पटना: बिहार में मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाले ‘दही-चूड़ा’ भोज ने इस बार भी राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। बुधवार को सबसे अधिक चर्चा जनशक्ति जनता दल के प्रमुख और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव के आवास पर आयोजित भोज की रही, जहाँ पारिवारिक दूरियों को कम करने और नए सियासी समीकरणों के संकेत मिले।

लालू यादव ने दिया आशीर्वाद, नाराजगी की खबरों पर लगाया विराम
भोज में सबसे खास पल वह रहा जब राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव अपने बड़े बेटे तेज प्रताप के निमंत्रण पर उनके घर पहुंचे। लालू यादव ने न केवल दही-चूड़ा का आनंद लिया, बल्कि मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि यह पर्व एकता का प्रतीक है और सभी को इसे मनाना चाहिए। उन्होंने तेज प्रताप को अपना आशीर्वाद दिया और परिवार में किसी भी तरह की नाराजगी की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।
मामा साधु यादव की उपस्थिति ने बटोरीं सुर्खियां
लंबे समय से लालू परिवार से दूर रहे साधु यादव का तेज प्रताप के भोज में पहुंचना चर्चा का विषय बना रहा। हालांकि उन्होंने मीडिया से अधिक बात नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि “परिवार के लोगों को साथ आना चाहिए और एक होना चाहिए।” उनके इस बयान को परिवार में सुलह की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सत्ता और विपक्ष का संगम
तेज प्रताप यादव ने अपने इस भोज में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के नेताओं को आमंत्रित किया था। भोज की महत्ता तब और बढ़ गई जब बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी वहां शिरकत करने पहुंचे।
अन्य दलों में भी ‘दही-चूड़ा’ का जोर
मकर संक्रांति के मौके पर केवल तेज प्रताप ही नहीं, बल्कि अन्य खेमों में भी सियासी भोज की धूम रही:
- भाजपा: भाजपा प्रदेश कार्यालय में दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया, जिसमें पार्टी के कई दिग्गज नेता शामिल हुए।
- जदयू (JDU): पूर्व मंत्री एवं जदयू विधायक रत्नेश सदा के आवास पर भी भव्य भोज का आयोजन हुआ।
- लोजपा (रामविलास): चिराग पासवान की पार्टी की ओर से 15 जनवरी को चूड़ा-दही भोज का आयोजन प्रस्तावित है।
- उपमुख्यमंत्री: इससे पूर्व मंगलवार को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा भी अपने आवास पर भोज दे चुके हैं।










