सरायकेला: सरायकेला स्थित खरखाई नदी के तट पर विराजमान पौराणिक मां झूमकेश्वरी शक्ति पीठ में गुरुवार (15 जनवरी) को वार्षिक आयखान यात्रा के अवसर पर भव्य पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में कारूवा एवं मुखी समाज के हजारों लोगों ने शिरकत की और सुख, समृद्धि तथा शांति की मन्नतें मांगीं।

तीन राज्यों का महासंगम
प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को आयोजित होने वाली इस विशेष पूजा में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि झारखंड, बंगाल और ओडिशा से भारी संख्या में श्रद्धालु अपनी कुलदेवी के दर्शन करने पहुँचते हैं। समाज के लोगों का मानना है कि यह शक्ति पीठ उनके पौराणिक अस्तित्व और ऐतिहासिक विरासत का केंद्र है।
मन्नतें और बलि प्रथा की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धालु यहाँ अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। विधिवत पूजा-अर्चना के दौरान फल और फूल अर्पित किए गए। परंपरा के अनुसार, जिन श्रद्धालुओं की मन्नतें पूरी होती हैं, वे आभार स्वरूप मुर्गे और बकरे की बलि भी चढ़ाते हैं।
प्रमुख हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर समाज के कई वरिष्ठ नेता और समाजसेवी मौजूद रहे, जिन्होंने मां के दरबार में माथा टेका:
- रंजन कारूवा: वरिष्ठ संघ मित्र (मानवाधिकार सहायता संघ अंतरराष्ट्रीय) एवं जिला संरक्षक (SC/ST एकता मंच)।
- गुरूचरण मुखी: प्रदेश कोषाध्यक्ष (मूलवासी कारूवा समाज)।
- मनोज चौधरी: पूर्व उपचेयरमैन (सरायकेला नगर)।
- आनन्द मुखी: पूर्व प्रत्याशी (जमशेदपुर लोकसभा)।
इसके अलावा सचिव पंचु मुखी, ओंकार नाथ कारूवा, सुदर्शन मुखी, रविशंकर मुखी, अजय मुखी, श्रीनिवासन कारूवा, नाडू कारुवा, अभिजीत मुखी, अजीत मुखी, गोविंदा मुखी, महेश मुखी, और बरूण मुखी सहित हजारों की संख्या में समाज के युवा और बुजुर्ग उपस्थित थे।
सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
खरखाई नदी के तट पर स्थित यह शक्ति पीठ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह कारूवा और मुखी समाज की एकता को भी दर्शाता है। आयोजन के दौरान सुरक्षा और सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया ताकि दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।











