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जमशेदपुर: NH-33 पर रैम्प निर्माण का विरोध तेज, व्यापारियों ने जताई कारोबार ठप होने की आशंका

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जमशेदपुर: शहर के एनएच-33 (NH-33) वाले शहरी हिस्से को ‘एक्सीडेंट फ्री’ और जाम मुक्त बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित रैम्प निर्माण योजना का विरोध शुरू हो गया है। जमशेदपुर सिटीजन फोरम और हाईवे शॉपकीपर एंड टेंडर एसोसिएशन ने इस निर्माण के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है।

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विकास सिंह ने दी आंदोलन की चेतावनी

​हाईवे शॉपकीपर और टेंडर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विकास सिंह ने रैम्प निर्माण का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि प्रशासन की यह योजना अव्यवहारिक है। उनके अनुसार:

  • व्यापार पर संकट: रैम्प बनने से हाईवे के किनारे स्थित सैकड़ों दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान मुख्य मार्ग से कट जाएंगे, जिससे स्थानीय कारोबार पूरी तरह ठप हो जाएगा।
  • जनता की असुविधा: विकास सिंह का तर्क है कि रैम्प निर्माण से आम नागरिकों के आवागमन में सुगमता आने के बजाय जटिलता बढ़ेगी।
  • वैकल्पिक समाधान की मांग: एसोसिएशन का कहना है कि प्रशासन को व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोई वैकल्पिक योजना बनानी चाहिए।

“एक्सीडेंट फ्री ज़ोन” बनाम “आजीविका”

​प्रशासन का उद्देश्य इस व्यस्त मार्ग को दुर्घटना मुक्त बनाना है, लेकिन स्थानीय निवासी और व्यापारी इसे अपनी आजीविका पर प्रहार मान रहे हैं। जमशेदपुर सिटीजन फोरम ने भी स्पष्ट किया है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर व्यापारियों का विनाश बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

“प्रशासन की मंशा मार्ग को सुरक्षित बनाने की हो सकती है, लेकिन इसके लिए दुकानदारों और स्थानीय लोगों की बलि नहीं दी जा सकती। अगर इस योजना पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो हम व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।” > — विकास सिंह, उपाध्यक्ष (हाईवे शॉपकीपर एंड टेंडर एसोसिएशन)

विरोध की मुख्य वजहें:

  1. एक्सेस की समस्या: रैम्प बनने से सर्विस रोड और मुख्य मार्ग के बीच संपर्क बाधित होगा।
  2. आर्थिक नुकसान: हाईवे के किनारे वर्षों से स्थापित होटल, शोरूम और छोटी दुकानों के ग्राहक कम हो जाएंगे।
  3. सुरक्षा के सवाल: प्रदर्शनकारियों का मानना है कि रैम्प के डिजाइन से स्थानीय ट्रैफिक की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।