गुमला (कामडारा): झारखंड के गुमला जिले से स्वास्थ्य विभाग की एक शर्मनाक और हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है। कामडारा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में ड्यूटी डॉक्टर की लापरवाही और अनुपस्थिति ने एक ऐसे व्यक्ति की जान ले ली, जिसने अपने जीवन के 15 साल दूसरों को अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाने में लगा दिए थे।
क्या है पूरा मामला?
मृतक की पहचान 45 वर्षीय संदीप प्रधान के रूप में हुई है, जो लंबे समय से एंबुलेंस चालक के रूप में कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार, अचानक संदीप के पेट में तेज दर्द उठा, जिसके बाद परिजन उन्हें लेकर तत्काल कामडारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। विडंबना देखिए कि जिस अस्पताल की चौखट पर वे रोज मरीजों को लाते थे, वहां उन्हें खुद प्राथमिक उपचार तक नसीब नहीं हुआ। अस्पताल में उस समय ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मौजूद नहीं थीं।
ड्यूटी रोस्टर में नाम, पर कुर्सी खाली
परिजनों का आरोप है कि संदीप अस्पताल में तड़पते रहे, लेकिन कोई चिकित्सक उन्हें देखने वाला नहीं था। जांच में सामने आया कि ड्यूटी रोस्टर के अनुसार उस समय महिला चिकित्सक डॉ. सविता कुमारी की तैनाती थी, लेकिन वे केंद्र से नदारद थीं। इलाज में हुई इसी देरी के कारण संदीप ने अस्पताल परिसर में ही दम तोड़ दिया।
ग्रामीणों का आक्रोश और हंगामा
संदीप की मौत की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जब डॉ. सविता कुमारी अस्पताल पहुंचीं, तो उन्होंने पहले अपनी ड्यूटी होने से ही इनकार कर दिया। हालांकि, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सुनील खलको द्वारा रोस्टर की जांच करने पर डॉक्टर की लापरवाही की पुष्टि हो गई।
ग्रामीणों के गंभीर आरोप:
- डॉक्टर सप्ताह में मात्र दो दिन कुछ घंटों के लिए अस्पताल आती हैं।
- अस्पताल में नाइट ड्यूटी का पालन नहीं किया जाता है।
- शिकायतों के बावजूद उच्च अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती।
प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद शांत हुआ मामला
नाराज ग्रामीणों ने रांची-सिमडेगा मुख्य मार्ग जाम करने की चेतावनी दी थी, जिससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों और अस्पताल प्रबंधन द्वारा दोषी डॉक्टर पर कड़ी कार्रवाई के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए।
तीसरी धारा न्यूज़ की टिप्पणी
एक एंबुलेंस चालक जो समाज के लिए जीवन रक्षक था, उसका सिस्टम की लापरवाही से दम तोड़ देना पूरे स्वास्थ्य महकमे पर सवालिया निशान खड़ा करता है। क्या बायोमेट्रिक हाजिरी और कागजी रोस्टर केवल खानापूर्ति के लिए हैं? क्या सरकार इन “लापरवाह” केंद्रों पर लगाम कसेगी?
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज़











