जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026
लौहनगरी जमशेदपुर में विद्यादायिनी मां सरस्वती की आराधना की तैयारियां अपने शिखर पर हैं। इस वर्ष शहर में भक्ति और कला का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, जहाँ बारीडीह का विद्यापतिनगर अपनी भव्यता के कारण पूरे झारखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है।

विद्यापतिनगर: 31 फीट की प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र
- कलाकारी: बंगाल के कुशल कारीगर पिछले दो महीनों से इस प्रतिमा को जीवंत रूप देने में जुटे थे।
- लागत: लगभग 2 लाख रुपये की लागत से तैयार इस प्रतिमा का विधिवत उद्घाटन आज, 22 जनवरी की शाम को होगा।
- विशेष कार्यक्रम: * 26 जनवरी: रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम।
- 27 जनवरी: ‘जादूगर संध्या’ का विशेष आयोजन।
- 28 जनवरी: प्रतिमा का विसर्जन।
बारीडीह (ट्रांसपोर्ट कुआं मैदान) में राधा कृष्ण ब्वायज क्लब द्वारा इस वर्ष 31 फीट ऊंची मां सरस्वती की भव्य प्रतिमा स्थापित की जा रही है। आयोजन समिति का दावा है कि यह पूरे झारखंड की सबसे बड़ी सरस्वती प्रतिमा है।
समिति के मुख्य संरक्षक प्रह्लाद लोहरा और अध्यक्ष अभिलाष गौड़ ने बताया कि महासचिव सुशील श्रीवास्तव और कोषाध्यक्ष कन्हैया चौबे सहित पूरी टीम इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में जुटी है।
राज क्लब: 1980 से बरकरार है परंपरा
सर्किट हाउस स्थित राज क्लब पूजा कमेटी ने भी अपना भव्य पंडाल तैयार कर लिया है। यहाँ वर्ष 1980 से निरंतर पूजा आयोजित की जा रही है, जो अपनी विशेष परंपरा के लिए जानी जाती है।
कमेटी के अध्यक्ष बलराम तांती और सचिव कैलाश क्षत्रिय के अनुसार, इस वर्ष भी यहाँ की विद्युत सज्जा (Lighting) और आकर्षक पंडाल शहरवासियों के लिए मुख्य केंद्र रहेंगे। गुरुवार को उद्घाटन के बाद यहाँ तीन दिनों तक पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलेगा, जिसके बाद चौथे दिन विसर्जन किया जाएगा।
सुरक्षा और सुविधा के कड़े इंतजाम
जमशेदपुर के इन दोनों प्रमुख पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। इसे देखते हुए समितियों ने सुरक्षा, कतारबद्ध दर्शन और पार्किंग के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। शहर के अन्य शिक्षण संस्थानों और मोहल्लों में भी पूजा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।











