एक नई सोच, एक नई धारा

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मानवता की जीत: मानगो पुल से नदी में कूदा व्यक्ति, राहगीरों ने देवदूत बनकर बचाई जान

जमशेदपुर: शहर के मानगो थाना क्षेत्र अंतर्गत स्वर्णरेखा नदी में गुरुवार को एक व्यक्ति ने मौत की छलांग लगा दी। हालांकि, वहां मौजूद स्थानीय राहगीरों की सूझबूझ और तत्परता से एक बड़ी अनहोनी टल गई। समय रहते लोगों ने नदी में कूदकर व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

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पारिवारिक कलह बनी वजह

​घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, आत्महत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति की पहचान सोनारी, आदर्श नगर निवासी उदय सिंह के रूप में हुई है। प्राथमिक जांच और पूछताछ में यह बात सामने आई है कि उदय सिंह पिछले कुछ समय से गंभीर पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। इसी कलह से परेशान होकर उन्होंने मानगो नदी में कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त करने का घातक कदम उठाया।

राहगीरों ने दिखाई बहादुरी

​जब उदय सिंह नदी में कूदे, तब वहां से गुजर रहे कुछ राहगीरों की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने बिना एक पल गंवाए उन्हें बचाने की कोशिश शुरू की और पानी से बाहर खींच लिया।

  • पुलिस की कार्रवाई: सूचना मिलते ही मानगो थाना पुलिस मौके पर पहुंची और उदय सिंह को अपनी कस्टडी में लिया।
  • काउंसलिंग: पुलिस ने परिजनों को सूचित कर दिया है और फिलहाल थाने में उनसे पूछताछ व काउंसलिंग की जा रही है ताकि भविष्य में वे ऐसा कदम न उठाएं।

प्रशासन की अपील: समस्या साझा करें, हारें नहीं

​जमशेदपुर पुलिस प्रशासन ने इस घटना के बाद आम जनता से अपील की है कि जीवन अनमोल है। किसी भी प्रकार की मानसिक समस्या, घरेलू विवाद या तनाव होने पर अकेले न रहें।

​”आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है। अगर आप परेशान हैं, तो अपने मित्रों, परिवार या पुलिस प्रशासन से संपर्क करें। शहर में उपलब्ध हेल्पलाइन नंबरों की मदद लें।” — मानगो थाना प्रभारी

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मानवता की मिसाल: टाइगर क्लब की तत्परता से बची मरीज की जान, आजाद गिरी ने कहा— ‘सेवा ही सबसे बड़ा धर्म’

जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर में समाजसेवा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने वाला टाइगर क्लब एक बार फिर गंभीर मरीज के लिए संकटमोचक बनकर उभरा है। क्लब के अध्यक्ष आजाद गिरी और उनके साथियों ने सूचना मिलते ही चंद घंटों के भीतर दुर्लभ रक्त की व्यवस्था कर एक अनमोल जीवन बचाने में सफलता हासिल की।

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तत्परता ने पेश की नजीर

​घटना बुधवार की है, जब टाइगर क्लब के अध्यक्ष आजाद गिरी को फोन के माध्यम से सूचना मिली कि एक अस्पताल में भर्ती जरूरतमंद मरीज की स्थिति अत्यंत गंभीर है और उसे तुरंत रक्त (Blood) की आवश्यकता है। मरीज के परिजन काफी परेशान थे और उन्हें कहीं से मदद नहीं मिल पा रही थी।

​सूचना मिलते ही आजाद गिरी ने बिना समय गंवाए क्लब के रक्तदाता सदस्यों का एक नेटवर्क सक्रिय किया। कुछ ही देर में रक्तदाता अस्पताल पहुंचे और रक्तदान की प्रक्रिया पूरी की गई। डॉक्टरों के अनुसार, अगर रक्त मिलने में थोड़ी भी देरी होती, तो मरीज की जान को खतरा हो सकता था।

“युवा आगे आएं और रक्तदान करें”

​इस सफल पहल के बाद आजाद गिरी ने युवाओं से भावुक अपील की। उन्होंने कहा:

​”मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। हमारे एक छोटे से प्रयास से यदि किसी का घर उजड़ने से बच जाए, तो इससे बड़ा पुण्य कुछ नहीं हो सकता। टाइगर क्लब सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक संकल्प है जो समाज के हर दुख-सुख में साथ खड़ा रहेगा।”

समाज में सराहना

​टाइगर क्लब की इस त्वरित कार्रवाई की स्थानीय लोगों और मरीज के परिजनों ने जमकर प्रशंसा की है। लोगों का कहना है कि आज के दौर में जब लोग अपनों से मुंह मोड़ लेते हैं, ऐसे समय में आजाद गिरी और उनकी टीम का यह समर्पण प्रेरणादायक है।

टाइगर क्लब का संकल्प

​क्लब ने घोषणा की है कि आने वाले समय में वे और भी बड़े स्तर पर रक्तदान शिविर (Blood Donation Camps) आयोजित करेंगे ताकि जमशेदपुर के किसी भी अस्पताल में खून की कमी के कारण किसी की जान न जाए।

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निकाय चुनाव: “हार के डर से अपराधियों को उतार रही झामुमो”, भाजपा नेता प्रदीप वर्मा का तीखा हमला

रांची: झारखंड में 23 फरवरी को होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। भाजपा प्रदेश महामंत्री और राज्यसभा सदस्य प्रदीप वर्मा ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि अपनी संभावित हार देखकर झामुमो नेता बौखलाहट में हैं और मतदाताओं को प्रलोभन देने के साथ-साथ डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं।

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सत्ता के दुरुपयोग और प्रलोभन का आरोप

​प्रदीप वर्मा ने झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि सरकार ‘पावर’ का गलत इस्तेमाल कर रही है। उनके मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

  • आचार संहिता का उल्लंघन: झामुमो ने अपने कार्यालय से ही चुनाव चिह्न का प्रदर्शन कर आचार संहिता की धज्जियां उड़ाई हैं।
  • प्रलोभन की राजनीति: रांची में झामुमो समर्थित प्रत्याशी की जीत पर तीन फ्लाईओवर बनाने की घोषणा करना और नगर विकास को ‘झामुमो का विभाग’ बताना सीधे तौर पर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश है।
  • व्यापारियों को धमकी: वर्मा ने कहा कि झामुमो नेताओं द्वारा व्यापारियों के संबंध में दिया गया बयान एक किस्म की धमकी है, जबकि दूसरी ओर ट्रांसपोर्ट नगर और विदेश दौरों का जिक्र प्रलोभन मात्र है।

बैलेट पेपर और बूथ कैप्चरिंग की आशंका

​भाजपा नेता ने चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि तकनीक के युग में बैलेट पेपर से चुनाव कराना पीछे की ओर ले जाने वाला कदम है।

​”राज्य सरकार ने जानबूझकर बैलेट पेपर का चुनाव चुना है ताकि अपराधियों के दम पर बूथ कैप्चरिंग की जा सके। भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं और अपराधियों को चुनाव प्रभावित करने के काम में लगाया गया है।” — प्रदीप वर्मा, राज्यसभा सांसद

निर्वाचन आयोग से कार्रवाई की मांग

​प्रदीप वर्मा ने राज्य निर्वाचन आयोग से मांग की है कि इन तमाम उल्लंघन और प्रलोभनों को देखते हुए झामुमो के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि झामुमो को अपनी जीत का इतना ही भरोसा था, तो भाजपा की मांग मानकर दलीय आधार पर चुनाव क्यों नहीं कराया?

एक नजर में विवाद के मुख्य बिंदु

भाजपा के आरोपझामुमो का पक्ष (प्रदीप वर्मा के अनुसार)
बैलेट पेपर का चुनावबूथ कैप्चरिंग की साजिश
फ्लाईओवर की घोषणामतदाताओं को सीधा प्रलोभन
व्यापारियों पर बयानडराने और धमकाने का प्रयास
चुनावी आधारदलीय आधार से भागने की कोशिश

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झारखंड के अस्पतालों में AI से होगा इलाज: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को अमेरिका का बुलावा, दो चरणों में बदलेगी चिकित्सा प्रणाली

रांची/नई दिल्ली: झारखंड सरकार राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह से हाई-टेक बनाने की तैयारी में है। अब राज्य के मरीजों का इलाज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत डिजिटल तकनीकों के माध्यम से होगा। इसी सिलसिले में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और अपर मुख्य सचिव अजय कुमार को अमेरिकी कंपनी एक्टयूवी (ActUV) के सीईओ ड्रैगन स्मिथ ने डलास, टेक्सास (USA) के दौरे के लिए आमंत्रित किया है।

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मई में ‘टेक्सास’ जाएगी स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम

​प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, मई 2026 में झारखंड स्वास्थ्य मंत्रालय का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका जाएगा। वहां की टीम:

  • ​उन्नत चिकित्सा अवसंरचना (Medical Infrastructure) का अध्ययन करेगी।
  • डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम और AI समर्थित डायग्नोस्टिक मॉडल को समझेगी।
  • ​झारखंड के ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक तकनीक आधारित इलाज पहुंचाने का ब्लूप्रिंट तैयार करेगी।

भारत मंडपम में झारखंड की उपस्थिति

​नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हेल्थ एवं टेक्नोलॉजी समिट में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार ने राज्य का प्रतिनिधित्व किया। यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ ही वैश्विक स्तर के इंटेलिजेंट डायग्नोस्टिक्स प्लेटफॉर्म और टेलीमेडिसिन मॉड्यूल का प्रदर्शन किया गया। स्वास्थ्य मंत्री ने विधानसभा सत्र में व्यस्तता के कारण अपनी टीम को इन नवाचारों के अध्ययन के लिए भेजा है।

दो चरणों में लागू होगा ‘AI हेल्थ मॉडल’

​स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बताया कि राज्य में एआई-समर्थित प्रणाली दो चरणों में जमीन पर उतारी जाएगी:

  1. प्रथम चरण: राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों को डिजिटल रेडियोलॉजी, पैथोलॉजिकल ऑटोमेशन और क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (CDSS) से जोड़ा जाएगा।
  2. द्वितीय चरण: जिला और सदर अस्पतालों को इस नेटवर्क में शामिल किया जाएगा। इससे कैंसर, हार्ट अटैक (कार्डियोवैस्कुलर) और स्ट्रोक जैसी जटिल बीमारियों का शुरुआती दौर में ही सटीक पता लगाया जा सकेगा।

सुदूर क्षेत्रों को मिलेगा लाभ

​स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रिसिजन डायग्नोस्टिक्स (सटीक जांच) और रियल-टाइम हेल्थ मॉनिटरिंग के जरिए इलाज की गुणवत्ता सुधारना है। अमेरिकी कंपनी के सीईओ ड्रैगन स्मिथ ने भी झारखंड के इन प्रयासों की सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम बताया है।

स्वास्थ्य मंत्री का संदेश: “हमारा लक्ष्य चिकित्सा सेवाओं को न केवल आधुनिक बनाना है, बल्कि इसे गरीब और ग्रामीण आबादी के लिए सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाना भी है।”

1002421911
झारखंड: 298 बालू घाटों की नीलामी पूरी, संविदाकर्मियों के पदों को लेकर सरकार का बड़ा फैसला

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन सदन के पटल पर रखी गई ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ में राज्य सरकार ने दो महत्वपूर्ण मुद्दों—बालू खनन और महिला बाल विकास विभाग में नियुक्तियों—पर विस्तृत जानकारी साझा की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट की रोक हटने के बाद अब राज्य में बालू की किल्लत दूर होगी।

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बालू खनन: 444 घाट चिह्नित, 298 की नीलामी संपन्न

​विपक्ष के विधायक शशि भूषण मेहता द्वारा अवैध खनन पर उठाए गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि ‘झारखंड सैंड माइनिंग रूल्स-2025’ के तहत बालू आपूर्ति को सुव्यवस्थित किया जा रहा है।

  • नीलामी का स्टेटस: राज्य में कैटेगरी-II के तहत कुल 444 बालू घाट चिह्नित किए गए हैं। इनमें से 298 घाटों की ई-नीलामी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
  • प्रक्रियारत घाट: शेष 146 घाटों पर प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया जारी है, जिन्हें जल्द ही नीलाम किया जाएगा।
  • कोर्ट का आदेश: विभाग ने जानकारी दी कि 13 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट द्वारा रोक हटाए जाने के बाद अब जिला स्तर पर खनन कार्य शुरू करने की बाधाएं दूर हो गई हैं। इससे सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी के साथ निर्माण कार्यों को गति मिलेगी।

आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिका: संविदा पद होंगे समाप्त, होगी नियमित नियुक्ति

​विधायक राज सिन्हा द्वारा आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिकाओं के नियमितीकरण को लेकर पूछे गए सवाल पर सरकार ने भविष्य की नीति साफ कर दी है।

  • पदों का विलोपन: महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के अंतर्गत जो भी संविदाकर्मी कार्यरत हैं, उनकी संविदा अवधि समाप्त होते ही वे पद स्वत: (Automatically) समाप्त मान लिए जाएंगे।
  • नया सेटअप: सरकार अब इन संविदा पदों की जगह नियमित रूप से सृजित पदों पर सीधी बहाली की प्रक्रिया शुरू करेगी।
  • विभागीय आश्वासन: मंत्री चमरा लिंडा के आश्वासन के बाद 13 फरवरी को इस मामले को संबंधित विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है।

एक नजर में मुख्य बिंदु

विषयवर्तमान स्थितिआगामी योजना
बालू घाट298 नीलाम, 146 शेषअवैध खनन पर रोक और सुचारु आपूर्ति
संविदा पदअवधि खत्म होने पर पद समाप्तनए नियमित पदों पर सीधी भर्ती
कानूनी स्थितिहाईकोर्ट की रोक हटी (13 जन.)जिला स्तर पर खनन कार्य का संचालन
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झारखंड: “अपराधियों के समानांतर सरकार और लोकतंत्र विरोधी नीयत”, आदित्य साहू ने हेमंत सरकार को घेरा

जमशेदपुर: झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा प्रहार किया है। बुधवार (18 फरवरी 2026) को साकची (जमशेदपुर) स्थित एक होटल में आयोजित प्रेस-वार्ता के दौरान उन्होंने नगर निकाय चुनावों में हो रही देरी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए। साहू ने आरोप लगाया कि सरकार अपराधियों के साये में चुनाव कराकर लोकतंत्र की हत्या करना चाहती है।

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“हार के डर से ईवीएम और दलीय आधार से भाग रही सरकार”

​आदित्य साहू ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से सरकार ने जानबूझकर निकाय चुनावों को लटकाए रखा। अब जब भाजपा कार्यकर्ताओं के आंदोलन के दबाव में चुनाव हो रहे हैं, तो सरकार नियमों के साथ खेल रही है।

  • बदलाव का विरोध: साहू ने आरोप लगाया कि 2018 में दलीय आधार और ईवीएम (EVM) से चुनाव हुए थे, लेकिन इस बार सरकार बैलेट पेपर पर चुनाव कराकर राज्य को 26 साल पीछे ले जा रही है।
  • विकास का दावा: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 6 साल में कोई विकास न होने के कारण सरकार को हार का डर सता रहा है, इसलिए वह दलीय आधार से भाग रही है।

अपराध और धमकियों का बोलबाला

​बीजेपी अध्यक्ष ने राज्य की कानून-व्यवस्था को ‘टूलकिट’ बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए:

  1. कड़िया मुंडा को धमकी: उन्होंने पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा को फोन पर मिली धमकी का जिक्र करते हुए पूछा कि जब 8 बार के सांसद सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता का क्या होगा?
  2. बीजेपी प्रत्याशियों को निशाना: चक्रधरपुर में भाजपा प्रत्याशी विजय सिंह गागराई को मिली जान से मारने की धमकी और पोस्टरबाजी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि अपराधियों की समानांतर सरकार चल रही है।
  3. अपहरण और दबाव: जमशेदपुर के उद्योगपति पुत्र कैरव गांधी के अपहरण मामले का जिक्र करते हुए साहू ने कहा कि अगर बीजेपी सड़कों पर नहीं उतरती, तो पुलिस प्रशासन निष्क्रिय ही रहता।

“प्रशासन टूलकिट न बने, हम कोर्ट तक जाएंगे”

​साहू ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारें आती-जाती हैं, लेकिन अधिकारियों को निष्पक्ष होना चाहिए। पक्षपात करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भाजपा न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने चुनाव आयोग से प्रत्येक बूथ पर CCTV कैमरे और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की अपनी मांग दोहराई।

चुनावी हुंकार: आदित्य साहू ने दावा किया कि एनडीए समर्थित प्रत्याशी सभी 48 सीटों पर जीत दर्ज करेंगे। उन्होंने इसे सिर्फ एक निकाय चुनाव नहीं, बल्कि झारखंड की ‘युवा, महिला और आदिवासी विरोधी’ सरकार के खिलाफ जनादेश बताया।

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कोल्हान में चुनाव का विरोध: 21 से 23 फरवरी तक ‘बंद’ का आह्वान, आदिवासी छात्र एकता ने फूंका बिगुल

जमशेदपुर/कोल्हान: झारखंड के कोल्हान प्रमंडल में नगर निकाय चुनाव (Municipal Elections) को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में चुनाव कराने के निर्णय के खिलाफ आदिवासी छात्र एकता की केंद्रीय कमेटी ने 21, 22 और 23 फरवरी 2026 को पूरे प्रमंडल में शांतिपूर्ण ‘बंद’ का आह्वान किया है। संगठन का दावा है कि यह चुनाव संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है।

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विरोध की मुख्य वजह: संवैधानिक पेच

​संगठन ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपा है। विरोध का मुख्य आधार संविधान का अनुच्छेद 244(1) और भाग IX ए (Part IX A) है।

  • संगठन का तर्क: भारतीय संविधान के मुताबिक, नगर पालिकाओं से संबंधित भाग IX ए के प्रावधान पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर स्वतः लागू नहीं होते।
  • MESA कानून का अभाव: जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ‘पेसा’ (PESA 1996) कानून है, वैसे ही शहरी निकायों के लिए संसद द्वारा कोई विशेष नगरपालिका विस्तार अधिनियम (MESA) अब तक नहीं बनाया गया है।
  • अधिनियम का उल्लंघन: झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 के तहत इन क्षेत्रों में चुनाव कराना आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के लिए बने पारंपरिक कानूनों के खिलाफ माना जा रहा है।

क्या रहेगा बंद और क्या खुला?

​आगामी तीन दिवसीय बंद को लेकर प्रमंडल में हलचल तेज है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि:

  1. चक्का जाम: प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रहने की संभावना है।
  2. आवश्यक सेवाएं: एम्बुलेंस, दवा दुकान, दूध की आपूर्ति और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं को बंद से मुक्त रखा गया है।
  3. आम जनजीवन: शांतिपूर्ण बंद की अपील के बावजूद, स्थानीय प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलर्ट मोड पर है।

चुनावी गणित: 23 फरवरी को है वोटिंग

​एक तरफ जहां विरोध हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।

  • वोटिंग तिथि: 23 फरवरी 2026 (48 नगर निकायों में)।
  • मतगणना: 27 फरवरी 2026।
  • मैदान में दिग्गज: रांची, धनबाद और जमशेदपुर जैसे बड़े नगर निगमों में प्रत्याशियों ने प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है।
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विक्रम शर्मा हत्याकांड: दुमका जेल में रची गई थी ‘गुरु’ के अंत की साजिश, अखिलेश सिंह के गुर्गों पर कसता शिकंजा

देहरादून/जमशेदपुर: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हुए सनसनीखेज विक्रम शर्मा हत्याकांड की जांच अब सीधे झारखंड की दुमका जेल तक जा पहुंची है। दून पुलिस की जांच में यह साफ हो गया है कि इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि विक्रम शर्मा का ही ‘शागिर्द’ रहा कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह है।

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वर्चस्व और रुपयों के विवाद में ‘गुरु’ की हत्या

​पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश सिंह और विक्रम शर्मा के बीच वर्चस्व और रंगदारी के पैसों के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। कभी अखिलेश के मार्गदर्शक रहे विक्रम शर्मा ने हाल के वर्षों में देहरादून में अपना बड़ा रियल एस्टेट और खनन कारोबार फैला लिया था। अखिलेश को शक था कि विक्रम उसकी गैर-मौजूदगी में गैंग के वित्तीय संसाधनों पर कब्ज़ा कर रहा है।

जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे

  • स्थानीय मददगारों की पहचान: पुलिस ने उन संदिग्धों की पहचान कर ली है जिन्होंने शूटर्स को देहरादून में पनाह दी, हथियार मुहैया कराए और जिम के आसपास की रेकी की।
  • दुमका जेल कनेक्शन: जांच में मिले सुराग बताते हैं कि हत्या की पूरी पटकथा दुमका जेल की सलाखों के पीछे लिखी गई। शूटर्स को झारखंड से विशेष रूप से इस काम के लिए भेजा गया था।
  • फरार शूटर्स की तलाश: हालांकि साजिशकर्ता पुलिस की रडार पर हैं, लेकिन मुख्य शूटर अब भी फरार हैं। पुलिस और एसटीएफ (STF) की तीन टीमें झारखंड से लेकर नेपाल सीमा तक उनकी तलाश में छापेमारी कर रही हैं।

रेकी के बाद मारी गई थी गोली

​हमलावरों को विक्रम शर्मा की दिनचर्या की पूरी जानकारी थी। वारदात के दिन, जब विक्रम जिम से बाहर निकल रहे थे, तभी घात लगाए हमलावरों ने उन पर करीब से गोलियां चलाईं। पुलिस को मौके से 9mm पिस्टल के खोखे मिले थे, जो पेशेवर अपराधियों की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं।

पुलिस का बयान: “जांच के दौरान अखिलेश सिंह की भूमिका मुख्य सूत्रधार के रूप में उभरी है। हम जल्द ही कुछ बड़ी गिरफ्तारियां करेंगे और इस साजिश का आधिकारिक खुलासा करेंगे।” – आधिकारिक सूत्र, देहरादून पुलिस

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खौफनाक: झारखंड में अंधविश्वास की आग में जला परिवार, मां-बेटे को पेट्रोल डालकर जिंदा फूंका

कुमारडुंगी (पश्चिमी सिंहभूम): झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ ‘डायन-बिसाही’ के शक में एक हंसते-खेलते परिवार को बेरहमी से उजाड़ दिया गया। कुमारडुंगी थाना क्षेत्र के कुदासाई कलाईया गांव में बुधवार (18 फरवरी 2026) को उपद्रवियों ने एक महिला और उसके मासूम बच्चे पर पेट्रोल छिड़ककर उन्हें जिंदा जला दिया।

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घटना का विवरण

​जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने इस नृशंस कांड को बुधवार की तड़के अंजाम दिया। हमले के दौरान घर में आग लगा दी गई, जिससे मां और उसके मासूम बच्चे की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, महिला का पति कोल्हान सिंकू इस हमले में गंभीर रूप से झुलस गया है, जिसका उपचार जारी है।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां

​घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। जगन्नाथपुर के SDPO रफाएल मुर्मू ने बताया कि पुलिस को सुबह 6:10 बजे इसकी जानकारी मिली। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तुरंत गठित टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की।

  • बरामदगी: पुलिस ने घटनास्थल से पेट्रोल से भरा एक प्लास्टिक का डिब्बा बरामद किया है।
  • दर्ज मामला: पीड़ित कोल्हान सिंकू के बयान पर कांड संख्या 06/2026 दर्ज की गई है।
  • गिरफ्तारी: पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रसिका उर्फ चेचे बिरुवा समेत जेना बिरुवा, सोना बिरुवा और डेलका सिंकू को गिरफ्तार कर लिया है।

वैज्ञानिक साक्ष्य और जांच

​मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम ने भी गांव पहुंचकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस का कहना है कि फरार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।

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सावधान! Blinkit से सब्जी नहीं ‘मौत’ बरस रही है: मर्डर मिस्ट्री ने खोला ऑनलाइन हथियारों के कारोबार का राज

नई दिल्ली (डेस्क): झटपट डिलीवरी के लिए घर-घर में मशहूर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म Blinkit अब एक बेहद संगीन और आपराधिक मामले के केंद्र में आ गया है। जिस ऐप का इस्तेमाल लोग रसोई का राशन और दूध मंगाने के लिए करते हैं, वहां से प्रतिबंधित बटनदार चाकू (स्विच ब्लेड) बेचे जाने का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

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मर्डर मिस्ट्री से खुला ‘ऑनलाइन हथियारों’ का राज

​इस पूरे मामले की शुरुआत पश्चिमी दिल्ली के ख्याला इलाके में हुई दो जघन्य हत्याओं से हुई। जब पुलिस ने कत्ल के आरोपियों को दबोचा और उनसे हथियार के स्रोत के बारे में पूछताछ की, तो उनके जवाब ने अधिकारियों के होश उड़ा दिए। आरोपियों ने कबूल किया कि हत्या में इस्तेमाल किए गए घातक बटनदार चाकू उन्होंने किसी अपराधी से नहीं, बल्कि Blinkit ऐप से ऑर्डर करके मंगाए थे।

दिल्ली पुलिस का ‘स्टिंग ऑपरेशन’: जब पुलिस बनी ग्राहक

​शुरुआत में पुलिस को आरोपियों के दावे पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन हकीकत जानने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक जाल बिछाया:

  • ​पुलिस टीम ने खुद एक साधारण ग्राहक बनकर Blinkit ऐप से बटनदार चाकू का ऑर्डर दिया।
  • ​महज कुछ ही मिनटों में जब ऑर्डर की डिलीवरी हुई, तो पुलिस के सामने कड़वी सच्चाई आ गई।
  • कानूनी पक्ष: भारत में ‘स्विच ब्लेड’ या बटन वाले चाकुओं की बिक्री और उन्हें पास रखना आर्म्स एक्ट के तहत प्रतिबंधित है, क्योंकि इनका इस्तेमाल अक्सर आपराधिक गतिविधियों में किया जाता है।

डार्क स्टोर्स पर छापेमारी: बरामद हुआ हथियारों का जखीरा

​पुष्टि होते ही दिल्ली पुलिस ने एक्शन मोड में आते हुए शहर के कई Blinkit डार्क स्टोर्स (गोदामों) पर छापेमारी की। इस तलाशी अभियान के दौरान दर्जनों की संख्या में अवैध बटनदार चाकू बरामद किए गए हैं।

कंपनी पर कानूनी शिकंजा: मैनेजमेंट को नोटिस

​पुलिस ने अब कंपनी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी अब निम्नलिखित बिंदुओं पर तफ्तीश कर रहे हैं:

  1. ​यह अवैध कारोबार कब से चल रहा था?
  2. ​अब तक कितने लोगों ने इन हथियारों को घर बैठे मंगवाया है?
  3. ​क्या कंपनी के वेंडर वेरिफिकेशन में कोई बड़ी चूक हुई है?

​Blinkit के मैनेजमेंट को भी नोटिस भेजकर जवाब तलब किया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कंपनी के शीर्ष अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

तीसरी धारा न्यूज़ डेस्क

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