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एक नई सोच, एक नई धारा

झारखंड हाईकोर्ट से CM हेमंत सोरेन को झटका: समन की अवहेलना मामले में याचिका खारिज

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​रांची: जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के समन की अवहेलना करने के आरोप में चल रही अदालती कार्यवाही को निरस्त कराने की उनकी कोशिश विफल रही है। झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में मुख्यमंत्री की याचिका को खारिज कर दिया है।

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​हाईकोर्ट का फैसला और राहत

​जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की एकल पीठ ने हेमंत सोरेन के खिलाफ एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहे केस को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने केस को निरस्त करने से तो इनकार कर दिया, लेकिन मुख्यमंत्री को एक महत्वपूर्ण राहत दी है:

  • ​राहत: हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन को निचली अदालत (एमपी-एमएलए कोर्ट) में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान की है।
  • ​स्थिति: अब निचली अदालत में उनके खिलाफ न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी, लेकिन उन्हें हर तारीख पर पेश नहीं होना पड़ेगा।

​क्या है पूरा मामला?

​यह विवाद रांची के बड़गाईं अंचल स्थित भूमि घोटाले की जांच से जुड़ा है। ईडी का आरोप है कि जांच के दौरान मुख्यमंत्री ने जांच एजेंसी के निर्देशों का पालन नहीं किया।

  • ​शिकायत: फरवरी 2024 में ईडी ने सीजेएम कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी।
  • ​धाराएं: ईडी ने इसे PMLA की धारा 63 और IPC की धारा 174 का उल्लंघन बताया है, जो लोक सेवक के आदेश की अवहेलना से संबंधित है।

​ईडी के 10 समन और सीएम का तर्क

​एजेंसी के अनुसार, हेमंत सोरेन को पूछताछ के लिए कुल 10 बार समन जारी किए गए थे, लेकिन वे केवल दो बार उपस्थित हुए।

​समन की समयसीमा:

  • ​2023: 14 अगस्त (पहला), 19 अगस्त, 1 सितंबर, 17 सितंबर, 26 सितंबर, 11 दिसंबर और 29 दिसंबर।
  • ​2024: 13 जनवरी, 22 जनवरी और 27 जनवरी।

​मुख्यमंत्री का पक्ष:

हेमंत सोरेन ने कोर्ट में दलील दी कि उन्होंने किसी समन की जानबूझकर अवहेलना नहीं की। उनका कहना था कि:

  1. ​जिन समनों पर वे नहीं जा पाए, उनका लिखित जवाब ईडी को भेज दिया गया था।
  2. ​पुराने समन के ‘लैप्स’ होने के बाद जब नए समन मिले, तो उन्होंने हाजिरी दी और जांच में सहयोग किया।
  3. ​ईडी द्वारा बार-बार समन भेजना ‘दुर्भावना से प्रेरित’ था।

​अगली प्रक्रिया

​सीजेएम कोर्ट द्वारा 4 मार्च 2024 को लिए गए संज्ञान के बाद यह मामला अब एमपी-एमएलए विशेष अदालत में चल रहा है। हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद अब निचली अदालत में साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर कार्यवाही आगे बढ़ेगी।

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