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तीसरी धारा न्यूज
7 अगस्त 2026, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क:
भारतीय राजनीति और न्याय व्यवस्था में करीब चार दशकों तक सबसे चर्चित और विवादित विषयों में से एक रहे ‘बोफोर्स घोटाले’ का आखिरकार पूर्ण रूप से कानूनी अंत हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने वर्ष 2005 के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अंतिम लंबित याचिका को खारिज कर दिया है।
अदालत के इस फैसले के साथ ही हिंदुजा बंधुओं और स्वीडिश हथियार निर्माता कंपनी एबी बोफोर्स (AB Bofors) से जुड़े इस मामले को दोबारा खोलने की तमाम कोशिशों पर पूरी तरह विराम लग गया है। शीर्ष अदालत की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए इतने लंबे अंतराल के बाद मामले में आगे की सुनवाई की औचित्यहीनता पर सवाल उठाया। इस निर्णय के साथ ही बोफोर्स केस की फाइल हमेशा के लिए बंद होकर इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है।
बोफोर्स विवाद की नींव 24 मार्च 1986 को रखी गई थी, जब तत्कालीन भारत सरकार ने स्वीडन की कंपनी एबी बोफोर्स के साथ 155 एमएम की 400 हॉवित्जर तोपों की खरीद के लिए लगभग 1,437 करोड़ रुपये का करार किया था।
हालांकि, इसके अगले ही वर्ष 1987 में स्वीडिश रेडियो की एक रिपोर्ट ने भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस रक्षा सौदे को हासिल करने के लिए कंपनी ने भारत के शीर्ष राजनीतिज्ञों और रक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को करीब 64 करोड़ रुपये की अवैध दलाली (रिश्वत) दी थी।
स्वीडिश रेडियो के खुलासे के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और उनकी सरकार सीधे तौर पर विपक्ष के निशाने पर आ गई। इस राजनीतिक घमासान के बीच तत्कालीन रक्षा मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
बोफोर्स के मुद्दे ने 1989 के आम चुनावों में केंद्रीय भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस को सत्ता गंवानी पड़ी और वीपी सिंह देश के प्रधानमंत्री बने। यद्यपि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी सहित कई प्रमुख हस्तियों पर आरोप लगे, लेकिन जांच एजेंसियां अदालत में इन आरोपों को साबित करने वाले पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सकीं।
मामले की जांच सीबीआई ने जनवरी 1990 में प्राथमिकी दर्ज कर शुरू की थी। लगभग एक दशक की लंबी जांच के बाद 1999 में चार्जशीट दाखिल की गई। हालांकि, 31 मई 2005 को दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंदुजा बंधुओं और बोफोर्स कंपनी के खिलाफ जारी सभी आपराधिक कार्यवाहियों को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि अभियोजन पक्ष के पास आरोपों को सिद्ध करने के लिए कोई ठोस आधार या सबूत मौजूद नहीं है।
दिल्ली हाईकोर्ट के 2005 के फैसले के खिलाफ सीबीआई ने भी 2018 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने 4,522 दिनों की अत्यधिक देरी का पर्याप्त कारण न होने के आधार पर अपील को खारिज कर दिया था।
अब, सीबीआई और अन्य पक्षों की ओर से केस को दोबारा पुनर्जीवित करने की अंतिम कानूनी कोशिश भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई है। चार दशकों तक देश की राजनीति, रक्षा सौदों की पारदर्शिता और सत्ता की जवाबदेही पर बहस का केंद्र रहा यह मामला अब आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुका है।
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7 अगस्त 2026, जमशेदपुर।
जमशेदपुर (ब्यूरो):
जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), जमशेदपुर द्वारा सुंदरनगर क्षेत्र में मोबाइल वैन के माध्यम से एक विशेष विधिक जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। अभियान के दौरान आम लोगों और स्कूली बच्चों को नालसा (NALSA) की निःशुल्क कानूनी सलाह एवं परामर्श योजनाओं के साथ-साथ आपातकालीन स्थिति में काम आने वाले विभिन्न सरकारी हेल्पलाइन नंबरों की विस्तृत जानकारी दी गई।
डीएलएसए, जमशेदपुर के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार पांडेय के दिशा-निर्देशन में यह जागरूकता कार्यक्रम सुंदरनगर स्थित मध्य विद्यालय, जयपाल सिंह मुंडा इंस्टीट्यूट ऑफ एडुकेशन (इंग्लिश मीडियम हाई स्कूल) तथा करनडीह में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों और अधिकार मित्रों ने उपस्थित लोगों को संकट के समय तुरंत मदद पाने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबर साझा किए:
इस जागरूकता अभियान में लीगल एड डिफेंस कौंसिल की सदस्य रंजना पांडेय, पीएलवी (पारा लीगल वालंटियर) सह अधिकार मित्र दिलीप जायसवाल, सुनील पांडेय एवं अन्य सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। वक्ताओं ने उपस्थित छात्रों और नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि कानूनी जानकारी के अभाव में कई बार लोग अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। डीएलएसए का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और कानूनी सहायता पहुंचाना है।
अभियान के दौरान पम्फलेट बांटकर लोगों को बाल अधिकार, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव और वरिष्ठ नागरिकों के कानूनी अधिकारों के प्रति सजग रहने की अपील की गई।
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7 अगस्त 2026, जमशेदपुर।
न्यूज डेस्क:
अगर आपने कभी पर्सनल लोन, होम लोन या कार लोन लिया है और किसी वजह से आपकी EMI मिस हो गई है, तो रिकवरी एजेंटों के कड़े और मनमाने रवैये से आप जरूर वाकिफ होंगे। कई मामलों में तो रिकवरी एजेंट हद पार करते हुए ग्राहकों का पर्सनल मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप तक सॉफ्टवेयर के जरिए लॉक कर देते थे। लेकिन अब लोन डिफॉल्टर्स और आम ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस तरह के हथकंडों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
RBI के नए नियमों के अनुसार, सिर्फ लोन न चुका पाने की वजह से कोई भी बैंक या फाइनेंस कंपनी (NBFC) आपका पर्सनल फोन, टैबलेट या लैपटॉप ब्लॉक नहीं कर सकती। रिजर्व बैंक का यह आदेश लोन रिकवरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मानवीय बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
बीते कुछ समय से रिजर्व बैंक को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि रिकवरी एजेंट लोन वसूली के लिए गलत रास्ते अपना रहे हैं। इसमें ग्राहकों को डराना-धमकाना, सोशल मीडिया के जरिए मानसिक दबाव बनाना, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना और रिमोट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर डिजिटल डिवाइसेज को लॉक कर देना शामिल था। इन्हीं गंभीर शिकायतों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए RBI ने लोन रिकवरी गाइडलाइंस को संशोधित किया है। यह नई नियमावली 1 जनवरी 2027 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू कर दी जाएगी।
अगर किसी व्यक्ति ने सामान्य पर्सनल लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन या होम लोन लिया है और किसी कारणवश किश्त भरने में असमर्थ है, तो बैंक उसके निजी इस्तेमाल वाले मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर को लॉक या ब्लॉक करने के लिए किसी भी तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं कर सकता।
RBI ने इस नियम में एक स्पष्ट अपवाद (Exception) भी रखा है:

डिवाइस लोन डिफॉल्ट के मामले में अगर फोन पर रिस्ट्रिक्शन लगाए भी जाते हैं, तब भी RBI के नियमानुसार निम्नलिखित बेसिक सुविधाएं किसी भी स्थिति में बंद नहीं की जा सकतीं:
अर्थात, आपातकालीन और सुरक्षा से जुड़ी सेवाएं हर हाल में एक्टिव रहेंगी ताकि ग्राहक किसी बड़ी विपत्ति में न पड़े।
RBI ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे रिकवरी एजेंटों के साथ ग्राहकों या गारंटरों की केवल उतनी ही पर्सनल डिटेल्स शेयर करें, जितनी रिकवरी प्रक्रिया के लिए बेहद जरूरी हो। बिना वजह डेटा शेयरिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
इसके अलावा, डिवाइस लोन मामलों में एक्सेस सीमित करने के लिए जिस भी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाएगा, उसका डिवाइस बनाने वाली मूल कंपनी (OEM) या ऑपरेटिंग सिस्टम से आधिकारिक रूप से सर्टिफाइड होना अनिवार्य होगा।
मई 2026 में जारी किए गए ड्राफ्ट गाइडलाइंस के बाद अब RBI ने यह फाइनल नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले इन दिशानिर्देशों से डिजिटल रिकवरी के नाम पर होने वाली मनमानी पर पूरी तरह अंकुश लगेगा।
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तीसरी धारा न्यूज | 7 अगस्त 2026 | जमशेदपुर
नई दिल्ली/जमशेदपुर: देश भर में चर्चित नीट यूजी (NEET UG) पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच टीम ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। सीबीआई ने अदालत में 94 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें यह विस्तृत ब्योरा दिया गया है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के एक्सपर्ट्स ने बेहद साधारण तरीके से परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक किया था।
एनटीए के 3 सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स की भूमिका आई सामने
सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, नीट यूजी परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र तैयार करने और मॉडरेशन की प्रक्रिया से जुड़े तीन मुख्य विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) ने इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। इन मुख्य आरोपियों में:
मामले की जांच के तहत गिरफ्तार किए गए कुल 13 आरोपियों में ये तीनों विशेषज्ञ भी शामिल हैं।
याद करके पर्चियों पर उतारे सवाल, NCERT की किताबों में किए मार्क
चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि प्रश्न पत्र के मॉडरेशन और अनुवाद की प्रक्रिया के दौरान इन विशेषज्ञों के पास आधिकारिक पहुंच थी। इसका फायदा उठाते हुए तीनों एक्सपर्ट्स रोज आसान और महत्वपूर्ण सवालों को याद कर लेते थे। रात में जब वे अपने कमरों में लौटते, तो याद किए गए सवालों को कागज की पर्चियों पर लिख लेते थे।
इसके बाद, उन्होंने NCERT की संबंधित किताबों के अध्यायों और पैराग्राफों पर निशान लगाए। फिर कोचिंग नेटवर्क और अपने भरोसेमंद बिचौलियों के माध्यम से परीक्षा की तारीख से पहले ही इन प्रश्नों को छात्रों तक पहुंचा दिया गया।
इस मामले में पहले भी बड़े पैमाने पर छात्रों का प्रदर्शन हुआ था और पुनरपरीक्षा (Re-exam) आयोजित की गई थी। अब सीबीआई द्वारा दाखिल इस 94 पन्नों की चार्जशीट ने परीक्षा प्रणाली और एनटीए की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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तीसरी धारा न्यूज | 6 अगस्त 2026, जमशेदपुर
भारतीय रेलवे ने AC कोचों में RAC (Reservation Against Cancellation) टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत दी है। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि RAC टिकट धारकों को भी कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों की तरह चादर, कंबल, तकिया और तौलिया समेत पूरा बेडरोल किट उपलब्ध कराया जाए।
4 अगस्त को सभी जोनल रेलवे को भेजा गया पत्र
4 अगस्त 2026 को रेलवे बोर्ड द्वारा सभी जोनल रेलवे के महाप्रबंधकों को जारी किए गए पत्र में निर्देश दिया गया है कि AC चेयर कार को छोड़कर सभी AC श्रेणियों (1AC, 2AC, 3AC और 3-इकोनॉमी) में यात्रा कर रहे प्रत्येक RAC यात्री को बेडरोल किट देना अनिवार्य है।
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया कि AC श्रेणियों के किराए में बेडरोल का शुल्क पहले से ही शामिल रहता है, इसलिए RAC यात्रियों को इस सुविधा से वंचित रखना नियमों के खिलाफ है। बोर्ड को विभिन्न माध्यमों से यह शिकायतें मिल रही थीं कि ट्रेन में RAC यात्रियों को या तो बेडरोल दिया ही नहीं जा रहा है या फिर अधूरा सामान दिया जा रहा है। इन्हीं शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
2009 के सर्कुलर का दिया गया हवाला
रेलवे बोर्ड ने अपने निर्देश में 23 सितंबर 2009 को जारी कमर्शियल सर्कुलर संख्या 50/2009 का हवाला देते हुए याद दिलाया कि यह नियम वर्षों से लागू है। बोर्ड ने कहा कि AC कोच में सफर करने वाले हर RAC यात्री को कन्फर्म यात्री की तरह ही समान सुविधाएं सुनिश्चित कराई जाएं।
जानें किस कोच में कितने RAC यात्री होते हैं समायोजित
साल 2016 में रेल मंत्रालय द्वारा बढ़ाए गए कोटे के अनुसार, ट्रेनों के विभिन्न कोचों में RAC सीटों का आवंटन इस प्रकार होता है:
कैंसर मरीजों के लिए इमरजेंसी कोटा की सुविधा बरकरार
दूसरी ओर, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में जानकारी दी कि गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों, विशेषकर कैंसर रोगियों को इलाज के लिए तत्काल यात्रा हेतु इमरजेंसी कोटा (EQ) उपलब्ध कराया जाता है, ताकि उन्हें यात्रा के लिए कन्फर्म टिकट आसानी से मिल सके।
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6 अगस्त 2026, लातेहार
झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ पुलिस और जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज होती दिख रही है। इसी कड़ी में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने लातेहार जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मनिका प्रखंड अंतर्गत बड़काडीह पंचायत के पंचायत सचिव नागेश्वर रजक को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, बड़काडीह पंचायत में जारी एक विकास योजना से जुड़े कार्य को आगे बढ़ाने और कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बदले पंचायत सचिव नागेश्वर रजक द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही थी। पीड़ित द्वारा इसकी शिकायत एसीबी (ACB) से की गई थी।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने गुप्त रूप से मामले का सत्यापन कराया। आरोप सही पाए जाने पर टीम ने पंचायत सचिव को पकड़ने के लिए रणनीतिक रूप से ट्रैप बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने तय राशि के अनुसार ₹10,000 आरोपी सचिव को सौंपे, पास में ही मुस्तैद ACB की टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथ धर दबोचा।
गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम आरोपी पंचायत सचिव को अपने साथ ले गई। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया और पूछताछ की जा रही है।
एसीबी की इस अचानक हुई कार्रवाई से मनिका प्रखंड सह अंचल कार्यालय और आसपास के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
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6 अगस्त 2026, सरायकेला
सरायकेला-खरसावां जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ (CRPF), 203 कोबरा (CoBRA) बटालियन और एसएसबी (SSB) की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भाकपा माओवादी संगठन के कुख्यात जोनल कमांडर रवि सिंह सरदार उर्फ सागर सिंह सरदार समेत 3 उग्रवादियों को गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तार अन्य उग्रवादियों में पश्चिम बंगाल-झारखंड-ओडिशा रीजनल कमेटी का सक्रिय सदस्य मदन महतो और रवि सिंह सरदार की पत्नी मीना पहाड़िया उर्फ नेपू पहाड़िया शामिल हैं।
मामले की जानकारी देते हुए सरायकेला के पुलिस अधीक्षक (SP) मनोज स्वर्गियारी ने प्रेस वार्ता में बताया कि पुलिस को चांडिल थाना क्षेत्र के ग्राम उदयपुर (टीलाडीह) में माओवादी संगठन के सदस्यों के जुटने और किसी बड़ी हिंसक घटना को अंजाम देने की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के सत्यापन के बाद संयुक्त टीम ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया।

अभियान के पहले चरण में पुलिस ने एकेएम-47 रायफल के साथ रवि सिंह सरदार को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इसके बाद रवि सिंह से हुई कड़ी पूछताछ और मिली गुप्त जानकारी के आधार पर कांदरबेड़ा क्षेत्र (चांडिल थाना) में दूसरा छापामारी अभियान चलाकर मदन महतो और मीना पहाड़िया को भी धर दबोचा गया।
सुरक्षा बलों ने गिरफ्तार नक्सलियों की निशानदेही पर दलमा पहाड़ और आसपास के ठिकानों से भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार व विस्फोटक सामग्री बरामद की है:

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद 203 कोबरा के कमांडेंट पवन कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार नक्सली पिछले कई वर्षों से कोल्हान, सारंडा और सिंहभूम क्षेत्र में सक्रिय थे। यह गिरोह सुरक्षा बलों पर हमले, कुकड़ू में पुलिस बल की हत्या कर हथियार लूटने, आईईडी ब्लास्ट करने और निर्दोष ग्रामीणों की हत्या जैसी कई संगीन वारदातों में शामिल रहा है
कमांडेंट ने सरायकेला एसपी के नेतृत्व में चलाए गए इस संयुक्त अभियान की सराहना की। पुलिस प्रशासन के अनुसार गिरफ्तार उग्रवादियों से पूछताछ जारी है और क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन लगातार चलाया जा रहा है।
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तीसरी धारा न्यूज़ | 06 अगस्त 2026, जमशेदपुर
जमशेदपुर: एनआईटी जमशेदपुर के बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र मीर तनवीर हसन का शव गुरुवार सुबह सोनारी स्थित दोमुहानी क्षेत्र से बरामद कर लिया गया है। मृतक छात्र बीते रविवार को अपने साथियों के साथ आसंगी चेकडैम में स्नान करने गए थे, जहां गहरे पानी में जाने के कारण वे डूब गए थे। एनडीआरएफ और पुलिस की टीमों द्वारा लगातार चलाए गए चार दिवसीय सघन सर्च अभियान के बाद आखिरकार छात्र का शव ढूंढ निकाला गया। इस दुखद घटना से पूरे कॉलेज परिसर में शोक की लहर दौड़ गई है।
चार दिनों तक चला एनडीआरएफ का सघन सर्च ऑपरेशन
हादसे की सूचना मिलने के बाद से ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ और गोताखोरों की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई थीं। खरकाई नदी के विभिन्न हिस्सों में चार दिनों तक चले व्यापक सर्च ऑपरेशन के बाद गुरुवार सुबह सोनारी के दोमुहानी क्षेत्र से शव बरामद हुआ। शव की पहचान की पुष्टि होते ही परिजनों और एनआईटी के छात्रों में कोहराम मच गया।
कॉलेज परिसर में पसरा सन्नाटा, छात्र थे मेधावी
पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के निवासी मीर तनवीर हसन एनआईटी जमशेदपुर में बीटेक चौथे वर्ष के छात्र थे। उनके सहपाठियों और शिक्षकों ने उन्हें एक मेधावी और मिलनसार छात्र के रूप में याद करते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
जलाशयों पर सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने की मांग
इस हादसे के बाद एनआईटी के छात्रों और स्थानीय लोगों ने आसंगी चेकडैम समेत आसपास के नदियों व जलाशयों पर सुरक्षा इंतजाम कड़े करने की मांग उठाई है। छात्रों का कहना है कि दुर्घटना संभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग और उचित निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
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तीसरी धारा न्यूज़ | 06 अगस्त 2026, झांसी/प्रयागराज
झांसी: माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की झांसी में एक दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई है। यह हादसा झांसी के पूंछ थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर उस समय हुआ, जब अबान अपने दोस्तों के साथ झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मुलाकात कर वापस प्रयागराज लौट रहा था। हादसे में अबान के एक साथी सोनू की भी मौत हो गई है, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
डिवाइडर से टकराई तेज रफ्तार कार
मिली जानकारी के अनुसार, कार में कुल पांच लोग सवार थे। झांसी जेल में अली अहमद से मुलाकात के बाद रात करीब साढ़े दस बजे जब उनकी कार पूंछ क्षेत्र के पास पहुंची, तो अत्यधिक रफ्तार होने के कारण अनियंत्रित होकर हाईवे के डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया।
तीन घायलों का इलाज जारी, पुलिस जांच में जुटी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और एंबुलेंस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद कार में फंसे सभी पांचों लोगों को बाहर निकाला और नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद अबान अहमद और उसके दोस्त सोनू को मृत घोषित कर दिया, जबकि तीन अन्य घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।
उल्लेखनीय है कि अली अहमद को 1 अक्टूबर 2025 को नैनी सेंट्रल जेल से झांसी जेल स्थानांतरित किया गया था। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
तीसरी धारा न्यूज़
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के शिक्षा विभाग और संबद्ध शिक्षण संस्थानों में अनारक्षित (Unreserved) वर्ग की सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और धांधली का मामला सामने आया है। नियमों को ताक पर रखकर योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों पर डाका डालने और बैकडोर एंट्री देने का एक बड़ा खेल उजागर होने की कगार पर है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पूर्वी सिंहभूम जिले के प्रमुख कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में अनारक्षित श्रेणी के तय कोटे की सीटों पर पारदर्शिता की अनदेखी करते हुए मेरिट लिस्ट में हेरफेर की गई है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासनिक मिलीभगत और वित्तीय लेन-देन के गंभीर आरोप उठ रहे हैं।
प्रमुख बिंदु जिन पर उठ रहे हैं सवाल:
तीसरी धारा न्यूज़ की पड़ताल:
हमारी टीम पिछले कुछ समय से पूर्वी सिंहभूम जिले के इस पूरे मामले से जुड़े मुख्य दस्तावेजों, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और आधिकारिक पत्राचार के सबूत जुटाने में लगी हुई है। शिक्षा व्यवस्था की साख से खिलवाड़ करने वाले इस पूरे तंत्र की परतें जल्द ही तथ्यों और पुख्ता प्रमाणों के साथ जनता के सामने होंगी।
पूरे मामले का विस्तृत खुलासा, दस्तावेजी सबूतों और जिम्मेदार अधिकारियों के नाम के साथ, बहुत जल्द केवल तीसरी धारा न्यूज़ पर।
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