धालभूमगढ़ थाना क्षेत्र के हरिनधुकड़ी स्थित घाटशिला उपकारा (जेल) के समीप शनिवार दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वहां की सूखी झाड़ियों में अचानक आग लग गई। चिलचिलाती धूप और हवा के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और आसपास के रिहाइशी इलाकों की ओर बढ़ने लगी।
ग्रामीणों की सूझबूझ और उप मुखिया की तत्परता
आग की लपटें उठती देख स्थानीय ग्रामीणों ने पहले खुद ही इसे बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग को अनियंत्रित होते देख उन्होंने तुरंत उप मुखिया सुजन मन्ना को इसकी जानकारी दी। उप मुखिया ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना समय गंवाए घाटशिला अग्निशमन पदाधिकारी रामाशीष राम को फोन कर दमकल की मांग की।
दो घंटे चला ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’
सूचना मिलते ही दमकल वाहन मौके पर पहुंचा। अग्निशमन दल और ग्रामीणों के साझा सहयोग से करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया गया। गनीमत रही कि आग समय रहते बुझा ली गई, वरना यह पास स्थित उपकारा (जेल) या अन्य संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा सकती थी।
”अगर दमकल वाहन समय पर नहीं पहुँचता तो आग आबादी वाले क्षेत्र में फैल सकती थी। ग्रामीणों और दमकल विभाग के त्वरित तालमेल से एक बड़ी अनहोनी टल गई।” — स्थानीय निवासी
शहर के सदर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना है। अस्पताल परिसर में नवनिर्मित भवन अब पूरी तरह सक्रिय होने जा रहा है। सोमवार (16 फरवरी) से ओपीडी (OPD) समेत अस्पताल की अधिकांश मुख्य सेवाएं पुराने भवन के बजाय नए भवन से संचालित होंगी।
क्यों बदला गया ठिकाना?
अस्पताल मैनेजर आशीष कुमार ने बताया कि पुराने ओपीडी भवन की स्थिति को देखते हुए वहां सोमवार से मरम्मत और जीर्णोद्धार (Renovation) का कार्य शुरू किया जा रहा है। मरीजों को बेहतर और आधुनिक सुविधाएं मिल सकें, इसलिए ओपीडी को नए भवन में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है।
नए भवन में मिलने वाली मुख्य सेवाएं:
मरीजों की सुविधा के लिए अब एक ही छत के नीचे निम्नलिखित विभाग और सुविधाएं उपलब्ध होंगी:
चिकित्सक कक्ष: सभी विभागों के डॉक्टर अब नए भवन के आवंटित कमरों में बैठेंगे।
जांच सेवाएं: एक्स-रे (X-Ray), अल्ट्रासाउंड और खून की सभी जांचें अब नए भवन में ही होंगी।
ऑपरेशन थिएटर (OT): ओटी सेवाओं को भी नए आधुनिक भवन में शिफ्ट कर दिया गया है।
रजिस्ट्रेशन काउंटर: भीड़ प्रबंधन के लिए पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग रजिस्ट्रेशन काउंटर बनाए गए हैं, ताकि मरीजों को लाइन में ज्यादा समय न बिताना पड़े।
अस्पताल प्रबंधन की अपील
मैनेजर आशीष कुमार ने अस्पताल आने वाले आम नागरिकों से अपील की है कि वे सोमवार से सीधे नए भवन में पहुँचें। जगह-जगह दिशा-निर्देश (Signboards) लगाए जा रहे हैं ताकि मरीजों को भटकना न पड़े।
”पुराने भवन की मरम्मत जरूरी थी। नए भवन में मरीजों को ज्यादा जगह और बेहतर वातावरण मिलेगा। हम कोशिश कर रहे हैं कि इस शिफ्टिंग से मरीजों के इलाज में कोई बाधा न आए।”
कोयलांचल के रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। हावड़ा से आनंद विहार (दिल्ली) के बीच चलने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस में धनबाद स्टेशन के लिए निर्धारित सीटों के कोटे में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की गई है। जिस ट्रेन में पहले धनबाद को महज ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ के समान 20 सीटें मिलती थीं, अब वहां से 360 सीटों का भारी-भरकम कोटा निर्धारित कर दिया गया है।
लाइन खुलते ही खत्म हो जाता था कोटा
18 जनवरी से शुरू हुई इस ट्रेन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुकिंग लाइन खुलते ही चंद मिनटों में ‘नो रूम’ की स्थिति बन जाती थी।
पुरानी स्थिति: मात्र 20 सीटों के कोटे के कारण धनबाद के यात्रियों को वेटिंग टिकट लेकर सफर करना पड़ता था।
नई स्थिति: अब धनबाद से भी जनरल कोटा (GN) का टिकट जारी होगा। इसका मतलब है कि जितनी सीटें हावड़ा या बंगाल के अन्य स्टेशनों के लिए उपलब्ध होंगी, धनबाद के यात्री भी उतनी ही सीटों पर अपना दावा ठोक सकेंगे।
10 अप्रैल से मिलेगा बढ़ा हुआ कोटा
रेलवे द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अमृत भारत एक्सप्रेस में कुल सात स्लीपर बोगियां हैं, जिनमें कुल 560 बर्थ उपलब्ध हैं।
धनबाद का हिस्सा: इन 560 सीटों में से 360 सीटें सीधे तौर पर धनबाद स्टेशन के लिए आरक्षित की गई हैं।
कब से लागू: इस नए कोटे का लाभ यात्री 10 अप्रैल 2026 से उठा सकेंगे। बाकी सीटें अन्य स्टेशनों और विशेष कोटे के लिए रखी गई हैं।
शादी और होली के सीजन में बड़ी राहत
अमृत भारत एक्सप्रेस अपनी तेज रफ्तार और कम किराए के कारण शुरू होते ही बेहद लोकप्रिय हो गई है।
वैवाहिक सीजन: फरवरी के अंतिम सप्ताह तक शादी-विवाह के कारण ट्रेन में भारी भीड़ है।
होली का त्योहार: मार्च में होली के दौरान दिल्ली से घर लौटने और वापस जाने वालों के लिए यह 360 सीटों का कोटा किसी वरदान से कम नहीं होगा।
झारखंड के बोकारो जिले में ‘बच्चा चोरी’ की अफवाह ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था को चुनौती दी है। बालीडीह थाना क्षेत्र के गोस्वामी टोला (बिशुनपुर) में शुक्रवार को हुई हिंसक घटना और सड़क जाम के मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासन ने अफवाह फैलाने और हिंसा भड़काने के आरोप में 21 नामजद सहित कुल 421 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।
क्या थी घटना? निर्दोष महिला बनी भीड़ का निशाना
घटना शुक्रवार सुबह की है, जब धनबाद के बरवाअड्डा की रहने वाली मनीषा देवी (27) एक मल्टी लेवल मार्केटिंग (MLM) कंपनी के उत्पाद बेचने बिशुनपुर पहुंची थीं।
गलतफहमी: भीड़ ने उन्हें ‘बच्चा चोर’ समझकर घेर लिया और हंगामा शुरू कर दिया।
पुलिस का रेस्क्यू: सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित निकालकर एक सामुदायिक भवन में छिपाया।
हिंसक भीड़: आक्रोशित भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया, धक्का-मुक्की की और सरकारी काम में बाधा डाली। अतिरिक्त बल की मदद से महिला को सुरक्षित थाने लाया गया, जहां जांच में वह पूरी तरह निर्दोष पाई गई।
सोशल मीडिया पर पुलिस की पैनी नजर
बोकारो पुलिस अब उन ‘डिजिटल चेहरों’ की तलाश कर रही है जिन्होंने इस घटना का भ्रामक वीडियो फैलाया।
300 सोशल मीडिया अकाउंट्स रडार पर: पुलिस ने ऐसे अकाउंट्स की पहचान की है जिन्होंने पुलिस द्वारा महिला को बचाने के वीडियो को ‘बच्चा चोर को बचाती पुलिस’ जैसे भ्रामक कैप्शन के साथ वायरल किया।
इनफ्लुएंसर्स पर कार्रवाई: एसपी हरविंदर सिंह ने स्पष्ट किया है कि अफवाह फैलाने वाले सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
NH-32 पर तांडव और पुलिस का कड़ा संदेश
महिला को बचाए जाने से नाराज भीड़ ने NH-32 को करीब एक घंटे तक जाम रखा और पुलिस विरोधी नारेबाजी की। पुलिस ने वीडियो और फोटोग्राफी के आधार पर दंगाइयों की पहचान शुरू कर दी है।
”किसी भी संदिग्ध स्थिति में कानून हाथ में न लें। सीधे डायल 112 पर सूचना दें। अफवाह फैलाना या भीड़ का हिस्सा बनकर हिंसा करना आपको जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है।”
— प्रशासनिक अपील
हालिया घटनाओं का सिलसिला
बोकारो में पिछले कुछ दिनों में अफवाहों के कारण कई बेगुनाह लोग भीड़ का शिकार हुए हैं:
चास: उत्तर प्रदेश से आए पांच साधुओं की बच्चा चोर समझकर पिटाई की गई।
बीएस सिटी: एक युवक की सरेराह पिटाई हुई, जिसे पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद बचाया।
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा की रहने वाली और IIT कानपुर में कार्यरत 26 वर्षीय अंजू ने शनिवार (वैलेंटाइन डे) को अपने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना उस वक्त हुई जब मंगेतर से फोन पर हुई एक बहस के बाद अंजू ने आत्मघाती कदम उठाने की बात कहकर कॉल काट दिया।
फोन पर विवाद और फिर मौत का लाइव थ्रिलर
जादूगोड़ा निवासी राजनंदन रविदास की बेटी अंजू पिछले तीन वर्षों से IIT कानपुर के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट में जूनियर लैब टेक्नीशियन के पद पर तैनात थी।
विवाद की वजह: शनिवार सुबह वैलेंटाइन डे के मौके पर अंजू की बातचीत ओडिशा में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात उसके मंगेतर प्रताप से हो रही थी।
कहासुनी: बातचीत के दौरान दोनों के बीच तीखी बहस हो गई। गुस्साई अंजू ने सुसाइड की चेतावनी देते हुए फोन काट दिया।
नाकाम कोशिश: घबराए प्रताप ने तुरंत कैंपस में रहने वाले अंजू के दोस्त सूरज को फोन कर कमरे पर भेजा, लेकिन तब तक अंजू अंदर से दरवाजा बंद कर चुकी थी। अंततः पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला।
भाई की मौत का गम और मानसिक अवसाद
पुलिस की प्रारंभिक जांच और परिजनों के बयानों से एक दुखद पहलू सामने आया है। ADCP पश्चिम कपिल देव सिंह के अनुसार:
अंजू अपने जुड़वां भाई की मौत के बाद से गहरे अवसाद (Depression) में थी। डेढ़ साल पहले उसका भाई UPSC की तैयारी के दौरान जान दे चुका था।
अंजू इस घटना के लिए खुद को जिम्मेदार मानती थी और भावनात्मक रूप से काफी कमजोर हो चुकी थी। मंगेतर प्रताप के मुताबिक, उसकी पहले काउंसिलिंग भी कराई गई थी।
[A solitary candle and a diary on a wooden table, symbolizing mourning]
डायरी के फटे पन्ने और अनसुलझे सवाल
फॉरेंसिक टीम को मौके से अंजू की एक डायरी बरामद हुई है, जिसमें सुसाइड से ठीक पहले लिखे गए कुछ पन्ने फटे हुए थे।
”डायरी के फटे टुकड़ों का मिलान किया जा रहा है। शुरुआती जांच में कुछ शेरो-शायरी जैसे अंश मिले हैं। मोबाइल फोन और डायरी की गहन जांच से मौत की असली वजह और स्पष्ट होगी।” — पुलिस प्रशासन
नवंबर में होनी थी शादी
अंजू और प्रताप की सगाई पिछले साल 25 सितंबर को IIT के गेस्ट हाउस में ही बड़े धूमधाम से हुई थी। दोनों इस साल नवंबर में शादी के बंधन में बंधने वाले थे, लेकिन एक पल के आवेश ने दो परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया।
झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष और घायल हाथियों के उपचार की गंभीर चुनौतियों के बीच राज्य सरकार ने एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। जमशेदपुर के डिमना में हाथियों के लिए एक अत्याधुनिक रेस्क्यू सेंटर (Rescue Center) बनाया जाएगा। वन विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिससे कोल्हान के वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी।
₹1 करोड़ की लागत और हाई-टेक सुविधाएं
लगभग एक करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह कोल्हान का पहला हाथी रेस्क्यू सेंटर होगा। इसका निर्माण अप्रैल 2026 से शुरू होने की संभावना है। डिमना लेक के पास 7 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस केंद्र में निम्नलिखित सुविधाएं होंगी:
अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर (OT): घायल हाथियों के तत्काल ऑपरेशन के लिए।
फीडिंग सेंटर और किचन: हाथियों के लिए पौष्टिक आहार की व्यवस्था।
क्वारेंटाइन और सुरक्षित बाड़े: बीमार हाथियों को अलग रखकर निगरानी करने के लिए।
प्राकृतिक जलस्रोत: हाथियों के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता।
क्यों जरूरी था यह रेस्क्यू सेंटर?
वर्तमान में पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में घायल हाथियों के इलाज के लिए उन्हें टाटा स्टील जू भेजना पड़ता है। दूरी और परिवहन के कारण इलाज में देरी होती है, जिससे हाथियों की मृत्यु दर बढ़ जाती है।
”रेस्क्यू सेंटर वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे हाथियों को सही समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी और उनकी जान बचाई जा सकेगी।”
— सबा आलम अंसारी, DFO, दलमा वन्यजीव अभयारण्य
हाथियों के हमले से 27 मौतें: सीएम हेमंत सोरेन का कड़ा निर्देश
राज्य में बढ़ते हाथी हमलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ महीनों में हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर और अन्य जिलों को मिलाकर लगभग 27 लोगों की मृत्यु हुई है। इस पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए हैं:
एलीफेंट रेस्क्यू टीम: प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों को तकनीकी प्रशिक्षण देकर रेस्क्यू टीम तैयार की जाए।
सुरक्षा किट का वितरण: ग्रामीणों को हाथी भगाने के लिए डीजल, टॉर्च, सोलर सायरन और टायर जैसे जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
जागरूकता अभियान: वन विभाग ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर सुरक्षा के उपाय सुनिश्चित करे।
तीसरी धारा का नज़रिया: डिमना में रेस्क्यू सेंटर का निर्माण न केवल वन्यजीवों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि यह मानव और हाथियों के बीच बढ़ती रंजिश को कम करने में भी एक सेतु का काम करेगा। यह विकास और पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
झारखंड नगर निकाय चुनाव के शोर के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अनुशासन का डंडा चला दिया है। पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के खिलाफ मोर्चा खोलने और खुद चुनावी मैदान में ताल ठोकने वाले 18 प्रदेश स्तरीय नेताओं को भाजपा ने ‘शोकॉज’ (Show-cause) नोटिस जारी किया है। पार्टी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि सात दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो निष्कासन की कार्रवाई तय है।
इन दिग्गजों की कुर्सी पर मंडराया खतरा
प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री सह राज्यसभा सदस्य प्रदीप वर्मा ने यह नोटिस जारी किए हैं। जिन प्रमुख नामों को नोटिस थमाया गया है, उनमें शामिल हैं:
धनबाद: पूर्व विधायक संजीव सिंह, भृगुनाथ भगत, और पूर्व महानगर अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह।
जमशेदपुर: पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव।
गढ़वा/पलामू: पूर्व जिलाध्यक्ष अलखनाथ पांडेय और परशुराम ओझा।
चास: मेयर प्रत्याशी परिंदा सिंह।
देवघर/जामताड़ा: बाबा बलियासे और तरुण गुप्ता।
इसके अलावा गिरिडीह से कामेश्वर पासवान और सिमडेगा से फुलसुंदरी देवी समेत कई अन्य नेताओं से भी जवाब तलब किया गया है।
केंद्रीय आलाकमान की कोशिशें रहीं नाकाम
सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने बागियों को मनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह, उपाध्यक्ष रेखा वर्मा और राष्ट्रीय मंत्री रितुराज सिन्हा जैसे भारी-भरकम नेताओं को बागियों को समझाने की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, रांची में तो तीन बागी मान गए, लेकिन धनबाद और जमशेदपुर जैसे इलाकों में ‘ऑपरेशन डैमेज कंट्रोल’ पूरी तरह फेल साबित हुआ।
धनबाद में ‘अपनों’ के बीच जंग: संजीव बनाम संजीव
सबसे दिलचस्प मुकाबला धनबाद नगर निगम में दिख रहा है। यहाँ भाजपा ने प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संजीव कुमार को अपना आधिकारिक समर्थन दिया है। लेकिन पूर्व विधायक संजीव सिंह (जिनकी पत्नी रागिनी सिंह झरिया से भाजपा विधायक हैं) ने पार्टी के फैसले को दरकिनार कर मैदान में डटे रहने का फैसला किया है। 12 फरवरी को जारी नोटिस का जवाब उन्हें 23 फरवरी (मतदान की तारीख) से पहले देना होगा।
”पार्टी के संज्ञान में आया है कि आप पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं। यह अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। एक सप्ताह में जवाब न मिलने पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
भारतीय रेलवे की प्रीमियम सेवा ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’ को लेकर ताजनगरी से एक निराश करने वाली खबर आई है। रेलवे बोर्ड ने आगरा कैंट-उदयपुर सिटी-आगरा कैंट वंदे भारत ट्रेन को आज यानी 15 फरवरी से बंद करने का निर्णय लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि रेलवे इस फैसले के पीछे ‘कम यात्री ट्रैफिक’ का तर्क दे रहा है, जबकि जमीनी आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
आंकड़ों का खेल: क्या घाटे में थी ट्रेन?
’तीसरी धारा’ की पड़ताल और बीते छह महीनों के बुकिंग आंकड़ों पर नजर डालें, तो कम आय का कोई ठोस कारण नजर नहीं आता:
रूट (दिशा)
सीट बुकिंग प्रतिशत
कुल आय (लगभग)
आगरा से उदयपुर
68.37%
₹2.94 करोड़
उदयपुर से आगरा
61.97%
₹2.53 करोड़
कुल औसत
करीब 68%
₹5.47 करोड़ (6 माह)
68 प्रतिशत की ऑक्युपेंसी किसी भी प्रीमियम ट्रेन के लिए ‘खराब’ नहीं मानी जाती। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या रेलवे ने किसी अन्य रणनीतिक कारण या कोच की कमी की वजह से इस लोकप्रिय ट्रेन पर ताला जड़ा है?
कोटा के छात्रों और पर्यटकों को बड़ा झटका
ट्रेन के बंद होने से सबसे ज्यादा प्रभावित आगरा के विद्यार्थी और पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग होंगे।
शिक्षा का सेतु: यह ट्रेन आगरा के हजारों छात्रों के लिए कोटा (कोचिंग हब) पहुंचने का सबसे सुगम जरिया थी। अब उन्हें फिर से बस या पुरानी पैसेंजर ट्रेनों के कठिन सफर पर निर्भर होना होगा।
पर्यटन पर असर: ताजनगरी (आगरा) और झीलों की नगरी (उदयपुर) को जोड़ने वाली इस ट्रेन से विदेशी पर्यटकों की आवाजाही आसान थी। डीआरयूसीसी मेंबर निधि अग्रवाल के अनुसार, इस फैसले से आगरा के पर्यटन व्यवसाय को भारी नुकसान होगा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
पूर्व डीआरयूसीसी मेंबर मुरारीलाल गोयल ने इस फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा कि यह ट्रेन बेहद कम समय में लोकप्रिय हो गई थी। अभिभावक और व्यवसायी इस सेवा के जारी रहने की उम्मीद कर रहे थे।
”सितंबर 2024 में शुरू हुई इस ‘सौगात’ को अचानक वापस लेना समझ से परे है। जब बुकिंग 68% तक पहुंच रही थी, तो इसे कम ट्रैफिक का नाम देना तर्कसंगत नहीं लगता।”
अगला कदम क्या?
रेलवे प्रशासन ने अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत कारण साझा नहीं किया है। स्थानीय जन प्रतिनिधियों और व्यापारिक संगठनों ने रेल मंत्रालय से मांग की है कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और आगरा के विकास व कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए वंदे भारत को दोबारा शुरू किया जाए।
झारखंड की राजधानी रांची का कचहरी चौक हाल ही में एक ऐसी सनसनीखेज वारदात का गवाह बना, जिसने पूरे शहर को सिहरा दिया। किन्नरों के साथ शराब पीने के विवाद के बाद हिट एंड रन, अपहरण और पुलिसकर्मी को कुचलने के प्रयास ने सुरक्षा दावों की पोल खोल दी थी। लेकिन ‘तीसरी धारा’ और ‘प्रभात खबर’ की टीम की पड़ताल बताती है कि प्रशासन की सख्ती महज एक ‘अस्थायी मरहम’ साबित हुई है।
कचहरी में सन्नाटा, स्टेशन रोड पर ‘सौदा’ जारी
पुलिसिया कार्रवाई के डर से कचहरी चौक के आसपास तो फिलहाल अड्डेबाजी बंद है, लेकिन चुटिया थाना क्षेत्र के स्टेशन रोड पर अपराधी और संदिग्ध तत्व अब भी बेखौफ हैं। यहाँ दो चाय की दुकानों के बीच स्थित एक गुमनाम ‘झोपड़ी’ अब संदिग्ध गतिविधियों का नया केंद्र बन गई है।
तीन रातों की निगरानी: अंधेरे में होता ‘डील’ का खेल
लगातार तीन रातों (रात 9:30 से 1:30 बजे तक) की गई निगरानी में चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं:
पैटर्न: मुँह ढके हुए महिलाएं सड़क किनारे खड़ी होकर राहगीरों और कार सवारों को इशारे करती हैं।
डील: पैदल गुजरने वाले युवकों और लग्जरी कारों में सवार ग्राहकों से खुलेआम बातचीत और मोलभाव होता है।
अड्डेबाजी: चाय की दुकानों को ‘कवर’ की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जहाँ से संदिग्धों को झोपड़ी की ओर जाते देखा गया है।
आम नागरिक और राहगीर परेशान
स्टेशन रोड से गुजरने वाले रेल यात्री, नाइट ड्यूटी से लौटने वाले कर्मचारी और स्थानीय निवासी इस माहौल से बेहद असहज हैं।
अशोभनीय हरकतें: स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात चढ़ते ही सड़क पर अश्लीलता और बदतमीजी आम हो जाती है।
युवाओं पर खतरा: अभिभावकों को डर है कि इस इलाके से गुजरने वाले छात्र और युवा इस दलदल में फंस रहे हैं।
पुलिस की गश्ती पर उठते सवाल
कचहरी चौक की घटना के बाद उम्मीद थी कि पुलिस पूरे शहर में ‘क्लीन स्वीप’ अभियान चलाएगी, लेकिन चुटिया इलाके की यह तस्वीर पुलिसिया गश्ती की पोल खोल रही है।
”पुलिस तभी जागती है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है। कुछ दिन सख्ती होती है और फिर वही ढर्रा शुरू हो जाता है। नियमित गश्ती न होना ही इन अड्डों को पाल रहा है।”
चांडिल के हुमिद स्थित वनराज स्टील कंपनी के कामगारों के लिए राहत की खबर है। पिछले 8 दिनों से कंपनी में तालाबंदी के कारण अधर में लटके 202 कामगारों के जनवरी माह के वेतन का भुगतान शनिवार से शुरू हो गया है। ईचागढ़ विधायक सविता महतो के हस्तक्षेप के बाद प्रबंधन ने ऑनलाइन खातों में राशि ट्रांसफर करना शुरू कर दिया है।
विधायक के प्रयास से सुलझा वेतन का संकट
विधायक के आप्त सचिव और झामुमो नेता काबलु महतो ने बताया कि कंपनी बंद होने के बाद कामगार आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। विधायक सविता महतो ने कामगारों के हितों को देखते हुए प्रबंधन से वार्ता की, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विधायक केवल वेतन ही नहीं, बल्कि कंपनी को दोबारा खुलवाने के लिए भी लगातार प्रयासरत हैं।
एक सप्ताह में पूरा होगा सभी का भुगतान
वनराज स्टील कंपनी प्रबंधन ने आधिकारिक बयान में कहा कि:
वर्तमान में 202 कामगारों के खातों में वेतन भेजा जा रहा है।
अगले एक सप्ताह के भीतर सभी कर्मचारियों का बकाया भुगतान पूरा कर दिया जाएगा।
इधर, पंचाग्राम विस्थापित एवं प्रभावित समिति के सचिव आशुतोष बेसरा ने कहा कि समिति महाशिवरात्रि से पहले भुगतान के लिए प्रबंधन पर दबाव बनाए हुए थी। उन्होंने कंपनी के पुनर्संचालन में हर संभव सहयोग का वादा किया है।
दिल्ली में ‘पुनरुद्धार’ की तैयारी: टॉप लेवल मीटिंग
बता दें कि 6 फरवरी को बकाया विवाद के कारण कंपनी में ताला लटक गया था। इसे सुलझाने के लिए दो दिन पूर्व दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई:
मुख्य मुद्दा: बिहार स्पंज आयरन कंपनी का बकाया भुगतान।
प्रतिभागी: वनराज स्टील और बिहार स्पंज आयरन कंपनी के टॉप लेवल प्रबंधन।
लक्ष्य: विवाद खत्म कर जल्द से जल्द उत्पादन दोबारा शुरू करना।
उपस्थिति: इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय झामुमो नेताओं और विस्थापित समिति के सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही।