एक नई सोच, एक नई धारा

झारखंड से दिल्ली की ओर ‘तीर-धनुष’: राष्ट्रीय फलक पर पहचान बनाने को तैयार झामुमो

n7104774151777530900740ce8d5b58980f032b56459998bdff8e10055f4c6e16b1810e05d8201505780572

रांची: क्षेत्रीय राजनीति की सीमाओं को लांघकर अब झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी धमक बढ़ाने के लिए निर्णायक कदम उठा दिए हैं। अप्रैल 2025 में रांची में आयोजित पार्टी के 13वें महाधिवेशन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में पार्टी की प्राथमिकता अब सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं, बल्कि देशभर में विस्तार की है।n7104774151777530900740ce8d5b58980f032b56459998bdff8e10055f4c6e16b1810e05d8201505780572

रणनीतिक विस्तार: बृहद झारखंड और राष्ट्रीय संपर्क

तीसरी धारा न्यूज के विश्लेषण के अनुसार, झामुमो की नई रणनीति के केंद्र में दिल्ली में संपर्क कार्यालय खोलना और बिहार, असम, ओडिशा एवं बंगाल के विशिष्ट हिस्सों को मिलाकर ‘बृहद झारखंड’ की परिकल्पना को मजबूत करना है। पार्टी अब अपने मूल आधार—आदिवासी, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों के सामाजिक गठजोड़ को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी में है।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

बिहार से सबक और असम में आक्रामक रुख

​पार्टी के लिए बिहार चुनाव एक बड़ा सबक रहा, जहां गठबंधन में सीटों पर सहमति न बनने के कारण उसे चुनावी दौड़ से बाहर रहना पड़ा। इस अनुभव से सीखते हुए झामुमो ने असम में समय रहते चुनाव आयोग से अपना चुनाव चिह्न ‘तीर-धनुष’ हासिल किया और 16 सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ा। हेमंत सोरेन की धुआंधार रैलियों ने स्पष्ट कर दिया कि झामुमो भाजपा के आदिवासी वोट बैंक में सेंधमारी के लिए पूरी तरह तैयार है।

बंगाल में परिपक्वता और भाजपा विरोधी मोर्चा

​पश्चिम बंगाल में झामुमो ने एक अलग राजनीतिक परिपक्वता दिखाई। वहां अपने उम्मीदवार उतारने के बजाय हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने ममता बनर्जी (TMC) का समर्थन किया। यह कदम झामुमो को राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के एक सशक्त वैचारिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है।

हेमंत सोरेन: देश के उभरते सबसे बड़े ट्राइबल लीडर

​झामुमो महासचिव विनोद पांडेय के अनुसार, पार्टी आने वाले समय में छत्तीसगढ़ जैसे अन्य राज्यों में भी विस्तार करेगी। राजनीतिक चिंतकों का मानना है कि हेमंत सोरेन आज देश के सबसे लोकप्रिय आदिवासी नेता के रूप में उभर रहे हैं, जो भाजपा की विचारधारा के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं।

चुनौतियां और भविष्य की राह

​झामुमो की जड़ें 1970 के दशक के आंदोलन और एके राय व शिबू सोरेन की समाजवादी सोच में हैं। हालांकि, राष्ट्रीय पार्टी बनने की राह में गठबंधन की जटिलताएं और नए राज्यों में संगठन खड़ा करना एक बड़ी चुनौती है। लेकिन असम और बंगाल की सक्रियता ने संकेत दे दिया है कि झारखंड के बाद झामुमो का अगला पड़ाव अब दिल्ली है।

राजनीति की हर बारीकी और निष्पक्ष खबरों के लिए जुड़े रहें “तीसरी धारा न्यूज” के साथ।

error: Content is protected !!