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सरायकेला: झुंड से बिछड़े टस्कर हाथी का आतंक, वन विभाग कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों को मिले ताले; फूटा गुस्सा

सरायकेला/चांडिल। चांडिल वन क्षेत्र के ईचागढ़ प्रखंड अंतर्गत मैसाड़ा और कालीचामदा गांव में पिछले 15-20 दिनों से एक जंगली टस्कर हाथी ने भारी आतंक मचा रखा है। हाथी के डर से ग्रामीणों की रात की नींद और दिन का चैन छिन गया है। इस भयावह स्थिति से परेशान होकर जब सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण चांडिल स्टेशन बस्ती स्थित वन विभाग कार्यालय पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।IMG 20260627 WA0010

​हाथी से स्थायी निजात दिलाने की गुहार लगाने पहुंचे ग्रामीणों को कार्यालय में न तो कोई पदाधिकारी मिला और न ही कोई कर्मचारी। सभी के नदारद रहने से आक्रोशित ग्रामीणों ने वनपाल (फॉरेस्टर) और वनरक्षी (फॉरेस्ट गार्ड) के इस उदासीन रवैए के खिलाफ कार्यालय परिसर में ही जमकर नारेबाजी की और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।b 1

​शाम ढलते ही गांवों में मचती है तबाही

​ग्रामीणों ने बताया कि पिछले तीन सप्ताह से यह बिछड़ा हुआ टस्कर हाथी शाम ढलते ही मैसाड़ा और कालीचामदा गांवों में दाखिल हो जाता है। हाथी अब तक कई घरों को क्षतिग्रस्त कर चुका है और घरों के अंदर रखे धान, चावल, कटहल तथा आम को अपना निवाला बना रहा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि ग्रामीण पूरी-पूरी रात जागकर अपने और अपने परिवार के जान-माल की रखवाली करने को विवश हैं।

​’जंगल के करीब बालू भंडारण की एनओसी देने से बिगड़े हालात’

​आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग की नीतियों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वन विभाग द्वारा जंगल से शून्य दूरी (जीरो डिस्टेंस) पर बालू भंडारण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) दे दिया गया है। जिस जगह पर बालू का अवैध रूप से भंडारण किया जा रहा है, वह असल में हाथियों का आवासीय और मुख्य विचरण क्षेत्र है। उनका आशियाना उजड़ने के कारण ही हाथी भोजन और पानी की तलाश में मजबूरन आबादी वाले गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।a 2

​उग्र आंदोलन की चेतावनी

​ग्रामीणों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर जल्द ही इस टस्कर हाथी को गांव से खदेड़ने और समस्या का समुचित व स्थायी समाधान करने के लिए कदम नहीं उठाए गए, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति या जान-माल के नुकसान की सारी जवाबदेही वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की होगी।

​(रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज)

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