जमशेदपुर: मानगो के डिमना चौक स्थित एमजीएम अस्पताल के पास शुक्रवार शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब पुलिस ने जान जोखिम में डालकर बस की छत पर सफर कर रहे मजदूरों को नीचे उतारा। क्षमता से अधिक सवारी और छत पर बैठे दर्जनों लोगों को देखकर एमजीएम थाना प्रभारी ने तत्परता दिखाते हुए बस को रुकवाया और एक बड़ा हादसा होने से टाल दिया।
थाना प्रभारी ने चलती बस को रुकवाया
मिली जानकारी के अनुसार, एक निजी बस डिमना चौक से मजदूरों को लेकर पटमदा की ओर जा रही थी। बस के अंदर पैर रखने की जगह नहीं थी, जिसके कारण बड़ी संख्या में मजदूर बस की छत पर चढ़ गए थे। जैसे ही बस एमजीएम अस्पताल के पास पहुंची, गश्त कर रहे थाना प्रभारी की नजर इस खतरनाक दृश्य पर पड़ी। उन्होंने तुरंत बस को रुकवाकर छत पर बैठे यात्रियों को नीचे उतरने का निर्देश दिया।
पुलिस की सख्ती और दस्तावेजों की जांच
थाना प्रभारी ने मौके पर ही मजदूरों और बस चालक को सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि “इस तरह जान जोखिम में डालकर यात्रा करना मौत को दावत देने जैसा है।” पुलिस ने लापरवाही को देखते हुए बस के कागजात की सघन जांच की और आवश्यक दस्तावेज जब्त कर लिए। चालक को चेतावनी दी गई कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति होने पर वाहन को जब्त कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
चालक की सफाई: ‘मात्र 20 रुपये है किराया’
पूछताछ के दौरान बस चालक ने अपनी सफाई में तर्क दिया कि डिमना चौक से पटमदा तक का किराया केवल 20 रुपये है। उसने दावा किया कि सवारियों का दबाव इतना अधिक था कि मना करने के बावजूद मजदूर जबरन छत पर बैठ गए थे। हालांकि, पुलिस ने इस तर्क को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी चालक और संचालक की होती है।
यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख
घटना के कुछ देर बाद पुलिस ने सख्त चेतावनी देकर बस को रवाना किया। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि मानगो और पटमदा मार्ग पर ओवरलोडिंग और छतों पर सवारी बैठाने वाले वाहनों पर अब विशेष नजर रखी जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले बस मालिकों पर भारी जुर्माना लगाने और लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज डेस्क











