रांची: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बंगाल और असम के चुनाव परिणामों को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को कठघरे में खड़ा किया है। रांची स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने चुनाव की निष्पक्षता पर कड़े प्रहार किए।
“लोकतंत्र का गला घोंटा गया” – सुप्रियो भट्टाचार्य
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने बंगाल चुनाव की पूरी प्रक्रिया को ‘अवैध और असंवैधानिक’ करार दिया। उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर संदेह जताते हुए निम्नलिखित प्रमुख आरोप लगाए:
- केंद्रीय बलों का दुरुपयोग: भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल में जिस स्तर पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई, वह देश के इतिहास में अभूतपूर्व है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी तैनाती लोकतांत्रिक प्रक्रिया को डराने और प्रभावित करने के लिए की गई थी।
- मतदान के अधिकार से वंचित: झामुमो नेता का दावा है कि लाखों मतदाताओं को उनके वोट देने के अधिकार से जानबूझकर दूर रखा गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आयोग का नारा ‘एक भी वोटर छूटे नहीं’ पूरी तरह विफल रहा।
- न्यायाधिकरण की साजिश: आरोप है कि बड़ी संख्या में वोटरों को ट्रिब्यूनल और कानूनी प्रक्रियाओं में उलझा दिया गया, ताकि वे मतदान न कर सकें। भट्टाचार्य के अनुसार, यही वो ‘वोटों का अंतर’ है जिसने अंततः नतीजों को सत्ता पक्ष के पक्ष में मोड़ दिया।

असम के नतीजों पर ‘परिसीमन’ का साया
असम विधानसभा चुनाव के परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए झामुमो महासचिव ने कहा कि वहां के नतीजे अप्रत्याशित नहीं हैं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि:
”असम में चुनाव से पहले परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया के जरिए जानबूझकर सीटों की जनसांख्यिकी को बदला गया। चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने के लिए यह कदम उठाया गया था, जिसका असर अब नतीजों में साफ दिख रहा है।”
चुनाव की वैधता पर प्रश्नचिह्न
झामुमो ने स्पष्ट किया कि जिस तरह से जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश की गई है, उसने पूरे चुनाव की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी का मानना है कि विपक्ष को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया है।
बंगाल और असम के इन घटनाक्रमों पर झामुमो की यह तीखी प्रतिक्रिया राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ सकती है।
रिपोर्ट: ब्यूरो, तीसरी धारा न्यूज











