स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य में डॉयल 108 आपातकालीन सेवा के तहत एंबुलेंस की तैनाती के आदेश दिये गये हैं. पहले चरण में धनबाद, हजारीबाग, खूंटी, लोहरदगा एवं रामगढ़ के 69 बेस लोकेशन पर एंबुलेंस का ठहराव सुनिश्चित करते हुए उनके नियमित संचालन की मंजूरी दी गयी है.
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अपर निदेशक, अभियान ने इससे संबंधित पत्र को जारी कर दिया है. एनएचएम परिसर में खड़ी सभी 206 नयी एंबुलेंस को धीरे-धीरे तय जगहों पर तैनात किया जा रहा है. दूसरे चरण में रांची, गिरिडीह, दुमका, पलामू, पूर्वी सिंहभूम और पाकुड़ में एंबुलेंस सेवा शुरू की जायेगी, इसके लिए चालकों और पैरा इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन की भर्ती की जा रही है.
मालूम हो कि पुरानी कंपनी मेसर्स जिकित्जा हेल्थ केयर लिमिटेड की जगह पर अब सिकंदराबाद की नयी कंपनी जीबीके इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (इएमआरआइ ग्रीन हेल्थ सर्विसेज) इसकी जिम्मेदारी संभालेगी. पुरानी कंपनी जिकित्जा को 18 अगस्त की रात बारह बजे तक संंबंधित कंपनी को हैंडओवर करने को कहा गया है. एंबुलेंस सर्विस का लाभ घायलों, सामान्य मरीजों व प्रसूताओं को इमरजेंसी सेवा के तहत मिलेगा. झारखंड में 14 नवंबर 2017 से निःशुल्क 108 एंबुलेंस सेवा चलायी जा रही है. एमओयू के तहत 14 नवंबर 2022 को कंपनी का सरकार के साथ एग्रीमेंट समाप्त हो गया था.
कहां कितनी एंबुलेंस
जिला कुल लोकेशन
धनबाद 27
हजारीबाग19
रामगढ़ 10
लोहरदगा 06
खूंटी 06
अस्पतालों में 24 घंटे सेवा
संबंधित जिलों में किसी हादसे में घायल को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाना हो, परिवार में किसी बीमार व्यक्ति या बुजुर्गों को घर से स्वास्थ्य जांच करवाने के लिए अस्पताल ले जाना है या फिर गर्भवती महिला को डिलिवरी के लिए, लोगों को 108 नंबर पर कॉल करने पर केस के अनुसार तुरंत सेवा उपलब्ध होगी. सभी एंबुलेंस की सेवा 24 घंटे उपलब्ध करायी जा रही है.
झारखंड के मसीहा शहीद निर्मल महतो का मंगलवार को समूचे राज्य में शहादत दिवस मनाया जायेगा. वे सूदखोरी व अत्याचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के साथ अलग झारखंड राज्य के लिए हमेशा संघर्षरत रहे, जिससे आम जनता के दिलों में हमेशा बसे रहेंगे.
आज निर्मल दा के गांव उलियान में बतौर मुख्य अतिथि दिशोर गुरु शिबू सोरेन, राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कैबिनेट के कई मंत्री, सांसद, विधायक समेत झारखंड, बंगाल व ओडिशा के नेता व कार्यकर्ता उन्हें पूरे सम्मान के साथ श्रद्धांजलि देने के लिए आ रहे हैं. उनके संघर्ष से जुड़ी यादों को ताजा करती लाइफ@जमशेदपुर के लिए कुमार आनंद की रिपोर्ट.
घर से बुला कर किया गया था हमला
शहीद निर्मल महतो के संघर्ष को याद करती हुईं उनकी बड़ी बहन शांतिबाला महतो ने बताया कि 80 के दशक में सूदखोरी व अन्य सामाजिक अत्याचार, शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करने पर उन पर हमला किया गया था. टुसू पर्व के एक दिन पूर्व 13 जनवरी को घर से बुलाकर कदमा शास्त्रीनगर क्वार्टर में निर्मल महतो पर भुजाली से वार में उनकी बांह, पेट व पीठ में गहरे जख्म हो गये थे, लेकिन वह किसी तरह भाग कर बच गये.
भागने के क्रम में घायल अवस्था में बेहोश भी हो गये थे. घटना के बाद उन्हें पांचवें नंबर के भाई सुधीर महतो व चचेरा भाई चीनू महतो ने पहले साइकिल से उठाकर अस्पताल ले जाना चाहा, लेकिन निर्मल के बेहोश होने के कारण किराये का टैक्सी लेकर टीएमएच ले गये. करीब एक माह तक टीएमएच में इलाज कराने के बाद उनकी जान बची थी. अस्पताल से लौटने के बाद उन्होंने पुन: सूदखोरी के खिलाफ संघर्ष शुरू किया. यह संघर्ष उनके मरने के दिन यानी 8 अगस्त 1987 तक जारी रहा.
सूदखोरी के खिलाफ कानून सच्ची श्रद्धांजलि
अलग झारखंड राज्य बनने के 20 वर्ष बाद हेमंत सोरेन सरकार द्वारा सूदखोरी के खिलाफ कानून बनाकर गरीबों को सुरक्षा देने का काम करने पर खुशी जताते हुए कहा कि यह उनके भाई को सच्ची श्रद्धांजलि है. कानून बनने से कोई गरीब, मजदूर, कामगारों पर सूदखोर किसी प्रकार का कोई शोषण व अत्याचार नहीं कर सकेंगे.
उलियान ही नहीं, जमशेदपुर सहित कई जगहों से लोग बुलाते थे
निर्मल महतो सत्य व न्याय प्रिय थे. उलियान गांव में किसी भी घर, परिवार, समाज में झगड़ा, विवाद होने पर उन्हें लोग सम्मानपूर्वक बुलाते थे. अधिकांश समस्या को बैठकर बातचीत के माध्यम से सुलझाने का काम करते थे. न्यायप्रिय छवि के कारण कम समय में जमशेदपुर ही नहीं, बल्कि बंगाल, ओडिशा में लोकप्रिय हो गये थे. राजनीति स्तर के अलावा सामाजिक स्तर के अधिकांश कार्यक्रम, सभा में बढ़कर हिस्सा लेते थे.
किशोरावस्था में बेलबॉटम व बाद में कुर्ता-पायजामा पहनते थे
बड़ी बहन ने बताया कि आठ भाइयों में निर्मल महतो किशोरावस्था में अधिकांश समय बेलबॉटम व बाद में कुर्ता-पायजामा पहनना पसंद करते थे. जाड़े के दिनों में कुर्ता के ऊपर हमेशा साल ओढ़ते थे. पिता जब भी एक थान का कपड़ा सभी भाइयों व बहन के लिए लाते थे, तब निर्मल एक जैसा कपड़ा कभी नहीं पहनते थे. बाद में अपने लिए अलग कपड़ा लेकर ही शांत होते थे.
बचपन से ही सादा भोजन करते थे
निर्मल महतो बचपन से ही शाकाहारी खाना खाते थे. सब्जी में झाल बिल्कुल नहीं खाते थे. खाने में चावल, रोटी में गाय का घी हमेशा लेते थे. घर में उसके लिए सादा खाना बनाकर पहले रख दिया जाता था और घर में आने पर पूछकर दिया जाता था. एक बार गलती से झाल वाली सब्जी खाने में निर्मल बेहोश तक हो गये थे. फिर घर पर उन्हें कभी भी झाल सब्जी या झालवाली कोई चीज नहीं दी गयी.
निर्मल महतो की हत्या की खबर ने राज्य के लोगों को झकझोर दिया था
निर्मल महतो महज 37 वर्ष की उम्र में ही राजनीतिक क्षितिज के शीर्ष पर पहुंच गये थे. अचानक बिष्टुपुर चमरिया गेस्ट हाउस के समीप 8 अगस्त 1987 को निर्मल महतो की हत्या कर दी गयी. इस खबर ने लोगों को झकझोर दिया था. निर्मल को जानने व मानने वाले लोगों की स्थिति काटो तो खून नहीं वाली हो गयी थी. हत्या के दो दिन बाद 10 अगस्त 1987 को टीएमएच से उलियान उनके घर तक उन्हें देखने व श्रद्धांजलि देने वालों का जनसैलाब जमशेदपुर में अद्वितीय रहा था. उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि बड़ी संख्या में झारखंड के लोग अपने घरों में उनकी पूजा तक करते हैं.
-शैलेंद्र महतो, निर्मल महतो के साथी सह पूर्व सांसद, जमशेदपुर
निर्मल न किसी से गलत बात करते थे, न गलत सुनते और सहते थे
निर्मल में एक बात सबसे गौर करने वाली ये थी कि वह न गलत बात करते थे, न गलत किसी की सुनते-सहते थे. गलत के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार रहते थे. कहीं से कोई गलत करने की सूचना या शिकायत मिलने पर तुरंत वहां पहुंचकर गलत के खिलाफ संघर्ष करने से पीछे नहीं रहते थे. राजनीतिक क्षेत्र में ही नहीं, सामाजिक जीवन में कम समय में ही लोगों के दिलों में राज करने वाले निर्मल के दुर्लभ साथ को कभी भूल नहीं सकता हूं. निर्मल को जानने वाले उससे कभी दूर हो नहीं सकते हैं. यही कारण है कि निर्मल झारखंड के लोगों के दिलों में काबिज हैं. उनकी हत्या के बाद झारखंड अगल राज्य के आंदोलन में तेजी आयी थी. इसे राजनीतिक दृष्टिकोण में निर्णायाक मोड़ मानते हैं.
– कृष्णा मार्डी, निर्मल महतो के साथी सह पूर्व सांसद, सिंहभूम
कोविड काल में नहीं हुआ बड़ा आयोजन, इस बार होगा भव्य समारोह
कोविड महामारी को लेकर भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुपालन के कारण पिछले तीन वर्षों से शहीद निर्मल महतो का शहादत दिवस व जयंती समारोह का कार्यक्रम भव्य रूप से नहीं हो पा रहा था. इस बार कदमा उलियान में पूर्व की भांति शहादत दिवस पर मुख्य समारोह आयोजित किया गया है. इसमें श्रद्धांजलि व जनसभा भव्य रूप से होगा. इसमें राज्य सहित ओडिशा व बंगाल के लोग शामिल होंगे.
एसएसपी प्रभात कुमार के काम की खूब वाहवाही होती है. इसी क्रम में उनके काम करने का स्टाइल सोमवार देर रात देखने को मिला, जो बहुत ही सराहनीय है. जहां सीतारामडेरा थाना उरांव बस्ती में जिला पुलिस ने नशे के खिलाफ मिशन छेड़ रखा है. इसी कड़ी में पुलिसिया कार्रवाई में रविवार रात खूब बवाल हुआ था. थाना पर पथराव भी हुआ. पुलिस ने पथराव और हंगामा करने के मामले में सोमवार को पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
इधर, मिशन “दाग हटाना” के तहत सोमवार देर रात एसएसपी प्रभात कुमार, धालभूम के एसडीओ पीयूष सिन्हा पुलिस और प्रशासनिक अमले के साथ सीतारामडेरा उरांव बस्ती पहुंचे. जहां उरांव बस्ती में पैदल मार्च किया. इस दौरान एसएसपी ने बस्ती के कई घरों में छापामारी की. पुलिस बल ने कई घरों के लोगों को देर रात जगाया और उनके घर की तलाशी ली. कुछ घरों में पुलिस ने देसी शराब की बोतल और बैलेंस भी बरामद किया, जिसे उत्पाद विभाग को सौंप दिया गया है.
शराब भट्टी के अलावा सड़क पर खड़ी गाड़ियों की जांच भी एसएसपी ने की. बारी बारी से जिस घर के सामने गाड़ी खड़ी थी. उस घर के लोगों को चाबी लेकर बुलाया गया. उसके बाद चाबी से गाड़ी को खोलकर स्टार्ट किया गया. जांच के बाद घर के लोगों को वापस नहीं दिया गया. जांच के दौरान पुलिस नंबर प्लेट की एक गाड़ी को पुलिस लाइन भेज दिया. छापामारी के दौरान सड़क से गुजरने वाले या बस्ती में घूमने वाले लोगों की भी जांच की गई, हालांकि पूरी छापामारी के दौरान किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई.
अवैध शराब को लेकर लगातार यह अभियान जारी रहेगा. एसएसपी ने लोगों से बातचीत की तो उन्हें बताया गया कि किसी की हिम्मत नहीं होती. यहां कार्रवाई करने की. मालूम हो कि इस तरह का अभियान एक बार बर्मामाइंस ट्यूब गेट हरिजन बस्ती में तत्कालीन सिटी एसपी ने चलाया था. तब वहां पुलिस को इसी तरह कि चुनौती से जूझना पड़ा था.
हालांकि आजतक उक्त बस्ती में भी खुलेआम अवैध कारोबार संचालित हो रहा है. सीतारामडेरा उरांव बस्ती की तर्ज पर ही उलीडीह, परसुडीह, बिरसानगर, बागबेड़ा, सुंदरनगर में भी कई टोले ऐसे हैं जहां दिन रात अवैध शराब का कारोबार फल फूल रहा है. वहां पुलिस के हाथ कब तक पहुंचते हैं. यह देखने वाली बात होगी.
एसएसपी ने बताया कि उरांव बस्ती शराब के अवैध कारोबार को लेकर पूरे शहर में बदनाम है. यहां देर रात तक लोग शराब पीते हैं और पिलाते हैं. ऐसे में इस पर रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है. शराब बेचने वाले लोगों से अपील की जा रही है कि वह इस कारोबार को छोड़कर सरकार से मिलने वाली योजनाओं से जुड़े और समाज के मुख्य धारा से जुड़कर बेहतर जिंदगी जीने का प्रयास करें. उन्होंने बताया कि रविवार देर रात थाना घेरने पहुंचे कुछ स्थानीय नेताओं के खिलाफ प्राथमिक की दर्ज की गई है और कुछ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है. एसएसपी ने बस्ती के लोगों से अपील की है कि वह इस अवैध कारोबार को छोड़ दें, ताकि बस्ती का माहौल ठीक हो व उनके बच्चे पढ़-लिख सके. जिला प्रशासन के द्वारा पहल करते हुए उन्हें विभिन्न योजनाओं से जोड़ा जाएगा ताकि वह आप आ जीविकोपार्जन कर सके.
तख्त श्री हरमंदिर पटना साहिब के प्रबंधन से झारखंड के 124 गुरुद्वारों के नाम काटे जाने पर विधायक सरयू राय ने बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है और इस निर्णय में सुधार की मांग की है।
विधायक का कहना है कि श्री हरमंदिरजी पटना साहिब के पर्यवेक्षण के लिए एक 15 सदस्यीय समिति गठित है। 1955 में तख्त श्री हरमंदिरजी पटना साहिब प्रबंधन समिति में जिस समय दक्षिण बिहार की सिख सभाओं और सोसाइटी द्वारा एक सदस्य निर्वाचित होने का प्रावधान किया गया था, उस समय झारखंड और बिहार एक थे। समिति के लिए सदस्य निर्वाचन में झारखंड के गुरुद्वारों की भी भागीदारी थी। समिति के एक सदस्य के निर्वाचन के लिए चिन्हित दक्षिण बिहार के झारखंड क्षेत्र में कुल 124 गुरुद्वारे हैं, जबकि शेष क्षेत्र में मुश्किल से डेढ़ दर्जन गुरुद्वारे हैं।
संविधान के अनुसार, प्रबंधन समिति का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है, जो पूरा हो गया है। इसके बाद सदस्यों ने बैठक कर दक्षिण बिहार से निर्वाचित होने वाले सदस्यों में से राज्य के सिखों की भागीदारी समाप्त कर दी, जो अनुचित है। जब अमृतसर, कोलकाता, लखनऊ आदि की भागीदारी सदस्य के रूप में समिति में रह सकती है, तो झारखंड के प्रतिनिधि का भी भागीदारी अवश्य होनी चाहिए।
भगवान सिंह से सहयोग से झारखण्ड की अगुवाई करेंगे शैलेन्द्र सिंह
हल निकलने की उम्मीद; नहीं निकलने पर आंदोलन के लिए होंगे बाध्य: भगवान सिंह
प्रबंध समिति से मिल रखेंगे अपने अधिकार की बात: शैलेन्द्र सिंह पटना साहिब संचालन समिति द्वारा झारखण्ड के सिखों को दक्षिण बिहार निर्वाचन क्षेत्र से बाहर किये जाने पर सीजीपीसी चुप न बैठते हुए अगली रणनीति के तहत मंगलवार को पटना साहिब रवाना होगी और अपनी बात मौजूदा प्रबंध समिति सामने रखेगी। सोमवार को इस सिलसिले में सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (सीजीपीसी) कार्यालय में कोल्हान के सभी गुरुद्वारों के प्रतिनिधियों संग इसी मुद्दे पर एक अहम बैठक रखी गयी थी। जिसकी अध्यक्षता सरदार भगवान सिंह ने की। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कल यानि मंगलवार को अहले सुबह सीजीपीसी सहित अन्य गुरुद्वारों के प्रतिनिधि तख्त श्री हरमंदिर साहिब, पटना के लिए प्रस्थान करेंगे। वहां पहुंचकर तख्त श्री हरमंदिर साहिब, पटना के निवर्तमान अध्यक्ष सरदार जगजीत सिंह सोही से मिलकर एक ज्ञापन सौंपा जायेगा। यह भी निर्णय लिया गया कि इस मुद्दे पर झारखण्ड राज्य गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के प्रधान सरदार शैलेन्द्र सिंह सीजीपीसी के प्रधान सरदार भगवान सिंह के सहयोग से पटना साहिब में झारखण्ड के सिखों की अगुवाई करेंगे।
बैठक उपरांत सरदार भगवान सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस समस्या का कोई न कोई हल अवश्य निकलेगा यदि नहीं निकलता है तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि केवल कोल्हान ही नहीं बल्कि बोकारो, रांची और धनबाद से भी प्रतिनिधि पटना साहिब पहुंच रहे हैं। सीजीपीसी के चेयरमैन और झारखण्ड राज्य गुरुद्वारा कमिटी के अध्यक्ष सरदार शैलेंद्र सिंह का कहना है कि सरदार जगजीत सिंह सोही से मिलकर झारखण्ड के सिखों के अधिकार की बात रखी जाएगी। शैलेन्द्र सिंह ने आगे कहा की सोही के अलावा पटना जिला प्रशासन को भी ज्ञापन सौंपा जायेगा।
भगवान सिंह ने सीधे-सीधे कहा कि सीजीपीसी चाहती है कि हल शांतिपूर्ण तरीके से निकले ऐसा नहीं होने पर लोकतान्त्रिक आंदोलन और धरना प्रदर्शन ही एकमात्र रास्ता बचता है। बैठक में प्रधान भगवान सिंह केअलावा चेयरमैन एवं झारखंड प्रदेश गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान सरदार शैलेंद्र सिंह, चेयरमैन गुरमीत सिंह तोते, उपाध्यक्ष चंचल सिंह, महासचिव अमरजीत सिंह-गुरचरण सिंह बिल्ला, अकाली दल के सुखदेव सिंह खालसा, रविंदर सिंह, कुलविंदर सिंह पन्नु, रविंदर सिंह, लखविंदर सिंह, दलबीर सिंह, गुरनाम सिंह बेदी, सुखदेव सिंह बिट्टू, रणजीत सिंह माथारू, प्रकाश सिंह, त्रिलोक सिंह, सलविंदर सिंह, सुजीत सिंह, परमजीत सिंह काले, बलदेव सिंह, जगजीत सिंह गांधी, कुलविंदर सिंह, जोगा सिंह, इंदरजीत सिंह, सुखबीर सिंह, हरजिंदर सिंह, हरभजन सिंह, परमजीत सिंह विक्की, ज्ञानी कुलदीप सिंह, जसवंत सिंह, दर्शन सिंह काले, जोगिंदर सिंह, सतनाम सिंह घुम्मन, ओंकार सिंह एवं हरविंदर सिंह शामिल हुए।
जमशेदपुर : जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित द टिनप्लेट न्यू काली मंदिर के प्रांगण में बाबा भोलेनाथ का पूजनकर जलाभिषेक किया गया. यह कार्यक्रम सावन के पांचवे सोमवार को किया गया. वहीं इसके पश्चात जरूरतमंदों के बीच साड़ी और धोती का वितरण किया गया. इसके साथ ही अथिति सम्मान और भोग का वितरण किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी, जंबू अखाड़ा के संरक्षक बंटी सिंह, भाजपा वरिष्ठ नेता पवन अग्रवाल, भाजपा गोलमुरी मंडल अध्यक्ष अजय सिंह, टिनप्लेट यूनियन महामंत्री मनोज सिंह, इंटक नेता ददन सिंह उपस्थित रहे.
कार्यक्रम की शुरुआत में सभी अतिथियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया, फिर बाबा भोलेनाथ का पूजन कर, वहां उपस्थित जरूरतमंदों के बीच 51 साड़ी और धोती का वितरण किया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने में मंदिर कमेटी के महामंत्री खोखन चकलाधार, विश्वजीत, मनोज पाठक, प्रीतपाल सिंह, आदि मंदिर के सदस्य गण उपस्थित रहे.
जमशेदपुर : बीर खालसा दल के अध्यक्ष और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रविंदर सिंह रिंकू ने तख्त श्री पटना साहिब से झारखंड के सिखों के प्रतिनिधित्व को खत्म किये जाने पर रोष जताते हुए कहा कि यह पूरी तरह से अनैतिक है और झारखंड के सम्पूर्ण सिख समाज इसकी घोर निंदा करता है।
उन्होंने ने झारखंड के सभी प्रतिनिधियों से आग्रह करते हुए कहा है कि झारखण्ड में इतनी ज्यादा सिख जनसंख्या होने के बावजूद तख्त श्री पटना साहिब से खत्म कर देना एक गंभीर मामला है और इसके लिए सभी प्रतिनिधियों को एक मंच पर आकर इसका विरोध करना होगा और विचार विमर्श करते हुए आगे की कार्रवाई की शुरुआत करनी होगी। हमें अपना हक़ के लिए आवाज़ बुलंद करना ही होगा और एक साथ करना होगा।
जमशेदपुर : शहर के उलीडीह थाना क्षेत्र के रामनगर चौक पर सोमवार को दिन-दहाड़े शराब माफियाओं ने मनीष यादव को गोली मारी गयी। घटना में मनीष के कंधे और पेट में गोली लगी है। घटना के बाद उसे इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उसकी हालत बिगड़ने पर टीएमएच रेफर कर दिया गया। सूचना मिलने के बाद पुलिस पहुंची और पूरे मामले की जांच कर रही है।
शराब पीकर घर के पास कर रहा था हंगामा
मनीष यादव का दोस्त कुंदन कुमार ने बताया कि घटना के समय वह भी मौजूद था। उसका कहना है कि घटना के समय शराब माफिया विक्रांत, विपुल व अन्य शराब पीकर हंगामा कर रहे थे। इसका ही विरोध मनीष यादव ने किया था। इस बीच ही विक्रांत ने हथियार निकाला और दो गोली मनीष को मार दी।
शराब माफियाओं की शिकायत करने पर नहीं सुनती है पुलिस
कुंदन का कहना है कि आरोपियों की शिकायत बस्ती के लोगों ने कई बार उलीडीह थाने पर जाकर की है, लेकिन पुलिस इस मामले में किसी तरह की कार्रवाई नहीं करती है। कुंदन का कहना है कि सभी आरोपी घर के पास ही अवैध रूप से शराब बनाने और बेचने का काम करते हैं।
पड़ोस के ही रहनेवाले हैं सभी आरोपियों
आरोपियों के बारे में बताया गया कि सभी शंकोसाई रोड नंबर 5 के ही रहनेवाले हैं। जिसे गोली लगी है और जिसने गोली मारी है सभी पड़ोसी ही है। घटना के बाद पुलिस टीएमएच पहुंची और मनीष से पूछताछ करने के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिये छापेमारी कर रही है।
बेरमो : तख्त श्री पटना साहिब में झारखंड के सिखों का प्रतिनिधित्व खत्म कर दिए जाने के बाद झारखण्ड के सिख समुदाय में एक रोष देखने को मिल रहा है। सिख समाज के प्रतिनिधियों ने अपने हक़ के लिए आवाज़ तेज कर दी है। इस बाबत सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, बेरमो के अध्यक्ष गुरमीत सिंह ने कहा कि तख्त श्री पटना साहिब में झारखंड के गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का प्रतिनिधित्व खत्म कर दिया गया जो काफी गंभीर और गलत है। हम झारखंड प्रदेश के प्रबंधक कमेटियों को पहले से कहते आ रहे हैं कि इस मामले में ध्यान दें, आखिरकार रविवार को वही हुआ जिसका अंदेशा था। (जारी…)
गुरमीत सिंह ने झारखंड के सभी सिख प्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा कि अब भी झारखंड के सभी सिख प्रतिनिधि एक हो कर इस मामले को गंभीरता से विचार करें एवं अपने हक के लिए मिलकर लड़े।
राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाल हो गई है। लोकसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर दी है। बता दें कि राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद उनकी लोकसभा सदस्यता वापस मिलने के दरवाजे खुल गए थे। (जारी…)
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुक्रवार को ‘मोदी’ उपनाम टिप्पणी मामले में उनकी सजा पर रोक लगाने के बाद लोकसभा सचिवालय ने वायनाड से सांसद राहुल गांधी की सदस्यता बहाल कर दी। मार्च 2023 में उन्हें निचले सदन से अयोग्य घोषित कर दिया गया था।