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तीसरी धारा न्यूज एक्सक्लूसिव: करोड़ों का अस्पताल, पर मरीजों को नसीब नहीं दो घूंट पानी; शौचालय का पानी पीने को मजबूर बेबस लोग

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जमशेदपुर: लौहनगरी के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, एमजीएम (MGM) की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो मानवता को शर्मसार कर देने वाली है। करोड़ों की लागत से बने इस अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं का इस कदर अभाव है कि यहां भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को प्यास बुझाने के लिए शौचालय (बाथरूम) के बेसिन का सहारा लेना पड़ रहा है।got mgm jamshedpur v0 8mqzs0ru4fkf1

शौचालय के पानी से बुझ रही प्यास

​अस्पताल के वार्डों में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीज और उनके तीमारदार बाथरूम की टोंटियों से पानी भरने को मजबूर हैं।

  • श्रवण साव (मरीज): शुक्रवार को इन्हें शौचालय से पानी भरते देखा गया। उन्होंने बेबसी जाहिर करते हुए कहा कि बाहर जाने की मनाही है, ऐसे में बाथरूम के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
  • लोहा महतो (परिजन): गदड़ा निवासी लोहा महतो अपने बीमार पिता को छोड़कर बाहर नहीं जा सकते, इसलिए वे भी बाथरूम के बेसिन से ही पीने का पानी जुटा रहे हैं।1002518072

बाहर जाने पर पाबंदी, अंदर इंतजाम नहीं

​अस्पताल प्रशासन ने पिछले दिनों हुई घटनाओं (मरीजों के गायब होने और परिसर में शव मिलने) के बाद सुरक्षा कड़ी कर दी है। होमगार्ड के जवान मरीजों को अकेले बाहर नहीं जाने दे रहे हैं।

  • ​मरीज ललन कुमार जब पानी लाने बाहर जा रहा था, तो जवानों ने उसे रोक दिया। सुरक्षाकर्मियों का तर्क है कि मरीज बाहर जाकर गुम हो सकते हैं, जिसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
  • ​लेकिन सवाल यह उठता है कि यदि प्रशासन बाहर जाने से रोक रहा है, तो अंदर पीने के पानी का प्रबंध क्यों नहीं किया गया?

गरीब मरीजों की जेब पर डाका

​सोनारी की रहने वाली सोनिका और अन्य परिजनों ने बताया कि जिनके साथ कोई सहायक नहीं है, उनकी स्थिति और भी दयनीय है। गरीब मरीजों को मजबूरी में अपनी जेब से पैसे खर्च कर बाहर से पानी की बोतलें खरीदनी पड़ रही हैं। करोड़ों की लागत वाले इस सरकारी संस्थान में साधारण फिल्टर या वाटर कूलर का न होना प्रशासन की बड़ी विफलता को दर्शाता है।

अधीक्षक की चुप्पी बरकरार

​इस गंभीर अव्यवस्था और मरीजों की जान से हो रहे खिलवाड़ के संबंध में जब अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बलराम झा से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कई बार फोन किए जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया। अधिकारियों की यह चुप्पी मरीजों की पीड़ा के प्रति उनकी संवेदनहीनता को उजागर करती है।

सुरक्षा के नाम पर केवल पहरा, सुविधाओं का टोटा

​14 मार्च को इमरजेंसी से गायब हुए मरीज का शव चार दिन पहले झाड़ियों में मिलना प्रशासन की लापरवाही का सबूत था। उसके बाद गश्त तो बढ़ा दी गई, लेकिन मरीजों की बुनियादी जरूरत ‘पानी’ की सुध लेने वाला कोई नहीं है।

तीसरी धारा न्यूज (Teesri Dhaara News)आम जनता की आवाज, प्रशासन से तीखे सवाल।

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