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एक नई सोच, एक नई धारा

झारखंड की उच्च शिक्षा संकट में: 60 छात्रों पर महज एक शिक्षक; बिहार से थोड़ी बेहतर, लेकिन राष्ट्रीय औसत से कोसों दूर

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​रांची: झारखंड के उच्च शिक्षण संस्थानों से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य विधानसभा में प्रस्तुत झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2024-26 के आंकड़ों ने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों की भारी किल्लत है, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता और छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है।

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​राष्ट्रीय औसत बनाम झारखंड: एक कड़वा सच

​आंकड़े बताते हैं कि झारखंड में छात्र-शिक्षक अनुपात राष्ट्रीय मानकों की तुलना में बेहद निराशाजनक है। जहाँ पूरे देश में उच्च शिक्षा का स्तर सुधर रहा है, वहीं झारखंड इस दौड़ में पिछड़ता दिख रहा है।

क्षेत्रझारखंड (छात्र:शिक्षक)भारत (छात्र:शिक्षक)
कुल उच्च शिक्षण संस्थान54 : 123 : 1
विश्वविद्यालय एवं कॉलेज60 : 124 : 1

झारखंड की स्थिति केवल पड़ोसी राज्य बिहार से कुछ बेहतर है, लेकिन देश के अन्य विकसित राज्यों के मुकाबले यह बेहद गंभीर है।

​सफेद हाथी साबित हो रहे हैं विश्वविद्यालय?

​आर्थिक सर्वेक्षण में स्पष्ट किया गया है कि राज्य के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों (Assistant Professors) के लगभग आधे पद रिक्त पड़े हैं। वहीं, सह प्राध्यापक (Associate Professor) और प्राध्यापक (Professor) के पद तो ‘नहीं के बराबर’ भरे हुए हैं।

​मुख्य कारण:

  • ​नियुक्ति में विलंब: लंबे समय से राज्य के विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में नियमित शिक्षकों की बहाली नहीं हुई है।
  • ​AISHE रिपोर्ट: यह विश्लेषण एआईएसएचई (AISHE) 2021-22 की रिपोर्ट पर आधारित है, और तब से अब तक नियुक्तियां न होने के कारण स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।

​सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

​शिक्षकों की इस कमी का सीधा असर राज्य के सकल नामांकन अनुपात (GER) और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। इस बीच, सर्वोच्च न्यायालय ने देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक रिक्त पदों को चार माह के भीतर भरा जाए।

​विशेषज्ञों की राय

​शिक्षाविदों का मानना है कि यदि जल्द ही नियुक्तियां नहीं की गईं, तो झारखंड के छात्र दूसरे राज्यों में पलायन करने को मजबूर होंगे। आर्थिक सर्वेक्षण में भी इस स्थिति पर चिंता जताते हुए इसे राज्य के विकास में बड़ी बाधा माना गया है।

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