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सियासी हलचल: झारखंड में राज्यसभा चुनाव का बिगुल, गठबंधन के भीतर ‘सीट’ को लेकर छिड़ी रार

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रांची | तीसरी धारा न्यूज झारखंड की सियासत में इस साल मई और जून का महीना बेहद तपिश भरा रहने वाला है। राज्य की दो राज्यसभा सीटों पर होने वाले आगामी चुनाव ने सत्ताधारी गठबंधन के भीतर खींचतान शुरू कर दी है। एक ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) दोनों सीटों पर अपनी दावेदारी देख रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने अपना हक जताते हुए एक सीट की मांग ठोक दी है।IMG 20260501 120910

कांग्रेस का दावा: ‘इस बार हमारा अधिकार बनता है’

​गुरुवार (30 अप्रैल) को कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि पार्टी आगामी चुनाव में एक सीट की मांग करेगी। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले तीन राज्यसभा चुनावों में गठबंधन सिर्फ एक सीट जीतने की स्थिति में था, इसलिए तीनों बार वह सीट झामुमो के खाते में गई। लेकिन इस बार संख्या बल मजबूत है और गठबंधन दोनों सीटें जीत सकता है, लिहाजा एक सीट कांग्रेस को मिलनी चाहिए।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

​के. राजू ने कहा, “हमारे पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या बल है। हम जल्द ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर एक सीट के लिए औपचारिक अनुरोध करेंगे।”

क्यों खाली हो रही हैं सीटें?

​जून 2026 में झारखंड की दो राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं:

  1. पहली सीट: झारखंड मुक्ति मोर्चा के दिग्गज नेता और संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के बाद से रिक्त चल रही है।
  2. दूसरी सीट: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा हो रहा है।

विधानसभा का गणित: किसका पलड़ा भारी?

​81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में वर्तमान संख्या बल इंडिया (INDIA) गठबंधन के पक्ष में झुकता दिख रहा है:

  • सत्तारूढ़ गठबंधन (कुल 56 विधायक): झामुमो (34), कांग्रेस (16), आरजेडी (04) और लेफ्ट (02)।
  • विपक्ष: बीजेपी के नेतृत्व वाला खेमा संख्या बल के मामले में फिलहाल गठबंधन से पीछे है।

इंडिया गठबंधन के सामने ‘सीट शेयरिंग’ की चुनौती

​हालांकि आंकड़ों के लिहाज से इंडिया गठबंधन दोनों सीटों पर जीत दर्ज करने की स्थिति में है, लेकिन असली पेंच जेएमएम और कांग्रेस के बीच फंसा है। जेएमएम जहां अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहती है, वहीं कांग्रेस अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए इस राज्यसभा सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना रही है।

तीसरी धारा न्यूज की नजर इस सियासी उठापटक पर बनी हुई है। देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने सहयोगी दल कांग्रेस को संतुष्ट कर पाते हैं या गठबंधन के बीच यह दरार और गहरी होगी।

ब्यूरो रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

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