देवघर: जिला प्रशासन अब उन संपन्न लोगों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करने जा रहा है जो नियमों को ताक पर रखकर गरीबों के हक का राशन डकार रहे हैं। खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के केपीआई (KPI) पोर्टल ने जिले के ऐसे हजारों अयोग्य लाभुकों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है, जो आयकर (Income Tax) और जीएसटी (GST) भरने के बावजूद राशन कार्ड का लाभ ले रहे हैं।

पोर्टल के आंकड़ों ने चौंकाया
केपीआई पोर्टल से प्राप्त डेटा के अनुसार, जिले के सभी 10 प्रखंडों, देवघर नगर निगम और मधुपुर नगर परिषद क्षेत्र में कुल 1910 ऐसे व्यक्ति चिन्हित किए गए हैं जो इनकम टैक्स दे रहे हैं, फिर भी राशन कार्ड धारक हैं। जांच के बाद अब तक 367 लोगों के कार्ड रद्द किए जा चुके हैं, जबकि 1478 आयकर दाता अब भी रडार पर हैं।
कौन-कौन हैं रडार पर? (अयोग्यता के मानक)
जिला आपूर्ति पदाधिकारी प्रीतिलता किस्कू ने स्पष्ट किया है कि निम्नलिखित श्रेणी के लोगों के कार्ड रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है:
- आयकर दाता: जिनकी वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक है।
- GST भुगतानकर्ता: जिनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन 25 लाख रुपये से अधिक का है (ऐसे 25 कार्डधारी चिन्हित)।
- वाहन मालिक: जिनके पास चार पहिया वाहन है (ऐसे 543 कार्डधारी)।
- बड़े मकान मालिक: नगर निगम क्षेत्र में जिनके पास 2000 स्क्वायर फीट से अधिक का मकान या बड़ी जमीन है (ऐसे 271 कार्डधारी)।
होगी कड़ी कार्रवाई: देना होगा ‘जुर्माना’
जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने बताया कि सभी संबंधित विपणन पदाधिकारियों (MO) को सूची भेज दी गई है। एमओ इन नामों का भौतिक सत्यापन कर कार्ड हटाने (Deletion) का कार्य करेंगे।
सबसे महत्वपूर्ण बात: यदि जांच में गड़बड़ी सही पाई गई, तो संबंधित व्यक्ति को नोटिस भेजा जाएगा। उन्हें न केवल राशन कार्ड से हाथ धोना पड़ेगा, बल्कि जितने दिनों तक उन्होंने अवैध रूप से राशन का उठाव किया है, उसकी पूरी राशि (मूलधन के साथ) पेनाल्टी के तौर पर सरकारी खजाने में जमा करनी होगी।
योग्य लाभुकों को मिलेगा हक
प्रशासन की इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य सूची से संपन्न लोगों को बाहर कर उन गरीब और पात्र परिवारों को जोड़ना है, जो वास्तव में इस योजना के हकदार हैं।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज









