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विशेष रिपोर्ट: पेसा कानून की ‘आत्मा’ पर प्रहार? झारखंड में आदिवासी अधिकारों को लेकर छिड़ा विवाद

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रांची: झारखंड में पेसा अधिनियम (PESA Act) 1996 की नियमावली को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आदिवासी संगठनों और जानकारों का आरोप है कि राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई नई नियमावली इस कानून की मूल अवधारणा को संरक्षित करने के बजाय उसे कमजोर करने की एक सोची-समझी साजिश है।

मूल भावना से छेड़छाड़ का आरोप

​पेसा कानून का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों की रूढ़िजन्य विधि (Customary Laws), सामाजिक-धार्मिक प्रथाओं और पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था का संरक्षण करना था। लेकिन विशेषज्ञों का दावा है कि झारखंड की नियमावली में इन प्रमुख प्रावधानों को ही दरकिनार कर दिया गया है।

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विवाद के मुख्य बिंदु: क्यों उठ रहे हैं सवाल?

विषयनियमावली पर आपत्ति
ग्राम सभा की शक्ति‘अनुमति’ शब्द को ‘सहमति’ में बदलना और 30 दिनों में ‘स्वतः स्वीकृति’ का प्रावधान ग्राम सभा के अधिकारों का हनन है।
जमीन का अधिकारCNT और SPT एक्ट के उल्लंघन पर जमीन वापसी का अधिकार ग्राम सभा से छीन लिया गया है।
परंपरागत ढांचाग्राम प्रधानों के साथ अन्य श्रेणियों के लिए पिछला दरवाजा खोलकर पारंपरिक स्वशासन को कमजोर किया जा रहा है।
राज्यपाल की भूमिकाशेड्यूल एरिया में राज्यपाल के अधिकारों को सीमित कर सारी शक्तियां उपायुक्त (DC) को सौंपने का विरोध हो रहा है।

नियमगिरि का हवाला और धार्मिक आस्था

​आदिवासी समाज का तर्क है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के नियमगिरि मामले में आदिवासियों की धार्मिक आस्थाओं को सर्वोपरि मानते हुए खनन पर रोक लगा दी थी, तो राज्य सरकार उनकी मान्यताओं और परंपराओं को दरकिनार कैसे कर सकती है?

‘जल, जंगल, जमीन’ के हक पर संकट

​आरोप है कि पेसा कानून के तहत मिलने वाले जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को नियमावली से हटा दिया गया है। पहले उपायुक्त के लिए जमीन हस्तांतरण से पूर्व ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य थी, जिसे अब शिथिल कर दिया गया है।

“जो कानून हमारी संस्कृति और अस्तित्व की रक्षा के लिए ढाल बनना चाहिए था, उसी कानून की नियमावली को हथियार बनाकर हमें हाशिये पर धकेलने की साजिश रची जा रही है।” > — स्थानीय आदिवासी संगठन के प्रतिनिधि

निष्कर्ष

​फिलहाल, यह मामला राज्य की राजनीति और आदिवासी अधिकारों की लड़ाई के केंद्र में आ गया है। सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इन आपत्तियों पर पुनर्विचार करेगी या प्रशासन ‘मनमर्जी’ के इन आरोपों के बीच ही आगे बढ़ेगा?

प्रमुख सुर्खियां (Headlines) जो इस्तेमाल की जा सकती हैं:

  1. झारखंड पेसा नियमावली: आदिवासी स्वशासन के ‘संवैधानिक कवच’ में छेद की कोशिश?
  2. पेसा कानून 1996: अधिकारों की रक्षा या अस्तित्व पर प्रहार? रांची में उठा विरोध का स्वर।
  3. ग्राम सभा बनाम प्रशासन: झारखंड में पेसा नियमावली पर छिड़ी कानूनी और सामाजिक जंग।