जमशेदपुर, 10 फरवरी 2026: कोल्हान क्षेत्र के ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को साकची में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यूनियनों ने घोषणा की कि 12 फरवरी को चार नए श्रम संहिताओं (Labour Codes) और ‘श्रम शक्ति नीति-2025’ के विरोध में संपूर्ण भारत में राष्ट्रव्यापी हड़ताल की जाएगी।
यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल श्रमिकों की नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बचाने की है।

मुख्य आपत्तियां और चिंताएं
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एटक (AITUC), सीटू (CITU) और बीमा व बैंक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने सरकार पर तीखे हमले किए:
- श्रम कानूनों का ‘कॉर्पोरेटीकरण’: आरोप लगाया गया कि कोविड महामारी के दौरान बिना किसी चर्चा के पारित किए गए ये कोड 70% कारखानों को श्रम कानूनों के दायरे से बाहर कर देंगे। इससे न्यूनतम वेतन, कार्य के घंटे और सामाजिक सुरक्षा जैसे अधिकार समाप्त हो जाएंगे।
- श्रम शक्ति नीति-2025: यूनियनों का मानना है कि इस नीति के तहत सरकार ने अपनी भूमिका ‘नियामक’ से घटाकर केवल एक ‘सुविधा प्रदाता’ की कर दी है, जिससे श्रमिकों के कानूनी संघर्ष की शक्ति कमजोर होगी।
- बजट 2026-27 और निजीकरण: सार्वजनिक उपक्रमों (जैसे HEC) के निजीकरण, बीमा क्षेत्र में 100% FDI और मनरेगा के स्वरूप को बदलने पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है।
- व्यापार समझौते का विरोध: अमेरिका के साथ हालिया व्यापार समझौते को ‘जन-विरोधी’ बताया गया, जिसमें भारतीय सामानों पर 18% टैरिफ के मुकाबले अमेरिकी सामानों पर शून्य टैरिफ का प्रावधान है।
मांग पत्र की मुख्य बातें
ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने निम्नलिखित मांगों को लेकर हड़ताल का आह्वान किया है:
- चारों नए श्रम संहिताओं को तत्काल रद्द किया जाए।
- समान काम के लिए समान वेतन और स्थायी रोजगार सुनिश्चित हो।
- ठेकाकरण और आउटसोर्सिंग प्रथा को समाप्त किया जाए।
- कृषि क्षेत्र के लिए वैधानिक MSP और ऋण माफी की गारंटी दी जाए।
- परमाणु ऊर्जा विकास (SHANTI) अधिनियम जैसे कानूनों को वापस लिया जाए।
आंदोलन की रूपरेखा: मशाल जुलूस से विशाल प्रदर्शन तक
हड़ताल को सफल बनाने के लिए कोल्हान में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया गया है। आगामी कार्यक्रम इस प्रकार हैं:
| तिथि | समय | कार्यक्रम | स्थान |
|---|---|---|---|
| 11 फरवरी | शाम 5:30 बजे | विशाल मशाल जुलूस | आमबगान मैदान से साकची चौक |
| 12 फरवरी | सुबह से | कार्यस्थल पर धरना | सभी औद्योगिक एवं निजी क्षेत्र |
| 12 फरवरी | दोपहर 12:00 बजे | महा-प्रदर्शन | जुबली |
”सरकार काम को ‘अधिकार’ के बजाय ‘धर्म’ की संज्ञा देकर श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों को छीनना चाहती है। यह हड़ताल कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ एक निर्णायक संघर्ष है।”
— बिश्वजीत देब, सीटू प्रतिनिधि
आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंबुज ठाकुर, बिश्वजीत देब, सुभाष करण, हीरा अरकाने, वीरेंद्र कुमार, पीयूष गुप्ता और ओम प्रकाश सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। मंच ने समाज के सभी वर्गों से इस हड़ताल को सफल बनाने की अपील की है।













