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अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट का डंडा: जमशेदपुर में एक महीने के भीतर ढहाए जाएंगे नक्शा उल्लंघन करने वाले भवन

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​जमशेदपुर: लौहनगरी में अवैध निर्माण और नक्शा विचलन कर बनाई गई इमारतों पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा प्रहार किया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने जेएनएसी (JNAC) क्षेत्र के चिह्नित अवैध निर्माणों को एक माह के भीतर ध्वस्त करने का ऐतिहासिक आदेश दिया है।

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​प्रशासन हुआ रेस, डीसी ने मांगी 24 भवनों की रिपोर्ट

​हाईकोर्ट की सख्ती के बाद जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। उपायुक्त (DC) कर्ण सत्यार्थी ने सोमवार तक जेएनएसी क्षेत्र के उन 24 भवनों की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिन्हें अवैध रूप से चिह्नित किया गया है। जांच में पता चला है कि इनमें से अधिकांश भवनों का निर्माण पिछले 5 से 10 वर्षों के दौरान नियमों को ताक पर रखकर किया गया है।

​अधिकारियों की तय होगी व्यक्तिगत जिम्मेदारी

​चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने स्पष्ट कर दिया है कि इस कार्रवाई में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • ​अदालत ने राज्य सरकार को जेएनएसी को पूरी मदद देने का निर्देश दिया है।
  • ​यदि सहयोग में कमी पाई गई, तो नगर विकास सचिव, उपायुक्त और वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा।

​जांच समिति ने खोली पोल

​अदालत द्वारा गठित अधिवक्ताओं की समिति ने अपनी रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार:

  1. ​भवन उपनियमों (Building Bylaws) का सरेआम उल्लंघन किया गया है।
  2. ​अवैध निर्माण के फलने-फूलने के पीछे संबंधित अधिकारियों की बड़ी लापरवाही रही है।
  3. ​बेसमेंट और पार्किंग की जगह का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।
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​25 फरवरी तक देनी होगी रिपोर्ट

​हाईकोर्ट ने जेएनएसी के उप नगर आयुक्त को 25 फरवरी तक अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को मुकर्रर की गई है। इस आदेश के बाद शहर के बिल्डरों और नक्शा उल्लंघन करने वाले भवन स्वामियों में हड़कंप मच गया है।

​संपादकीय टिप्पणी: शहर के नियोजन के लिए कड़ा संदेश

​हाईकोर्ट का यह आदेश जमशेदपुर के शहरी नियोजन (Urban Planning) के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है। वर्षों से अधिकारियों की मिलीभगत और बिल्डरों की मनमानी ने शहर के बुनियादी ढांचे को दबाव में डाल दिया है। सड़कों पर जाम और पार्किंग की कमी का बड़ा कारण यही अवैध निर्माण हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन ‘रसूखदारों’ के खिलाफ किस हद तक कार्रवाई सुनिश्चित कर पाता है।

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