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जमशेदपुर में अनुभव सिन्हा: ‘अस्सी’ की दस्तक और झारखंड के नायकों को स्क्रीन पर उतारने की तैयारी

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जमशेदपुर: मशहूर बॉलीवुड निर्देशक अनुभव सिन्हा शुक्रवार को ‘लौहनगरी’ जमशेदपुर पहुंचे। गोलमुरी में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने न केवल शहर की सुव्यवस्थित सुंदरता की तारीफ की, बल्कि झारखंड की ऐतिहासिक विरासत और आदिवासी संस्कृति को फिल्म जगत के लिए एक अनमोल खजाना बताया।

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बिरसा मुंडा और सिद्धू-कान्हू की वीरता से हुए प्रभावित

​सिन्हा ने स्वीकार किया कि इस यात्रा ने उन्हें झारखंड के महान क्रांतिकारियों के बारे में जानने का नया दृष्टिकोण दिया है।

  • अनसुनी गाथाएं: उन्होंने पहली बार सिद्धू-कान्हू के संघर्षों के बारे में सुना और अब वे उनके जीवन पर विस्तार से अध्ययन करने के इच्छुक हैं।
  • भगवान बिरसा मुंडा: बिरसा मुंडा के उलगुलान (आंदोलन) को गहराई से समझने की इच्छा जताते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड के इन नायकों की कहानियां राष्ट्रीय स्तर पर सिनेमा के जरिए सामने आनी चाहिए।

झारखंडी स्वाद: हड़िया और धुसका का अनुभव

​फिल्मी चकाचौंध से दूर अनुभव सिन्हा ने यहाँ की जमीनी जीवनशैली को करीब से महसूस किया:

  • आदिवासी खान-पान: उन्होंने स्थानीय पेय ‘हड़िया’ और लोकप्रिय व्यंजन ‘धुसका’ का आनंद लिया। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि हड़िया का स्वाद शुरुआत में अलग लगा, लेकिन यही यहाँ की मौलिक पहचान है।
  • भारत दर्शन: उन्होंने कहा कि मुंबई की जिंदगी से निकलकर वे अब तक 40 शहरों का दौरा कर चुके हैं ताकि ‘असली भारत’ को समझ सकें।

फिल्म ‘अस्सी’: 20 फरवरी को कोर्टरूम में होगा फैसला

​उनकी आगामी फिल्म ‘अस्सी’ को लेकर दर्शकों में काफी उत्साह है। सिन्हा ने फिल्म के बारे में कुछ अहम बातें साझा कीं:

  1. रिलीज डेट: यह फिल्म 20 फरवरी को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।
  2. सजीव चित्रण: यह एक कोर्टरूम ड्रामा है। इसके लिए सिन्हा ने वास्तविक अदालती कार्यवाहियों का गहन अध्ययन किया है ताकि फिल्म बनावटी न लगे।
  3. दर्शक ही जज: उन्होंने कहा, “कोर्टरूम फिल्मों में दर्शक खुद को जज की कुर्सी पर महसूस करता है, वह वकीलों की दलीलें सुनकर अपना फैसला खुद देता है।”

झारखंड में शूटिंग की संभावना

​अनुभव सिन्हा ने जमशेदपुर की लोकेशंस और यहाँ की संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि यदि उन्हें उपयुक्त कहानी मिली, तो वे भविष्य में झारखंड में शूटिंग करना जरूर पसंद करेंगे। उनके अनुसार, छोटे शहरों के दर्शक भी गंभीर विषयों वाली फिल्मों को उतनी ही ईमानदारी से देखते हैं।

निष्कर्ष: अनुभव सिन्हा की इस यात्रा ने यह संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में बॉलीवुड के बड़े पर्दे पर झारखंड की जनजातीय वीरता और यहाँ की मिट्टी की सोंधी खुशबू देखने को मिल सकती है।