तीसरी धारा न्यूज / जमशेदपुर:
बिरसानगर की रहने वाली निरूपा पिछले लगभग दो वर्षों से कैंसर जैसी जानलेवा और गंभीर बीमारी से जंग लड़ रही हैं। एक तरफ जहां इस जानलेवा बीमारी ने उनकी जिंदगी को शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद कष्टदायी बना दिया है, वहीं दूसरी तरफ अपनों की बेरुखी और गहराते आर्थिक संकट ने उनकी राह और मुश्किल कर दी है।
सगे भाई पर घर पर कब्जे का आरोप, परिवार ने भी छोड़ा साथ
पीड़िता निरूपा का आरोप है कि इस कठिन और संवेदनशील दौर में उनके अपने परिवार वालों ने ही उनसे मुंह मोड़ लिया। हद तो तब हो गई जब उनके सगे भाई पर ही उनके घर पर अवैध रूप से कब्जा करने का आरोप लगा है। बीमारी से कमजोर हो चुकी निरूपा अब अपनों के ही धोखे और उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं।
आर्थिक तंगी से थमी मासूम की पढ़ाई, दर-दर भटकने को मजबूर
निरूपा का कहना है कि इलाज के भारी-भरकम खर्च और आय का कोई साधन न होने के कारण उनके सामने अब भुखमरी और दैनिक जीवन का संकट खड़ा हो गया है। इस भीषण आर्थिक तंगी की गाज उनके मासूम बच्चे के भविष्य पर गिरी है, और पैसों के अभाव में बच्चे की पढ़ाई पूरी तरह से बंद हो गई है।
प्रशासनिक मदद का इंतजार, समाज से उम्मीद की आस
निरूपा ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उन्होंने न्याय और आर्थिक सहायता के लिए जिला प्रशासन का द्वार भी खटखटाया, लेकिन अब तक उन्हें प्रशासनिक स्तर से केवल आश्वासन ही प्राप्त हुआ है। कोई ठोस मदद न मिलने से उनकी परेशानियां जस की तस बनी हुई हैं।
अब सवाल यह उठता है कि जब जानलेवा बीमारी के वक्त अपनों का साथ भी छूट जाए और प्रशासनिक तंत्र भी सिर्फ आश्वासनों तक सीमित रहे, तो निरूपा जैसी बेबस और जरूरतमंद महिला की मदद के लिए कौन आगे आएगा?
📌 तीसरी धारा न्यूज
जब अपनों ने छोड़ा साथ, तब समाज और प्रशासन बढ़ाए हाथ: निरूपा को मिले न्याय और सहारा!





















