ताजा खबर
जमशेदपुर में प्रशासनिक फेरबदल: एसएसपी डॉ. एहतेशाम वाकारिब ने तीन थानों को दिए नए प्रभारी, सीतारामडेरा, बिरसानगर और श्यामसुंदरपुर में तैनाती•शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी स्वरूप की होती है पूजा, जानिए पूरी विधि और महत्व•नवरात्रि के प्रथम दिन ‘सेवा ही लक्ष्य’ संस्था ने ताइक्वांडो के बच्चों के बीच किया खाद्य सामग्री का वितरण, मिस मनदीप कौर रहीं मौजूद•साकची गोलचक्कर पर ट्रैफिक पुलिस की अनोखी पहल: सड़क सुरक्षा को लेकर चलाया गया जागरूकता अभियान, बांटे गए हेलमेट•रूपी सोरेन के निधन पर झामुमो ने दी श्रद्धांजलि, 14 अक्टूबर को शहीद देवेंद्र माझी का शहादत दिवस सादगी से मनाने का निर्णय•विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मानगो चौक पर डीएलएसए ने चलाया जागरूकता अभियान, टोल-फ्री नंबर 14416 पर परामर्श की दी जानकारी•भाजपा परसुडीह मंडल के ज्ञापन का दिखा सकारात्मक असर, बाजार में शुरू हुई साफ-सफाई; नेताओं ने जताया आभार•डांडिया और गरबा कार्यक्रमों में अश्लील व द्विअर्थी गानों पर रोक लगाने की मांग, ‘सेवा ही लक्ष्य’ संस्था ने जिला प्रशासन को सौंपा ज्ञापन•मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के निधन पर मूलवासी कारुवा समाज ने जताया गहरा शोक, गुरुचरण मुखी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि•बागबेड़ा के कन्हैया सिंह को पुलिस हिरासत में लिए जाने की चर्चा, चांडिल ले जाने की सूचना से बढ़ा सस्पेंसजमशेदपुर में प्रशासनिक फेरबदल: एसएसपी डॉ. एहतेशाम वाकारिब ने तीन थानों को दिए नए प्रभारी, सीतारामडेरा, बिरसानगर और श्यामसुंदरपुर में तैनाती•शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी स्वरूप की होती है पूजा, जानिए पूरी विधि और महत्व•नवरात्रि के प्रथम दिन ‘सेवा ही लक्ष्य’ संस्था ने ताइक्वांडो के बच्चों के बीच किया खाद्य सामग्री का वितरण, मिस मनदीप कौर रहीं मौजूद•साकची गोलचक्कर पर ट्रैफिक पुलिस की अनोखी पहल: सड़क सुरक्षा को लेकर चलाया गया जागरूकता अभियान, बांटे गए हेलमेट•रूपी सोरेन के निधन पर झामुमो ने दी श्रद्धांजलि, 14 अक्टूबर को शहीद देवेंद्र माझी का शहादत दिवस सादगी से मनाने का निर्णय•विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मानगो चौक पर डीएलएसए ने चलाया जागरूकता अभियान, टोल-फ्री नंबर 14416 पर परामर्श की दी जानकारी•भाजपा परसुडीह मंडल के ज्ञापन का दिखा सकारात्मक असर, बाजार में शुरू हुई साफ-सफाई; नेताओं ने जताया आभार•डांडिया और गरबा कार्यक्रमों में अश्लील व द्विअर्थी गानों पर रोक लगाने की मांग, ‘सेवा ही लक्ष्य’ संस्था ने जिला प्रशासन को सौंपा ज्ञापन•मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के निधन पर मूलवासी कारुवा समाज ने जताया गहरा शोक, गुरुचरण मुखी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि•बागबेड़ा के कन्हैया सिंह को पुलिस हिरासत में लिए जाने की चर्चा, चांडिल ले जाने की सूचना से बढ़ा सस्पेंस

एक नई सोच, एक नई धारा

सी. सुब्रमण्यम—भारत की ‘हरित क्रांति’ के वे गुमनाम नायक, जिन्होंने देश को आत्मनिर्भर बनाया

1002341085

​नई दिल्ली: आधुनिक भारत के इतिहास में जब भी कृषि और खाद्य सुरक्षा की बात होगी, चिदंबरम सुब्रमण्यम का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिया जाएगा। पूर्व केंद्रीय खाद्य और कृषि मंत्री, जिन्हें ‘भारत की हरित क्रांति का वास्तुकार’ कहा जाता है, एक ऐसे नेता थे जिन्होंने देश को भुखमरी के मुहाने से निकालकर अन्न के भंडार तक पहुँचाया, लेकिन कभी इसका व्यक्तिगत श्रेय नहीं लिया।

1002341085

​संकट के समय में ‘साहसी’ नेतृत्व

​1960 के दशक में भारत एक गंभीर खाद्यान्न संकट और अकाल की स्थिति से जूझ रहा था। उस समय भारत अनाज के लिए पूरी तरह से अमेरिका (PL-480 आयात) पर निर्भर था। कृषि मंत्री के रूप में सुब्रमण्यम ने एक साहसिक निर्णय लिया—उन्होंने पारंपरिक खेती को वैज्ञानिक पद्धति में बदलने का बीड़ा उठाया।

​हरित क्रांति के स्तंभ: बीज, उर्वरक और विज्ञान

​सुब्रमण्यम ने केवल नीतियां नहीं बनाईं, बल्कि वैज्ञानिकों और किसानों के बीच की दूरी को मिटाया। उनके योगदान के मुख्य बिंदु थे:

  • ​वैज्ञानिक साझेदारी: उन्होंने प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एम. एस. स्वामीनाथन के साथ मिलकर कार्य किया।
  • ​HYV बीजों की शुरुआत: अधिक उपज देने वाली किस्म (HYV) के बीजों और रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को प्रोत्साहित किया।
  • ​सिंचाई और समर्थन: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सुनिश्चित सिंचाई और बफर स्टॉक तंत्र की नींव रखी।

​शिक्षा से रक्षा तक: एक बहुआयामी व्यक्तित्व

​सुब्रमण्यम केवल कृषि तक सीमित नहीं थे। वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी और कुशल प्रशासक भी थे:

  • ​शिक्षा: उन्होंने भारत में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई IITs और इंजीनियरिंग कॉलेजों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • ​रक्षा: 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान रक्षा मंत्री के रूप में उनकी भूमिका निर्णायक रही।
  • ​वित्त और उद्योग: तमिलनाडु और केंद्र सरकार में वित्त और इस्पात मंत्रालयों को संभालते हुए उन्होंने औद्योगिक विकास को नई दिशा दी।

​विरासत और सम्मान

​राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा और दूरदर्शिता को देखते हुए, 1998 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजा गया। 7 नवंबर 2000 को उनके निधन के बाद भी, भारत का गेहूं और चावल उत्पादन में विश्व में अग्रणी होना उनकी सबसे बड़ी विरासत है।

​“वे सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध और निर्णयों में साहसी थे। विरोध के बावजूद अपने विश्वास पर दृढ़ रहना उनकी सबसे बड़ी खूबी थी।”

​निष्कर्ष

​सी. सुब्रमण्यम का जीवन सिखाता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है। आज जब हम खाद्य सुरक्षा का आनंद ले रहे हैं, तो यह उन “भगीरथी प्रयासों” का परिणाम है जो सुब्रमण्यम ने दशकों पहले किए थे। वे सच्चे अर्थों में आधुनिक भारत के निर्माता थे।

CCTV 2 CAMERA TWISTER 1
error: Content is protected !!