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तीसरी धारा विशेष: जल, जंगल, जमीन के रक्षक बाबा तिलका मांझी को नमन; बालिगुमा में गूँजा शौर्य का जयघोष

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जमशेदपुर: भारतीय स्वाधीनता संग्राम के प्रथम सेनानी और अदम्य साहस के प्रतीक वीर शहीद बाबा तिलका मांझी की 276वीं जयंती आज बालिगुमा स्थित ‘एवन आखड़ा क्लब’ परिसर में धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पूरा क्षेत्र पारंपरिक संगीत, खेलकूद के उत्साह और बाबा तिलका मांझी के नारों से सराबोर रहा।

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परंपरा और श्रद्धा का संगम

​दिन की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना से हुई। समाज के बुजुर्गों और युवाओं ने बाबा तिलका मांझी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।

प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की गौरव गाथा

​कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्मारक समिति के सचिव श्री मदन मोहन ने बाबा तिलका मांझी के ऐतिहासिक संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा:

“1785 में जब अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ कोई बोलने का साहस नहीं करता था, तब बाबा तिलका मांझी ने तीर-धनुष के बल पर फिरंगियों के दांत खट्टे कर दिए थे। उनका संघर्ष केवल जमीन के लिए नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता और संस्कृति की रक्षा के लिए था।”

आकर्षण का केंद्र: महिलाओं की तीरंदाजी और पारंपरिक खेल

​जयंती समारोह को खास बनाने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया:

  • महिला तीरंदाजी: पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने तीर-धनुष प्रतियोगिता में अपनी सटीक निशानेबाजी का जौहर दिखाया, जो कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा।
  • बच्चों की दौड़: युवाओं और बच्चों के लिए दौड़ एवं पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया। विजेताओं को मंच पर सम्मानित किया गया।
  • सांस्कृतिक संध्या: रात में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लोक नृत्य और गीतों के माध्यम से बाबा तिलका मांझी के बलिदान की गाथा सुनाई जाएगी।

संकल्प: प्रकृति और अस्तित्व की रक्षा

​वक्ताओं ने वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण और जंगलों की कटाई पर चिंता व्यक्त की। सभी उपस्थित जनों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे बाबा के बताए रास्तों पर चलते हुए जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के लिए एकजुट रहेंगे।