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मिडल ईस्ट में युद्ध के बीच भारत की ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ को लेकर राहत वाली खबर: पेट्रोल-डीजल की किल्लत नहीं, सरकार के पास 45 दिनों का बैकअप

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नई दिल्ली: ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच गहराते संघर्ष ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लगभग ठप कर दिया है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का आधा कच्चा तेल इसी रास्ते से मंगाता है, ऐसे में देश के भीतर ईंधन की कमी को लेकर चिंताएं बढ़ रही थीं। लेकिन भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि देश के पास फिलहाल पर्याप्त तेल और गैस का भंडार मौजूद है।

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पेट्रोलियम मंत्री का भरोसा: “सप्लाई में नहीं आएगी कोई रुकावट”

​पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल या रसोई गैस (LPG) की कोई किल्लत नहीं होगी। मंत्रालय ने देशभर में सप्लाई और स्टॉक की रियल-टाइम निगरानी के लिए 24×7 कंट्रोल रूम भी सक्रिय कर दिया है।

भारत के पास कितना है ‘स्टॉक’?

​भारत ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मजबूत ‘स्टॉक गणित’ तैयार रखा है:

  • तेल कंपनियों का बैकअप: IOCL, BPCL और HPCL जैसी कंपनियों के पास 25 दिनों का कच्चा तेल और 25 दिनों का तैयार पेट्रोल-डीजल सुरक्षित है।
  • रणनीतिक भंडार (SPR): विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर के भूमिगत टैंकों में 5.33 मिलियन टन तेल जमा है।
  • फ्लोटिंग कार्गो: समुद्र में मौजूद जहाजों को मिलाकर भारत के पास लगभग 40 से 45 दिनों का ‘इंपोर्ट कवर’ मौजूद है।

अगर युद्ध लंबा चला तो क्या होगा? भारत का ‘प्लान-B’ तैयार

​यदि मिडल ईस्ट संकट एक महीने से ज्यादा खिंचता है, तो सरकार ने चार सूत्रीय रणनीति बनाई है:

  1. रूसी तेल पर जोर: रूस से आने वाला तेल होर्मुज के रास्ते नहीं गुजरता, इसलिए भारत वहां से खरीदारी और बढ़ाएगा।
  2. रूट का बदलाव: भारत अब होर्मुज (40%) के बजाय उत्तरी अमेरिका, लैटिन अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका जैसे सुरक्षित समुद्री रास्तों पर निर्भरता बढ़ा रहा है।
  3. निर्यात पर अंकुश: जरूरत पड़ने पर सरकार घरेलू रिफाइनरियों को आदेश दे सकती है कि वे पेट्रोल-डीजल का निर्यात रोककर सारा उत्पादन देश के भीतर ही रखें।
  4. गैस के नए साझीदार: कतर में उत्पादन रुकने की स्थिति में भारत अब कनाडा और नॉर्वे से अतिरिक्त LNG मंगाने की बातचीत कर रहा है।

क्या बढ़ेंगे दाम?

​फिलहाल ब्रेंट क्रूड $85 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो चिंता का विषय है। हालांकि, सरकार की कोशिश है कि ‘प्राइस स्टेबलाइजेशन’ के जरिए कीमतों का बोझ आम आदमी पर न डाला जाए।

भविष्य की तैयारी: 90 दिनों का बैकअप

​ऊर्जा सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए ओडिशा के चंडीखोल और कर्नाटक के पादुर में नए रणनीतिक भंडार बनाने का काम तेज कर दिया गया है। इससे भारत का बैकअप क्षमता बढ़कर 90 दिनों की हो जाएगी। साथ ही, घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रति वर्ष 100 नए कुएं खोदने का लक्ष्य रखा गया है।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज डेस्क