: टंकी खाली होने के कारण गाड़ी बंद हुई और इंजन ने ‘एयर’ ले लिया, जिससे वाहन पूरी तरह ठप हो गया।
  • कबाड़ में तब्दील वाहन: यह एम्बुलेंस पहले जुगसलाई में थी और वहां भी अक्सर खराब रहती थी। 10-15 दिन पहले ही इसे लावजोड़ा भेजा गया है।
  • बैटरी और मरम्मत का अभाव: चालक के अनुसार, वाहन की बैटरी खराब है और नियमित मरम्मत न होने से यह कभी भी बंद हो जाती है।

दूसरी एम्बुलेंस के भरोसे तय हुआ सफर

​मरीज की जान जोखिम में देख आनन-फानन में एमजीएम अस्पताल से दूसरी एम्बुलेंस मंगवाई गई। लगभग एक घंटे की देरी के बाद सावित्री सिंह को एमजीएम अस्पताल पहुंचाया जा सका। परिजनों में इस देरी को लेकर गहरा आक्रोश है।

पुरानी घटनाओं से भी नहीं लिया सबक

​यह पहली बार नहीं है जब बोड़ाम-पटमदा क्षेत्र में 108 सेवा फेल हुई है:

  • 25 दिसंबर की घटना: डांगरडीह गांव में समय पर एम्बुलेंस न पहुंचने के कारण सांस की बीमारी से जूझ रही एक महिला की मौत हो गई थी।
  • ​उसी घटना के बाद लावजोड़ा पीएचसी को यह एम्बुलेंस आवंटित की गई थी, जो अब खुद तकनीकी खराबी और ईंधन की कमी का शिकार है।

उठते सवाल: जिम्मेदार कौन?

​सरकार और विभाग के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा गरीब मरीज भुगत रहे हैं। एम्बुलेंस में तेल न होना और खराब बैटरी के साथ उसे फील्ड में भेजना प्रशासन की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।

परिजनों का पक्ष: “हमने समय पर कॉल किया, एम्बुलेंस भी आई, लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने हमारी मरीज की जान खतरे में डाल दी। अगर कुछ अनहोनी हो जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता?” — रविन्द्र सिंह (रिश्तेदार)

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‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’: आज देशभर में ओला, उबर और रैपिडो की हड़ताल, ठप रहेंगी कैब और बाइक-टैक्सी सेवाएं

नई दिल्ली/मुंबई: आज यानी शनिवार, 7 फरवरी को देशभर में ऐप-आधारित परिवहन सेवाओं (Ola, Uber, Rapido) का पहिया थम गया है। तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) और कई राष्ट्रीय मजदूर संगठनों ने मिलकर ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ का आह्वान किया है। इस हड़ताल के कारण यात्रियों को कार, ऑटो और बाइक-टैक्सी की बुकिंग में भारी किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

क्यों बंद हैं ऐप-आधारित टैक्सियां?

​ड्राइवर संगठनों का आरोप है कि एग्रीगेटर कंपनियां उनका “अंतहीन शोषण” कर रही हैं। हड़ताल के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. किराया नीति में मनमानी: ड्राइवरों का कहना है कि सरकार की ओर से कोई न्यूनतम किराया (Minimum Fare) तय नहीं है। कंपनियां अपनी मर्जी से कमीशन काटती हैं, जिससे ड्राइवरों की आय अनिश्चित हो गई है।
  2. पैनिक बटन का वित्तीय बोझ: महाराष्ट्र कामगार सभा के अनुसार, ड्राइवरों को 12,000 रुपये खर्च कर नए पैनिक बटन डिवाइस लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पहले लगाए गए कई डिवाइस को सरकार ने ‘अनधिकृत’ घोषित कर दिया है, जिसका खामियाजा ड्राइवरों को भुगतना पड़ रहा है।
  3. ओपन परमिट पॉलिसी: ऑटो रिक्शा की बढ़ती संख्या और अवैध बाइक टैक्सियों के कारण पुराने ड्राइवरों की कमाई में भारी गिरावट आई है।
  4. बीमा का अभाव: यूनियन का आरोप है कि बाइक टैक्सी हादसों के पीड़ितों को उचित बीमा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

नितिन गडकरी को लिखा पत्र

​यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि लाखों ट्रांसपोर्ट वर्कर्स ‘इनकम इनसिक्योरिटी’ (आय की असुरक्षा) और खराब वर्किंग कंडीशन से जूझ रहे हैं। उनका दावा है कि कंपनियां भारी मुनाफा कमा रही हैं, जबकि ड्राइवर गरीबी की ओर धकेले जा रहे हैं।

यात्रियों के लिए क्या है स्थिति?

  • मोबाइल ऐप बंद: अधिकांश ड्राइवरों ने अपने पार्टनर ऐप लॉग-ऑफ कर दिए हैं।
  • ऑफलाइन विकल्प: यात्रियों को स्टेशन, एयरपोर्ट और बस स्टैंड पर जाने के लिए काली-पीली टैक्सी या स्थानीय ऑटो पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जहाँ मनमाना किराया वसूले जाने की भी खबरें आ रही हैं।
  • सोशल मीडिया पर गूंज: #AllIndiaBreakdown के साथ ड्राइवर अपनी समस्याओं को साझा कर रहे हैं।

निष्कर्ष

​यह हड़ताल भारत में तेज़ी से बढ़ते ‘गिग इकोनॉमी’ (Gig Economy) के भीतर गहरे असंतोष को दर्शाती है। यदि सरकार और कंपनियों के बीच जल्द कोई सहमति नहीं बनी, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।

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जमशेदपुर में अनुभव सिन्हा: ‘अस्सी’ की दस्तक और झारखंड के नायकों को स्क्रीन पर उतारने की तैयारी

जमशेदपुर: मशहूर बॉलीवुड निर्देशक अनुभव सिन्हा शुक्रवार को ‘लौहनगरी’ जमशेदपुर पहुंचे। गोलमुरी में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने न केवल शहर की सुव्यवस्थित सुंदरता की तारीफ की, बल्कि झारखंड की ऐतिहासिक विरासत और आदिवासी संस्कृति को फिल्म जगत के लिए एक अनमोल खजाना बताया।

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बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हू की वीरता से हुए प्रभावित

​सिन्हा ने स्वीकार किया कि इस यात्रा ने उन्हें झारखंड के महान क्रांतिकारियों के बारे में जानने का नया दृष्टिकोण दिया है।

  • अनसुनी गाथाएं: उन्होंने पहली बार सिद्धू-कान्हू के संघर्षों के बारे में सुना और अब वे उनके जीवन पर विस्तार से अध्ययन करने के इच्छुक हैं।
  • भगवान बिरसा मुंडा: बिरसा मुंडा के उलगुलान (आंदोलन) को गहराई से समझने की इच्छा जताते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड के इन नायकों की कहानियां राष्ट्रीय स्तर पर सिनेमा के जरिए सामने आनी चाहिए।

झारखंडी स्वाद: हड़िया और धुसका का अनुभव

​फिल्मी चकाचौंध से दूर अनुभव सिन्हा ने यहाँ की जमीनी जीवनशैली को करीब से महसूस किया:

  • आदिवासी खान-पान: उन्होंने स्थानीय पेय ‘हड़िया’ और लोकप्रिय व्यंजन ‘धुसका’ का आनंद लिया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि हड़िया का स्वाद शुरुआत में अलग लगा, लेकिन यही यहाँ की मौलिक पहचान है।
  • भारत दर्शन: उन्होंने कहा कि मुंबई की जिंदगी से निकलकर वे अब तक 40 शहरों का दौरा कर चुके हैं ताकि ‘असली भारत’ को समझ सकें।

फिल्म ‘अस्सी’: 20 फरवरी को कोर्टरूम में होगा फैसला

​उनकी आगामी फिल्म ‘अस्सी’ को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह है। सिन्हा ने फिल्म के बारे में कुछ अहम बातें साझा कीं:

  1. रिलीज डेट: यह फिल्म 20 फरवरी को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।
  2. सजीव चित्रण: यह एक कोर्टरूम ड्रामा है। इसके लिए सिन्हा ने वास्तविक अदालती कार्यवाहियों का गहन अध्ययन किया है ताकि फिल्म बनावटी न लगे।
  3. दर्शक ही जज: उन्होंने कहा, “कोर्टरूम फिल्मों में दर्शक खुद को जज की कुर्सी पर महसूस करता है, वह वकीलों की दलीलें सुनकर अपना फैसला खुद देता है।”

झारखंड में शूटिंग की संभावना

​अनुभव सिन्हा ने जमशेदपुर की लोकेशंस और यहाँ की संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि यदि उन्हें उपयुक्त कहानी मिली, तो वे भविष्य में झारखंड में शूटिंग करना जरूर पसंद करेंगे। उनके अनुसार, छोटे शहरों के दर्शक भी गंभीर विषयों वाली फिल्मों को उतनी ही ईमानदारी से देखते हैं।

निष्कर्ष: अनुभव सिन्हा की इस यात्रा ने यह संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में बॉलीवुड के बड़े पर्दे पर झारखंड की जनजातीय वीरता और यहाँ की मिट्टी की सोंधी खुशबू देखने को मिल सकती है।

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कैरव किडनैपिंग केस: मास्टरमाइंड ‘तेजा’ का खौफनाक इतिहास, जेल में बना था अंतरराज्यीय सिंडिकेट का प्लान

जमशेदपुर/लुधियाना: युवा उद्यमी कैरव के अपहरण ने एक ऐसे अपराधी के चेहरे से नकाब हटा दिया है, जो पंजाब से लेकर झारखंड तक अपनी दहशत फैलाने की फिराक में था। इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार तेजिंदरपाल सिंह उर्फ तेजा (निवासी कोटमाना, जगराव) कोई छोटा अपराधी नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल किडनैपिंग सिंडिकेट का सरगना है, जिसका नेटवर्क जेल की सलाखों के पीछे से संचालित होता था।

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पंजाब का मोस्ट वांटेड ‘प्रोफेशनल किडनैपर’

​तेजिंदरपाल का आपराधिक रिकॉर्ड पंजाब पुलिस की फाइलों में बेहद काला है। उस पर फिरौती के लिए अपहरण, हत्या के प्रयास और लूट के आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं।

  • डॉक्टर के बेटे का अपहरण: लुधियाना के एक नामचीन डॉक्टर के बेटे का अपहरण कर करोड़ों की फिरौती मांगना उसका अब तक का सबसे चर्चित जुर्म रहा है।
  • उद्योगपतियों पर निशाना: वह जगराव और मोगा के कई बड़े औद्योगिक घरानों के सदस्यों के अपहरण की साजिश रचने का मुख्य आरोपी रहा है।

लुधियाना जेल: जहाँ बुना गया अपराध का नया ताना-बाना

​पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि तेजिंदरपाल ने लुधियाना सेंट्रल जेल को ही अपना ‘कमांड सेंटर’ बना लिया था।

  • नेटवर्क बिल्डिंग: जेल के भीतर उसने दूसरे राज्यों के अपराधियों और तकनीकी विशेषज्ञों से हाथ मिलाया।
  • जमशेदपुर कनेक्शन: जेल से छूटने के बाद उसने झारखंड का रुख किया और कैरव के अपहरण के लिए स्थानीय अपराधियों का एक ‘स्लीपर सेल’ तैयार किया।

हाई-टेक अपराधी: तकनीक और हथियारों का घातक मेल

​तेजा केवल ताकत के दम पर नहीं, बल्कि दिमाग और तकनीक के सहारे वार करता है। पुलिस को चकमा देने में वह माहिर है:

  • डिजिटल फुटप्रिंट: पुलिस ट्रैकिंग से बचने के लिए वह वर्चुअल नंबर और एन्क्रिप्टेड एप्स का इस्तेमाल करता है।
  • विदेशी हथियार: उसके पास से पहले भी प्रतिबंधित विदेशी हथियार बरामद हो चुके हैं, जो उसके अंतरराष्ट्रीय आर्म्स स्मगलिंग लिंक की ओर इशारा करते हैं।
  • रेकी की कला: कैरव कांड में भी यह बात सामने आई है कि तेजा का गिरोह महीनों तक ‘रेकी’ (जासूसी) करता था और शिकार की पूरी पारिवारिक और वित्तीय जानकारी जुटाने के बाद ही हमला बोलता था।

एक नज़र में तेजिंदरपाल उर्फ तेजा का प्रोफाइल

विवरणजानकारी
निवासकोटमाना, जगराव (लुधियाना)
मुख्य अपराधफिरौती के लिए अपहरण, डकैती (2018-19), आर्म्स एक्ट
विशेषतावर्चुअल नंबरों का उपयोग और महीनों लंबी रेकी
ताजा कांडजमशेदपुर का चर्चित कैरव अपहरण कांड

मौजूदा स्थिति: झारखंड पुलिस अब पंजाब पुलिस के साथ तालमेल बिठाकर तेजा के पूरे स्लीपर सेल को ध्वस्त करने में जुटी है। आशंका है कि अगर उसे जल्द काबू नहीं किया गया, तो वह राज्य में कुछ और बड़े व्यापारिक घरानों को निशाना बना सकता था।

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मानगो निकाय चुनाव: करोड़पति ‘महारानियों’ के सामने 16 हजार वाली चुनौती, शिक्षा और संपत्ति का दिलचस्प मुकाबला

जमशेदपुर/मानगो: मानगो की ‘सरकार’ चुनने की घड़ी नजदीक आ रही है। 23 फरवरी को होने वाले मतदान के लिए प्रत्याशियों ने अपनी संपत्ति और शिक्षा का ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया है। हलफनामों के अनुसार, चुनावी मैदान में एक ओर जहाँ 3.65 करोड़ की मालकिन हैं, वहीं दूसरी ओर अशिक्षित लेकिन सेवा के जज्बे से भरी महिलाएं भी ताल ठोक रही हैं।

संपत्ति का गणित: सुधा सबसे अमीर, सुशीला की पूंजी सबसे कम

​मानगो मेयर पद की दौड़ में धनबल का पलड़ा सुधा गुप्ता की ओर झुकता दिख रहा है, जबकि सुशीला सिंह सादगी की मिसाल बनी हुई हैं।

  • करोड़पति क्लब: सुधा गुप्ता 3.65 करोड़ की संपत्ति के साथ सूची में शीर्ष पर हैं। उनके बाद संध्या सिंह (2.30 करोड़) और डॉ. वनीता सहाय (1.24 करोड़) का स्थान है।
  • सादगी का चेहरा: सुशीला सिंह ने अपनी कुल पूंजी महज 16,000 रुपये घोषित की है। पार्वती देवी (20 हजार) और इंदिरा मुंडा (70 हजार) भी इसी कतार में हैं, जो दिखाती हैं कि लोकतंत्र में हौसला धन से बड़ा होता है।

शिक्षा का स्तर: डिग्री बनाम जमीनी अनुभव

​उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता में भी भारी अंतर देखने को मिल रहा है:

  1. उच्च शिक्षित: सायस्ता परवीन (MA, B.Ed) और सोनामुनी सोरेन (LLB) जैसी प्रत्याशी अपनी प्रशासनिक और कानूनी समझ के साथ जनता के बीच हैं।
  2. साक्षर और अनुभवी: मैदान में वैसी महिलाएं भी हैं जिन्होंने स्कूल का मुंह नहीं देखा (जैसे इंदिरा मुंडी और सुशीला सिंह), लेकिन वे अपने सामाजिक जुड़ाव और जमीनी संघर्ष को अपनी ताकत मान रही हैं।

मानगो मेयर प्रत्याशी: एक नज़र में (तुलनात्मक चार्ट)

प्रत्याशी का नामशैक्षणिक योग्यताघोषित संपत्ति (₹ में)
सुधा गुप्तामैट्रिक3.65 करोड़
संध्या सिंहइंटर2.30 करोड़
वनीता सहायएमबीए1.24 करोड़
सायस्ता परवीनएमए, बीएड46.46 लाख
कुमकुम श्रीवास्तवस्नातकोत्तर38.48 लाख
सोनामुनी सोरेनएलएलबी6.73 लाख
सुशीला सिंहअनपढ़16 हजार

मतदाताओं के सामने बड़ी चुनौती

​मानगो की जनता अब इस कशमकश में है कि वे डिग्री (सरस्वती) को वोट दें, आर्थिक मजबूती (लक्ष्मी) को चुनें या सादगी और संघर्ष को। चुनावी गलियारों में बहस छिड़ गई है कि क्या भारी-भरकम संपत्ति विकास की गारंटी बनेगी या उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाएगी।

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चाईबासा ब्लड बैंक कांड: मासूमों को HIV+ खून चढ़ाने के मामले में FIR दर्ज, हाईकोर्ट के आदेश पर बड़ी कार्रवाई

चाईबासा: झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में स्वास्थ्य विभाग की एक रूह कंपा देने वाली लापरवाही के खिलाफ आखिरकार कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। झारखंड हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद, चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक टेक्नीशियन मनोज कुमार और अन्य के खिलाफ सदर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।

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क्या है पूरा मामला?

​अक्टूबर 2025 में यह मामला तब उजागर हुआ जब चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया (Thalassemia) से पीड़ित पांच मासूम बच्चों को इलाज के दौरान HIV पॉजिटिव रक्त चढ़ा दिया गया। नियमित रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया के दौरान हुई इस भारी चूक ने इन बच्चों के भविष्य को खतरे में डाल दिया।

हाईकोर्ट का कड़ा रुख और आदेश

​मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस गौतम कुमार की अदालत ने बुधवार को स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया था:

  • ​अदालत ने पीड़ित परिवारों को सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने और थाना प्रभारी को इसे तुरंत स्वीकार करने का आदेश दिया।
  • ​न्यायालय ने इस घटना को स्वास्थ्य प्रणाली की चरम विफलता माना।

सरकारी आश्वासन और धरातल की हकीकत

​घटना के प्रकाश में आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने चाईबासा का दौरा कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और परिवारों को आजीवन सहयोग का वादा किया था।

  • मुआवजा: अब तक परिवारों को केवल 2 लाख रुपये की सहायता राशि मिली है।
  • असंतोष: पीड़ित परिवारों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि इतने महीनों बाद भी दोषी कर्मचारियों पर कोई ठोस कानूनी कदम नहीं उठाया गया था, जिसके कारण उन्हें कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

जनसंघर्ष मोर्चा की भूमिका

​झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष माधव चंद्र कुंकल ने इस लड़ाई को अंजाम तक पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाई।

  1. धरना प्रदर्शन: पीड़ित परिवारों ने पहले विधानसभा के समक्ष धरना दिया।
  2. याचिका: न्याय न मिलने पर मोर्चा द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
  3. मांग: कुंकल ने कहा, “यह स्वास्थ्य प्रणाली में व्याप्त लापरवाही का उदाहरण है। हमारी मांग है कि दोषियों को कठोरतम दंड मिले ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।”

आगे क्या?

​FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस इस मामले में आरोपी टेक्नीशियन और अन्य संबंधित अधिकारियों से पूछताछ करेगी। जांच का मुख्य केंद्र यह होगा कि ब्लड बैंक में रक्त की स्क्रीनिंग (Screening) के प्रोटोकॉल का उल्लंघन कैसे हुआ।

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झारखंड शराब दुकान अपडेट: आज शाम तय होगा कितनी दुकानें होंगी सरेंडर, 1343 दुकानों के भविष्य पर फैसला

रांची: झारखंड में शराब दुकानों के संचालन को लेकर आज यानी शनिवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य की कुल 1343 खुदरा शराब दुकानों के नवीनीकरण (Renewal) के लिए लाइसेंस शुल्क जमा करने की अंतिम समय-सीमा 7 फरवरी को समाप्त हो रही है। आज शाम तक यह साफ हो जाएगा कि कितनी दुकानों का संचालन निजी हाथों में रहेगा और कितनी दुकानें सरकारी नियंत्रण में वापस जाएंगी।

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आज शाम तक की समय-सीमा: क्या है नियम?

​उत्पाद विभाग के नियमों के अनुसार, जिन दुकानों के संचालकों ने आज शाम तक लाइसेंस शुल्क जमा नहीं किया, उनकी दुकानों को ‘सरेंडर’ माना जाएगा।

  • 31 मार्च के बाद का प्लान: सरेंडर की गई दुकानें 1 अप्रैल से झारखंड राज्य बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के अधीन चली जाएंगी।
  • अगली प्रक्रिया: JSBCL इन खाली दुकानों के लिए फिर से लॉटरी प्रक्रिया शुरू करेगा। यदि लॉटरी के माध्यम से बंदोबस्ती नहीं हो पाती है, तो जेएसबीसीएल खुद इन दुकानों का संचालन करेगा।

दुकानों का वर्तमान ढांचा

​राज्य में वर्तमान में शराब दुकानों की स्थिति इस प्रकार है:

  • कुल दुकानें: 1343
  • देसी शराब दुकानें: 159
  • कंपोजिट शराब दुकानें: 1184
  • वर्तमान व्यवस्था: 1 सितंबर 2025 से ये सभी दुकानें निजी लाइसेंसियों द्वारा संचालित की जा रही हैं।

विवादों के घेरे में उत्पाद विभाग: प्लेसमेंट एजेंसियों का मुद्दा

​एक तरफ नई बंदोबस्ती की तैयारी है, वहीं दूसरी तरफ पुरानी व्यवस्था का हिसाब अब तक चुकता नहीं हो पाया है। राज्य में पिछले 7 महीनों से प्लेसमेंट एजेंसियों और उत्पाद विभाग के बीच देनदारी (Liability) का मामला अटका हुआ है।

मुख्य विवादविवरण
JSBCL का आरोपप्लेसमेंट एजेंसियों ने शराब बिक्री के करोड़ों रुपयों का गबन किया है।
एजेंसियों का पक्षजेएसबीसीएल ने मैनपावर आपूर्ति का बकाया भुगतान अभी तक नहीं किया है।
वर्तमान स्थिति1 जुलाई से सभी दुकानें JSBCL के अधीन आने के बावजूद, विभाग अभी तक यह तय नहीं कर पाया है कि किस एजेंसी पर कितनी देनदारी बनती है।

राजस्व पर पड़ सकता है असर

​अगर बड़ी संख्या में दुकानें सरेंडर होती हैं और लॉटरी प्रक्रिया में देरी होती है, तो इसका सीधा असर राज्य के राजस्व पर पड़ेगा। अंधेरे का फायदा उठाकर अवैध शराब की बिक्री बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

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झारखंड की पंचायतों के लिए खुशखबरी: केंद्र से 275.12 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त मंजूर

रांची: झारखंड में ग्रामीण विकास और स्थानीय निकायों के सशक्तीकरण को लेकर एक बड़ी प्रगति हुई है। केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 15वें वित्त आयोग की ‘बेसिक ग्रांट’ (Basic Grant) की दूसरी किस्त जारी करने की सिफारिश कर दी है। इसके तहत राज्य को अगले सप्ताह तक 275.12 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।

समय पर शर्तें पूरी करने का मिला लाभ

​झारखंड सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग की अनिवार्य शर्तों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के कारण यह राशि स्वीकृत की गई है। राज्य ने निम्नलिखित मानकों पर सफलता प्राप्त की है:

  • ई-ग्राम स्वराज पोर्टल: योजनाओं की समय पर अपलोडिंग।
  • वित्तीय अनुशासन: खातों का समापन, ऑडिट और पहली किस्त के उपयोग का प्रमाण पत्र।
  • हस्तांतरण: 24 दिसंबर 2025 को मिली पहली किस्त को निर्धारित समय के भीतर पंचायतों को ट्रांसफर किया गया।

फंड का त्रिस्तरीय वितरण ढांचा

​जारी होने वाली अनुदान राशि को राज्य की त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में पूर्व निर्धारित फार्मूले के अनुसार बांटा जाएगा:

पंचायत स्तरहिस्सेदारी (%)मुख्य उद्देश्य
ग्राम पंचायत75%स्थानीय बुनियादी ढांचा, स्वच्छता और जल संरक्षण
पंचायत समिति (ब्लॉक)15%ब्लॉक स्तर की विकास योजनाएं
जिला परिषद10%जिला स्तरीय समन्वय और बड़े विकास कार्य

ग्रामीण विकास मंत्री का बयान

​झारखंड की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य ने सभी वैधानिक और औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं। उन्होंने बताया:

“हमें केंद्र के व्यय विभाग को की गई अनुशंसा की जानकारी मिली है। राशि प्राप्त होते ही इसे बिना किसी विलंब के सीधे पंचायतों के खातों में हस्तांतरित कर दिया जाएगा ताकि ग्रामीण विकास की योजनाएं प्रभावित न हों।”

विकास कार्यों को मिलेगी गति

​इस ‘अनटाइड ग्रांट’ (Untied Grant) का उपयोग पंचायतें अपनी आवश्यकतानुसार स्थानीय विकास कार्यों के लिए कर सकेंगी। इसमें मुख्य रूप से नालियों का निर्माण, पीसीसी सड़कें, सार्वजनिक भवनों का रखरखाव और अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा।

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झारखंड के कोडरमा में बड़ी वारदात: बिरहोर समुदाय के 10 आदिवासी बच्चे लापता, मानव तस्करी की आशंका

कोडरमा: झारखंड के कोडरमा जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) ‘बिरहोर’ समुदाय के 10 बच्चे पिछले एक सप्ताह से रहस्यमयी ढंग से लापता हैं। 31 जनवरी से गायब इन बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिलने से जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

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श्राद्ध कार्यक्रम में गए थे बच्चे, फिर नहीं लौटे

​घटना जयनगर थाना क्षेत्र के गदियाई बिरहोर टोला (खारियोडीह पंचायत) की है। पुलिस के अनुसार:

  • 31 जनवरी को गांव के लगभग 60-70 लोग 15 किलोमीटर दूर परसाबाद में एक श्राद्ध कार्यक्रम में शामिल होने गए थे।
  • ​इन ग्रामीणों के साथ ही ये 10 बच्चे भी कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए थे।
  • ​कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वयस्क ग्रामीण तो लौट आए, लेकिन ये बच्चे घर वापस नहीं पहुंचे।

मानव तस्करी का गहराता साया

​एक साथ 10 बच्चों का गायब होना सामान्य घटना नहीं मानी जा रही है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने मानव तस्करी (Human Trafficking) की गंभीर आशंका जताई है। बिरहोर समुदाय अपनी मासूमियत और बाहरी दुनिया से कम संपर्क के लिए जाना जाता है, जिसका फायदा उठाकर तस्करों द्वारा उन्हें निशाना बनाए जाने का डर बना हुआ है।

पुलिस की कार्रवाई: CCTV और सर्विलांस पर टिकी उम्मीद

​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है:

  • गठित टीमें: डीएसपी (ट्रेनी) दिवाकर कुमार के नेतृत्व में विशेष टीमों का गठन किया गया है।
  • CCTV फुटेज: परसाबाद और रेलवे स्टेशन के आसपास के कैमरों की बारीकी से जांच की जा रही है।
  • हाई अलर्ट: बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और नेशनल हाईवे पर चौकसी बढ़ा दी गई है ताकि बच्चों को जिले से बाहर ले जाने की किसी भी कोशिश को नाकाम किया जा सके।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

​बिरहोर टोला में पिछले एक सप्ताह से चूल्हा नहीं जला है। गायब हुए बच्चों के माता-पिता की आंखों के आंसू नहीं सूख रहे हैं। परिजनों का कहना है कि उन्होंने रिश्तेदारों और नजदीकी गांवों में काफी तलाश की, लेकिन जब कहीं पता नहीं चला तब पुलिस की शरण ली।

थाना प्रभारी का बयान: जयनगर थाना प्रभारी उमा नाथ सिंह ने कहा है कि, “पुलिस पूरी संवेदनशीलता के साथ बच्चों की बरामदगी में जुटी है। हम हर संभव तकनीकी और मानवीय इनपुट का सहारा ले रहे हैं।”

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झारखंड में पश्चिमी विक्षोभ का असर: अगले 48 घंटों में गिरेगा पारा, ठिठुरन बढ़ने के आसार

राँची: झारखंड में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र, राँची के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से राज्य के तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की जा सकती है। अगले 24 से 48 घंटों के भीतर न्यूनतम तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आने की संभावना है, जिससे सुबह और देर रात की कनकनी बढ़ेगी।

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आसमान साफ होते ही बढ़ेगी ठंड

​मौसम विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. बाबूराज पीपी ने बताया कि शनिवार से आसमान साफ होने की उम्मीद है। जैसे ही बादल छंटेंगे, उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं का प्रवेश राज्य में सुगम हो जाएगा। इससे न्यूनतम तापमान में तेजी से गिरावट आएगी। सुबह के समय राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्के से मध्यम दर्जे का कुहासा (Fog) छाया रहेगा।

क्षेत्रवार तापमान का पूर्वानुमान (अगले 5 दिन)

क्षेत्रजिलेअधिकतम तापमानन्यूनतम तापमान
उत्तर-पश्चिमगढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार25°C – 29°C7°C – 9°C
मध्य झारखंडरांची, बोकारो, हजारीबाग, गुमला25°C – 27°C7°C – 11°C
पूर्वोत्तरदेवघर, धनबाद, गिरिडीह, साहिबगंज26°C – 28°C8°C – 11°C
दक्षिण झारखंडजमशेदपुर, सिमडेगा, सरायकेला29°C – 30°C8

प्रमुख अपडेट्स:

  • सबसे ज्यादा ठंड: गुमला, खूंटी, गढ़वा और पलामू में पारा 7 डिग्री तक गिरने की संभावना है, जिससे यहाँ शीतलहर जैसे हालात बन सकते हैं।
  • दिन और रात के तापमान में अंतर: दक्षिण झारखंड (कोल्हान क्षेत्र) में दिन का तापमान 30 डिग्री तक रहेगा जबकि रात में यह 8 डिग्री तक गिर जाएगा। तापमान में इस बड़े अंतर के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
  • खगोल गणना: 7 फरवरी को सूर्योदय सुबह 06:21 बजे और सूर्यास्त शाम 05:33 बजे होगा। धूप की अवधि कम होने से शाम होते ही ठंड का अहसास तेज होगा।

सावधानी की सलाह

​मौसम विभाग ने लोगों को विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। दिन में धूप के बावजूद रात के समय अचानक गिरते तापमान से वायरल बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

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