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सरायकेला में देव स्नान पूर्णिमा की धूम: भक्ति भाव से हुआ महाप्रभु जगन्नाथ का जलाभिषेक, पर्यटनीय स्थलों पर भी उमड़े श्रद्धालु

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सरायकेला (तीसरी धारा न्यूज): सरायकेला में ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा के अवसर पर पारंपरिक देव स्नान पूर्णिमा का त्योहार बेहद ही भक्तिपूर्ण और उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस दौरान सरायकेला स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में दारू ब्रह्म श्री जगन्नाथ महाप्रभु, भाई बलभद्र, माता सुभद्रा और सुदर्शन का विधि-विधान से महास्नान और जलाभिषेक रस्म पूरी की गई।IMG 20260630 WA0003

​अनुष्ठान की शुरुआत अलसुबह मंगल आरती और विशेष पूजन के साथ हुई। मंदिर के मुख्य पुजारी ब्रह्मानन्द महापात्र के नेतृत्व में पंडितों ने महाप्रभु के स्नान की रस्म को पूरा कराया, जिसमें सानो आचार्य और सुमित महापात्र ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।

​कुल 108 कलश जल से हुआ महास्नान

​परंपरा के अनुसार महाप्रभु जगन्नाथ और उनके भाई-बहन को कुल 108 पवित्र कलशों के जल से स्नान कराया गया। इसमें:

  • महाप्रभु कालिया (जगन्नाथ): 35 कलश
  • प्रभु बलभद्र: 33 कलश
  • माता सुभद्रा: 22 कलश
  • भगवान सुदर्शन: 18 कलश

​इस पूरे धार्मिक महाआयोजन को सफल बनाने में जगन्नाथ सेवा समिति के अध्यक्ष लिपू माहंती और सचिव शंकर सतपति के नेतृत्व में समिति के तमाम सदस्यों ने सराहनीय योगदान दिया। मंदिर परिसर दिनभर महाप्रभु के जयकारों से गूंजता रहा और श्रद्धालु भक्ति के सागर में सराबोर नजर आए।b 1

​प्रचंड गर्मी के बावजूद पर्यटन स्थलों पर भी रही रौनक

​क्षेत्र में पड़ रही अत्यधिक और प्रचंड गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं और पर्यटकों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। महाप्रभु के दर्शन करने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने सरायकेला के प्रमुख दर्शनीय स्थलों का भी आनंद लिया।

​खरकाई नदी तट पर मांजणाघाट स्थित मनोरम पार्क और श्मशान काली मंदिर में श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ देखी गई। इसके अलावा कुदरसाई शिव मंदिर के पास बने पार्क और प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां पाउड़ी देवी स्थल (पाउड़ीमेल) में भी काफी संख्या में लोग पहुंचे। युवा और बच्चों ने दीवानसाई स्थित छऊ थीम पार्क का भी रुख किया और वहां समय बिताया।a 2

​शाम की बारिश ने दिलाई राहत

​दिनभर की तेज धूप और भीषण उमस के बाद शाम को हुई छिटपुट बारिश ने लोगों को बड़ी राहत दी। इस बारिश से न सिर्फ मौसम सुहाना हुआ, बल्कि तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। महाप्रभु के इस पवित्र स्नान अनुष्ठान और शाम की फुहारों से पूरे सरायकेला क्षेत्र का प्राकृतिक व सामाजिक वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय और खुशनुमा बना रहा।

– तीसरी धारा न्यूज रिपोर्ट

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