ताजा खबर
बिष्टुपुर हिंसा पर गरमाई राजनीति: कांग्रेस ने भाजपा जिलाध्यक्ष और पूर्वी विधायक पर बोला हमला•झारखंड में धान खरीद की शुरू हुई तैयारियां: 15 दिसंबर से होगी शुरुआत, इस बार 50 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य•जमशेदपुर के बिष्टुपुर में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भीषण झड़प, पथराव में पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार समेत 10 से अधिक घायल•पूर्वी सिंहभूम में दुर्गा पूजा पंडालों के 100 मीटर के दायरे को किया गया तंबाकू मुक्त घोषित, नियम तोड़ने पर लगेगा 1,000 रुपये तक जुर्माना•जमशेदपुर में प्रशासनिक फेरबदल: एसएसपी डॉ. एहतेशाम वाकारिब ने तीन थानों को दिए नए प्रभारी, सीतारामडेरा, बिरसानगर और श्यामसुंदरपुर में तैनाती•शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी स्वरूप की होती है पूजा, जानिए पूरी विधि और महत्व•नवरात्रि के प्रथम दिन ‘सेवा ही लक्ष्य’ संस्था ने ताइक्वांडो के बच्चों के बीच किया खाद्य सामग्री का वितरण, मिस मनदीप कौर रहीं मौजूद•साकची गोलचक्कर पर ट्रैफिक पुलिस की अनोखी पहल: सड़क सुरक्षा को लेकर चलाया गया जागरूकता अभियान, बांटे गए हेलमेट•रूपी सोरेन के निधन पर झामुमो ने दी श्रद्धांजलि, 14 अक्टूबर को शहीद देवेंद्र माझी का शहादत दिवस सादगी से मनाने का निर्णय•विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मानगो चौक पर डीएलएसए ने चलाया जागरूकता अभियान, टोल-फ्री नंबर 14416 पर परामर्श की दी जानकारीबिष्टुपुर हिंसा पर गरमाई राजनीति: कांग्रेस ने भाजपा जिलाध्यक्ष और पूर्वी विधायक पर बोला हमला•झारखंड में धान खरीद की शुरू हुई तैयारियां: 15 दिसंबर से होगी शुरुआत, इस बार 50 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य•जमशेदपुर के बिष्टुपुर में भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भीषण झड़प, पथराव में पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार समेत 10 से अधिक घायल•पूर्वी सिंहभूम में दुर्गा पूजा पंडालों के 100 मीटर के दायरे को किया गया तंबाकू मुक्त घोषित, नियम तोड़ने पर लगेगा 1,000 रुपये तक जुर्माना•जमशेदपुर में प्रशासनिक फेरबदल: एसएसपी डॉ. एहतेशाम वाकारिब ने तीन थानों को दिए नए प्रभारी, सीतारामडेरा, बिरसानगर और श्यामसुंदरपुर में तैनाती•शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी स्वरूप की होती है पूजा, जानिए पूरी विधि और महत्व•नवरात्रि के प्रथम दिन ‘सेवा ही लक्ष्य’ संस्था ने ताइक्वांडो के बच्चों के बीच किया खाद्य सामग्री का वितरण, मिस मनदीप कौर रहीं मौजूद•साकची गोलचक्कर पर ट्रैफिक पुलिस की अनोखी पहल: सड़क सुरक्षा को लेकर चलाया गया जागरूकता अभियान, बांटे गए हेलमेट•रूपी सोरेन के निधन पर झामुमो ने दी श्रद्धांजलि, 14 अक्टूबर को शहीद देवेंद्र माझी का शहादत दिवस सादगी से मनाने का निर्णय•विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मानगो चौक पर डीएलएसए ने चलाया जागरूकता अभियान, टोल-फ्री नंबर 14416 पर परामर्श की दी जानकारी

एक नई सोच, एक नई धारा

अब ‘कानून अंधा’ नहीं है…, बदली गई न्याय की देवी की मूर्ति, आंखों से पट्टी हटाई गई, CJI चंद्रचूड़ की कवायद

n6353068451729129475549d054b039997f5c6e5dfd5356ec6437e8573f39c892187e82e111ea48a28473d9

आपने देश की अदालतों, फिल्मों और कानूनविदों के चेंबर्स में आंखों पर बंधी पट्टी के साथ न्याय की देवी की मूर्ति को देखा होगा। लेकिन अब नए भारत की न्याय की देवी की आंखें खुल गईं हैं।

यहां तक कि उनके हाथ में तलवार की जगह संविधान आ गया है। दरअसल, कुछ समय पहले ही अंग्रेजों के कानून बदले गए हैं और अब भारतीय न्यायपालिका ने भी ब्रिटिश काल को पीछे छोड़ते हुए नया रंगरूप अपनाना शुरू कर दिया है।

IMG 20240309 WA0028

देवी की आंखों पर बंधी पट्टी हटाई गई

सुप्रीम कोर्ट का ना केवल प्रतीक बदला रहा है बल्कि सालों से न्याय की देवी की आंखों पर बंधी पट्टी भी हट गई है। जाहिर है कि सुप्रीम कोर्ट ने देश को संदेश दिया है कि अब ‘ कानून अंधा’ नहीं है। आपको बता दे ये सब कवायद सुप्रीम कोर्ट के CJI डी वाई चंद्रचूड़ ने की है। ऐसी ही स्टेच्यू सुप्रीम कोर्ट में जजों की लाइब्रेरी में लगाई गई है।

IMG 20240309 WA00271

तलवार की जगह संविधान

CJI चंद्रचूड़ के निर्देशों पर न्याय की देवी की मूर्ति को नए सिरे से बनवाया गया। सबसे पहले एक बड़ी मूर्ति जजों की लाइब्रेरी में स्थापित की गई है। जो पहले न्याय की देवी की मूर्ति होती थी उसमें उनकी दोनों आंखों पर पट्टी बंधी होती थी। नई मूर्ति में न्याय की देवी की आंखें खुली हैं और कोई पट्टी नहीं है। साथ ही एक हाथ में तराजू जबकि दूसरे में सजा देने की प्रतीक तलवार होती थी। हालांकि, अब न्याय की देवी की मूर्ति के हाथों में तलवार की जगह संविधान ने ले ली है। मूर्ति के दूसरे हाथ में तराजू पहले की ही तरह है।

क्यों बदली गई मूर्ति?

सूत्रों के मुताबिक CJI चंद्रचूड़ का मानना था कि अंग्रेजी विरासत से अब आगे निकलना होगा। कानून कभी अंधा नहीं होता, वो सबको समान रूप से देखता है। इसलिए न्याय की देवी का स्वरूप बदला जाना चाहिए। साथ ही देवी के एक हाथ में तलवार नहीं बल्कि संविधान होना चाहिए जिससे समाज में ये संदेश जाए कि वो संविधान के अनुसार न्याय करती हैं। दूसरे हाथ में तराजू सही है कि उनकी नजर में सब समान है।

IMG 20240309 WA00261
CCTV 2 CAMERA TWISTER 1
error: Content is protected !!