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जमशेदपुर (साकची): लौहनगरी के साकची स्थित ऐतिहासिक आमबागान मैदान में “फन वर्ल्ड डिजनीलैंड” मेले का भव्य उद्घाटन संपन्न हुआ। इस मनोरंजन मेले का शुभारंभ जूना अखाड़ा के उपाध्यक्ष श्री विद्यानंद सरस्वती जी और प्रसिद्ध समाजसेवी श्री अवधेश गिरी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
उद्घाटन के पश्चात अतिथियों ने मेले का भ्रमण किया और आयोजन की सराहना की। मेले के संचालक श्री चंद्रशेखर पर्वत ने बताया कि इस वर्ष शहरवासियों के लिए कई नए रोमांचक झूले और शो लाए गए हैं। मुख्य आकर्षणों में शामिल हैं:

डिजनीलैंड मेला केवल झूलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ परिवार के हर सदस्य के लिए कुछ न कुछ खास है:
उद्घाटन समारोह के अवसर पर सांसद श्री विद्युत वरण महतो के साथ-साथ शहर की कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं। इनमें कांग्रेस जिला अध्यक्ष परविंदर सिंह, एडवोकेट समरेंद्र प्रताप सिंह और शत्रुघन गिरी सहित अन्य प्रमुख लोग शामिल हुए। संचालक चंद्रशेखर पर्वत ने जमशेदपुर की जनता से अपील की है कि वे सपरिवार आकर इस मेले के आनंद और खरीदारी का लुत्फ उठाएं।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज
हजारीबाग (बरही): झारखंड के हजारीबाग जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ बरही स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में शुक्रवार को अपराधियों ने दिनदहाड़े धावा बोलकर करीब 7 करोड़ रुपये मूल्य का सोना और 5 लाख रुपये नकद लूट लिए। इस दुस्साहसिक वारदात के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, चार की संख्या में आए नकाबपोश अपराधी देसी कट्टों से लैस होकर बैंक में घुसे थे। सुरक्षा और पहचान छिपाने के लिए अपराधियों ने हेलमेट, मास्क और गमछे का इस्तेमाल किया था। बैंक में घुसते ही उन्होंने कर्मियों के साथ मारपीट शुरू कर दी और हथियार के बल पर सभी को बंधक बना लिया।
अपराधियों ने बैंककर्मियों को डरा-धमकाकर लॉकर खुलवाया और उसमें रखे सोने के जेवरात समेट लिए। लूट की वारदात को अंजाम देने के बाद, डकैतों ने चालाकी दिखाते हुए बैंक के दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया ताकि कर्मी बाहर न निकल सकें और उन्हें भागने का पर्याप्त समय मिल जाए। बताया जा रहा है कि यह बैंक शाखा महज 7-8 महीने पहले ही खुली थी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस बैंक के भीतर और आसपास लगे CCTV फुटेज को खंगाल रही है। जिस सफाई से अपराधियों ने इस बड़ी डकैती को अंजाम दिया है, उससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि उन्हें बैंक के आंतरिक ढांचे की पहले से जानकारी थी।
फिलहाल, जिले की सीमाओं को सील कर सघन छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन अब तक अपराधियों का कोई सुराग नहीं मिल सका है।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज
पटना/रांची: बिहार विधानसभा में शुक्रवार (24 अप्रैल, 2026) को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा विश्वासमत हासिल करने के बाद सूबे की सियासत और गरमा गई है। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) के जरिए मुख्यमंत्री पर तीखा प्रहार किया है। रोहिणी ने मुख्यमंत्री के भाषण को विरोधाभासी बताते हुए उनकी शैक्षणिक योग्यता और अवसरवादिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
सदन में सम्राट चौधरी ने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर व्यक्तिगत आरोप लगाएंगे तो सुनना पड़ेगा। इस पर पलटवार करते हुए रोहिणी आचार्य ने लिखा कि मुख्यमंत्री खुद पर हुए व्यक्तिगत हमलों से तिलमिला रहे हैं, लेकिन वह भूल गए कि उन्होंने एक बेटी द्वारा अपने पिता को किडनी दिए जाने पर कितनी ओछी टिप्पणी की थी।
रोहिणी ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में कुछ भी ‘पर्सनल’ नहीं होता। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के दाखिल हलफनामे (Affidavit) में विसंगतियां हैं और जब सवाल उठता है, तो उन्हें जवाब देना चाहिए।”
सम्राट चौधरी के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें बिहार की 14 करोड़ जनता का आशीर्वाद प्राप्त है, रोहिणी ने चुटकी लेते हुए कहा:
”मुख्यमंत्री श्री सम्राट कुमार चौधरी उर्फ राकेश कुमार चौधरी उर्फ राकेश कुमार मौर्या उर्फ सम्राट कुमार मौर्या किस थर्मामीटर से जनता का आशीर्वाद माप रहे हैं? क्या बिहार में 14 करोड़ मतदाता हैं? एनडीए ने चुनाव सम्राट चौधरी के चेहरे पर नहीं लड़ा था। जरूर मुख्यमंत्री की याददाश्त के साथ कोई केमिकल लोचा है!”
रोहिणी आचार्य ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि उन्हें जनता ने नहीं चुना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं थे, बल्कि असली चेहरे को साजिश के तहत हटाकर उन्हें इस कुर्सी पर बैठाया गया है।
सम्राट चौधरी के ‘पाठशाला’ वाले बयान (कि वह किसी की पाठशाला से नहीं हैं) पर घेरेते हुए रोहिणी ने कहा, “बिल्कुल ठीक कहा, आपने घाट-घाट घूमकर अवसरवादिता की राजनीति पढ़ी है। आप किसी एक पाठशाला में कभी टिके ही नहीं और अभी जहां हैं, वहां कितने दिन टिकेंगे इसकी भी कोई गारंटी नहीं है।”
बता दें कि शुक्रवार को सदन में विश्वासमत के दौरान भी सम्राट चौधरी और तेजस्वी यादव के बीच तीखी बहस हुई थी। अब रोहिणी आचार्य के इस जुबानी हमले ने बिहार की सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी आरजेडी के बीच के संघर्ष को और तेज कर दिया है।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज
मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) का बैंकिंग लाइसेंस रद्द कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने यह कड़ी कार्रवाई बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के प्रावधानों के उल्लंघन और नियमों की लगातार अनदेखी के कारण की है। इस फैसले के बाद पेटीएम पेमेंट्स बैंक अब किसी भी प्रकार का बैंकिंग परिचालन नहीं कर सकेगा।
RBI द्वारा जारी बयान के अनुसार, ऑडिट रिपोर्ट में पेटीएम पेमेंट्स बैंक द्वारा नियमों की गंभीर अनदेखी पाई गई थी। लाइसेंस रद्द करने के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
RBI के इस आदेश के बाद अब पेटीएम पेमेंट्स बैंक में किसी भी प्रकार का डिपॉजिट स्वीकार नहीं किया जाएगा।

पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर RBI की कार्रवाई कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। यह प्रक्रिया साल 2022 में शुरू हुई थी, जब पहली बार बैंक पर कुछ पाबंदियां लगाई गई थीं। साल 2024 की शुरुआत में इन पाबंदियों को और सख्त कर दिया गया था। बार-बार सुपरवाइज़री चिंताएं सामने आने के बाद अब अंततः लाइसेंस रद्द करने का ‘आखिरी कदम’ उठाया गया है।
रेगुलेटर ने अपनी टिप्पणी में बेहद सख्त लहजे में कहा कि बैंक के मैनेजमेंट का रवैया जमाकर्ताओं के हितों के लिए नुकसानदेह था। नियमों की लगातार अनदेखी के कारण बैंक अब बैंकिंग कारोबार करने की योग्यता खो चुका है।
इस फैसले ने फिनटेक सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है और यह उन सभी डिजिटल बैंकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो रेगुलेटरी नियमों को हल्के में लेते हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज
गुमला/सिसई: झारखंड के ऐतिहासिक गौरव और नागवंशी स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना, 17वीं शताब्दी का एकाश्मक प्रस्तर स्तंभ (Monolithic Stone Pillar) आज प्रशासनिक लापरवाही के कारण खतरे में है। गुमला जिले के सिसई-बसिया रोड पर नवरतनगढ़ के समीप स्थित एक प्राचीन तालाब में खड़ा यह कीर्ति स्तंभ कभी भी गिर सकता है।
विचित्र विरोधाभास यह है कि एक तरफ राज्य के पर्यटन और संस्कृति मंत्री धरोहरों के संरक्षण का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गुमला जिले का भूजल संरक्षण विभाग इसी प्राचीन तालाब का गहरीकरण कर रहा है। गहरीकरण के दौरान स्तंभ के आसपास की मिट्टी पूरी तरह हटा दी गई है, जिससे करीब 20 फीट लंबा यह विशाल स्तंभ अब केवल हवा के झोंके या जरा सी हलचल से जमींदोज हो सकता है।
पुरातत्वविदों के अनुसार, यह संभवतः झारखंड का इकलौता स्तंभ है जो एक ही पत्थर (एकाश्मक) को तराश कर बनाया गया है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), रांची मंडल के सहायक अधीक्षण पुरातत्त्वविद डॉ. नीरज कुमार मिश्र ने बताया कि यह स्तंभ ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ है। इसके तीन ओर अभिलेख हैं और एक ओर खिला हुआ कमल है। इसे बचाने के लिए तुरंत इसके चारों ओर मिट्टी डालकर और ईंट-सीमेंट की दीवार बनाकर संरक्षित करने की आवश्यकता है।
मामले के तूल पकड़ने पर संबंधित अधिकारियों का कहना है कि उन्हें तालाब के बीच में इस ऐतिहासिक स्तंभ की मौजूदगी की जानकारी नहीं थी। विभाग ने अब आश्वासन दिया है कि जानकारी संज्ञान में आने के बाद गहरीकरण के कार्य में सावधानी बरती जाएगी और स्तंभ को सुरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा।
तीसरी धारा न्यूज का सवाल: क्या विकास की अंधी दौड़ में हम अपनी उन जड़ों को ही काट देंगे जो हमारी पहचान हैं? अगर समय रहते इस स्तंभ को संरक्षित नहीं किया गया, तो नागवंशी इतिहास का यह महत्वपूर्ण पन्ना हमेशा के लिए दफन हो जाएगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज
रांची/रामगढ़: रामगढ़ स्थित सुप्रसिद्ध माँ छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को अवमानना मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने सरकार और जिला प्रशासन को दुकानदारों के पुनर्वास और नदी क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान रामगढ़ उपायुक्त (DC) और पर्यटन सचिव व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर हुए। रामगढ़ डीसी ने अदालत को सूचित किया कि मंदिर परिसर से हटाए गए 254 वेंडरों के पुनर्वास के लिए मंदिर के पास ही स्थान चिन्हित कर लिया गया है। इस पर अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि इन दुकानदारों के लिए स्थायी दुकानें बनाई जाएं। कोर्ट ने सुझाव दिया कि इनसे उचित किराया लिया जाए, जिससे दुकानदारों को आजीविका मिले और सरकार को राजस्व प्राप्त हो।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, भैरवी नदी के खतरनाक क्षेत्रों में बैरिकेडिंग करने पर चर्चा हुई। जल संसाधन विभाग ने बताया कि इसके लिए 50 लाख रुपये की डीपीआर तैयार की गई है। अदालत ने CCL को निर्देशित किया कि वह दो सप्ताह के भीतर अपने CSR फंड से इस कार्य पर निर्णय ले। साथ ही, कोर्ट ने चेतावनी दी कि बैरिकेडिंग का काम बरसात शुरू होने से पहले हर हाल में पूरा हो जाना चाहिए।
अदालत ने मंदिर परिसर में आने वाले हजारों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक बेहतर अस्पताल निर्माण पर भी कदम उठाने का निर्देश दिया है। कोर्ट का उद्देश्य मंदिर परिसर को न केवल सुंदर बनाना है, बल्कि यहाँ आने वाले भक्तों के लिए सुरक्षा और चिकित्सा की बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करना भी है।
इस सुनवाई के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि रजरप्पा मंदिर क्षेत्र का कायाकल्प जल्द ही धरातल पर नजर आएगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज
रांची/जमशेदपुर: झारखंड के युवाओं के लिए खुशखबरी है। राज्य पुलिस मुख्यालय ने सिपाही स्तर के पुलिसकर्मियों की बड़े पैमाने पर बहाली की तैयारी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, झारखंड पुलिस में जल्द ही 9362 सिपाहियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने वाली है।
राज्य पुलिस मुख्यालय की कार्मिक शाखा ने रिक्त पदों का पूरा विवरण, बैकलॉग और आरक्षण का रोस्टर तैयार कर लिया है। अब इन रिक्तियों को भरने के लिए गृह विभाग को औपचारिक पत्र भेजा जाएगा। यह नियुक्तियां राज्य सरकार द्वारा बनाई गई नई आरक्षी नियमावली के तहत की जाएंगी।
पुलिस विभाग में बड़ी संख्या में खाली पदों के पीछे दो मुख्य कारण हैं:
इससे पहले, सिपाही के कुल 4919 पदों (3799 नियमित और 1120 बैकलॉग) के लिए जनवरी-फरवरी 2024 में आवेदन लिए गए थे। हजारों अभ्यर्थियों ने इसके लिए फॉर्म भरा था, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई थी। उस समय पुरानी नियमावली के तहत बहाली मांगी गई थी, जिसे राज्य सरकार द्वारा नई नियमावली बनाने के कारण बीच में ही रोक दिया गया था। अब नई नियमावली के तहत इन सभी पदों और नई रिक्तियों को मिलाकर कुल 9362 पदों पर बहाली की जाएगी।
राज्य में पुलिसकर्मियों की कमी को दूर करने और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय की ओर से प्रक्रिया तेज होने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही गृह विभाग से मंजूरी मिलते ही इसके लिए आधिकारिक विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज
कानपुर/लखनऊ: रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक रूह कपा देने वाली घटना सामने आई है। लखनऊ के एक गुरुकुल में पढ़ने गए 11 साल के मासूम दिव्यांश की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो खुलासे हुए हैं, उसने पुलिस और परिजनों के होश उड़ा दिए हैं। बच्चे के शरीर पर प्रताड़ना के 42 गंभीर निशान मिले हैं, जिससे साफ है कि उसे मौत से पहले नर्क जैसी यातनाएं दी गईं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मासूम दिव्यांश की पीठ, हाथ, पैर और सीने पर गहरे जख्म थे। क्रूरता की हद तो तब पार हो गई जब उसके शरीर पर सिगरेट से जलाने के 11 निशान भी पाए गए। परिजनों ने बच्चे के साथ कुकर्म की भी आशंका जताई है, जिसके बाद पुलिस ने सैंपल लेकर लैब जांच के लिए भेज दिए हैं।
कानपुर के महाराजपुर, गौरैया गांव निवासी नरेंद्र कुमार ने अपने इकलौते बेटे दिव्यांश को बेहतर शिक्षा के लिए 15 अप्रैल को लखनऊ के आलमनगर स्थित रामानुज भागवत वेद विद्यापीठ गुरुकुल में दाखिल कराया था। इस गुरुकुल का संचालन दिव्यांश का रिश्ते में मामा लगने वाला सौरभ मिश्रा उर्फ कन्हैया कर रहा था। परिजनों को अंदेशा भी नहीं था कि जिस मामा पर उन्होंने भरोसा किया, वही उनके बेटे का हत्यारा निकलेगा।
पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपी सौरभ ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने बताया कि दिव्यांश गुरुकुल के नियमों का पालन नहीं कर रहा था, जिससे नाराज होकर उसने बच्चे को घंटों धूप में खड़ा रखा। इसके बाद रात भर उसे लात-घूंसों और डंडों से बेरहमी से पीटा। एक जोरदार लात लगने से बच्चा दीवार से टकराकर बेहोश हो गया, जिसे आरोपी उसी हाल में छोड़कर चला गया। अगली सुबह मासूम मृत पाया गया।
घटना को छिपाने के लिए आरोपी ने इसे बीमारी का रूप देने की कोशिश की और परिजनों को गलत सूचना दी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गुरुकुल के CCTV फुटेज को डिलीट करने में सौरभ की महिला मित्र प्रियंका ने मदद की। पुलिस ने प्रियंका को भी हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ जारी है।
महाराजपुर और लखनऊ पुलिस के समन्वय से मुख्य आरोपी सौरभ मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक अत्यंत गंभीर और जघन्य अपराध है। मामले की गहन जांच की जा रही है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में पैरवी की जाएगी।
अपने मां-बाप के इकलौते चिराग के इस तरह बुझ जाने से पूरे गौरैया गांव में मातम पसरा हुआ है और लोग आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज
कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर कचहरी परिसर में गुरुवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हुआ। पिता के कथित मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर 23 वर्षीय युवा अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने कोर्ट की नई बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। इस आत्मघाती कदम से पहले प्रियांशु ने व्हाट्सएप स्टेटस पर दो पन्नों का भावुक सुसाइड नोट साझा किया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब 2 बजे प्रियांशु नई बिल्डिंग की पांचवीं मंजिल पर पहुंचा। सीसीटीवी फुटेज में वह फोन पर बात करते हुए दिखाई दिया और उसके तुरंत बाद उसने नीचे छलांग लगा दी। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण मौके पर ही उसकी मृत्यु हो गई। घटना की सूचना मिलते ही डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया।
प्रियांशु ने अपने सुसाइड नोट में बचपन से लेकर अब तक के मानसिक टॉर्चर की दास्तां बयां की है। उसने लिखा:
“6 साल की उम्र में फ्रिज से जूस पीने पर मुझे निर्वस्त्र कर घर से बाहर निकाल दिया गया। हाईस्कूल के समय धमकी मिली कि नंबर कम आए तो फिर निर्वस्त्र कर भगा देंगे। हर मिनट शक की नजरों से देखना और हिसाब लेना… ऐसी बेगैरत जिंदगी जीने से बेहतर मर जाना है।”
उसने अंत में भावुक अपील करते हुए लिखा, “सभी माता-पिता से निवेदन है कि बच्चों को उतना ही टॉर्चर करें जितना वे सह सकें। मेरी लाश को मेरे पापा छू भी न पाएं। मैं हार गया, पापा जीत गए। लव यू मम्मी…”
जांच में सामने आया है कि प्रियांशु के पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव भी कानपुर में वकील हैं और प्रियांशु उन्हीं के साथ वकालत करता था। पुलिस अब सुसाइड नोट और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले की गहराई से जांच कर रही है। डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि सभी साक्ष्यों को कब्जे में ले लिया गया है और परिजनों से पूछताछ की जा रही है।
इस घटना ने न केवल कानपुर बल्कि पूरे प्रदेश के अधिवक्ताओं को झकझोर कर रख दिया है। एक उभरते हुए युवा वकील का इस तरह से अंत होना समाज और परिवार के भीतर बढ़ते मानसिक दबाव और संवादहीनता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज
सिलिकॉन वैली/न्यूयॉर्क: दुनिया की दो सबसे बड़ी टेक दिग्गज कंपनियां, मेटा (Meta) और माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी और वर्कफोर्स पुनर्गठन की तैयारी में हैं। दोनों कंपनियों के ताजा फैसलों से कुल मिलाकर लगभग 23,000 नौकरियों पर सीधा असर पड़ने वाला है। इस कदम का मुख्य कारण आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) पर हो रहे अरबों डॉलर के निवेश को संतुलित करना और ऑपरेशंस को सुव्यवस्थित बनाना बताया जा रहा है।
मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा (फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी) ने आंतरिक मेमो के जरिए सूचित किया है कि कंपनी अपने कुल वर्कफोर्स में 10 फीसदी की कटौती करेगी।

माइक्रोसॉफ्ट ने अपने अमेरिकी कर्मचारियों के लिए एक अनोखा ऑफर पेश किया है, जिसे ‘वॉलेंटियर बायआउट’ कहा जा रहा है। कंपनी के 51 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है।
दोनों कंपनियां एआई सर्विसेज की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए डेटा सेंटर बनाने और इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड तोड़ निवेश कर रही हैं। मेटा ने जहां एआई पार्टनर्स के साथ अरबों डॉलर की डील की है, वहीं माइक्रोसॉफ्ट ने जापान और ऑस्ट्रेलिया में नए एआई इन्वेस्टमेंट का ऐलान किया है। इस बढ़ते खर्च को मैनेज करने के लिए कंपनियां अब ‘कॉस्ट कटिंग’ (लागत कटौती) का सहारा ले रही हैं।
पिछले कुछ वर्षों में कई बार हुई छंटनी के बाद अब इन नई घोषणाओं ने टेक प्रोफेशनल्स के बीच तनाव पैदा कर दिया है। मेटा के रियलिटी लैब्स डिवीजन के बाद अब पूरी कंपनी में डर का माहौल है। वहीं, माइक्रोसॉफ्ट के पुराने कर्मचारियों को अब यह तय करना होगा कि वे बायआउट ऑफर स्वीकार कर सम्मानजनक विदाई लें या कंपनी में बने रहें।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज