एक नई सोच, एक नई धारा

सरयू राय ने झारखण्ड के सिखों के मताधिकार का मामला विधान सभा में उठाया

झारखण्ड : बुधवार को जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने तख्त श्री हरमंदिर साहिब, पटना की 15सदस्यीय समिति में झारखण्ड का स्थान सुरक्षित करने का मामला शून्यकाल के दौरान विधानसभा में जोरदार ढंग से उठाया तथा सभा अध्यक्ष से इस बारे में सरकार को संज्ञान लेने का निर्देश देने का आग्रह किया।

झारखण्ड सिखों के अधिकार सुरक्षित रखने के लिए हरसंभव प्रयास करेगा सीजीपीसी: भगवान सिंह

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इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (सीजीपीसी) के प्रधान सरदार भगवान सिंह ने कहा कि झारखण्ड के सिख अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना जानते है तथा झारखण्ड सिखों के अधिकार सुरक्षित रखने के लिए सीजीपीसी हरसंभव प्रयास करेगी। झारखण्ड सिखों के अधिकार पक्ष का मुद्दा सदन में उठाने के लिए उन्होंने सरयू राय का धन्यवाद भी किया।

विधान सभा में मामला उठना शुरुआती जीत है, सीजीपीसी विधायक का धन्यवाद करती है: शैलेन्द्र सिंह

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वहीँ झारखण्ड राज्य गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के प्रधान सरदार शैलेन्द्र सिंह ने इसे शुरुआती जीत करार देते हुए झारखण्ड सिखों के मौलिक और धार्मिक अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखने की बात कही। सरदार भगवान सिंह और सरदार शैलेन्द्र सिंह ने एक सुर में कहा कि तख्त श्री हरमंदिर साहिब, पटना की सदस्य समिति में झारखण्ड का स्थान सुरक्षित करने के लिए वे क़ानूनी सहारा भी ले सकते हैं। (जारी…)

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गौरतलब है कि आज शून्यकाल में के दौरान जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने झारखण्ड विधान सभा में वक्तव्य रखते हुए कहा कि सिखों के दसवें गुरू, गुरू गोविंद सिंह जी की जन्मस्थली पटना साहिब में स्थित तख्त श्री हरमंदिर साहिब जी का प्रबंधन 15 सदस्यीय समिति करती है। इसका संचालन 1955 में बने संविधान और नियामवाली के तहत होता है। प्रबंधन समिति में अमृतसर, कोलकाता, लखनऊ, दिल्ली सहित उत्तर एवं दक्षिण बिहार का प्रतिनिधित्व है। बिहार का पुनर्गठन होकर झारखण्ड राज्य बना है।

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अभी तक दक्षिण बिहार के साथ झारखण्ड था। दक्षिण बिहार और झारखण्ड का संयुक्त प्रतिनिधित्व तख्त श्री हरमंदिर साहिब, पटना के प्रबंधन की 15 सदस्यीय समिति में रहता था।
परन्तु किन्ही लोगों द्वारा अब यह साजिश हो रही है कि झारखण्ड को दक्षिण बिहार के प्रतिनिधि से अलग कर दिया जाय और इसके लिए तख्त श्री हरमंदिर साहिब, पटना समिति के संविधान में संशोधन किया जाय। जबकि दक्षिण बिहार में केवल 15 गुरूद्वारा है और झारखंड में 120 के करीब गुरूद्वारा है। इस तरह झारखण्ड को प्रतिनिधित्व से वंचित करने की साजिश चल रही है। जब अमृतसर, कोलकाता, लखनऊ, दिल्ली के सिख प्रतिनिधि तख्त हरमंदिर साहेब की 15सदस्यीय समिति में है तो झारखण्ड को इसमें प्रतिनिधित्व नहीं देना कहीं से भी उचित नहीं है।
इसी प्रकरण पर सरयू राय ने सरकार से मांग की है कि बिहार की सरकार के साथ वार्ता कर तख्त श्री हरमंदिर साहिब प्रबंधन समिति में झारखण्ड का स्थान सुरक्षित कार्यवाया जाये।

झारखंड के सिखों के प्रतिनिधित्व अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक लड़ूंगा – सेठी

झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह सेठी ने हरमंदिर जी, पटना साहिब में सिखों के जनसांख्यिक प्रतिनिधित्व में प्रस्तावित परिवर्तनों पर नाराजगी व्यक्त की है। श्री सेठी ने कहा के तक़त श्री हरमंदिर जी, पटना साहिब प्रबंधन समिति के संविधान का अस्तित्व 1955-56 से है, और हमारे समुदाय के सदस्य दक्षिण बिहार निर्वाचन क्षेत्र में अपना संविधानिक अधिकार व्यय कर रहे हैं।हाल ही में, कुछ नेताओं ने झारखंड राज्य के सिख संगत और गुरुद्वारों के प्रतिनिधित्व को दक्षिण बिहार निर्वाचन क्षेत्र की वोटिंग प्रक्रिया से बाहर करने की कोशिश की है, यह दावा करते हुए कि झारखंड बिहार से अलग हो चुका है और इसलिए हमारा वोट देने का अधिकार समाप्त होना चाहिए।

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श्री सेठी ने बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार से झारखंड के सिखों के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए पत्र लिखा है, श्री सेठी ने कहा के झारखंड में सिख समुदाय बिहार के तुलना में अधिक है। बिहार पुनर्गठन अधिनियम और तखत श्री हरमंदिर जी, पटना साहिब के बायलॉज की प्रावधानों का उल्लंघन करने वाली इस कदम को रोकने का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अनुरोध किया है जब तक बायलॉज में कोई संशोधन नहीं किया गया है।

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जमशेदपुर में बाढ़ के हालात,डीसी ने की आम लोगो को सतर्क रहने की अपील, जाने क्या करना है
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जमशेदपुर : जमशेदपुर ज़िलें मे हो रही लगातार बारिश से आम जनजीवन पर असर पड़ा है. इस बीच जमशेदपुर के डीसी मंजूनाथ भजन्त्री ने अपने अधीनस्थ अधिकारियो को सतर्क कर दिया है. डीसी के निर्देश के बाद पूरा अमला रेस हो गया है. लोगो को निचले इलाके से हटाकर ऊपरी इलाके शिफ्ट होने की हिदायत दी जा रही हैं. वही कई इलाका को खाली भी कराया जा रहा है. दूसरी ओर, बरसात के मौसम को देखते हुए जिलेवासियों को बिजली के कारण जानमाल का नुकसान नहीं हो इसके लिए उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा अपील जारी की गई है. उन्होने कहा कि बरसात के दिनों में तेज हवा के कारण किसी खेत में पोल गिरे हों या पेड़ की टहनी बिजली के तार को छू रहे हों तो तत्काल पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत जमशेदपुर, मानगो, घाटशिला विद्युत आपूर्ति प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को सूचना दें. बारिश के दौरान बिजली लाइन, ट्रासंफॉर्मर व पोल आदि से दूर रहें. उक्त के संपर्क में आने से करंट इंसान के शरीर में प्रवाहित हो सकता है, क्योंकि बारिश में अर्थिंग मिलता है. बिजली लाइन या ट्रांसफॉर्मर से छेड़छाड़ नहीं करें. विद्युत लाइन के नीचे न बैठें न खड़े रहें. कहीं पर भी चिंगारी उठ रही हो या कोई तार टूट जाए या किसी पोल या अर्थिंग सेट में करंट आ रहा हो तो तुरंत संबंधित अभियंता या विद्युत उपकेन्द्र पर सूचना दें.

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कार्यपालक अभियंता का फोन नंबर : 

कार्यपालक अभियंता, विद्युत प्रमंडल, जमशेदपुर- 9431135915
कार्यपालक अभियंता, विद्युत प्रमंडल, मानगो- 9431135905
कार्यपालक अभियंता, विद्युत प्रमंडल, घाटशिला- 9431135917

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वज्रपात से बचाव के लिए क्या करें –

जब आप घर के भीतर हों

बिजली से संचालित उपकरणों से दूर रहें, तार वाले टेलीफोन का उपयोग न करें.
ऐसी वस्तुएं जो बिजली के सुचालक हैं, उनसे दूर रहे, धातु से बने पाइप, नल, फव्वारा, वॉशबेसिन आदि से दूर रहें.
कपड़े सुखाने के लिए तार का प्रयोग न कर जूट या सुत की रस्सी का प्रयोग करें.
जब आप खेल, खलिहान में काम कर रहे हैं
गीले खेतों में हल चलाते, रोपनी या अन्य कार्य कर रहे किसान तथा मजदूर या तालाब में कोई कार्य कर रहे व्यक्ति तुरंत सूखे या सुरक्षित स्थान पर जायें.
धातु से बने कृषि यंत्र या डंडा से अपने आप को दूर कर लें.
जब आप जंगल में हों
छोटे या घने पेड़ों की शरण में चले जायें.
जब आप घर के बाहर हों
ऊंचे वृक्ष बिजली को आकर्षित करते हैं, कृप्या उनके नीचे न खड़े रहें. समूह में न रहें बल्कि अलग-अलग हो जायें.
किसी पक्के मकान में आश्रय लेना बेहतर है. सफर के दौरान अपने वाहन में ही बने रहें. खुली छत वाले वाहन की सवारी न करें.
बाहर रहने पर धातु से बनी वस्तुओं का उपयोग न करें. बाईक, बिजली या टेलीफोन का खंभा, तार की बाड़, मशीन आदि से दूर रहें.
तालाब और जलाशयों से दूर रहें. यदि आप पानी के भीतर हैं अथवा किसी नाव में हैं तो तुरंत बाहर आ जाएं.
अगर किसी सुरक्षित स्थान पर शरण ले पाने में असमर्थ हों
जहां हैं वहीं रहें हो सके तो पैरों के नीचे सूखी चीजें जैसे लकड़ी, प्लास्टिक, बोरा या सूखे पत्ते रख लें.
जमीन पर बिल्कुल नहीं लेटें.
दोनों पैरों को आपस में सटा लें एवं दोनों हाथों को घुटनों पर रखकर अपने सिर को जमीन की तरफ यथोसंभव झुका लें तथा सिर को जमीन से न छूने दें.
वज्रपात का झटका लगने पर ये करें
वज्रपात के झटका लगने पर जरूरत के अनुसार व्यक्ति को सीपीआर यानी कृत्रिम श्वास देनी चाहिए. तत्काल प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने की व्यवस्था करें. वज्रपात से प्रभावित व्यक्ति की सूचना अपने अंचलाधिकारी या जिले के जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी अथवा उपायुक्त को तत्काल दें.

“हम दिल दे चुके सनम” के डायरेक्टर नितिन देसाई ने दे दी जान, स्टूडियो में कई आत्महत्या, जांच में जुटी पुलिस

मुंबई : जानेमाने आर्ट डायरेक्टर नितिन देसाई ने बुधवार को खुदकुशी कर ली, उन्होंने मुंबई में एनडी स्टूडियो में आत्महत्या की है। नितिन देसाई पर कुछ दिन पहले 51 लाख की धोखाधड़ी का आरोप लगा था। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक कर्जत के पास नितीन देसाई ND स्टूडियो में फांसी लगाकर अपनी जिंदगी खत्म कर ली है और सुबह सुबह सफाई कर्मचारी ने उन्हें इस अवस्था में पाया है।

फांसी लगाकर की आत्महत्या

यह बात सामने आई है कि नितिन देसाई ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। यह जानने के बाद कि स्टूडियो स्टाफ ने आत्महत्या कर ली है, उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया। अब पुलिस उसके अनुसार आगे की कार्रवाई कर रही है। नितिन देसाई की आत्महत्या के पीछे की वजह अभी तक सामने नहीं आई है।

80 के दशक में हुई करियर की शुरूआत

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नितिन देसाई ने कला निर्देशन जैसे अलग क्षेत्र में बहुमूल्य काम किया है। नितिन देसाई ने पिछले 30 वर्षों में कई फिल्मों का कला निर्देशन संभाला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर महाराष्ट्र के सभी राजनेताओं से नितिन देसाई के अच्छे संबंध थे। नितिन देसाई इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम हैं। नितीश देसाई ने अपने करियर की शुरुआत 80 के दशक में की थी। नितिन देसाई को असली ब्रेक फिल्म ‘1942 ए लव स्टोरी’ से मिला। बाद में उन्होंने कई लोकप्रिय निर्देशकों के साथ काम किया।

बॉलीवुड को दिए हैं कई यादगार सेट

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नितिन देसाई ने हम दिल दे चुके सनम, लगान, देवदास, जोधा अकबर, मिशन काश्मीर, खारी, स्वदेश और प्रेम रतन धन पायो जैसी फिल्मों का सेट डिजाइन किया था, उन्हें चार बार बेस्ट आर्ट डायरेक्शन का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। 2000 में हम दुल दे चुके सनम और 2003 में देवदास के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशक के राष्ट्रयी पुरस्कारी से सम्मानित किया गया है। इतना ही नहीं नितिन को फिल्म ‘हिरश्रंद फैक्ट्री’ के लिए सर्वश्रष्ठ कला नर्धेशक के रूप में महाराष्ट राज्य फिल्म पुरस्कार मिला है।

एडवर्टाइजिंग एजेंसी ने लगाया था धोखाधड़ी का आरोप

मई में एक एडवर्टाइजिंग एजेंसी ने देसाई पर 51.7 लाख रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। एजेंसी ने कहा था कि 3 महीने तक काम करवाने के बावजूद देसाई ने पैसा नहीं दिया था। हालांकि, नितिन देसाई ने इन आरोपों का खंडन किया था,उन्होंने कहा था कि एजेंसी पहले भी उन पर इस तरह के आरोप लगा चुकी है।

कपाली में बच्चों के झगड़े को लेकर घर में घुस कर मारपीट, परिवार के छह लोग जख्मी, दो की हालत गंभीर, एमजीएम में भर्ती

जमशेदपुर : जमशेदपुर से निकट सरायकेला जिले के कपाली ओपी क्षेत्र के इस्लामनगर मजार लाइन में बच्चों के विवाद में कुछ लोगों ने एक घर पर हमला बोल दिया हमलावरों ने घर के लोगों को मारपीट कर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया, जबकि 4 लोगों को मामूली चोटें आई हैं। सभी को इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। (जारी…)

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इस मारपीट में जख्मी जमाल अंसारी और आयशा खातून की हालत गंभीर बताई जा रही है। जमाल अंसारी और आयशा खातून का सर फट गया है। जबकि बाकी 4 लोगों को हल्की चोटें आई हैं। इनमें जमाल अंसारी का बेटा साहिल अंसारी, उनकी दो बेटियां और बहू शमीमा खातून शामिल हैं। शमीमा खातून ने बताया कि उनकी बेटी के साथ पड़ोसी की बेटी का झगड़ा हुआ था। इसी को लेकर पड़ोसियों ने यह मारपीट की है। कपाली ओपी पुलिस को सूचना दे दी गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

बीमार रिश्तेदार से फोन पर हिन्दी में की बात, तो नौकरी से हुआ बर्खास्त, अदालत पहुंचा भारतीय इंजीनियर

अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के 78 वर्षीय इंजीनियर को नौकरी से सिर्फ इसलिए निकाल दिया गया, क्योंकि वह भारत में मरणासन्न अपने एक रिश्तेदार से वीडियो कॉल पर हिंदी में बात कर रहा था.

अमेरिकी मीडिया ने यह खबर देते हुए बताया कि अलाबामा में मिसाइल डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर के साथ लंबे समय से अनिल वार्ष्णेय काम कर रहे थे और नौकरी से निकाले जाने के फैसले को उन्होंने अदालत में चुनौती दी है.

वार्ष्णेय हंट्सविली मिसाइल डिफेंस कांट्रैक्टर पार्सन्स कॉरपोरेशन में बतौर वरिष्ठ सिस्टम इंजीनियर काम करते थे. उन्होंने संघीय अदालत में दाखिल वाद में आरोप लगाया है कि उनके साथ व्यवस्थागत भेदभाव किया गया, जिसकी वजह से पिछले साल अक्टूबर में उन्हें बेरोजगार होना पड़ा.

‘मरने से पहले आखिरी बार बात करना चाहते थे रिश्तेदार’

एएल डॉट कॉम ने सोमवार को खबर दी कि श्वेत सहकर्मी ने वार्ष्णेय को भारत में मरणासन्न अपने रिश्तेदार से फोन पर हिंदी में बात करते हुए सुना. वार्ष्णेय को 26 सितंबर 2023 को ‘उनके मरणासन्न रिश्तेदार केसी गुप्ता का भारत से फोन आया जो अंतिम बार वार्ष्णेय से बात करना चाहते थे.

धनबाद में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का सपना टूटा, यहां की अत्याधुनिक मशीनें भेजी जायेंगी एम्स कल्याण व जबलपुर

शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसएनएमएमसीएच) परिसर में बने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के शुरू होने का सपना टूटता दिख रहा है. इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए मंगायी गयीं मशीनें दूसरी जगह ले जाने की तैयारी है. अस्पताल के अब तक शुरू नहीं होने और इसके लिए चिकित्सक नहीं मिलने के कारण ऐसा निर्णय किया गया है. यहां अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध कराने वाली एजेंसी हाइट्स ने इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को जानकारी दी है.

एजेंसी ने कहा है कि इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के शुरू होने की संभावना नहीं दिख रही है. ऐसे में यहां रखे-रखें इन अत्याधुनिक मशीनों के खराब होने की संभावना है. इस वजह से मशीनों को दूसरी जगह भेजना आवश्यक है. जब सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू होगा, तो दूसरी मशीनें धनबाद के लिए मुहैया करायी जायेगी. याद रहे कि एसएनएमएमसीएच कैंपस में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनकर तैयार है, पर चिकित्सक नहीं मिलने के कारण इसे शुरू नहीं किया जा सका है. हाल ही में रांची में इसके लिए साक्षात्कार का आयोजन किया गया था, पर एक भी चिकित्सक उसमें शामिल होने नहीं आया.

187 करोड़ खर्च के बाद भी सुविधाएं मयस्सर नहीं

चार बार निकली वैकेंसी, पर नहीं मिले चिकित्सक : सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए चिकित्सक नहीं मिल रहे हैं. सरकार ने यहां चिकित्सकों के 94 पद स्वीकृत किये हैं. अब तक चार बार चिकित्सकों की बहाली के लिए वैकेंसी भी निकाली गयी, लेकिन साक्षात्कार के लिए एक भी डॉक्टर नहीं पहुंचा. इसके लिए एमसीएच और इससे समतुल्य पद के डॉक्टरों की बहाली होनी हैं. इसके अलावा प्रशिक्षित कर्मचारियों की भी बहाली होनी है. इसके लिए 300 से ज्यादा कर्मचारियों के पद सृजित किये गये हैं. पर तमाम कोशिशों के बाद भी कुछ नहीं हुआ.

  • 2012 में बनी थी कार्ययोजना
  • 2015 में राज्य व केंद्र सरकार के बीच एमओयू
  • 2016 में शुरू हुआ निर्माण कार्य
  • 2017 दिसंबर की जगह इस साल पूरा हुआ कार्य
  • 80 करोड़ रुपए भवन निर्माण पर खर्च
  • 87 करोड़ रुपये मशीन व उपकरण की खरीदारी पर खर्च
  • 25 एकड़ जमीन पर बना है अस्पताल
  • जमीन विवाद के कारण काम पर असर पड़ा, तो 2020 में कोरोना महामारी ने डाला व्यवधान

यह भी जानें

  • पीएसएसवाइ के तहत मिली राशि का 85% केंद्र सरकार व 15% राज्य सरकार ने किया वहन
  • केंद्र सरकार ने सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए 167 करोड़ रुपये आवंटित किये
  • अस्पताल की क्षमता 200 बेड की है. इसमें 160 जनरल और 40 आइसीयू बेड हैं
  • आठ माड्यूलर ऑपरेशन थियेटर अस्पताल में स्थापित किये गये हैं
  • अस्पताल में अलग से रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी की भी तैयारी है

इस कारण नहीं आना चाहते हैं चिकित्सक

एयरपोर्ट नहीं होना : धनबाद में एयरपोर्ट नहीं होना सुपर स्पेशियलिटी के लिए ग्रहण साबित हो रहा है. एयरपोर्ट नहीं होने के कारण बाहर के चिकित्सक धनबाद आना नहीं चाहते हैं. धनबाद के चिकित्सक भी इस बात को मानते हैं.

सुरक्षा की गारंटी नहीं : सुरक्षा को लेकर भी चिकित्सक धनबाद आने से परहेज करते हैं. हाल के कुछ वर्षों में यहां चिकित्सकों पर हमले तेज हुए हैं. यहां के चिकित्सक गैंस्टरों की रडार पर हैं. चिकित्सकों से रंगदारी मांगने की बात भी सामने आ चुकी है. यही वजह है कि सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलने के कारण बाहर के चिकित्सक धनबाद आने से परहेज कर रहे हैं.

मंगवाई गयी हैं 87 करोड़ की मशीनें

बता दें कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए लगभग 87 करोड़ रुपये की लागत से मशीनें मंगवायी गयीं हैं. इनमें से कई मशीनों को एजेंसी ने इंस्टॉल भी कर दिया गया है. मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के अनुसार यहां लगने वाली सभी मशीनें अत्याधुनिक हैं.

एजेंसी हाइट्स ने कही मशीनें शिफ्ट करने की बात

मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के अनुसार सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए मशीनें उपलब्ध कराने वाली एजेंसी हाइट्स ने यहां की मशीनों को एम्स, कल्याणपुर व जबलपुर शिफ्ट करने की बात कही है.

पहले ही छीना जा चुका है एम्स

धनबाद में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बदहाल है. यहां एकमात्र सरकारी अस्पताल एसएनएमएमसीएच है. इस अस्पताल में अभी भी कॉर्डियोलॉजी, नेफरोलॉजी, न्यूरोलॉजी जैसी बीमारियों के उपचार की व्यवस्था नहीं है. यहां बीच में एम्स लाने की बात हुई थी. प्रस्ताव भी बना था. लेकिन, एम्स का निर्माण देवघर में हो गया. उसके विकल्प के रूप में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को पेश किया जा रहा था. लेकिन अब इस पर भी ग्रहण लग रहा है.डॉ ज्योति रंजन प्रसाद, प्राचार्य, एसएनएमएमसीएच, धनबादसुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए मशीन मुहैया कराने वाली एजेंसी हाइट्स ने मशीनों को दूसरी जगह शिफ्ट करने संबंधित जानकारी दी है. हालांकि, अबतक मशीनों को दूसरी जगह शिफ्ट करने संबंधित कोई लिखित निर्देश केंद्रीय स्वास्थ्य मुख्यालय से प्राप्त नहीं हुआ है. मुख्यालय से जैसा निर्देश मिलेगा, उसी मुताबिक कार्य किया जायेगा.

300 तरह की दवाओं पर बार कोड लगाना हुआ अनिवार्य, सार्वजनिक करनी होगी ये जानकारी

नकली दवाओं पर लगाम लगाने के लिए भारत के शीर्ष दवा नियामक ने मंगलवार से शीर्ष 300 दवा ब्रांडों जिनमें एलेग्रा, शेल्कल, कैलपोल, डोलो और मेफ्टल स्पा जैसी दवाएं शामिल हैं, उनपर बार कोड या क्यूआर कोड लगाने के नियम को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।

भारतीय औषधि नियंत्रण जनरल (डीसीजीआई) ने फार्मा कंपनियों को नई व्यवस्था का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है और ऐसा नहीं करने पर उन पर कठोर जुर्माना लगाया जाएगा। भारत के शीर्ष दवा नियामक ने फार्मा निकाय संघों को सलाह दी है कि वे अपनी सदस्य कंपनियों को नए नियम का पालन करने की सलाह दें।

नियामक के अनुसार यूनिक प्रोडक्ट आइडेंटिफिकेशन कोड में उचित जेनरिक नाम के अलावे ब्रांड नेम, दवा बनाने वाली कंपनी का नाम और पता, बैच नंबर, विनिर्माण की तारीख, एक्सपायरी की तारीख और विनिर्माण का लाइसेंस नंबर जैसी सभी जानकारी उपलब्ध रहनी चाहिए।

300 ब्रांडों पर 1 अगस्त 2023 से क्यूआर कोड प्रिंट करना या चिपकाना अनिवार्य

अधिसूचना के अनुसार निर्दिष्ट दवा फॉर्मूलेशन के ब्रांडों के किसी भी बैच को जो 1 अगस्त 2023 को या उसके बाद बना होगा, चाहे वह किसी भी विनिर्माण स्थल पर बना हो उसके लेबल पर बारकोड या क्यूआर कोड होना जरूरी है। दवा फॉर्मूलेशन के 300 ब्रांडों पर क्यूआर कोड प्रिंट करना/चिपकाना अनिवार्य है।

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने दवा निर्माताओं को भेजे पत्र में कहा, ‘हालांकि, अगर कोई निर्माता स्वेच्छा से किसी अन्य ब्रांड के लिए बार कोड या क्यूआर कोड चिपकाना चाहता है या प्रिंट करना चाहता है, तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है। बयान में कहा गया है, “यह नियम उन सभी स्वदेशी और विदेशी विनिर्माताओं पर लागू होगा जो देश में विपणन के लिए इन ब्रांडों के दवा फार्मूलेशन का विनिर्माण कर रहे हैं।”

झारखंड के इन जिलों में दो दिन तक होगी बहुत भारी बारिश, ऑरेंज अलर्ट जारी

झारखंड में मानसून सक्रिय है. पिछले 24 घंटे में राज्य में लगभग सभी स्थानों पर हल्के से मध्यम दर्जे की बारिश हुई. कहीं-कहीं भारी और बहुत भारी बारिश हुई. जबकि एक-दो स्थानों पर अति भारी बारिश दर्ज की गई. राज्य में मानसून गतिविधि सक्रिय रही.

सबसे अधिक वर्षा 212.4 मीमी पाकरटंड सिमडेगा में दर्ज किया गया. सबसे अधिक उच्चतम तापमान 37 जिग्री सेसि गोड्डा में जबकि सबसे न्यूनतम तापमान 22.3 डिग्री रांची में दर्ज किया गया. आज भी राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना है. वहीं, 1 अगस्त को पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा में और 2 अगस्त को गुमला, सिमडेगा व लोहरदगा में बहुत भारी बारिश की संभावना है. इसे लेकर विभाग ने इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.

मौसम विभाग का पूर्नुमान:

  • 1 और 2 अगस्त राज्य के लगभग सभी जिलों में हल्क से मध्यम दर्जे की बारिश के आसार हैं.
  • 1 अगस्त को राज्य के पश्चिमी (गढ़वा, लातेहार, गुमला सिमडेगा) और निकटवर्ती मध्य भागों (पलामू, लातेहार, लोहरदगा व खूंटी) में कहीं कहीं भारी बारिश की संभावना है.
  • 2 अगस्त को राज्य के दक्षिणी भागों (पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा) और पश्चिमी भागों (गढ़वा, लातेहार, गुमला सिमडेगा) में कहीं कहीं भारी बारिश की संभावना है.
  • 1 अगस्त को पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और सिमडेगा में बहुत भारी बारिश की संभावना है.
  • 2 अगस्त को गुमला, सिमडेगा और लोहरदगा में बहुत भारी बारिश की संभावना है
  • 3 अगस्त तक इस दौरान कहीं-कहीं गर्जन और वज्रपात की भी आशंका है.

3 अगस्त तक येलो अलर्ट जारी

वज्रपात की आशंका देखते हुए मौसम विभाग ने 3 अगस्त तक येलो अलर्ट जारी कर लोगों को सावधान किया है. विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे इस मौसम में वे सुरक्षित स्थान पर ही शरण लें. भूलकर भी बारिश से बचने के लिए पेड़ों के नीचे ना रहें और बिजली के पोल से दूर रहें. विभाग ने किसानों से भी खास अपील की है कि वे खेतों में तब तक ना जाएं जब तक मौसम सामान्य नहीं हो जाता.

अभी क्या है मानसून की स्थिति

अभी, बंगाल की उत्तरी खाड़ी के ऊपर बना दबाव 25 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ गया, गहरे दबाव में बदल गया और आज सुबह 08.30 बजे IST, 21.2 डिग्री उत्तर और देशांतर 91.2 डिग्री पूर्व, खेपुपारा (बांग्लादेश) से लगभग 160 किमी पूर्व दक्षिण-पूर्व और 420 पर केंद्रित है, दीघा (पश्चिम बंगाल) से किमी पूर्व, इसके उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और आज, 1 अगस्त की शाम तक खेपुपारा के पूर्व के करीब बांग्लादेश तट को पार करने की संभावना है. इसके बाद, अगले 24 घंटों के दौरान इसके गंगटिकपश्चिम बंगाल में पश्चिम उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने की संभावना है. मानसून का पश्चिमी छोर घास के मैदान के समुद्र तल से हिमालय की तलहटी के करीब चला है और पूर्वी छोर अब गोरखपुर, पटना, श्रीनिकेतन कैनिंग से होकर गुजरा है और वहां से पूर्व दक्षिणपूर्व की ओर बांग्लादेश तट से दूर बंगाल की पूर्वोत्तर खाड़ी पर गहरे दबाव के केंद्र तक पहुंचा है.

झारखंड में अब भी 49 प्रतिशत कम बारिश

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में अब भी 44 प्रतिशत कम बारिश हुई है. एक जून से एक अगस्त तक 291.3 मिमी ही बारिश हुई है. जबकि, इस समय सामान्य बारिश रिकॉर्ड 517 मिमी है. झारखंड के 24 जिलों में चतरा जिला में सबसे कम बारिश हुई है. यहां अब भी 70 प्रतिशत बारिश कम हुई है. जबकि, सबसे अधिक बारिश साहिबगंज में हुई है. हालांकि, वह भी सामान्य से कम ही है. साहिबगंज में सामान्य से 10 प्रतिशत कम बारिश हुई है. हालांकि, बीते एक-दो दिन से मानसून सक्रिय रहने के कारण बारिश की कमी थोड़ी कम हुई है, लेकिन इससे यह नहीं कहा जा सकता कि किसानों की समस्या दूर हो जाएगी. उम्मीद की जा रही है कि झारखंड में मानसून सक्रिय रहने से बारिश की कमी दूर हो जाएगी.

मौसम विभाग ने 1 जून 2023 से 1 अगस्त 2023 तक हुई बारिश के आंकड़े जारी किये हैं. नीचे दिए चार्ट में आप देख सकते हैं कि अब तक झारखंड के किस जिले में कितनी बारिश हुई है-

बैंकों में लौट आए 2,000 रुपये के 88 फीसदी नोट, चलन में थे 3.56 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट

भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को कहा कि 2,000 रुपये मूल्य के करीब 88 फीसदी नोट 31 जुलाई तक बैंकों में वापस आ चुके हैं. रिजर्व बैंक ने एक बयान में कहा कि बैंकों से मिली सूचनाओं से पता चलता है कि 31 जुलाई तक 2,000 रुपये के कुल 3.14 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट चलन से वापस आ चुके हैं.

बता दें, RBI ने 19 मई को 2,000 रुपये मूल्य के नोट को चलन से बाहर करने की घोषणा की थी. इसके लिए उपभोक्ताओं को 30 सितंबर तक ये नोट बैंकों में जमा करने या वहां पर बदलने की सुविधा दी गई है. इसी क्रम में 31 जुलाई तक 3.14 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 2,000 रुपये के नोट बैंकों में वापस आ चुके हैं. अब 2,000 रुपये के सिर्फ 42,000 करोड़ रुपये मूल्य के नोट ही चलन में मौजूद हैं.

RBI ने जब इन नोटों को चलन से हटाने की घोषणा की थी, तब 3.56 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट चलन में मौजूद थे. गत 31 मार्च को इन नोटों का मूल्य 3.62 लाख करोड़ रुपये था. RBI ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में लौटकर आने वाले 2,000 रुपये के नोट में से करीब 87 फीसदी नोट बैंकों में जमा के रूप में आए हैं जबकि 13 फीसदी नोट अन्य मूल्यों के नोट से बदले गए हैं.

केंद्रीय बैंक ने लोगों से अनुरोध किया है कि वे किसी भी तरह की असुविधा से बचने के लिए अपने पास मौजूद 2,000 रुपये मूल्य के नोट सितंबर तक बैंकों में जाकर जमा कर दें या उन्हें दूसरे नोट से बदल लें.

8 जून तक 50 फीसदी नोट हुए थे वापसइससे पहले, आठ जून को मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद में दास ने कहा था कि 1.8 लाख करोड़ रुपये के 2,000 रुपये के नोट वापस आ गये हैं. यह चलन में मौजूदा 2,000 रुपये के कुल नोट का लगभग 50 फीसदी था. इसमें मोटे तौर पर 85 फीसदी बैंक शाखाओं में जमा हुए हैं जबकि अन्य को दूसरे मूल्य के नोट से बदला गया. गौरतलब है कि RBI ने 19 मई को 2,000 रुपये के नोट को चलन से बाहर करने फैसला लिया था. हालांकि, सेंट्रल बैंक ने कहा था कि ये नोट मार्केट में अभी चलन में बने रहेंगे, लेकिन बैंक अब 2,000 रुपये के नए नोट ग्राहकों को नहीं देंगे. 23 मई से बैंकों में इन नोटों के बदलने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. 

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