एक नई सोच, एक नई धारा

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आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के एक प्लांट में हादसा, सात मजदूर झुलसे

आदित्यपुर : सरायकेला खरसावां जिले आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया के फेज 6 स्थित बालाजी कृष्णा इंजीटेक में बुधवार को अचानक लगने से कंपनी में काम कर रहे करीब सात मजदूर बुरी तरह से झुलस गए है. सभी मजदूरों को टाटा मुख्य अस्पताल ले जाया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है. सूचना मिलते ही झारखंड अग्निशमन विभाग की एक गाड़ी मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने में जुट गई है, हालांकि समाचार लिखे जाने तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका है.

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आग कैसे लगी फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है मिली जानकारी के अनुसार कंपनी के हीट ट्रीटमेंट मशीन के तेल लीकेज के दौरान अचानक चिंगारी भड़की और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया. इसकी जद में कंपनी में काम कर रहे सात मजदूर आ गए. वही इस अगलगी से कंपनी को भी भारी नुकसान होने का अनुमान है, हालांकि इस संबंध में कंपनी प्रबंधन की ओर से किसी तरह का भी कोई बयान जारी नहीं किया गया है. वहीं घायलों में ललन सिंह, सोमा जमुदा, दिलीप मुर्मू, अजय टांडी, सावन सोरेन, श्रीराम तप्पे शामिल है.

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झारखंड : पुलिस कर्मियों के लिए खुशखबरी, मुफ्त में होगा लाखों रुपये का बीमा, पढ़ें पूरी खबर

झारखण्ड : चतुर्थवर्गीय कर्मचारी से लेकर डीजीपी तक करीब 66 हजार पुलिसकर्मियों को भारतीय स्टेट बैंक से मुफ्त में 50 से 60 लाख रुपये का बीमा का लाभ मिलेगा। इसका नाम पुलिस सैलरी पैकेज दिया गया है। झारखंड पुलिस के 95 प्रतिशत कर्मियों का खाता एसबीआइ में है। इसी के एवज में बिना कोई प्रीमियम दिये उक्त लाभ पुलिसकर्मियों को मिलेगा। पुलिस सैलरी पैकेज के लिए झारखंड पुलिस व एसबीआइ के बीच एमओयू हुआ। (जारी…)

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जाने किस स्थिति में कितना मिलेगा बीमा

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पुलिस मुख्यालय सभागार में हुए एमओयू पर डीआइजी बजट शम्स तबरेज व डीजीएम देवेश मित्तल ने हस्ताक्षर किये। पुलिस सैलरी पैकेज में व्यक्तिगत दुर्घटना मृत्यु बीमा 50 लाख, स्थायी पूर्ण विकलांगता पर 50 लाख, स्थायी आंशिक विकलांगता पर 30 लाख रुपये मिलेंगे।

वायुयान दुर्घटना होने पर एक करोड़, व्यक्तिगत दुर्घटना में मृत्यु हाेने पर आश्रित बच्चों की उच्चतर शिक्षा के लिए बीमा राशि 10 लाख रुपये व अविवाहित बच्चों के विवाह के लिए भी बीमा राशि अधिकतम 10 लाख रुपये देने का प्रावधान है। नक्सली,उग्रवादी या अपराधियों के हमले में शहीद होने पर आश्रित को अतिरिक्त 10 लाख देने का प्रावधान किया गया है।

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कदमा में पुरानी रंजिश को लेकर खूनी संघर्ष: मारपीट के बाद तीन राउंड फायरिंग, तीन युवक घायल

जमशेदपुर: शहर के कदमा थाना क्षेत्र में एक बार फिर बेखौफ अपराधियों ने कानून व्यवस्था को चुनौती दी है। कदमा के रामजनम नगर स्थित बिहारी बस्ती में बुधवार को पुरानी रंजिश को लेकर दो पक्षों में हिंसक झड़प हो गई। बात सिर्फ मारपीट तक ही सीमित नहीं रही, हमलावरों ने दहशत फैलाने के उद्देश्य से तीन राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग भी की। इस घटना में तीन युवक बाल-बाल बच गए, हालांकि वे मारपीट में गंभीर रूप से घायल हुए हैं।b 1

​घटना के संबंध में रामजनम नगर निवासी समीर नाग ने कदमा थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

​मरीन ड्राइव हाईवे के पास हुआ हमला

​दर्ज शिकायत के अनुसार, बुधवार को समीर नाग अपने दो दोस्तों—सन्नी गुप्ता और विकास तांती के साथ मरीन ड्राइव हाईवे के नीचे स्थित सार्वजनिक शौचालय के पास खड़ा था। इसी दौरान दो मोटरसािकिलों पर सवार होकर छह युवक वहां पहुंचे। पुरानी रंजिश का हवाला देते हुए आरोपियों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने तीनों युवकों पर जानलेवा हमला बोल दिया।

​ईंट-पत्थरों से हमला और फायरिंग

​पीड़ित समीर नाग ने बताया कि हमलावरों ने उन पर ईंट-पत्थरों से ताबड़तोड़ हमला किया, जिससे उसके सिर पर गंभीर चोट आई है। वहीं उसके दोनों साथी सन्नी गुप्ता और विकास तांती भी इस पथराव और मारपीट में लहूलुहान हो गए। मारपीट के बाद इलाके में दहशत का माहौल बनाने के लिए हमलावरों ने तीन राउंड फायरिंग की, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि गोली किसी को नहीं लगी और तीनों युवक बाल-बाल बच गए।

शिकायत में नामजद: पीड़ित पक्ष की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में मारपीट और फायरिंग के पीछे आसू कर्मकार और उसके साथियों का हाथ होने का आरोप लगाया गया है।a 2

 

​पुलिस मामले की जांच में जुटी

​घटना की सूचना मिलते ही कदमा थाना पुलिस हरकत में आई और मामले की छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जा सके। स्थानीय पुलिस का कहना है कि आपसी विवाद और पुरानी रंजिश के सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

तीसरी धारा न्यूज

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झारखंड राज्य सूचना आयोग में नियुक्तियों को हरी झंडी: अनुज सिन्हा समेत 4 सूचना आयुक्तों के नाम पर राज्यपाल की सशर्त मंजूरी

रांची/जमशेदपुर:

झारखंड राज्य सूचना आयोग को लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नए सूचना आयुक्त मिलने जा रहे हैं। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर बुधवार को अपनी सशर्त स्वीकृति प्रदान कर दी है। राज्यपाल की इस मंजूरी के बाद अब वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा समेत चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। राजभवन से फाइल स्वीकृत होने के बाद राज्य सरकार द्वारा जल्द ही इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाएगी, जिसके बाद सभी मनोनीत सदस्य पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।IMG 20260611 WA0002

​इन चार नामों पर लगी मुहर

​राज्यपाल द्वारा स्वीकृत किए गए प्रस्ताव में राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े चार प्रमुख चेहरों को सूचना आयुक्त के पद पर जिम्मेदारी दी गई है:

  1. अनुज कुमार सिन्हा (वरिष्ठ पत्रकार)
  2. शिवपूजन पाठक
  3. तनुज खत्री
  4. अमूल्य नीरज खलखो

​राज्यपाल ने लगाईं सख्त शर्तें, मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के भी निर्देश

​राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने इस बार संचिका (फाइल) को मंजूरी तो दे दी है, लेकिन इसके साथ ही राज्य सरकार के सामने कुछ कड़े निर्देश और शर्तें भी रखी हैं:

  • मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति जल्द हो: राज्यपाल ने सरकार को निर्देशित किया है कि झारखंड राज्य सूचना आयोग में ‘मुख्य सूचना आयुक्त’ (Chief Information Commissioner) के रिक्त पद को भी जल्द से जल्द भरा जाए, ताकि आयोग का कामकाज पूरी तरह सुचारू और प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।
  • जवाबदेही राज्य सरकार की होगी: राजभवन ने स्पष्ट किया है कि यदि इन सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में कोई भी प्रक्रियागत खामी या त्रुटि पाई जाती है, अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के आदेशों के अनुपालन को लेकर कोई कानूनी सवाल उठता है, तो उसकी पूरी जवाबदेही राज्य सरकार की होगी।b 1

​दो बार वापस लौट चुकी थी फाइल, विरोध में भी सौंपे गए थे ज्ञापन

​मालूम हो कि इस नियुक्ति को लेकर राजभवन और राज्य सरकार के बीच लंबे समय से पेंच फंसा हुआ था। इससे पहले राज्यपाल ने दो बार इस नियुक्ति से संबंधित संचिका को वापस लौटा दिया था:

  • पहली बार: सूची में शामिल तीन सदस्यों का राजनीतिक दलों से सीधा संबंध होने की बात सामने आने पर फाइल वापस की गई थी। इसके बाद सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए दोबारा फाइल भेजी।
  • दूसरी बार: कुछ सदस्यों पर आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आने के बाद राज्यपाल ने पुनः स्पष्टीकरण की मांग करते हुए फाइल लौटा दी थी।a 2

​इसके अलावा, सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का हवाला देते हुए कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर इस नियुक्ति प्रक्रिया को रोकने की मांग भी की थी। बहरहाल, सरकार के जवाबों के बाद अब राज्यपाल ने शर्तों के साथ इस पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है।

ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज

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जमशेदपुर में NEET (UG)-2026 परीक्षा को लेकर प्रशासन मुस्तैद: 8 केंद्रों पर 4 हजार से अधिक परीक्षार्थी होंगे शामिल, सुरक्षा और क्राउड मैनेजमेंट के कड़े निर्देश

जमशेदपुर:

आगामी 21 जून 2026 को होने वाली NEET (UG)-2026 परीक्षा को पूरी तरह कदाचारमुक्त, स्वच्छ और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। समाहरणालय सभागार में जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त श्री राजीव रंजन की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ एनटीए (NTA) एवं संबंधित परीक्षा केंद्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जहां तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा की गई।IMG 20260611 WA0001

​8 केंद्रों पर परीक्षा, दोपहर 1:30 बजे बंद हो जाएंगे गेट

​बैठक में दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पूर्वी सिंहभूम जिले के 6 प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में कुल 8 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर इस वर्ष 4,000 से अधिक परीक्षार्थी परीक्षा देंगे।

  • परीक्षा की टाइमिंग: दोपहर 2:00 बजे से शाम 05:15 बजे तक।
  • प्रवेश का समय: परीक्षार्थियों को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 01:30 बजे तक ही केंद्र में एंट्री दी जाएगी। तय समय के बाद किसी भी परीक्षार्थी को भीतर जाने की अनुमति नहीं होगी।

इन प्रमुख संस्थानों में बने हैं परीक्षा केंद्र:

  1. ​लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल (LBSM) कॉलेज, करनडीह
  2. ​को-ऑपरेटिव कॉलेज
  3. ​वीमेन्स यूनिवर्सिटी, जमशेदपुर
  4. ​द ग्रेजुएट कॉलेज फॉर वीमेन्स
  5. ​राजकीय आदिवासी हाई स्कूल, सीतारामडेरा
  6. ​एलबीएसएम कॉलेज, गोलमुरी

​सिर्फ सरकारी कर्मी संभालेंगे इनविजिलेटर का जिम्मा, होगी वीडियोग्राफी

​परीक्षा में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने बेहद कड़े और स्पष्ट निर्देश दिए हैं। गाइडलाइन के अनुसार, परीक्षा केंद्रों पर इनविजिलेटर (वीक्षक) के रूप में केवल और केवल सरकारी कर्मियों की ही ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके साथ ही:

  • ​परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी सुनिश्चित की जाएगी।
  • ​केंद्रों पर अभ्यर्थियों की कड़ी फ्रिस्किंग (जांच) की जाएगी।
  • ​परीक्षा से एक दिन पहले सभी केंद्रों को पूरी तरह से सैनिटाइज कर सील कर दिया जाएगा।b 1

​ट्रैफिक और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष फोकस

​परीक्षार्थियों और अभिभावकों की सहूलियत के लिए शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और परीक्षा केंद्रों के आसपास सुगम यातायात व क्राउड मैनेजमेंट हेतु मजिस्ट्रेट के साथ पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा सभी केंद्रों पर निर्बाध बिजली आपूर्ति, शुद्ध पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। उपायुक्त ने साफ लफ्जों में कहा कि तैयारियों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।a 2

​बैठक में सिटी एसपी, एसडीएम धालभूम, एएसपी, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर, नजारत उप समाहर्ता, डीआईओ, डीएसपी हेडक्वार्टर, डीएसपी ट्रैफिक और विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंता सहित विभिन्न कॉलेज प्रबंधन के प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज

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जमशेदपुर में ऑटो का सफर होगा महंगा: सीएनजी-डीजल के दाम बढ़ने पर भाड़ा ₹5 तक बढ़ाने का प्रस्ताव, उपायुक्त को सौंपी सूची

जमशेदपुर: शहर के ऑटो और टेम्पो में सफर करने वाले आम यात्रियों की जेब पर महंगाई की एक और मार पड़ने वाली है। जमशेदपुर में डीजल और सीएनजी (CNG) की कीमतों में हुई बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद ‘शिक्षित बेरोजगार टेम्पो चालक-संचालक संघ’ ने ऑटो किराए में वृद्धि करने का फैसला किया है। इस संबंध में संघ की ओर से पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त (DC) को एक मांग पत्र सौंपा गया है, जिसमें विभिन्न रूटों पर ₹5 तक किराया बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है।8a5b17942d934519abec6dcfa0becee1eafb770c064a420803d1d107e2e47afa.0 29f9c473b7c790172a0796f42a58b0b17688d3ab339f8df4807e24c47c98c56e.0

​संघ के संरक्षक बन्ना गुप्ता और महासचिव श्याम किंकर झा के नेतृत्व में प्रशासन से मांग की गई है कि इस संशोधित किराया सूची को जल्द से जल्द मंजूरी दी जाए ताकि ईंधन की मार झेल रहे ऑटो चालकों को राहत मिल सके।b 1

प्रस्तावित नई किराया सूची (रूट वार):

​संघ द्वारा जारी की गई नई सूची के अनुसार, साकची से बारीडीह और साकची से मानगो/पारडीह रूट का प्रस्तावित किराया इस प्रकार है:

1. साकची से बारीडीह रूट:

गंतव्य (साकची से)

पुराना किराया

नया (प्रस्तावित) किराया

बदलाव

बाराद्वारी

₹10.00

₹10.00

कोई बदलाव नहीं

भालूबासा, एग्रीको, सिदगोड़ा

₹10.00

₹15.00

+ ₹5.00

एन.एम.एल., बागुनहातु

₹15.00

₹20.00

+ ₹5.00

बारीडीह, न्यू बारीडीह

₹15.00

₹20.00

+ ₹5.00

मर्सी हॉस्पिटल, बारीडीह बस्ती

₹20.00

₹25.00

+ ₹5.00

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2. साकची से मानगो, डिमना और पारडीह रूट:

गंतव्य (साकची से)

पुराना किराया

नया (प्रस्तावित) किराया

बदलाव

मानगो चौक

₹10.00

₹15.00

+ ₹5.00

डिमना चौक

₹15.00

₹15.00

कोई बदलाव नहीं

आजाद बस्ती

₹10.00

₹15.00

+ ₹5.00

गरीब कॉलोनी, चेपा पूल

₹15.00

₹20.00

+ ₹5.00

पारडीह चौक / कपाली टीओपी

₹20.00

₹25.00

+ ₹5.00

 

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नेचर संस्था के इंटर्नशिप कार्यक्रम में राजनीति शास्त्र की छात्राओं ने किया पंचायत प्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद

जमशेदपुर: जमीनी स्तर पर पंचायती राज व्यवस्था की कार्यप्रणाली और ग्रामीण विकास की वास्तविकताओं को समझने के लिए आज राजनीति शास्त्र की छात्राओं को एक बेहतरीन व्यावहारिक अवसर मिला। ‘नेचर संस्था’ (NATURE NGO) द्वारा अनुग्रह नारायण सिंह शिक्षण एवं सेवा संस्थान, बागबेड़ा में संचालित स्नातक छात्राओं के विशेष इंटर्नशिप कार्यक्रम के तहत एक ‘लाइव टॉक’ और परिचर्चा सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस अनूठे संवाद का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को किताबी ज्ञान से परे ग्रामीण भारत के राजनीतिक ढांचे और जमीनी शासन से रूबरू कराना था।IMG 20260610 WA0052

प्रमुख जनप्रतिनिधियों ने साझा किए जमीनी अनुभव

​इस लाइव टॉक में बागबेड़ा कॉलोनी पंचायत और मध्य बागबेड़ा पंचायतों के प्रमुख प्रतिनिधियों, मुखिया, पंचायत समिति सदस्यों और वार्ड सदस्यों ने हिस्सा लिया। सत्र के दौरान जनप्रतिनिधियों ने छात्राओं को अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के क्रियान्वयन, सरकारी योजनाओं के लाभ, महिला सशक्तिकरण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताया।b 1

छात्राओं ने पूछे तीखे और व्यावहारिक प्रश्न

​संवाद के दौरान राजनीति शास्त्र की छात्राओं ने अपनी प्रशासनिक और राजनीतिक समझ का परिचय देते हुए पंचायत प्रतिनिधियों से कई महत्वपूर्ण सवाल किए:

  • मुखिया राजकुमार गौड़ और उमा मुंडा से छात्राओं ने ग्राम सभा के संचालन, बजट आवंटन, स्थानीय स्वशासन की शक्तियों और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी जैसे विषयों पर सवाल पूछे, जिनका मुखिया द्वय ने अपने दीर्घकालिक अनुभवों के आधार पर स्पष्ट उत्तर दिया।
  • पंचायत समिति सदस्य झरना मिश्रा और राजू सिंह से छात्राओं ने ग्रामीण विवादों के निपटारे और ब्लॉक स्तरीय समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को समझा।
  • वार्ड सदस्य अभिषेक उपाध्याय ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सबसे निचली और महत्वपूर्ण कड़ी, यानी वार्ड सदस्य के रोल और उनके कार्यों के संबंध में विस्तार से चर्चा की।a 2

नेतृत्व कौशल विकसित करने में मील का पत्थर: डॉ. कविता परमार

​इस अवसर पर नेचर संस्था की संरक्षक डॉ. कविता परमार ने संवाद की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा:

​”राजनीति विज्ञान की छात्राओं के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि वे सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ जमीनी स्तर की राजनीति और पंचायती राज व्यवस्था को गहराई से समझें। पंचायत प्रतिनिधियों के साथ यह सीधा संवाद छात्राओं के नेतृत्व कौशल और प्रशासनिक समझ को विकसित करने में मील का पत्थर साबित होगा।”

 

छात्राओं को मिला गहन अनुभव

​सत्र के समापन पर प्रतिभागी छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए माना कि इस लाइव टॉक से उन्हें ग्राम स्तर पर लोकतंत्र के वास्तविक स्वरूप, जन-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और ग्रामीण नेतृत्व की चुनौतियों का एक व्यावहारिक व गहन अनुभव प्राप्त हुआ है, जो भविष्य में उनके बेहद काम आएगा।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

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बंगाल में बड़ा राजनीतिक उलटफेर: ममता को झटका, यूसुफ पठान, शत्रुघ्न और सयोनी समेत TMC के 19 सांसदों ने की बगावत

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद राज्य की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बिखराव की स्थिति पैदा हो गई है। 60 से ज्यादा विधायकों के बाद अब टीएमसी के सांसदों ने भी ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस बीच, बगावत करने वाले टीएमसी के 19 सांसदों की पहली आधिकारिक लिस्ट भी सामने आ चुकी है।455d7d6a d72e 4c3a 84ba 15ffbdf74c7e

​हालांकि, बागी गुट का दावा था कि उनके साथ 20 से ज्यादा सांसद हैं, लेकिन फिलहाल सामने आई सूची में 19 सांसदों के नाम दर्ज हैं।

​बागियों की नेता बनीं काकोली घोष, NDA को समर्थन का दावा

​इस पूरे राजनीतिक विद्रोह की कमान बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार संभाल रही हैं। बागी सांसदों ने उन्हें अपना नेता चुना है। खबरों के अनुसार, 10 से ज्यादा बागी सांसदों ने कुछ दिनों पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी।b 1

​इसके बाद, लगभग 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए (NDA) को समर्थन देने की बात कही है। बागियों ने संसद में एक अलग गुट बनाने का भी दावा पेश किया है।

​अपनी बगावत पर बोलते हुए काकोली घोष ने कहा:

​”मैं ममता बनर्जी के साथ तब भी खड़ी थी जब वह सत्ता में नहीं थीं। पहले की नीतियां बंगाल के गरीबों के भले के लिए थीं, लेकिन पिछले 3-4 सालों से उम्मीद के मुताबिक काम नहीं हो रहा था।”

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​इन 19 बागी सांसदों के नाम आए सामने:

​सामने आई लिस्ट में बंगाल के कई कद्दावर और चर्चित चेहरों के नाम शामिल हैं:

  1. काकोली घोष (बारासात) – बागी गुट की नेता
  2. जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार)
  3. खली उर रहमान (जंगीपुर)
  4. यूसुफ पठान (बेहरामपुर)
  5. अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद)
  6. पार्थ भौमिक (बैरकपुर)
  7. बापी हलधर (मथुरापुर)
  8. सयोनी घोष (जादवपुर)
  9. माला रॉय (कोलकाता दक्षिण)
  10. मिताली बाग (आरामबाग)
  11. दीपक अधिकारी – देव (घाटल)
  12. कालीपद सोरेन (झालग्राम)
  13. जून मालिया (मेदिनीपुर)
  14. अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा)
  15. डॉ. शर्मिला सरकार (वर्धमान पूर्व)
  16. शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल)
  17. असित कुमार मल (बोलपुर)
  18. शताब्दी रॉय (बीरभूम)
  19. रचना बनर्जी (हुगली)

​सयोनी घोष का नाम सबसे हैरान करने वाला

​इस पूरी लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला नाम जादवपुर की सांसद सयोनी घोष का है। बंगाल चुनाव के दौरान सयोनी अपनी आक्रामक बयानबाजी और रैलियों के कारण पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बनी हुई थीं। राजनीतिक गलियारों में तो उन्हें ममता बनर्जी का भविष्य का विकल्प तक माना जाने लगा था।

​साल 2021 में टीएमसी जॉइन करने वाली सयोनी भले ही अपना पहला विधानसभा चुनाव हार गई थीं, लेकिन उनके तेवर देखते हुए अभिषेक बनर्जी ने उन्हें टीएमसी यूथ विंग का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था। ऐसे में उनका बागी गुट में जाना ममता बनर्जी के लिए बहुत बड़ा निजी झटका माना जा रहा है।

​यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा भी खेमे से बाहर

​ममता बनर्जी को झटका देने वालों में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान और ‘शॉटगन’ शत्रुघ्न सिन्हा भी शामिल हैं।

  • शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल): बीजेपी और कांग्रेस का सफर तय करने के बाद मार्च 2022 में टीएमसी में आए थे। 2022 के उपचुनाव और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आसनसोल से टीएमसी के टिकट पर जीत दर्ज की थी।
  • यूसुफ पठान (बेहरामपुर): यूसुफ ने अपने सियासी सफर की शुरुआत ही टीएमसी से की थी। 2024 के चुनाव में उन्होंने बहरामपुर सीट पर कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी को 85 हजार से अधिक वोटों से हराकर सबको चौंका दिया था, लेकिन अब उन्होंने भी बगावत का रास्ता चुन लिया है।

​पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए इस भूचाल ने अब दिल्ली तक की हलचल बढ़ा दी है। देखना होगा कि ममता बनर्जी इस सबसे बड़े संकट से अपनी पार्टी को कैसे बचा पाती हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज

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श्रीनाथ विश्वविद्यालय ने मलेशिया के सेगी यूनिवर्सिटी के साथ किया ऐतिहासिक एमओयू, विद्यार्थियों को मिलेंगे अंतरराष्ट्रीय अवसर

जमशेदपुर: शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करते हुए जमशेदपुर के श्रीनाथ विश्वविद्यालय ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय ने वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को सशक्त बनाने और अपने छात्र-छात्राओं व शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने के उद्देश्य से मलेशिया की प्रतिष्ठित सेगी (SEGi) यूनिवर्सिटी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।IMG 20260610 WA0012

​इस महत्वपूर्ण समझौते पर श्रीनाथ विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय मामलों के निदेशक डॉ. जे. राजेश तथा सेगी यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. डॉ. मारियानी एमडी नोर ने हस्ताक्षर किए। यह रणनीतिक साझेदारी श्रीनाथ विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीयकरण और शैक्षणिक उत्कृष्टता की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर मानी जा रही है।b 1

​इन वैश्विक कार्यक्रमों का मिलेगा सीधा लाभ

​इस एमओयू के तहत दोनों देशों के उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • ग्लोबल इमर्शन व एक्सचेंज प्रोग्राम: विश्वविद्यालय के छात्रों को ‘स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम’ और शिक्षकों को ‘फैकल्टी एक्सचेंज प्रोग्राम’ के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीखने-सिखाने का मौका मिलेगा।
  • एक सेमेस्टर विदेशों में पढ़ाई: छात्रों को अपने पाठ्यक्रम का एक सेमेस्टर मलेशिया की सेगी यूनिवर्सिटी में रहकर पूरा करने का विशेष अंतरराष्ट्रीय अवसर प्राप्त होगा।
  • संयुक्त शोध एवं अनुसंधान: दोनों विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ मिलकर वैश्विक स्तर की संयुक्त शोध परियोजनाओं (Joint Research Projects) और नवाचार (Innovation) पर काम करेंगे।a 2

​वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होंगे छात्र

​एमओयू हस्ताक्षर समारोह के दौरान सेगी यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग, बिल्ट एनवायरनमेंट एंड आईटी के डीन डॉ. मोए लिप कीन सहित कई वरिष्ठ शिक्षाविद मौजूद रहे। वहीं श्रीनाथ विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व डॉ. जे. राजेश के साथ स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष श्री शशिकांत सिंह ने किया।

विश्वविद्यालय प्रशासन का विज़न: इस रणनीतिक साझेदारी से हमारे विद्यार्थियों को एक वैश्विक दृष्टिकोण (Global Perspective) मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अनुभवों से जुड़कर छात्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप खुद को तैयार कर सकेंगे। यह एमओयू श्रीनाथ विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।

 

​इस समझौते के बाद श्रीनाथ विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट व अन्य विभागों के विद्यार्थियों में वैश्विक स्तर पर प्लेसमेंट और उच्च शिक्षा के अवसरों को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

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जमशेदपुर के आमों का लंदन में बजेगा डंका: उपायुक्त ने डेढ़ टन आम की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के कृषि इतिहास में 08 जून 2026 का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। जिला जनसंपर्क कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, जिले के किसानों द्वारा उपजाए गए रसीले आमों की पहली अंतरराष्ट्रीय खेप को लंदन (यूके) के लिए रवाना कर दिया गया है। जमशेदपुर समाहरणालय परिसर से उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने आमों से लदे ट्रक को नजदीकी पोर्ट के लिए हरी झंडी दिखाई।IMG 20260610 WA0011

​केंद्र सरकार की संस्था एपीडा (APEDA – कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) के सहयोग से लगभग डेढ़ टन (1.5 Ton) आमों का यह निर्यात किया गया है। यह कदम स्थानीय किसानों को वैश्विक मंच प्रदान करने की दिशा में एक बहुत बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।b 1

​FPO के जरिए जुटाए गए आम, मानकों का रखा गया खास ध्यान

​लंदन भेजे जा रहे इन आमों का संकलन और आपूर्ति जिले के ही एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) के माध्यम से की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की सख्त गाइडलाइंस को देखते हुए आमों की गुणवत्ता की कड़ाई से जांच की गई और उनकी पैकेजिंग पूरी तरह से निर्धारित वैश्विक मानकों के अनुरूप की गई है, ताकि विदेशों में भी यहां के आमों का स्वाद और फ्रेशनेस बरकरार रहे।a 2

​इस उपलब्धि के मुख्य मायने:

    • बिचौलियों से मुक्ति, सीधा मुनाफा: इस अंतरराष्ट्रीय बाजार के मिलने से आम उत्पादक किसानों को उनके उत्पादों का सीधा और बेहद बेहतर मूल्य मिलेगा।
    • वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा: इस सफलता से उत्साहित होकर अब अन्य किसान भी अंतरराष्ट्रीय मांग के अनुरूप वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के लिए प्रेरित होंगे।
    • अन्य फसलों के लिए खुले रास्ते: आम के सफल निर्यात के बाद अब जिले के अन्य कृषि एवं बागवानी उत्पादों को भी वैश्विक बाजार में भेजने की तैयारी शुरू हो सकेगी।

उपायुक्त का बयान: जिले के किसानों के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। हमारी स्थानीय कृषि उपज अब सात समंदर पार अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रही है। यह किसानों की आय दोगुनी करने और हमारे कृषि क्षेत्र को एक नई पहचान देने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। प्रशासन भविष्य में भी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हर संभव तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग जारी रखेगा।

 

​इस गौरवशाली और ऐतिहासिक मौके पर समाहरणालय परिसर में उप विकास आयुक्त (DDC), एपीडा के प्रतिनिधि, जेएसएलपीएस (JSLPS) के डीपीएम, FPO के पदाधिकारी और कई प्रगतिशील किसान मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

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जमशेदपुर में किसानों को मिले अंतरराष्ट्रीय बाजार के पंख: कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए आयोजित हुआ विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम

जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के किसानों और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पादों को बेचने की राह आसान होगी। जिला जनसंपर्क कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, जमशेदपुर समाहरणालय सभागार में किसान उत्पादक संगठनों, किसान उत्पादक कंपनियों और प्रगतिशील किसानों के लिए एक विशेष ‘निर्यातोन्मुखी क्षमता विकास कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया।IMG 20260610 WA0010

​इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों को कृषि और बागवानी उत्पादों के निर्यात (Export) से जुड़े अवसरों, सरकारी प्रक्रियाओं और अंतरराष्ट्रीय बाजार की बारीकियों से रूबरू कराना था, ताकि उनकी आय में व्यापक बढ़ोतरी की जा सके।

​अंतरराष्ट्रीय मानकों और पैकेजिंग पर रहा जोर

​कार्यक्रम में भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत संस्था एपीडा (APEDA – कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) के ईस्टर्न रीजन हेड श्री सीताकांत मंडल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक बाजार में जगह बनाने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता, आधुनिक पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन (Value Addition) सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने किसानों को संगठित होकर ‘निर्यातोन्मुख खेती’ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।b 1

​इन मुख्य बिंदुओं पर हुआ मंथन:

    • संभावित उत्पादों की पहचान: पूर्वी सिंहभूम जिले से निर्यात किए जा सकने वाले प्रमुख कृषि एवं बागवानी उत्पादों की लिस्टिंग की गई।
    • बाजार विस्तार: FPO के माध्यम से किसानों को सीधे बड़े और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों (Buyers) से जोड़ने की रणनीति पर चर्चा हुई।
    • तकनीकी मार्गदर्शन: विशेषज्ञों द्वारा किसानों को फसल की गुणवत्ता सुधारने और वैश्विक मानकों को पूरा करने के लिए जरूरी तकनीकी और व्यावसायिक टिप्स दिए गए।

उपायुक्त का संदेश: जिले के कृषि और बागवानी उत्पादों में अपार संभावनाएं हैं। यदि हमारे किसान संगठित होकर और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पादन शुरू करें, तो पूर्वी सिंहभूम जिला निर्यात के क्षेत्र में देश पटल पर एक नई पहचान बना सकता है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को इस दिशा में मिलकर काम करने के निर्देश दिए हैं।

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​इस क्षमता विकास कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त (DDC), नाबार्ड (NABARD) के अधिकारी, जिला कृषि विभाग के पदाधिकारी, JSLPS के डीपीएम सहित विभिन्न प्रखंडों के बीपीओ, प्रगतिशील किसान और एफपीओ से जुड़ी ग्रामीण दीदियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

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जमशेदपुर सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर! इलाज के अभाव में महिला की मौत पर हंगामा; कंप्यूटर ऑपरेटर के भरोसे फेब्रिकेटेड वार्ड, आयुष डॉक्टरों के जिम्मे ICU

जमशेदपुर:

पूर्वी सिंहभूम जिला मुख्यालय स्थित जमशेदपुर सदर अस्पताल इन दिनों खुद ‘वेंटिलेटर’ पर नजर आ रहा है। अस्पताल में बदइंतजामी, डॉक्टरों की लापरवाही और प्रशासनिक स्तर पर मचे भारी गोलमाल के कारण गरीब मरीजों की जान आफत में है। ताजा मामला रविवार की रात का है, जहाँ फेब्रिकेटेड वार्ड में समय पर मुकम्मल इलाज न मिलने के कारण एक महिला मरीज आशिता नंदी की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।9462fb058099800feec93fe47b431d5f4972e95edf139f82e5722e51c9b8cf86.0

​मरीज की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। परिजनों का सीधा सवाल था कि जब यहाँ इलाज की बुनियादी सुविधाएं ही नहीं थीं, तो मरीज को फेब्रिकेटेड वार्ड में क्यों शिफ्ट किया गया?

​गायब रहते हैं डॉक्टर, बीते एक हफ्ते में 3 की मौत!

​परिजनों के अनुसार, रविवार रात को वार्ड में आयुष चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजेश की ड्यूटी थी, लेकिन वे अपनी सेवा से गायब थे। इससे पहले 6 जून की रात को भी इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों के न होने पर मरीजों ने भारी हंगामा किया था, उस वक्त डॉ. अभिषेक ऑन-ड्यूटी होने के बावजूद नदारद थे।b 1

मीडिया सूत्रों का दावा है कि सदर अस्पताल में सही इलाज और संसाधनों के अभाव में बीते एक सप्ताह के भीतर 3 मरीजों की जान जा चुकी है, लेकिन हर बार मामलों को सामान्य बताकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

​योग्यता दरकिनार: कंप्यूटर ऑपरेटर संभाल रहा ‘हॉस्पिटल मैनेजर’ की कमान

​अस्पताल के भीतर चल रहे भाई-भतीजावाद का आलम यह है कि सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने नियमों को ताक पर रखकर अपने चहेते कंप्यूटर सहायक विमल कुमार मंडल को फेब्रिकेटेड वार्ड की पूरी ऑपरेशनल जिम्मेदारी (बतौर हॉस्पिटल मैनेजर) सौंप दी है। बिना किसी तकनीकी योग्यता और पर्याप्त अनुभव के एक कंप्यूटर ऑपरेटर को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद अब पूरी व्यवस्था और सिविल सर्जन की कार्यशैली सवालों के घेरे में है।a 2

​बदहाली की मुख्य कड़ियां: कहाँ-कहाँ है लापरवाही?

  • आयुष डॉक्टरों के भरोसे ICU: अस्पताल का अति-संवेदनशील आईसीयू (ICU) और फेब्रिकेटेड वार्ड विशेषज्ञ डॉक्टरों के बजाय आयुष चिकित्सकों के भरोसे चल रहा है।
  • डायलिसिस वार्ड हुआ बंद: डॉक्टर और डायलिसिस टेक्नीशियन की कमी के कारण जीवनदायिनी डायलिसिस सेवा पूरी तरह ठप हो चुकी है।
  • दवा और उपकरणों का अकाल: ऑपरेशन थिएटर (OT) समेत कई विभागों में जीवन रक्षक दवाओं की भारी किल्लत है। डॉक्टरों को मास्क और हैंड ग्लव्स जैसे छोटे और सामान्य उपकरण तक नसीब नहीं हो रहे हैं।
  • केवल ‘आयुष्मान’ के पैसे पर फोकस: जानकारों का आरोप है कि डॉक्टरों और कर्मचारियों की पूरी टीम का मुख्य ध्यान मरीजों के इलाज से ज्यादा आयुष्मान भारत योजना के तहत आने वाले फंड को भुनाने पर टिका रहता है।
  • दिखावे का उद्घाटन: एक तरफ आईसीयू और वार्ड खाली पड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ सिविल सर्जन ने हाल ही में नए एचडीयू (HDU) वार्ड का उद्घाटन कर दिया है, जिसके संचालन को लेकर अभी से संशय बरकरार है।

​दवा खरीद और DPC बहाली में बड़े घोटाले की बू, स्वास्थ्य मंत्री के संरक्षण का आरोप!

​सदर अस्पताल केवल चिकित्सा के मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक मोर्चे पर भी भ्रष्टाचार का केंद्र बनता जा रहा है। हाल ही में दवा खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी की शिकायत सामने आई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोटाले की जांच के लिए जो कमेटी बनाई गई, उसमें खुद आरोपी सिविल सर्जन को ही शामिल कर लिया गया, जिससे जांच की मंशा पर साफ तौर पर पानी फिरता दिख रहा है। मीडिया में उठी आवाजों के बाद भी इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

15 सालों में सबसे खराब स्थिति

विभागीय जानकारों का कहना है कि वर्तमान सिविल सर्जन को सिर्फ स्वास्थ्य मंत्री की नजदीकी का फायदा मिल रहा है। राजनीतिक रसूख के कारण ही उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती, जबकि पिछले 15 वर्षों में सदर अस्पताल की इतनी बदतर स्थिति कभी नहीं हुई थी।

 

​फर्जी सर्टिफिकेट पर बहाली का अनोखा कारनामा

​भ्रष्टाचार का सबसे नायाब उदाहरण झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के अंतर्गत दिसंबर 2025 में हुई DPC (डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर) की बहाली में देखने को मिला। चयनित उम्मीदवार डॉ. अंकित कुमार के अनुभव प्रमाण पत्र (Experience Certificate) को संबंधित कंपनी ने 23 दिसंबर 2025 को ही ईमेल भेजकर ‘फेक’ (फर्जी) करार दे दिया था।

​इसके बावजूद, 8 जनवरी 2026 को सिविल सर्जन ने डॉ. अंकित को जॉइनिंग लेटर जारी कर दिया। मामला तब फंसा जब सिविल सर्जन ने राज्य सोसाइटी से वेतन की मांग की। सोसाइटी ने सर्टिफिकेट पर आपत्ति जताते हुए स्पष्टीकरण मांग लिया। हालांकि 24 अप्रैल 2026 को सिविल सर्जन ने तमाम फर्जी दस्तावेजों को सही बताते हुए वेतन जारी करने की पैरवी की, लेकिन सोसाइटी ने फंड रोक दिया। नतीजतन, फरवरी से बिना वेतन काम कर रहे DPC ने अब दफ्तर आना छोड़ दिया है। मीडिया सूत्रों के अनुसार, यहाँ हुई हेल्थ एडवाइजर की बहाली का भी यही हाल है, जो पूरी तरह विवादों में है।

​स्वास्थ्य मंत्री से हस्तक्षेप की मांग

​सदर अस्पताल की इस चौपट हो चुकी व्यवस्था को देखते हुए अब शहर के सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री से तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब तक सिविल सर्जन स्तर पर बड़ा प्रशासनिक बदलाव नहीं किया जाता, तब तक जमशेदपुर की गरीब जनता को मुकम्मल इलाज मिलना नामुमकिन है।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

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