जमशेदपुर: शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) अस्पताल में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और लापरवाही को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार को एक नवजात बच्ची की मौत के बाद अस्पताल परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। परिजनों का आरोप है कि गलत टीकाकरण या प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही के कारण उनकी स्वस्थ बच्ची की जान चली गई।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, गुरुद्वारा रोड निवासी उमेश कुमार ने अपनी पत्नी को प्रसव के लिए बीते शुक्रवार को एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया था। शनिवार को उनकी पत्नी ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। रविवार को डॉक्टरों ने मां और बच्ची दोनों को स्वस्थ पाकर अस्पताल से छुट्टी दे दी थी।
सोमवार को परिजन बच्ची को सरकारी नियमों के अनुसार बीजीसी (BCG) का टीका लगवाने के लिए दोबारा अस्पताल पहुंचे। टीका लगने के कुछ ही देर बाद बच्ची की स्थिति बिगड़ने लगी।
परिजनों के गंभीर आरोप
मृतक बच्ची के पिता उमेश कुमार ने बताया कि अस्पताल से घर लौटते समय ही बच्ची के रोने की आवाज सामान्य नहीं थी। घर पहुँचते ही उसका शरीर धीरे-धीरे नीला पड़ने लगा और वह बेसुध हो गई। आनन-फानन में परिजन उसे लेकर फिर से एमजीएम अस्पताल भागे, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
”हमारी बच्ची पूरी तरह स्वस्थ थी। डिस्चार्ज के वक्त भी वह ठीक थी, लेकिन टीका लगने के तीन घंटे के भीतर ही उसकी जान चली गई। यह सीधे तौर पर अस्पताल की लापरवाही है।” — परिजनों का बयान
अस्पताल में हंगामा और पुलिस की दखल
बच्ची की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। अस्पताल परिसर में जमकर नारेबाजी और हंगामा हुआ, जिससे काफी देर तक वहां तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। परिजनों ने दोषी स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बढ़ते तनाव को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने स्थानीय पुलिस को सूचित किया। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया और मामले की जांच का आश्वासन दिया। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आना बाकी है कि क्या यह मौत किसी एलर्जी की वजह से हुई या टीकाकरण में कोई चूक हुई।
तीसरी धारा न्यूज











